देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्रों को सौंपी डिग्री

By: Dilip Kumar
4/15/2017 1:35:38 PM
नई दिल्ली

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह दो हजार छात्रों को डिग्री सौंपी गई। दीक्षांत समारोह में राज्यपाल केके पॉल, नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी एवं देसंविवि के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पंड्या मौजूद रहे। इस मौके पर मुख्य अतिथि एवं नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि वह पहली बार किसी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि देवभूमि में आपदा के समय शांतिकुंज ने मानवता को स्थान दिया। आपदा से पीड़ित लोगों को शरण देना और रक्षा करना देवत्व है।

राज्यपाल केके पाल ने कहा यहां शिक्षा में आधुनिकता और भारतीय संस्कृति का समागम है, जो अनूठी परंपरा है। कहा कि कैलाश सत्यार्थी जैसे व्यकित्व के साथ बैठना हमारा गौरव है। साथ ही उन्होंने छात्रों से कहा कि जीवन में परीक्षा का क्रम हमेशा जारी रहेगा। भविष्य में नौकरी या रोजगार की चिंता सताएगी, लेकिन केवल नौकरी के लिए अपनी जन्मभूमि से पलायन न करें। साथ ही इसके बारे में शिक्षण संस्थाओं को भी सोचना होगा।

उन्होंने कहा कि कहा तकनीकी तेज गति से बदल रही है। यह चुनौती है। साथ ही नए अवसर भी बढ़ते हैं। ऐसे में प्रासंगिक रहने के लिए अपने ज्ञान को बढ़ाने के लिए निरंतर अध्ययन जरूरी है। आगे बढ़ने के लिए अपने प्रतिस्पर्धी से भी सीखें। आज ऐसे शिक्षण संस्थाओं की जरूरत है, जहां शिक्षा के साथ संस्कार और परंपराओं की भी रक्षा हो।

कुलाधिपति डाक्टर प्रणव पंड्या ने सभी सम्मानित छात्र छात्राओं को अनुशासन की दीक्षा दी। उन्होंने कहा कि कहा गंगा के पावन तट पर बसा यह विश्वविद्यालय पूरे विश्व में अपनी पताका फहरा रहा है। आने वाले दिनों में इस विश्वविद्यालय में जल्द ही नालंदा और तक्षशीला विश्वविद्यालय की तर्ज पर भी शिक्षा दी जाएगी। 

उन्होंने कहा कि यहां शिक्षा और विद्या का मिलन किया जाता है। इस नए प्रयोग का संगम सिर्फ यहां संभव है। यहां के विद्यार्थियों को सामाजिक दायित्व की दीक्षा दी जाती है। योग विज्ञान को आध्यात्मिक से जोड़ा जाता है। साथ ही कहा कि हम हर जिले में योगशिक्षा देंगे।  इसके लिए विद्यालय खोलेंगे। टेलीविजन से योग की शिक्षा नहीं दी जा सकती है। इसके लिए लोगों के बीच में जाना पड़ता है।

इस मौके पर कुलपति शरद पारधी विश्वविद्यालय की उपलब्धि को विस्तार से बयां किया। बताया कि देव संस्कृति विवि में गीता ज्ञान देकर सस्कृति व संस्कार की शिक्षा दीक्षा दी जाती है। 2002 में इसकी स्थापना हुई थी। अब तक डेढ़ सौ से अधिक शोधकर्ताओं को डॉक्टरेट की उपाधि से अलंकृत किया जा चुका है।

 


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