दुनिया का सबसे बड़ा स्कूल भोजन कार्यक्रम संचालित करने वाली संस्था अक्षय पात्र फाउंडेशन ने चेतू फाउंडेशन के साथ साझेदारी में सात अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक मील डिलीवरी वाहनों (EVs) को अपने बेड़े में शामिल किया। यह कदम पर्यावरण के प्रति जागरूकता के साथ-साथ कक्षा के भूख के खिलाफ संघर्ष में एक मील का पत्थर है। इन ईवी ट्रकों को शनिवार को अक्षय पात्र रसोईघर में आयोजित एक संयुक्त समारोह के दौरान हरी झंडी दिखाई गई। ये वाहन दिल्ली-एनसीआर के स्कूलों में प्रतिदिन 18,000 से अधिक बच्चों को गर्म और पौष्टिक मध्याह्न भोजन पहुंचाएंगे और सालाना 40 लाख से अधिक भोजन वितरण में योगदान देंगे। अक्षय पात्र फाउंडेशन के दिल्ली-एनसीआर के ऑपरेशन हेड बलवीर सिंह राठौर के नेतृत्व में पूरा कार्यक्रम संपन्न हुआ।
अक्षय पात्र फाउंडेशन दिल्ली-एनसीआर के डिविजनल हेड गोविंद दत्ता दास ने कहा कि इन इलेक्ट्रिक वाहनों के जुड़ने से हमारी सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच दोनों में ही उल्लेखनीय वृद्धि होगी। ये वाहन अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं, जिसमें भोजन की गर्मी बनाए रखने वाले थर्मल कम्पार्टमेंट, जीरो-एमीशन टेक्नोलॉजी और बेहतर लॉजिस्टिक्स फीचर शामिल हैं। इनके उपयोग से हम कार्बन फुटप्रिंट को काफी कम करते हुए ज्यादा बच्चों तक भोजन पहुंचा पा रहे हैं। चेतू फाउंडेशन का यह योगदान न केवल भूखमरी के खिलाफ हमारी लड़ाई को मजबूत करता है, बल्कि पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। चेतू फाउंडेशन का यह सहयोग इस दिशा में एक बड़ा योगदान है।
चेतू फाउंडेशन की कार्यकारी निदेशक शैली बंसल ने कहा कि हम अक्षय पात्र के मिशन में साझेदार बनकर गौरवान्वित हैं। इन इलेक्ट्रिक वाहनों के माध्यम से हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि बच्चों को पौष्टिक भोजन तो मिले ही, साथ ही वातावरण भी शुद्ध रहे। यह पहल हमारे दोहरे दृष्टिकोण—भविष्य की पीढ़ियों और हमारी पृथ्वी दोनों की देखभाल—का प्रतीक है।
इलेक्ट्रिक वाहन : हरित तकनीक के साथ गुणवत्तापूर्ण वितरण
ये ईवी विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए हैं ताकि भोजन की गुणवत्ता, तापमान और स्वच्छता वितरण के दौरान बनी रहे। प्रत्येक वाहन प्रतिदिन दो चक्कर लगाएगा और लगभग 2500 भोजन वितरित करेगा। इन ईवी की सबसे बड़ी खासियत है कि ये पूरी तरह शून्य-उत्सर्जन पर आधारित हैं, जिससे न केवल हवा की गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि वितरण की लागत भी कम होगी।
अक्षय पात्र के बारे में
वर्ष 2000 से अक्षय पात्र ने प्रत्येक स्कूली दिन में अधिकाधिक बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया है। फाउंडेशन लाखों बच्चों की जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार प्रौद्योगिकी का लाभ उठा रहा है। इसकी अत्याधुनिक रसोई अध्ययन का विषय बन गई है और दुनिया भर से उत्सुक आगंतुकों को आकर्षित करती है। भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों के साथ साझेदारी में, तथा अनेक परोपकारी दान दाताओं और शुभचिंतकों के अमूल्य सहयोग से, अक्षय पात्र ने 25 वर्ष पूर्व स्कूलों में मात्र 1,500 स्कूली बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने के साथ अपनी शुरुआत की है। आज, यह दुनिया का सबसे बड़ा (गैर-लाभकारी) मध्याह्न भोजन कार्यक्रम है, जो भारत के 17 राज्यों के 24,000 से अधिक स्कूलों के 23 लाख से अधिक बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराता है। दिल्ली-एनसीआर में अक्षय पात्र फाउंडेशन के पांच रसोईघर हजारों बच्चों को प्रतिदिन मीड-डे मिल उपलब्ध कराती है। देश में आपदा के समय भी अक्षय पात्र फाउंडेशन हमेशा पीडि़तों के साथ खड़ी रहती है। संस्था ने कोरोना काल के दौरान जम्मू-कश्मीर सहित देशभर में 23 करोड़ लोगों में राशन किट वितरित की। सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में मिड-डे मील योजना को लागू करके, अक्षय पात्र का उद्देश्य भूख से लड़ना और साथ ही बच्चों को स्कूल लाना है।
चेतू इंडिया के बारे में
साल 2000 में स्थापित, चेतू डिजिटल इंटेलिजेंस और सॉफ्टवेयर समाधान में एक वैश्विक अग्रणी कंपनी है। 2,800 से अधिक विशेषज्ञों के साथ, चेतू का भारत कैंपस नोएडा के सेक्टर 63 में तीन अत्याधुनिक विकास केंद्रों में फैला हुआ है। 1,69,000 वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र में फैले ये सेंटर उन्नत सॉफ़्टवेयर समाधानों पर काम करने वाले डेवलपर्स के लिए आदर्श स्थान हैं। हाल ही में तकनीकी स्नातकों के लिए एक समर्पित प्रशिक्षण और विकास केंद्र के साथ, इस कैंपस में आधुनिक सुविधाएं हैं—जैसे कि जिम, कैफेटेरिया और कंपनी-प्रायोजित क्लब—जो पेशेवर विकास और समुदाय निर्माण को बढ़ावा देती हैं।
चेतू फाउंडेशन के बारे में
साल 2018 में स्थापित चेतू फाउंडेशन, चेतू का गैर-लाभकारी संगठन है, जिसे टीम के सदस्यों की परोपकारी रुचियों का समर्थन करने के लिए बनाया गया था। चेतू फाउंडेशन का मिशन “बच्चों को सशक्त बनाना,” “जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना,” “समुदायों को वापस देना” और “बदलाव को बनाना और बनाए रखना” जैसे सिद्धांतों पर आधारित है। फाउंडेशन आपदा राहत सहायता और मानवीय सहायता का भी समर्थन करता है, लेकिन इसका मुख्य फोकस स्थानीय समुदायों में बचपन की भलाई और शिक्षा में सुधार पर है।
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