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महिला कैंसर उपचार में क्रांति, अपोलो एथेना का नया मॉडल
स्वदेशी से सशक्त राष्ट्र: भारत मंथन पर्व में उभरी नई दिशा
जीतो न्यू दिल्ली चैप्टर ने किया विश्व नवकार महामंत्र दिवस का आयोजन
रबर एक्सपो में दिखी भारत की मैन्युफैक्चरिंग ताकत

आज ट्रेलर रिलीज़ करना और ग्लोबल प्रीमियर का ऐलान करना पूरी टीम के लिए बहुत खुशी की बात है, क्योंकि दर्शकों को पहली बार उस दुनिया की झलक मिलेगी जिसे हम सालों से बड़ी मेहनत से तैयार कर रहे हैं। विजनरी फिल्म मेकर नागराज पोपटराव मंजुले के निर्देशन, बेहद टैलेंटेड अभय कोरान्ने की मेहनत और बेहतरीन कलाकारों के साथ बनी 'मटका किंग' उस तरह के क्रिएटिव रिस्क को दिखाती है जो हमें लगता है कि लेने चाहिए। हमें गर्व है कि हम प्राइम वीडियो के साथ मिलकर इस कहानी को पूरी दुनिया तक पहुँचा रहे हैं और हम 17 अप्रैल का इंतज़ार नहीं कर पा रहे हैं।"

राइटर, क्रिएटर और डायरेक्टर नागराज पोपटराव मंजुले ने कहा, " 'मटका किंग' सिर्फ एक पीरियड ड्रामा नहीं है। यह एक ऐसे आदमी की कहानी है जो सम्मान के लिए लड़ने और अपने सपनों को पूरा करने की हिम्मत करता है, और ऐसा करते हुए वह अपने आस-पास के पूरे सिस्टम को बदल देता है।

हर फ्रेम में तनाव, बड़े सपने और ऊंचे दांव नज़र आएंगे, जिसमें उस दौर के हिसाब से सटीक इंटीरियर, सामान, कपड़े और लाइटिंग का इस्तेमाल किया गया है ताकि किरदारों के इमोशनल सफर को और बेहतर दिखाया जा सके। रॉय कपूर फिल्म्स, आटपाट, एसएमआर एंटरटेनमेंट और प्राइम वीडियो के साथ जुड़कर इस विज़न को हकीकत में बदलने में मदद मिली। मैं चाहता हूँ कि 17 अप्रैल को दर्शक इस सीरीज की गहराई और रोमांच को खुद महसूस करें।"

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प्राइम वीडियो की नई सीरीज 'मटका किंग' : 17 अप्रैल से शुरू होगा सत्ता और सट्टे का खेल!

आज ट्रेलर रिलीज़ करना और ग्लोबल प्रीमियर का ऐलान करना पूरी टीम के लिए बहुत खुशी की बात है, क्योंकि दर्शकों को पहली बार उस दुनिया की झलक मिलेगी जिसे हम सालों से बड़ी मेहनत से तैयार कर रहे हैं। विजनरी फिल्म मेकर नागराज पोपटराव मंजुले के निर्देशन, बेहद टैलेंटेड अभय कोरान्ने की मेहनत और बेहतरीन कलाकारों के साथ बनी 'मटका किंग' उस तरह के क्रिएटिव रिस्क को दिखाती है जो हमें लगता है कि लेने चाहिए। हमें गर्व है कि हम प्राइम वीडियो के साथ मिलकर इस कहानी को पूरी दुनिया तक पहुँचा रहे हैं और हम 17 अप्रैल का इंतज़ार नहीं कर पा रहे हैं।"

राइटर, क्रिएटर और डायरेक्टर नागराज पोपटराव मंजुले ने कहा, " 'मटका किंग' सिर्फ एक पीरियड ड्रामा नहीं है। यह एक ऐसे आदमी की कहानी है जो सम्मान के लिए लड़ने और अपने सपनों को पूरा करने की हिम्मत करता है, और ऐसा करते हुए वह अपने आस-पास के पूरे सिस्टम को बदल देता है।

हर फ्रेम में तनाव, बड़े सपने और ऊंचे दांव नज़र आएंगे, जिसमें उस दौर के हिसाब से सटीक इंटीरियर, सामान, कपड़े और लाइटिंग का इस्तेमाल किया गया है ताकि किरदारों के इमोशनल सफर को और बेहतर दिखाया जा सके। रॉय कपूर फिल्म्स, आटपाट, एसएमआर एंटरटेनमेंट और प्राइम वीडियो के साथ जुड़कर इस विज़न को हकीकत में बदलने में मदद मिली। मैं चाहता हूँ कि 17 अप्रैल को दर्शक इस सीरीज की गहराई और रोमांच को खुद महसूस करें।"

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इससे स्पष्ट है कि इस क्षेत्र में विस्तार की काफी संभावनाएँ मौजूद हैं यूनिटरी कूलिंग उत्पादों की हमारी नई रेंज, जिसमें कमर्शियल रेफ्रिजरेशन समाधान का व्यापक पोर्टफोलियो भी शामिल है हमें बढ़ते अवसरों का लाभ उठाने और आवासीय तथा व्यावसायिक दोनों ही क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करने में मदद करेगी प्रहली बार एसी अपनाने वाले ग्राहकों की बढ़ती संख्या और रेफ्रिजरेशन जरूरतों में हो रहे बदलाव जैसे बड़े रुझानों को ध्यान में रखकर हमने अपनी उत्पाद रणनीति तैयार की है। इससे ब्लू स्टार कूलिंग की बढ़ती मांग के अगले चरण में नेतृत्व करने के लिए अच्छी स्थिति में है।'

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ब्लू स्टार एयर कंडीशनर ने 2026 के लिए नई ऊर्जा-कुशल एसी रेंज लॉन्च की

इससे स्पष्ट है कि इस क्षेत्र में विस्तार की काफी संभावनाएँ मौजूद हैं यूनिटरी कूलिंग उत्पादों की हमारी नई रेंज, जिसमें कमर्शियल रेफ्रिजरेशन समाधान का व्यापक पोर्टफोलियो भी शामिल है हमें बढ़ते अवसरों का लाभ उठाने और आवासीय तथा व्यावसायिक दोनों ही क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करने में मदद करेगी प्रहली बार एसी अपनाने वाले ग्राहकों की बढ़ती संख्या और रेफ्रिजरेशन जरूरतों में हो रहे बदलाव जैसे बड़े रुझानों को ध्यान में रखकर हमने अपनी उत्पाद रणनीति तैयार की है। इससे ब्लू स्टार कूलिंग की बढ़ती मांग के अगले चरण में नेतृत्व करने के लिए अच्छी स्थिति में है।'

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शारदा हॉस्पिटल में आयुष्मान भारत के तहत पहली किडनी ट्रांसप्लांट
“हरित बड़ा मंगल” अभियान: पर्यावरण अनुकूल भंडारों पर जोर
दिवंगत वन्यजीव पशु चिकित्सकों के शोक में राष्ट्रव्यापी काला दिवस मनाया गया

इची, जो एक थिएटर अभिनेत्री है, जब एक नए फ्लैट में रहने आती है, तो उसका सामना उस मक्खी से होता है। इची के पास प्लास्टिक के गुलाबों और सूरजमुखी के फूलों का एक गुलदस्ता है। किसी अजीब वजह से, उस मक्खी को प्लास्टिक के गुलाब पसंद आ जाते हैं और वह फ्लैट छोड़कर जाने से मना कर देती है।

मक्खी मारने वाले रैकेट लेकर, इची, उसके नाटक का निर्देशक और उसकी सह-अभिनेत्री मिलकर उस मक्खी को मारने की कोशिश करते हैं। वे मक्खी को मारने में कामयाब तो होते हैं, लेकिन उसे पूरी तरह खत्म नहीं कर पाते। फिर इची की एक अवास्तविक (surreal) पर्यावरणीय यात्रा शुरू होती है, जिसका अंत एक हत्या के साथ होता है। इची की प्रेम कहानी भी इस अवास्तविक यात्रा का ही एक हिस्सा बन जाती है।

अभिनेत्री दीपाली जैन ने बताया, डायरेक्टर जी किसी भी कहानी का खुलासा पहले नहीं करतें, वहीं उनकी भावनाये, कहानियो के साथ बढ़ती हैं, सवेदनशील मुद्दों और आत्मीयता को नजदीक से दिखाने में माहिर हैं, फ़िल्म 'प्लास्टिक रोज'ऐसी ही उनकी सोच को समर्पित हैं और में इस फ़िल्म का हिस्सा हूँ.

