जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक 'वेदांत स्थल' पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जेएनयू और 'खेलो भारत' द्वारा आयोजित तीन दिवसीय खेल महाकुंभ 'जेएनयू ओलंपिक 2.O' का पुरस्कार वितरण समारोह अत्यंत भव्यता के साथ संपन्न हुआ। 21 से 24 जनवरी तक चले इस खेल महोत्सव ने जेएनयू के इतिहास में सहभागिता के सभी पुराने कीर्तिमानों को ध्वस्त कर दिया है। इस आयोजन के माध्यम से अभाविप ने परिसर में "स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम" के संकल्प को चरितार्थ करते हुए हज़ारों छात्रों को खेल के मैदान तक लाने में सफलता प्राप्त की।
इस वर्ष जेएनयू ओलंपिक 2.O की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जेएनयू ओलंपिक में इस वर्ष 2500 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 1600 के करीब थी। इसके अतिरिक्त वॉलीबॉल, बैडमिंटन, फुटबॉल, एथलेटिक्स (100 मीटर, 400 मीटर दौड़), गोला फेंक और लंबी कूद जैसी स्पर्धाओं में 500 से अधिक पदक (स्वर्ण, रजत और कांस्य) विजेताओं को आज सम्मानित किया गया। विशेष रूप से 'पैरा-गेम्स' के सफल आयोजन ने इस पूरे महोत्सव को समावेशी बनाया, जिसके लिए प्रतिभागियों को विशेष प्रशस्ति पत्र और पदक प्रदान किए गए।
समारोह के मुख्य अतिथि, अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि, "जेएनयू ओलंपिक केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा में युवाओं को अनुशासित करने का एक महा-अभियान है। खेल हमें हार को स्वीकार करना और जीत के लिए निरंतर परिश्रम करना सिखाते हैं। आज जेएनयू का छात्र जिस उत्साह के साथ मैदान पर उतरा है, वह इस बात का प्रमाण है कि राष्ट्रवादी विचारधारा युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह समर्पित है। अभाविप का ध्येय परिसरों में नकारात्मकता को समाप्त कर सकारात्मक और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का वातावरण बनाना है।" उन्होंने जोर देते हुए कहा कि 'स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम' जैसे प्रयास न केवल छात्रों के स्वास्थ्य में सुधार करेंगे, बल्कि उनमें टीम वर्क और 'राष्ट्र प्रथम' की भावना को भी पुख्ता करेंगे, जो एक विकसित भारत के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है।
भारतीय कबड्डी टीम के पूर्व कप्तान और अर्जुन अवॉर्डी दीपक निवास हुड्डा ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि, "जेएनयू जैसे संस्थान में खेलों के प्रति ऐसा जुनून देखना सुखद अनुभव है। एक खिलाड़ी के रूप में मैं कह सकता हूँ कि खेल से बड़ा कोई शिक्षक नहीं होता। यहाँ के खिलाड़ियों की ऊर्जा देखकर विश्वास होता है कि आने वाले समय में जेएनयू से भी राष्ट्रीय स्तर के एथलीट निकलेंगे।"
अभाविप जेएनयू इकाई के अध्यक्ष मयंक पंचाल ने कहा कि शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ खेलों में भी अपना परचम लहराना चाहते हैं और अभाविप जेएनयू उन विद्यार्थियों के लिए हमेशा से प्रयासरत है। मंत्री प्रवीण के. पीयूष ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि 21 से 24 जनवरी तक चला ओलंपिक जेएनयू के इतिहास में यह एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ा है। अभाविप लगातार खेलों के प्रति पूरी तरह से समर्पित है, चाहे वो जेएनयू ओलंपिक का आयोजन हो चाहे परिषद प्रीमियर लीग का आयोजन हो।
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