झारखंड विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की जोरदार वापसी के बाद यह लगभग तय हो गया है कि भाजपा राज्य की सत्ता से बाहर जा रही है। नतीजों में स्पष्ट बहुमत मिलता देख जेएमएम नेता हेमंत सोरेन ने झारखंड की जनता का धन्यवाद किया है। बताते चलें कि झारखंड में जेएमएम के शानदार प्रदर्शन के बाद हेमंत सोरेन का मुख्यमंत्री बनना तय है दिख रहा है। नतीजों की तस्वीर साफ होते देख हेमंत सोरेन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
उन्होंने कहा कि आज झारखंड की लगभग 40 दिन की चुनावी यात्रा का अंतिम दिन है। आज पूरे राज्य में मतगणना का कार्यक्रम चल रहा है। नतीजे स्पष्ट हो चुके हैं। जो अभी तक मगणना के रुझान आए हैं, उसके माध्यम से झारखंड की जनता ने जो जनादेश दिया है, इसके लिए मैं सभी मतदाताओं का आभार प्रकट करता हूं।
हेमंत ने कहा, ''निश्चित रूप से आज का दिन झारखंड में मतादाओं के लिए उत्साह का दिन है.. लेकिन मेरे लिए आज का दिन एक संकल्प लेने का दिन है कि मैं राज्य के लोगों और राज्य की आकांक्षाओं को पूरा कर सकूं। निश्चित रूप से आज हम महागठबंधन में कांग्रेस, राजद के साथ मिलकर चुनाव लड़े। राहुल जी, लालू जी, प्रियंका जी, सोनिया जी और सभी कार्यकर्ताओं को मुझपर विश्वास जताने के लिए आभार व्यक्त करता हूं। जनता ने जो विश्वास हम पर दिखाया उसके लिए मतदाताओं का आभार जताता हूं। झारखंड में आज से नया अध्याय शुरू हो रहा है और मैं सभी का आभार जताता हूं। यह जीत महागठबंधन की जीत है।''
वहीं भाजपा का ग्राफ नीचे जाता देख झारखंड के सीएम रघुवर दास ने चुनावी नतीजों और रुझानों पर कहा, ''मैं जनादेश का स्वागत करता हूं। हमारी सरकार ने पूरे पांच साल ईमानदारी से काम करने की कोशिश की। मैं सवा तीन करोड़ जनता का धन्यवाद करता हूं। सभी नतीजे आना अभी बाकी हैं। राज्य में भाजपा हारती है तो ये मेरी जिम्मेदारी है।'' बता दें कि जमशेदपुर ईस्ट सीट से सीएम रघुवर दास निर्दलीय उम्मीदवार सरयू राय से 7856 वोटों से पीछे चल रहे हैं।
झामुमो-कांग्रेस-राजद महागठबंधन के तहत हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार थे। हेमंत सोरेन अभी झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। हेमंत सोरेन 2013-14 में झारखंड के मुख्यमंत्री रहे थे। सोरेन जामा से 1995 से 2005 तक विधायक रहे हैं। इनके भाई बसंत सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के यूथ संगठन झारखंड युवा मोर्चा के अध्यक्ष हैं। हेमंत सोरेन की गिनती झारखंड के कद्दावर नेताओं में होती है। कुछ ही सालों के अंदर हेमंत सोरेन ने सियासत की बुलंदियों को छूने में कामयाबी हासिल की। 38 वर्षीय हेमंत झारखंड के दिशोम गुरु शिबू सोरेन के बेटे हैं। हेमंत का जन्म 10 अगस्त 1975 को रामगढ़ जिले के सुदूर नेमरा गांव में हुआ था।
राजनीतिक जीवन
उनके दो बेटे निखिल और अंश हैं। जबकि उनकी पत्नी कल्पना सोरेन निजी स्कूल की संचालक हैं। उनकी मां रूपी सोरेन हैं जो उन्हें इंजीनियर बनाना चाहती थीं, लेकिन हेमंत ने 12वीं तक ही पढ़ाई की। उन्होंने इंजीनियरिंग में दाखिला तो लिया मगर बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी। उन्होंने 2003 में छात्र मोर्चा की राजनीति शुरू की और फिर आगे ही बढ़ते चले गए। हेमंत 2009 में राज्यसभा के सदस्य चुने गए।
दिसंबर 2009 में हुए विधानसभा चुनाव में संथाल परगना के दुमका सीट से जीत हासिल की और राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। 2010 में भारतीय जनता पार्टी के अर्जुन मुंडा की सरकार बनी, तो समर्थन के बदले हेमंत सोरेने को उप मुख्यमंत्री बनाया गया था। हालांकि जनवरी 2013 को झामुमो की समर्थन वापसी के चलते अर्जुन मुंडा की सरकार गिर गई। 13 जुलाई 2013 को हेमंत सोरेन ने झारखंड के 9वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। 28 साल की उम्र में हेमंत सोरेन झारखंड के मुख्यमंत्री बने थे।
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