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प्लास्टिक रोज -लव, मिस्ट्री, मर्डर और पर्यावरण उपदेश देती फ़िल्म

इची, जो एक थिएटर अभिनेत्री है, जब एक नए फ्लैट में रहने आती है, तो उसका सामना उस मक्खी से होता है। इची के पास प्लास्टिक के गुलाबों और सूरजमुखी के फूलों का एक गुलदस्ता है। किसी अजीब वजह से, उस मक्खी को प्लास्टिक के गुलाब पसंद आ जाते हैं और वह फ्लैट छोड़कर जाने से मना कर देती है।

मक्खी मारने वाले रैकेट लेकर, इची, उसके नाटक का निर्देशक और उसकी सह-अभिनेत्री मिलकर उस मक्खी को मारने की कोशिश करते हैं। वे मक्खी को मारने में कामयाब तो होते हैं, लेकिन उसे पूरी तरह खत्म नहीं कर पाते। फिर इची की एक अवास्तविक (surreal) पर्यावरणीय यात्रा शुरू होती है, जिसका अंत एक हत्या के साथ होता है। इची की प्रेम कहानी भी इस अवास्तविक यात्रा का ही एक हिस्सा बन जाती है।

अभिनेत्री दीपाली जैन ने बताया, डायरेक्टर जी किसी भी कहानी का खुलासा पहले नहीं करतें, वहीं उनकी भावनाये, कहानियो के साथ बढ़ती हैं, सवेदनशील मुद्दों और आत्मीयता को नजदीक से दिखाने में माहिर हैं, फ़िल्म 'प्लास्टिक रोज'ऐसी ही उनकी सोच को समर्पित हैं और में इस फ़िल्म का हिस्सा हूँ.

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जुनून से दर्द तक: भंसाली के 7 गाने जो सीधे दिल को छू जाते हैं
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महावीर के सिद्धांत ही विश्व शांति का मार्ग : मनोज कुमार जैन 
राष्ट्रीय बोध एवं आध्यात्मिकता के समन्वय से ही सशक्त राष्ट्र निर्माण संभव : डॉ. कृष्ण गोपाल
25 साल पूरे: जेनेसिस फाउंडेशन ने 5400+ बच्चों को दी नई जिंदगी
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फिल्म “Belcha” का प्रीमियर हाउसफुल, 10 को होगी रिलीज
“संस्कार, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण का केंद्र- ‘विद्या भारती भवन’ का भव्य लोकार्पण”

बबिता अशिवाल द्वारा यूनोइया फिल्म्स (Eunoia Films) के बैनर तले प्रोड्यूस की गई 'माँ का सम' एक दिल को छू लेने वाली प्राइम ओरिजिनल सीरीज है, जिसे निकोलस खारकोंगोर ने डायरेक्ट किया है और रविंदर रंधावा और सुमृत शाही ने लिखा है। अंगिरा के अलावा, इस सीरीज में मोना सिंह, मिहिर आहूजा और रणवीर बरार लीड रोल में हैं। 'माँ का सम' अब विशेष रूप से प्राइम वीडियो पर हिंदी में स्ट्रीम हो रही है, साथ ही तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम में सबटाइटल्स भी उपलब्ध हैं।

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ऑन-स्क्रीन लॉजिक, ऑफ-स्क्रीन एंग्जायटी: अंगिरा की कहानी

बबिता अशिवाल द्वारा यूनोइया फिल्म्स (Eunoia Films) के बैनर तले प्रोड्यूस की गई 'माँ का सम' एक दिल को छू लेने वाली प्राइम ओरिजिनल सीरीज है, जिसे निकोलस खारकोंगोर ने डायरेक्ट किया है और रविंदर रंधावा और सुमृत शाही ने लिखा है। अंगिरा के अलावा, इस सीरीज में मोना सिंह, मिहिर आहूजा और रणवीर बरार लीड रोल में हैं। 'माँ का सम' अब विशेष रूप से प्राइम वीडियो पर हिंदी में स्ट्रीम हो रही है, साथ ही तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम में सबटाइटल्स भी उपलब्ध हैं।

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ABVP ने जगाई राष्ट्रभक्ति की अलख, कैंपसों में वंदे मातरम् की गूंज

सोशल मीडिया के माध्यम से दिए गए जवाब में केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि एनईपी 2020 हिंदी थोपने के बारे में नहीं, बल्कि 'भाषाई मुक्ति' का एक विजन है। यह मातृभाषा को प्राथमिकता देती है ताकि तमिल भाषी बच्चे अपनी समृद्ध और गौरवशाली भाषा में शिक्षा प्राप्त कर वैश्विक स्तर पर उत्कृष्टता प्राप्त कर सकें।

प्रधान ने कहा कि बहुभाषावाद को खतरे के रूप में देखना गलत है। तमिल भाषा अतिरिक्त भाषाओं को सीखने से कमजोर नहीं, बल्कि समृद्ध होती है। मुख्यमंत्री का लचीली नीति को "अनिवार्य हिंदी" के रूप में पेश करना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
एनईपी न केवल सभी भारतीय भाषाओं को समान बढ़ावा देती है, बल्कि मौजूदा दो भाषा प्रणाली की सीमाओं को भी दूर करती है। सरकार 'समग्र शिक्षा' और शिक्षक प्रशिक्षण (NPST, NMM) के माध्यम से इसे जमीन पर उतार रही है।

श्री प्रधान ने लिखा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तमिल को 'राष्ट्रीय धरोहर' माना गया है। काशी तमिल संगमम जैसे आयोजनों ने तमिल संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई है। श्री प्रधान ने आरोप लगाया कि डीएमके सरकार वोट बैंक की राजनीति के लिए तमिल छात्रों को विविध अवसरों से वंचित कर रही है।

मंत्री ने डेटा का हवाला देते हुए कहा कि डीएमके सरकार ने ही एमओयू पर हस्ताक्षर न करके पीएम श्री स्कूलों का रास्ता रोका है। साथ ही, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद तमिलनाडु में नवोदय विद्यालयों के कार्यान्वयन में बाधा डालना गरीब और मेधावी छात्रों के साथ सीधा अन्याय है।

 

 

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प्रधान बोले—NEP हिंदी नहीं, मातृभाषा को देता है प्राथमिकता

सोशल मीडिया के माध्यम से दिए गए जवाब में केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि एनईपी 2020 हिंदी थोपने के बारे में नहीं, बल्कि 'भाषाई मुक्ति' का एक विजन है। यह मातृभाषा को प्राथमिकता देती है ताकि तमिल भाषी बच्चे अपनी समृद्ध और गौरवशाली भाषा में शिक्षा प्राप्त कर वैश्विक स्तर पर उत्कृष्टता प्राप्त कर सकें।

प्रधान ने कहा कि बहुभाषावाद को खतरे के रूप में देखना गलत है। तमिल भाषा अतिरिक्त भाषाओं को सीखने से कमजोर नहीं, बल्कि समृद्ध होती है। मुख्यमंत्री का लचीली नीति को "अनिवार्य हिंदी" के रूप में पेश करना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
एनईपी न केवल सभी भारतीय भाषाओं को समान बढ़ावा देती है, बल्कि मौजूदा दो भाषा प्रणाली की सीमाओं को भी दूर करती है। सरकार 'समग्र शिक्षा' और शिक्षक प्रशिक्षण (NPST, NMM) के माध्यम से इसे जमीन पर उतार रही है।

श्री प्रधान ने लिखा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तमिल को 'राष्ट्रीय धरोहर' माना गया है। काशी तमिल संगमम जैसे आयोजनों ने तमिल संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई है। श्री प्रधान ने आरोप लगाया कि डीएमके सरकार वोट बैंक की राजनीति के लिए तमिल छात्रों को विविध अवसरों से वंचित कर रही है।

मंत्री ने डेटा का हवाला देते हुए कहा कि डीएमके सरकार ने ही एमओयू पर हस्ताक्षर न करके पीएम श्री स्कूलों का रास्ता रोका है। साथ ही, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद तमिलनाडु में नवोदय विद्यालयों के कार्यान्वयन में बाधा डालना गरीब और मेधावी छात्रों के साथ सीधा अन्याय है।

