बलिया : गंगा की रेती पर ऐतिहासिक ददरी मेला, मेले में तय होती है इंसानों की शादी

By: Dilip Kumar
11/8/2018 9:59:31 PM
नई दिल्ली

बलिया@राकेश उपाध्याय। बलिया  यूपी के बलिया में कार्तिक पूर्णिमा से गंगा और सरयू किनारे ददरी पशु मेला शुरू हो गया है। मेला 15 दिनों तक चलेगा। खास बात है कि गाय, भैंस, बकरी जैसे जानवरों के साथ यहां गधों का मेला भी लगता है। इनकी कीमत 5 हजार से 50 हजार रुपए रहती है। यही नहीं मेले में धोबी समाज के लोग पंचायत लगाकर अपने बच्चों की शादियां तय करके संगीत में भी रम जाते हैं।

महर्षि भृगु की धरती पर हर वर्ष लगने वाला ऐतिहासिक ददरी पशु मेला बुधवार को प्रारंभ हो गया। इसी के साथ नंदी ग्राम अब धीरे-धीरे गुलजार होने लगा है। दूर दराज के व्यापारी मेले में अपने पशु के साथ आने लगे हैं। पशुओं के उतरने से मेले में रौनक आने लगी हैं। नगर पालिका परिषद से लगने वाले इस मेले की तैयारी आधी अधूरी होने से आने वाले व्यापारियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 

कहा जाता है कि विष्णु को लात मारने पर महर्षि भृगु को जो श्राप मिला था, उससे मुक्ति इसी क्षेत्र में ही उन्हें मिली थी। तपस्या पूरी होने पर भृगु के शिष्य दर्दर मुनि के नेतृत्व में यज्ञ हुआ, जिसमें 88 हजार ऋषियों का यहां समागम हुआ। उसके बाद से शुरू हुई यह परम्परा समय के साथ 'लोक मेला' में तब्दील हो गयी। मेला का इंतजार जिले के उन लोगों को तो रहता ही है जो दूसरे शहर या विदेश में हैं, पूरे पूर्वांचल व बिहार के लोग भी उतनी ही बेसब्री से इसकी राह देखते हैं। इस बार यह मेला 14 नवम्बर से शुरू होगा।

कार्तिक पूर्णिमा के दिन से लगने वाला ददरी मेला का मीना बाजार करीब डेढ़ किमी की परिधि में लगता है। विभिन्न प्रकार की करीब 500 से अधिक दुकानों को खुद में समेटे इस मेला का भारतेंदु मंच कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का गवाह बनेगा। चेतक प्रतियोगिता व दंगल के साथ ही अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, मुशायरा, लोक गीत, कव्वाली आदि कार्यक्रम करीब एक महीने तक चलने वाले इस मेला की शान बढ़ायेंगे। मेला के लिए स्पेशल ट्रेन व बसों के संचालन की व्यवस्था पहले ही की जा चुकी है।

पिछले दिनों स्थानीय सांसद ने केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री से मिलकर इस मेले को राष्टï्रीय दर्जा देने की मांग की थी जिसे मंत्री ने स्वीकार कर लिया था।


comments