कुलवंत कौर के साथ बंसी लाल की रिपोर्ट। भारत में प्रदूषण हर साल बढ़ता है, लेकिन असली वजह वही है अस्थायी उपाय, कमज़ोर व्यवस्था, और लंबी अवधि की योजना की कमी। सरकारें स्मॉग टावर, ऑड–ईवन जैसे शॉर्ट-टर्म उपाय लाती हैं, लेकिन जड़ वाली समस्या पर कम काम होता है। कई एजेंसियाँ हैं, लेकिन किसी के पास पूरी ताकत नहीं — इसलिए कोऑर्डिनेशन कमजोर है। वाहन, उद्योग, कंस्ट्रक्शन डस्ट और पराली जैसे बड़े स्रोतों पर कड़े नियम और enforcement की कमी है। लंबी अवधि की नीतियों को अपनाने में राजनीतिक जोखिम होता है, इसलिए लीडर अक्सर अस्थायी कदमों पर ही रुक जाते हैं।
सच्चा बदलाव तभी आएगा जब— एक एकीकृत राष्ट्रीय प्राधिकरण एयर-क्वालिटी संभाले l मॉनिटरिंग और नियम मज़बूत हों lसाफ ऊर्जा, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और इंटर-स्टेट कोऑर्डिनेशन में लंबी अवधि का निवेश हो और केंद्र सरकार इसमें निर्णायक नेतृत्व दिखाए। यही वजह है कि प्रभावी और मजबूत केंद्रीय नेतृत्व की मांग ज़रूरी है।
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