 

 

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पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज कटौती से जनता को बड़ी राहत : प्रवीन खंडेलवाल

आशीष जैन, संस्थापक एवं निदेशक ने कहा कि उद्देश्य एक ऐसा मंच तैयार करना है जो स्थापित और उभरते दोनों क्षेत्रों के बीच सहयोग को बढ़ावा दे। उन्होंने कहा,"ऑटो टेक एशिया पूरे ऑटोमोबाइल इकोसिस्टम को एक साथ लाता है, जिसमें वाहन निर्माता, सप्लायर्स, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े सभी प्रमुख भागीदार शामिल हैं। हमारा फोकस ऐसे सार्थक इंडस्ट्री संवाद को सक्षम बनाना है जहां नवाचार से सहयोग को बढ़ावा मिले और सहयोग से दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित हो।"

यह प्रदर्शनी ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और विनिर्माण क्षेत्रों की अग्रणी कंपनियों को एक साथ लाएगी, जो पूरे उद्योग के व्यापक प्रतिनिधित्व को दर्शाएंगी, जिनमें शामिल हैं: ऑटोमोबाइल ओईएम और टियर-1 आपूर्तिकर्ता इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता और नवउद्यम बैटरी निर्माता और ऊर्जा भंडारण समाधान प्रदाता ऑटोमोबाइल कलपुर्जा और प्रणाली आपूर्तिकर्ता मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी, ऑटोमेशन और इंडस्ट्रियल सॉल्यूशन प्रोवाइडर सॉफ्टवेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स और कनेक्टेड मोबिलिटी से जुड़ी कंपनियां इस आयोजन में खरीद, उत्पादन, अनुसंधान एवं विकास और व्यवसायिक नेतृत्व से जुड़े प्रमुख निर्णयकर्ताओं के एक साथ आने की उम्मीद है जिससे एक केंद्रित व्यापार-से-व्यापार माहौल तैयार होगा।

ईवी टेक और बैटरी टेक से उद्योग को मिलेगी दिशा इन दोनों खंडों के एकीकरण के माध्यम से, यह प्रदर्शनी ऑटोमोबाइल निर्माण, विद्युतिकरण और ऊर्जा भंडारण को एक ही मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास करेगी, जो उद्योग के तेजी से एकीकृत होते स्वरूप को दर्शाता हैं।

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भारत मंडपम-ऑटोटेक एशिया 2026 एक्सजीबिशन में दिखेंगे इनोवेशन इंटिग्रेट

आशीष जैन, संस्थापक एवं निदेशक ने कहा कि उद्देश्य एक ऐसा मंच तैयार करना है जो स्थापित और उभरते दोनों क्षेत्रों के बीच सहयोग को बढ़ावा दे। उन्होंने कहा,"ऑटो टेक एशिया पूरे ऑटोमोबाइल इकोसिस्टम को एक साथ लाता है, जिसमें वाहन निर्माता, सप्लायर्स, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े सभी प्रमुख भागीदार शामिल हैं। हमारा फोकस ऐसे सार्थक इंडस्ट्री संवाद को सक्षम बनाना है जहां नवाचार से सहयोग को बढ़ावा मिले और सहयोग से दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित हो।"

यह प्रदर्शनी ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और विनिर्माण क्षेत्रों की अग्रणी कंपनियों को एक साथ लाएगी, जो पूरे उद्योग के व्यापक प्रतिनिधित्व को दर्शाएंगी, जिनमें शामिल हैं: ऑटोमोबाइल ओईएम और टियर-1 आपूर्तिकर्ता इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता और नवउद्यम बैटरी निर्माता और ऊर्जा भंडारण समाधान प्रदाता ऑटोमोबाइल कलपुर्जा और प्रणाली आपूर्तिकर्ता मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी, ऑटोमेशन और इंडस्ट्रियल सॉल्यूशन प्रोवाइडर सॉफ्टवेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स और कनेक्टेड मोबिलिटी से जुड़ी कंपनियां इस आयोजन में खरीद, उत्पादन, अनुसंधान एवं विकास और व्यवसायिक नेतृत्व से जुड़े प्रमुख निर्णयकर्ताओं के एक साथ आने की उम्मीद है जिससे एक केंद्रित व्यापार-से-व्यापार माहौल तैयार होगा।

ईवी टेक और बैटरी टेक से उद्योग को मिलेगी दिशा इन दोनों खंडों के एकीकरण के माध्यम से, यह प्रदर्शनी ऑटोमोबाइल निर्माण, विद्युतिकरण और ऊर्जा भंडारण को एक ही मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास करेगी, जो उद्योग के तेजी से एकीकृत होते स्वरूप को दर्शाता हैं।

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सिक्सइट ने बढ़ाया दायरा, अर्शदीप सिंह बने चेहरा
दिल्ली में 12–14 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय पैकेजिंग शिखर सम्मेलन

ध्यातव्य हो कि "मदारी" 2017 से दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों को अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने हेतु एक मंच प्रदान कर रहा है । इस कला महोत्सव को मुख्य रूप से खिचड़ी(नुक्कड़-नाटक), धरोहर(ओपेन माईक) और ग्राम्या(प्रदर्शनी) तीन भागों में बाँटा गया है । कार्यक्रम के पिछले तीन दिनों में खिचड़ी में गार्गी महाविद्यालय, लेडी हार्डिंग, देशबंधु महाविद्यालय, केशव महाविद्यालय सहित कुल 38 टीमों ने नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति की, धरोहर के अंतर्गत दिल्ली विश्वविद्यालय के 100 से अधिक प्रतिभावान कवियों और गायकों ने अपनी प्रस्तुति की तथा ग्राम्या के अंतर्गत मिरांडा हाऊस, हिन्दू महाविद्यालय, दौलतराम महाविद्यालय सहित कुल 30 महाविद्यालयों के छात्रों ने अपनी प्रदर्शनी लगाई ।

अभाविप के राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने अपने वक्तव्य में कहा' मदारी वह मंच है जहाँ पर नाटक समस्या के साथ समाधान की दिशा भी दिखाता है । मदारी का यह कार्यक्रम कला, संगीत, नाटक, संस्कृति को बढ़ावा देने का कार्य करने का प्रतिबिंब के रूप में होता है। राष्ट्रीय कला मंच युवाओं को स्क्रीन टाइम से प्ले टाइम की दिशा में कार्य कर रहा है। जिससे युवा भारतीय कला, संस्कृति, संगीत की परंपरा के साथ देशहित में कार्य करने के लिए प्रेरित भी करता है। राष्ट्रीय कला मंच के राष्ट्रीय संयोजक अभिनव सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि मदारी केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि समाज की गहरी सच्चाईयों को उजागर करने वाला एक मंच है। यह संवेदनशील अभिव्यक्ति का सशक्त मंच है जिसका उद्देश्य केवल अभिनय करना नहीं बल्कि समाज को जागरूक करना है ।

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DU के कला संकाय में पुरस्कार वितरण के साथ हुआ "मदारी" का समापन

ध्यातव्य हो कि "मदारी" 2017 से दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों को अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने हेतु एक मंच प्रदान कर रहा है । इस कला महोत्सव को मुख्य रूप से खिचड़ी(नुक्कड़-नाटक), धरोहर(ओपेन माईक) और ग्राम्या(प्रदर्शनी) तीन भागों में बाँटा गया है । कार्यक्रम के पिछले तीन दिनों में खिचड़ी में गार्गी महाविद्यालय, लेडी हार्डिंग, देशबंधु महाविद्यालय, केशव महाविद्यालय सहित कुल 38 टीमों ने नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति की, धरोहर के अंतर्गत दिल्ली विश्वविद्यालय के 100 से अधिक प्रतिभावान कवियों और गायकों ने अपनी प्रस्तुति की तथा ग्राम्या के अंतर्गत मिरांडा हाऊस, हिन्दू महाविद्यालय, दौलतराम महाविद्यालय सहित कुल 30 महाविद्यालयों के छात्रों ने अपनी प्रदर्शनी लगाई ।

अभाविप के राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने अपने वक्तव्य में कहा' मदारी वह मंच है जहाँ पर नाटक समस्या के साथ समाधान की दिशा भी दिखाता है । मदारी का यह कार्यक्रम कला, संगीत, नाटक, संस्कृति को बढ़ावा देने का कार्य करने का प्रतिबिंब के रूप में होता है। राष्ट्रीय कला मंच युवाओं को स्क्रीन टाइम से प्ले टाइम की दिशा में कार्य कर रहा है। जिससे युवा भारतीय कला, संस्कृति, संगीत की परंपरा के साथ देशहित में कार्य करने के लिए प्रेरित भी करता है। राष्ट्रीय कला मंच के राष्ट्रीय संयोजक अभिनव सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि मदारी केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि समाज की गहरी सच्चाईयों को उजागर करने वाला एक मंच है। यह संवेदनशील अभिव्यक्ति का सशक्त मंच है जिसका उद्देश्य केवल अभिनय करना नहीं बल्कि समाज को जागरूक करना है ।

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शराब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है

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स्कॉच से वोडका तक: आर्डेंट की नई प्रीमियम पेशकश

 

शराब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है

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क्रेडाई का फोकस: सतत विकास और कौशल सशक्तिकरण
लेबलब्लाइंड® अध्ययन: 33% फूड लेबल दावे गैर-अनुपालक
कॉसप्ले 101 वर्कशॉप ने बढ़ाया गुरुग्राम कॉमिक कॉन का क्रेज
“द ब्लड ओथ” का नई दिल्ली में भव्य लोकार्पण

साथी ही अभाविप दिल्ली प्रदेश के पुनर्निवाचित प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा,"आज जहां अन्य देशों में युवाओं को विखंडनकारी एवं नकारात्मक दृष्टिकोण के साथ देख रहा है वहीं भारत का युवा अभाविप जैसे राष्ट्र प्रथम का विचार रखने वाले संगठन के साथ खड़ा है और विकसित भारत की ओर अग्रसर है।अभाविप का यह प्रांत अधिवेशन विभिन्न वैचारिक, शैक्षणिक एवं संगठनात्मक सत्रों के माध्यम से छात्रशक्ति को राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रेरित करने तथा संगठन के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण हेतु महत्वपूर्ण दिशा प्रदान करेगा।”

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विद्यार्थी परिषद में गंगा जैसी पवित्रता: पद्मश्री प्रो. चमू कृष्ण शास्त्री

साथी ही अभाविप दिल्ली प्रदेश के पुनर्निवाचित प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा,"आज जहां अन्य देशों में युवाओं को विखंडनकारी एवं नकारात्मक दृष्टिकोण के साथ देख रहा है वहीं भारत का युवा अभाविप जैसे राष्ट्र प्रथम का विचार रखने वाले संगठन के साथ खड़ा है और विकसित भारत की ओर अग्रसर है।अभाविप का यह प्रांत अधिवेशन विभिन्न वैचारिक, शैक्षणिक एवं संगठनात्मक सत्रों के माध्यम से छात्रशक्ति को राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रेरित करने तथा संगठन के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण हेतु महत्वपूर्ण दिशा प्रदान करेगा।”

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इस वर्ष जेएनयू ओलंपिक 2.O की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जेएनयू ओलंपिक में इस वर्ष 2500 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 1600 के करीब थी। इसके अतिरिक्त वॉलीबॉल, बैडमिंटन, फुटबॉल, एथलेटिक्स (100 मीटर, 400 मीटर दौड़), गोला फेंक और लंबी कूद जैसी स्पर्धाओं में 500 से अधिक पदक (स्वर्ण, रजत और कांस्य) विजेताओं को आज सम्मानित किया गया। विशेष रूप से 'पैरा-गेम्स' के सफल आयोजन ने इस पूरे महोत्सव को समावेशी बनाया, जिसके लिए प्रतिभागियों को विशेष प्रशस्ति पत्र और पदक प्रदान किए गए।

समारोह के मुख्य अतिथि, अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि, "जेएनयू ओलंपिक केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा में युवाओं को अनुशासित करने का एक महा-अभियान है। खेल हमें हार को स्वीकार करना और जीत के लिए निरंतर परिश्रम करना सिखाते हैं। आज जेएनयू का छात्र जिस उत्साह के साथ मैदान पर उतरा है, वह इस बात का प्रमाण है कि राष्ट्रवादी विचारधारा युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह समर्पित है। अभाविप का ध्येय परिसरों में नकारात्मकता को समाप्त कर सकारात्मक और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का वातावरण बनाना है।" उन्होंने जोर देते हुए कहा कि 'स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम' जैसे प्रयास न केवल छात्रों के स्वास्थ्य में सुधार करेंगे, बल्कि उनमें टीम वर्क और 'राष्ट्र प्रथम' की भावना को भी पुख्ता करेंगे, जो एक विकसित भारत के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है।

भारतीय कबड्डी टीम के पूर्व कप्तान और अर्जुन अवॉर्डी दीपक निवास हुड्डा ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि, "जेएनयू जैसे संस्थान में खेलों के प्रति ऐसा जुनून देखना सुखद अनुभव है। एक खिलाड़ी के रूप में मैं कह सकता हूँ कि खेल से बड़ा कोई शिक्षक नहीं होता। यहाँ के खिलाड़ियों की ऊर्जा देखकर विश्वास होता है कि आने वाले समय में जेएनयू से भी राष्ट्रीय स्तर के एथलीट निकलेंगे।"

अभाविप जेएनयू इकाई के अध्यक्ष मयंक पंचाल ने कहा कि शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ खेलों में भी अपना परचम लहराना चाहते हैं और अभाविप जेएनयू उन विद्यार्थियों के लिए हमेशा से प्रयासरत है। मंत्री प्रवीण के. पीयूष ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि 21 से 24 जनवरी तक चला ओलंपिक जेएनयू के इतिहास में यह एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ा है। अभाविप लगातार खेलों के प्रति पूरी तरह से समर्पित है, चाहे वो जेएनयू ओलंपिक का आयोजन हो चाहे परिषद प्रीमियर लीग का आयोजन हो।

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'जेएनयू ओलंपिक 2.0' का भव्य पुरस्कार वितरण समारोह संपन्न

इस वर्ष जेएनयू ओलंपिक 2.O की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जेएनयू ओलंपिक में इस वर्ष 2500 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 1600 के करीब थी। इसके अतिरिक्त वॉलीबॉल, बैडमिंटन, फुटबॉल, एथलेटिक्स (100 मीटर, 400 मीटर दौड़), गोला फेंक और लंबी कूद जैसी स्पर्धाओं में 500 से अधिक पदक (स्वर्ण, रजत और कांस्य) विजेताओं को आज सम्मानित किया गया। विशेष रूप से 'पैरा-गेम्स' के सफल आयोजन ने इस पूरे महोत्सव को समावेशी बनाया, जिसके लिए प्रतिभागियों को विशेष प्रशस्ति पत्र और पदक प्रदान किए गए।

समारोह के मुख्य अतिथि, अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि, "जेएनयू ओलंपिक केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा में युवाओं को अनुशासित करने का एक महा-अभियान है। खेल हमें हार को स्वीकार करना और जीत के लिए निरंतर परिश्रम करना सिखाते हैं। आज जेएनयू का छात्र जिस उत्साह के साथ मैदान पर उतरा है, वह इस बात का प्रमाण है कि राष्ट्रवादी विचारधारा युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह समर्पित है। अभाविप का ध्येय परिसरों में नकारात्मकता को समाप्त कर सकारात्मक और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का वातावरण बनाना है।" उन्होंने जोर देते हुए कहा कि 'स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम' जैसे प्रयास न केवल छात्रों के स्वास्थ्य में सुधार करेंगे, बल्कि उनमें टीम वर्क और 'राष्ट्र प्रथम' की भावना को भी पुख्ता करेंगे, जो एक विकसित भारत के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है।

भारतीय कबड्डी टीम के पूर्व कप्तान और अर्जुन अवॉर्डी दीपक निवास हुड्डा ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि, "जेएनयू जैसे संस्थान में खेलों के प्रति ऐसा जुनून देखना सुखद अनुभव है। एक खिलाड़ी के रूप में मैं कह सकता हूँ कि खेल से बड़ा कोई शिक्षक नहीं होता। यहाँ के खिलाड़ियों की ऊर्जा देखकर विश्वास होता है कि आने वाले समय में जेएनयू से भी राष्ट्रीय स्तर के एथलीट निकलेंगे।"

अभाविप जेएनयू इकाई के अध्यक्ष मयंक पंचाल ने कहा कि शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ खेलों में भी अपना परचम लहराना चाहते हैं और अभाविप जेएनयू उन विद्यार्थियों के लिए हमेशा से प्रयासरत है। मंत्री प्रवीण के. पीयूष ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि 21 से 24 जनवरी तक चला ओलंपिक जेएनयू के इतिहास में यह एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ा है। अभाविप लगातार खेलों के प्रति पूरी तरह से समर्पित है, चाहे वो जेएनयू ओलंपिक का आयोजन हो चाहे परिषद प्रीमियर लीग का आयोजन हो।

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अभाविप दिल्ली का संगठनात्मक चुनाव संपन्न : तपन-सार्थक फिर चुने गए
आईजीएनसीए में मनेगा ‘साहित्य, संस्कृति और समृद्धि’ का उत्सव

पीस प्रोग्राम की प्रिंसिपल कोऑर्डिनेटर साध्वी तपेश्वरी भारती जी ने कहा, “महाशिवरात्रि केवल एक अनुष्ठानिक रात्रि नहीं है, बल्कि यह आत्म जागरण, संतुलन और सचेत जीवन की प्रेरणा है। शिव आनंदम 3.0 के माध्यम से हमारा प्रयास है कि महादेव के शाश्वत ज्ञान को आज की पीढ़ी की भाषा-तकनीक, सहभागिता और अनुभव- के माध्यम से प्रस्तुत किया जाए, ताकि शिव केवल पूजित ही नहीं, बल्कि अनुभूत भी हों।"

इस सोच को आगे बढ़ाते हुए, सह-संयोजिका साध्वी निधि भारती जी ने कहा: "यह मंच अध्यात्म को ऐसा बनाना चाहता है जिसे लोग महसूस कर सकें, उसमें भाग ले सकें और जो आज के समय से जुड़ा हो। शिव आनंदम 3.0 दिखाता है कि हमारे प्राचीन सनातन मूल्य आज के जीवन में भी कैसे रास्ता दिखा सकते हैं- चाहे वह सेहत हो, रिश्ते हों, विज्ञान हो या पूरी दुनिया में आपसी सद्भाव-और वह भी अपनी पवित्रता बनाए रखते हुए।"

अपने नवाचार, अवधारणा और प्रस्तुति के साथ, शिव आनंदम 3.0 आधुनिक भारत में महाशिवरात्रि उत्सव की एक नई परिभाषा स्थापित करने जा रहा है।

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भक्ति, तकनीक और संस्कृति का महासंगम: शिव आनंदम 3.0

पीस प्रोग्राम की प्रिंसिपल कोऑर्डिनेटर साध्वी तपेश्वरी भारती जी ने कहा, “महाशिवरात्रि केवल एक अनुष्ठानिक रात्रि नहीं है, बल्कि यह आत्म जागरण, संतुलन और सचेत जीवन की प्रेरणा है। शिव आनंदम 3.0 के माध्यम से हमारा प्रयास है कि महादेव के शाश्वत ज्ञान को आज की पीढ़ी की भाषा-तकनीक, सहभागिता और अनुभव- के माध्यम से प्रस्तुत किया जाए, ताकि शिव केवल पूजित ही नहीं, बल्कि अनुभूत भी हों।"

इस सोच को आगे बढ़ाते हुए, सह-संयोजिका साध्वी निधि भारती जी ने कहा: "यह मंच अध्यात्म को ऐसा बनाना चाहता है जिसे लोग महसूस कर सकें, उसमें भाग ले सकें और जो आज के समय से जुड़ा हो। शिव आनंदम 3.0 दिखाता है कि हमारे प्राचीन सनातन मूल्य आज के जीवन में भी कैसे रास्ता दिखा सकते हैं- चाहे वह सेहत हो, रिश्ते हों, विज्ञान हो या पूरी दुनिया में आपसी सद्भाव-और वह भी अपनी पवित्रता बनाए रखते हुए।"

अपने नवाचार, अवधारणा और प्रस्तुति के साथ, शिव आनंदम 3.0 आधुनिक भारत में महाशिवरात्रि उत्सव की एक नई परिभाषा स्थापित करने जा रहा है।

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कर्णगोष्ठी नोएडा का भव्य पारिवारिक मिलन समारोह
आलेख फाउन्डेशन पेश करते हैं अनंत संगम का दूसरा संस्करण

डॉ. सुमित सिंह ने कहा, “अल्ज़ाइमर बीमारी भारत में एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है क्योंकि हमारी युवा आबादी अब वृद्धावस्था के चरण में जा रही है इसलिए इस बीमारी के ज्यादा होने की संभावना बढ़ रही है। अगर हम चाहते हैं कि इस बीमारी का इलाज और देखभाल प्रभावी ढंग से हो तो इसके लिए जरूरी है कि इस बीमारी का पता जल्दी चले और इसका निदान बहुत सटीक हो।” डॉ. एम.वी. पद्मा ने कहा, “ब्लड-बेस्ड बायोमार्कर को MRI और PET-CT इमेजिंग के साथ मिलाकर यह पैकेज समय पर बीमारी का पता लगाने, सही रेफरल और देखभाल की बेहतर योजना बनाने में मदद करता है। यह हमारे हेल्थकेयर सिस्टम की सक्रिय रूप से प्रतिक्रिया करने की क्षमता को मज़बूत करता है और परिवारों और समाज पर लंबे समय का बोझ कम करता है।”


अभी तक अल्ज़ाइमर के बायोमार्कर टेस्ट सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड सैंपल पर निर्भर थे। यह मरीजों के लिए ज्यादा मुश्किल प्रक्रिया थी। आज प्लाज़्मा-बेस्ड टेस्टिंग से हम एक सिंपल ब्लड टेस्ट के ज़रिए वही ज़रूरी जानकारी हासिल कर सकते हैं। इससे डायग्नोसिस आसान, सुरक्षित और मरीज़ों के लिए ज्यादा स्वीकार्य हो जाता है। महाजन इमेजिंग एंड लैब्स अब अपनी रेफरेंस लेबोरेटरी में pTAU/Aβ1-42 ब्लड बायोमार्कर टेस्ट करती है, जिससे तेज़ रिपोर्टिंग, इमेजिंग नतीजों के साथ बेहतर क्लीनिकल इंटीग्रेशन और मरीज़ों और डॉक्टरों दोनों के लिए बेहतर किफायती सुविधा मिलती है। महाजन इमेजिंग एंड लैब्स की लैब डायरेक्टर डॉ. शैली महाजन ने कहा, “ अभी तक अल्ज़ाइमर का पता क्लीनिकल लक्षणों के दिखने पर होता था। इससे अक्सर सही इलाज में देरी होती है। वहीं ब्लड-बेस्ड बायोमार्कर डॉक्टरों को अल्ज़ाइमर पैथोलॉजी की पहचान बहुत शुरुआती स्टेज में करने में मदद करते हैं। शुरुआती स्टेज में बीमारी का पता चलने से मरीज़ों और परिवारों के पास योजना बनाने, इलाज कराने और सोच-समझकर देखभाल के फैसले लेने का मौका होता है। इस टेस्टिंग और एनालिसिस को भारत में लाने से एक बड़ी रुकावट दूर होगी और भारतीय डायग्नोस्टिक्स को ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के अनुरूप बनाया जा सकेगा।”

विश्व स्तर पर अल्ज़ाइमर का डायग्नोसिस ज़्यादातर एमाइलॉयड PET इमेजिंग और सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (CSF) टेस्टिंग पर निर्भर करता है। भारत में अल्ज़ाइमर डायग्नोस्टिक्स के बारे में बात करते हुए महाजन इमेजिंग एंड लैब्स के फाउंडर और चेयरमैन ,पद्म श्री अवॉर्डी, डॉ. हर्ष महाजन ने कहा, "भारत में सीमित उपलब्धता और ज़्यादा खर्च, जोकि प्रति स्कैन दो लाख रुपये तक है, ने एमाइलॉयड PET टेस्ट आम लोगों की पहुँच से दूर कर दियाहै। इस कमी की वजह से कई डॉक्टर लक्षणों के नजर आने पर बीमारी पहचानते हैं। महाजन इमेजिंग एंड लैब्स के दृष्टिकोण की एक मुख्य खासियत लैब डायग्नोस्टिक्स को इमेजिंग के साथ जोड़ना है। ब्लड बायोमार्कर का 18F FDG के साथ कॉम्बिनेशन न केवल अल्ज़ाइमर के शुरुआती डायग्नोसिस में, बल्कि नए इलाज करा रहे मरीज़ों के फॉलो-अप में भी ट्रीटमेंट रिस्पॉन्स का आकलन करने में गेम-चेंजर साबित हो सकता है। इस सिम्पोज़ियम के निष्कर्ष न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ़ इंडिया को भेजे जाएंगे ताकि भारत में अल्ज़ाइमर के डायग्नोसिस और इलाज के लिए गाइडलाइंस बनाने में मदद मिल सके। इसका असर दुनिया के दूसरे हिस्सों में अल्ज़ाइमर की जल्दी पहचान करने के तरीकों पर भी पड़ सकता है।”

इस डेवलपमेंट पर टिप्पणी करते हुए महाजन इमेजिंग एंड लैब्स की न्यूक्लियर मेडिसिन और PET CT की डायरेक्टर डॉ. रितु वर्मा ने बताया, "ब्लड बायोमार्कर एक मज़बूत प्राइमरी डायग्नोस्टिक इंडिकेटर के तौर पर काम करता है, MRI ब्रेन इमेजिंग मेमोरी से जुड़े हिस्सों में स्ट्रक्चरल बदलावों का पता लगाने और कॉग्निटिव लक्षणों के दूसरे कारणों, जैसे स्ट्रोक, ट्यूमर या प्रेशर से जुड़ी गड़बड़ियों को दूर करने में अहम भूमिका निभाती है। PET इमेजिंग का उपयोग तब किया जाता है जब इससे मरीज के इलाज में स्पष्ट लाभ हो और बीमारी की सही पहचान करने में मदद मिले।”

इस डायग्नोस्टिक दृष्टिकोण के बारे में बताते हुए डॉ. वर्मा ने कहा, “इस इंटीग्रेटेड डायग्नोस्टिक विधि से मरीज़ में pTAU/Aβ1-42 ब्लड बायोमार्कर टेस्ट से शुरूआत होती हैं। टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आने या रिजल्ट संदिग्ध आने के बाद ज़रूरत पड़ने पर MRI ब्रेन और FDG PET CT किया जाता है। इसके बाद आगे के इलाज़ के लिए सभी टेस्ट रिपोर्ट को मिलाकर सही इलाज़ सुझाया जाता है। इलाज़ का यह फ्रेमवर्क खास तौर पर 50 साल से ज़्यादा उम्र के उन लोगों के लिए ज़रूरी होता है जिन्हें याददाश्त की समस्या हैं, हल्के कॉग्निटिव इंपेयरमेंट (MCI) के लक्षण हैं, या जिनके परिवार में अल्ज़ाइमर बीमारी किसी को रह चुकी हो, और ऐसे केसों में जहां एडवांस्ड इमेजिंग की सुविधा नहीं होती है वहां यह दृष्टिकोण फायदेमंद होता है।”

डायग्नोसिस में इस नई सुविधा के आने से महाजन इमेजिंग एंड लैब्स सटीक डायग्नोस्टिक्स में अपनी भूमिका को और ज्यादा मज़बूत किया है। इस नए डायग्नोस्टिक दृष्टिकोण से डॉक्टरों को इंटीग्रेटेड, साइंस-आधारित टूल मिलते हैं जो अल्ज़ाइमर का जल्दी, ज़्यादा स्पष्ट और ज़्यादा भरोसेमंद डायग्नोसिस करते हैं। डायग्नोसिस की यह सुविधा अल्जाइमर मरीजों के परिवारों के लिए बहुत राहत भरी ख़बर है।

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AI-संचालित ब्लड बायोमार्कर से अल्ज़ाइमर की जल्दी पहचान संभव

डॉ. सुमित सिंह ने कहा, “अल्ज़ाइमर बीमारी भारत में एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है क्योंकि हमारी युवा आबादी अब वृद्धावस्था के चरण में जा रही है इसलिए इस बीमारी के ज्यादा होने की संभावना बढ़ रही है। अगर हम चाहते हैं कि इस बीमारी का इलाज और देखभाल प्रभावी ढंग से हो तो इसके लिए जरूरी है कि इस बीमारी का पता जल्दी चले और इसका निदान बहुत सटीक हो।” डॉ. एम.वी. पद्मा ने कहा, “ब्लड-बेस्ड बायोमार्कर को MRI और PET-CT इमेजिंग के साथ मिलाकर यह पैकेज समय पर बीमारी का पता लगाने, सही रेफरल और देखभाल की बेहतर योजना बनाने में मदद करता है। यह हमारे हेल्थकेयर सिस्टम की सक्रिय रूप से प्रतिक्रिया करने की क्षमता को मज़बूत करता है और परिवारों और समाज पर लंबे समय का बोझ कम करता है।”


अभी तक अल्ज़ाइमर के बायोमार्कर टेस्ट सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड सैंपल पर निर्भर थे। यह मरीजों के लिए ज्यादा मुश्किल प्रक्रिया थी। आज प्लाज़्मा-बेस्ड टेस्टिंग से हम एक सिंपल ब्लड टेस्ट के ज़रिए वही ज़रूरी जानकारी हासिल कर सकते हैं। इससे डायग्नोसिस आसान, सुरक्षित और मरीज़ों के लिए ज्यादा स्वीकार्य हो जाता है। महाजन इमेजिंग एंड लैब्स अब अपनी रेफरेंस लेबोरेटरी में pTAU/Aβ1-42 ब्लड बायोमार्कर टेस्ट करती है, जिससे तेज़ रिपोर्टिंग, इमेजिंग नतीजों के साथ बेहतर क्लीनिकल इंटीग्रेशन और मरीज़ों और डॉक्टरों दोनों के लिए बेहतर किफायती सुविधा मिलती है। महाजन इमेजिंग एंड लैब्स की लैब डायरेक्टर डॉ. शैली महाजन ने कहा, “ अभी तक अल्ज़ाइमर का पता क्लीनिकल लक्षणों के दिखने पर होता था। इससे अक्सर सही इलाज में देरी होती है। वहीं ब्लड-बेस्ड बायोमार्कर डॉक्टरों को अल्ज़ाइमर पैथोलॉजी की पहचान बहुत शुरुआती स्टेज में करने में मदद करते हैं। शुरुआती स्टेज में बीमारी का पता चलने से मरीज़ों और परिवारों के पास योजना बनाने, इलाज कराने और सोच-समझकर देखभाल के फैसले लेने का मौका होता है। इस टेस्टिंग और एनालिसिस को भारत में लाने से एक बड़ी रुकावट दूर होगी और भारतीय डायग्नोस्टिक्स को ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के अनुरूप बनाया जा सकेगा।”

विश्व स्तर पर अल्ज़ाइमर का डायग्नोसिस ज़्यादातर एमाइलॉयड PET इमेजिंग और सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (CSF) टेस्टिंग पर निर्भर करता है। भारत में अल्ज़ाइमर डायग्नोस्टिक्स के बारे में बात करते हुए महाजन इमेजिंग एंड लैब्स के फाउंडर और चेयरमैन ,पद्म श्री अवॉर्डी, डॉ. हर्ष महाजन ने कहा, "भारत में सीमित उपलब्धता और ज़्यादा खर्च, जोकि प्रति स्कैन दो लाख रुपये तक है, ने एमाइलॉयड PET टेस्ट आम लोगों की पहुँच से दूर कर दियाहै। इस कमी की वजह से कई डॉक्टर लक्षणों के नजर आने पर बीमारी पहचानते हैं। महाजन इमेजिंग एंड लैब्स के दृष्टिकोण की एक मुख्य खासियत लैब डायग्नोस्टिक्स को इमेजिंग के साथ जोड़ना है। ब्लड बायोमार्कर का 18F FDG के साथ कॉम्बिनेशन न केवल अल्ज़ाइमर के शुरुआती डायग्नोसिस में, बल्कि नए इलाज करा रहे मरीज़ों के फॉलो-अप में भी ट्रीटमेंट रिस्पॉन्स का आकलन करने में गेम-चेंजर साबित हो सकता है। इस सिम्पोज़ियम के निष्कर्ष न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ़ इंडिया को भेजे जाएंगे ताकि भारत में अल्ज़ाइमर के डायग्नोसिस और इलाज के लिए गाइडलाइंस बनाने में मदद मिल सके। इसका असर दुनिया के दूसरे हिस्सों में अल्ज़ाइमर की जल्दी पहचान करने के तरीकों पर भी पड़ सकता है।”

इस डेवलपमेंट पर टिप्पणी करते हुए महाजन इमेजिंग एंड लैब्स की न्यूक्लियर मेडिसिन और PET CT की डायरेक्टर डॉ. रितु वर्मा ने बताया, "ब्लड बायोमार्कर एक मज़बूत प्राइमरी डायग्नोस्टिक इंडिकेटर के तौर पर काम करता है, MRI ब्रेन इमेजिंग मेमोरी से जुड़े हिस्सों में स्ट्रक्चरल बदलावों का पता लगाने और कॉग्निटिव लक्षणों के दूसरे कारणों, जैसे स्ट्रोक, ट्यूमर या प्रेशर से जुड़ी गड़बड़ियों को दूर करने में अहम भूमिका निभाती है। PET इमेजिंग का उपयोग तब किया जाता है जब इससे मरीज के इलाज में स्पष्ट लाभ हो और बीमारी की सही पहचान करने में मदद मिले।”

इस डायग्नोस्टिक दृष्टिकोण के बारे में बताते हुए डॉ. वर्मा ने कहा, “इस इंटीग्रेटेड डायग्नोस्टिक विधि से मरीज़ में pTAU/Aβ1-42 ब्लड बायोमार्कर टेस्ट से शुरूआत होती हैं। टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आने या रिजल्ट संदिग्ध आने के बाद ज़रूरत पड़ने पर MRI ब्रेन और FDG PET CT किया जाता है। इसके बाद आगे के इलाज़ के लिए सभी टेस्ट रिपोर्ट को मिलाकर सही इलाज़ सुझाया जाता है। इलाज़ का यह फ्रेमवर्क खास तौर पर 50 साल से ज़्यादा उम्र के उन लोगों के लिए ज़रूरी होता है जिन्हें याददाश्त की समस्या हैं, हल्के कॉग्निटिव इंपेयरमेंट (MCI) के लक्षण हैं, या जिनके परिवार में अल्ज़ाइमर बीमारी किसी को रह चुकी हो, और ऐसे केसों में जहां एडवांस्ड इमेजिंग की सुविधा नहीं होती है वहां यह दृष्टिकोण फायदेमंद होता है।”

डायग्नोसिस में इस नई सुविधा के आने से महाजन इमेजिंग एंड लैब्स सटीक डायग्नोस्टिक्स में अपनी भूमिका को और ज्यादा मज़बूत किया है। इस नए डायग्नोस्टिक दृष्टिकोण से डॉक्टरों को इंटीग्रेटेड, साइंस-आधारित टूल मिलते हैं जो अल्ज़ाइमर का जल्दी, ज़्यादा स्पष्ट और ज़्यादा भरोसेमंद डायग्नोसिस करते हैं। डायग्नोसिस की यह सुविधा अल्जाइमर मरीजों के परिवारों के लिए बहुत राहत भरी ख़बर है।

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स्कॉलर प्राची मिश्रा, इकोनॉमिक्स की प्रोफेसर और डायरेक्टर, आइज़ैक सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी, अशोका यूनिवर्सिटी,डॉ. लवीश भंडारी, प्रेसिडेंट और सीनियर फेलो, सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक, प्रोग्रेस नीलकंठ मिश्रा, चीफ इकोनॉमिस्ट, एक्सिस बैंक और हेड ऑफ ग्लोबल रिसर्च, एक्सिस कैपिटल पैनल में जाने-माने इकोनॉमिस्ट भी उपस्थित रहें, सुधांशु त्रिवेदी सांसद भाजपा ने कहा रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स एक बुनियादी सवाल पूछता है- कोई देश अपनी पावर का इस्तेमाल कितनी ज़िम्मेदारी से करता है? बिना ज़िम्मेदारी के खुशहाली टिकाऊ नहीं है।आरएनआई नैतिक शासन, मानवीय विकास और ग्लोबल मैनेजमेंट को बढ़ावा देना चाहता है।"

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राष्ट्रों की जवाबदेही मापेगा भारत का रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स

स्कॉलर प्राची मिश्रा, इकोनॉमिक्स की प्रोफेसर और डायरेक्टर, आइज़ैक सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी, अशोका यूनिवर्सिटी,डॉ. लवीश भंडारी, प्रेसिडेंट और सीनियर फेलो, सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक, प्रोग्रेस नीलकंठ मिश्रा, चीफ इकोनॉमिस्ट, एक्सिस बैंक और हेड ऑफ ग्लोबल रिसर्च, एक्सिस कैपिटल पैनल में जाने-माने इकोनॉमिस्ट भी उपस्थित रहें, सुधांशु त्रिवेदी सांसद भाजपा ने कहा रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स एक बुनियादी सवाल पूछता है- कोई देश अपनी पावर का इस्तेमाल कितनी ज़िम्मेदारी से करता है? बिना ज़िम्मेदारी के खुशहाली टिकाऊ नहीं है।आरएनआई नैतिक शासन, मानवीय विकास और ग्लोबल मैनेजमेंट को बढ़ावा देना चाहता है।"

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ओटीटी प्लेटफॉर्म को लेकर नियमन होना चाहिए : अनंत विजय

देवलापार ग्रामीण अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय मेश्राम ने प्रकाश डालते हुए कहा,“यह सहयोग हमारे अस्पताल की आपातकालीन तैयारियों को मजबूत करता है और एनएच-44 पर सड़क दुर्घटनाओं में घायल हुए मरीजों को सीधे तौर पर लाभ पहुँचाएगा। ग्रामीण स्तर पर आघात देखभाल सेवाओं को सुदृढ़ करने में सेवलाइफ फाउंडेशन और पार्ले बिस्कुट प्राइवेट लिमिटेड के प्रयासों की हम सराहना करते हैं।” एनएच-353डी और एनएच-44 पर यातायात बहुत अधिक रहता है और यहाँ गंभीर सड़क दुर्घटनाओं का खतरा अधिक रहता है। जनवरी-नवंबर 2025 के बीच, एनएच-44 पर सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में पिछले वर्ष की तुलना में 104% की वृद्धि दर्ज की गई, जो 2024 में 24 से बढ़कर 2025 में 49 हो गईं। वहीं, एनएच-353डी पर मौतों में पिछले वर्ष की तुलना में 10% की कमी दर्ज की गई, जो 2024 में 30 से घटकर 2025 में 27 रह गईं। कुल मिलाकर, नागपुर ग्रामीण क्षेत्र के उच्च मृत्यु दर वाले गलियारों में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में पिछले वर्ष की तुलना में 7.3% की वृद्धि दर्ज की गई, जो जनवरी-नवंबर 2024 के बीच 233 से बढ़कर इस वर्ष इसी अवधि में 250 हो गईं। ग्रामीण अस्पतालों को आवश्यक शल्य चिकित्सा और आपातकालीन देखभाल उपकरणों से लैस करके, इस पहल का उद्देश्य आघात देखभाल की तैयारियों में सुधार करना और सड़क दुर्घटनाओं के कारण होने वाली रोकी जा सकने वाली मौतों और गंभीर चोटों को कम करना है।

पारले बिस्कुट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) प्रयासों के तहत समर्थित, जीरो फैटैलिटी कॉरिडोर कार्यक्रम उन्नत दुर्घटना डेटा विश्लेषण, सामुदायिक सहभागिता, बेहतर आघात देखभाल और क्षमता निर्माण के माध्यम से उच्च जोखिम वाले राजमार्गों को सुरक्षित गलियारों में बदलने पर केंद्रित है।
उमरेड ग्रामीण अस्पताल और देओलापार ग्रामीण अस्पताल को महत्वपूर्ण शल्य चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने की पहल से सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए आपातकालीन देखभाल की तैयारी और समय पर उपचार सुनिश्चित होगा। जीरो फैटैलिटी कॉरिडोर कार्यक्रम के तहत यह पहल रोकी जा सकने वाली मौतों को कम करने और अधिक प्रभावी आपातकालीन देखभाल प्रणाली के निर्माण की दिशा में एक कदम है।

इस पहल के बारे में बात करते हुए, सेवलाइफ फाउंडेशन की कार्यक्रम प्रमुख डॉ. इलिया जाफर ने कहा, ”विशेषीकृत आघात देखभाल सुविधाओं की अनुपलब्धतादुर्घटनास्थलों के निकट स्थित अस्पताल सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों का एक प्रमुख कारण है। उमरेड ग्रामीण अस्पताल और देओलापार ग्रामीण अस्पताल की आपातकालीन चिकित्सा और आघात संबंधी देखभाल प्रदान करने की क्षमता को मजबूत करके, हम बेहतर उत्तरजीविता परिणामों को प्राप्त करने के प्रति आश्वस्त हैं।” सेवलाइफ फाउंडेशन भारत के राजमार्गों पर शून्य मौतों के लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से डेटा-आधारित साक्ष्यों का लाभ उठाते हुए सड़क सुरक्षा और आघात देखभाल के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

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सेवलाइफ–पार्ले की पहल से ग्रामीण आघात देखभाल को मजबूती

देवलापार ग्रामीण अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय मेश्राम ने प्रकाश डालते हुए कहा,“यह सहयोग हमारे अस्पताल की आपातकालीन तैयारियों को मजबूत करता है और एनएच-44 पर सड़क दुर्घटनाओं में घायल हुए मरीजों को सीधे तौर पर लाभ पहुँचाएगा। ग्रामीण स्तर पर आघात देखभाल सेवाओं को सुदृढ़ करने में सेवलाइफ फाउंडेशन और पार्ले बिस्कुट प्राइवेट लिमिटेड के प्रयासों की हम सराहना करते हैं।” एनएच-353डी और एनएच-44 पर यातायात बहुत अधिक रहता है और यहाँ गंभीर सड़क दुर्घटनाओं का खतरा अधिक रहता है। जनवरी-नवंबर 2025 के बीच, एनएच-44 पर सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में पिछले वर्ष की तुलना में 104% की वृद्धि दर्ज की गई, जो 2024 में 24 से बढ़कर 2025 में 49 हो गईं। वहीं, एनएच-353डी पर मौतों में पिछले वर्ष की तुलना में 10% की कमी दर्ज की गई, जो 2024 में 30 से घटकर 2025 में 27 रह गईं। कुल मिलाकर, नागपुर ग्रामीण क्षेत्र के उच्च मृत्यु दर वाले गलियारों में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में पिछले वर्ष की तुलना में 7.3% की वृद्धि दर्ज की गई, जो जनवरी-नवंबर 2024 के बीच 233 से बढ़कर इस वर्ष इसी अवधि में 250 हो गईं। ग्रामीण अस्पतालों को आवश्यक शल्य चिकित्सा और आपातकालीन देखभाल उपकरणों से लैस करके, इस पहल का उद्देश्य आघात देखभाल की तैयारियों में सुधार करना और सड़क दुर्घटनाओं के कारण होने वाली रोकी जा सकने वाली मौतों और गंभीर चोटों को कम करना है।

पारले बिस्कुट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) प्रयासों के तहत समर्थित, जीरो फैटैलिटी कॉरिडोर कार्यक्रम उन्नत दुर्घटना डेटा विश्लेषण, सामुदायिक सहभागिता, बेहतर आघात देखभाल और क्षमता निर्माण के माध्यम से उच्च जोखिम वाले राजमार्गों को सुरक्षित गलियारों में बदलने पर केंद्रित है।
उमरेड ग्रामीण अस्पताल और देओलापार ग्रामीण अस्पताल को महत्वपूर्ण शल्य चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने की पहल से सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए आपातकालीन देखभाल की तैयारी और समय पर उपचार सुनिश्चित होगा। जीरो फैटैलिटी कॉरिडोर कार्यक्रम के तहत यह पहल रोकी जा सकने वाली मौतों को कम करने और अधिक प्रभावी आपातकालीन देखभाल प्रणाली के निर्माण की दिशा में एक कदम है।

इस पहल के बारे में बात करते हुए, सेवलाइफ फाउंडेशन की कार्यक्रम प्रमुख डॉ. इलिया जाफर ने कहा, ”विशेषीकृत आघात देखभाल सुविधाओं की अनुपलब्धतादुर्घटनास्थलों के निकट स्थित अस्पताल सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों का एक प्रमुख कारण है। उमरेड ग्रामीण अस्पताल और देओलापार ग्रामीण अस्पताल की आपातकालीन चिकित्सा और आघात संबंधी देखभाल प्रदान करने की क्षमता को मजबूत करके, हम बेहतर उत्तरजीविता परिणामों को प्राप्त करने के प्रति आश्वस्त हैं।” सेवलाइफ फाउंडेशन भारत के राजमार्गों पर शून्य मौतों के लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से डेटा-आधारित साक्ष्यों का लाभ उठाते हुए सड़क सुरक्षा और आघात देखभाल के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि,"अभाविप अपनी विशिष्ट कार्यपद्धति के कारण आज विश्व का सबसे बड़ा विद्यार्थी संगठन बनकर उभरी है। इस बैठक में देशभर से आए विद्यार्थी परिषद के प्रमुख कार्यकर्ता गत तीन से चार माह में किए गए अभियानों एवं कार्यक्रमों की समीक्षा करेंगे तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा करेंगे। गोवा की यह भूमि केवल भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। बैठक में शिक्षा से जुड़े गंभीर विषयों पर भी गहन विमर्श हुआ। देशभर के शैक्षिक परिसरों में व्याप्त अनियमितताएँ, अनैतिक शुल्क वृद्धि, तथा छात्रावासों की स्थिति जैसे मुद्दों पर अभाविप ने अपनी स्पष्ट चिंता व्यक्त की है। इन्हीं विषयों के समाधान हेतु आगामी फरवरी माह से देशभर में ‘छात्रावास सर्वेक्षण अभियान’ चलाया जाएगा, जिसके माध्यम से जमीनी वास्तविकताओं को सामने लाकर ठोस हस्तक्षेप किया जाएगा।

राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर प्रारंभ किए गए ‘स्क्रीन टाइम से एक्टिविटी टाइम’ अभियान के माध्यम से युवाओं को डिजिटल लत से बाहर निकालकर खेल, समाजसेवा, रचनात्मक एवं शारीरिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यह अभियान युवाओं के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके अतिरिक्त, गुरु तेग बहादुर जी के 350वें बलिदान दिवस, महारानी अब्बक्का के 500वें राज्यारोहण वर्ष, भगवान बिरसा मुंडा जी की 150वीं जन्म जयंती, वंदे मातरम् के 150 वर्ष तथा संघ शताब्दी वर्ष जैसे ऐतिहासिक अवसरों के माध्यम से छात्रसमाज में राष्ट्रबोध, सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक आत्मगौरव को और अधिक सशक्त किया जाएगा।"

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अभाविप केंद्रीय कार्यसमिति बैठक: शिक्षा, संगठन और राष्ट्रबोध पर मंथन

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि,"अभाविप अपनी विशिष्ट कार्यपद्धति के कारण आज विश्व का सबसे बड़ा विद्यार्थी संगठन बनकर उभरी है। इस बैठक में देशभर से आए विद्यार्थी परिषद के प्रमुख कार्यकर्ता गत तीन से चार माह में किए गए अभियानों एवं कार्यक्रमों की समीक्षा करेंगे तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा करेंगे। गोवा की यह भूमि केवल भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। बैठक में शिक्षा से जुड़े गंभीर विषयों पर भी गहन विमर्श हुआ। देशभर के शैक्षिक परिसरों में व्याप्त अनियमितताएँ, अनैतिक शुल्क वृद्धि, तथा छात्रावासों की स्थिति जैसे मुद्दों पर अभाविप ने अपनी स्पष्ट चिंता व्यक्त की है। इन्हीं विषयों के समाधान हेतु आगामी फरवरी माह से देशभर में ‘छात्रावास सर्वेक्षण अभियान’ चलाया जाएगा, जिसके माध्यम से जमीनी वास्तविकताओं को सामने लाकर ठोस हस्तक्षेप किया जाएगा।

राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर प्रारंभ किए गए ‘स्क्रीन टाइम से एक्टिविटी टाइम’ अभियान के माध्यम से युवाओं को डिजिटल लत से बाहर निकालकर खेल, समाजसेवा, रचनात्मक एवं शारीरिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यह अभियान युवाओं के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके अतिरिक्त, गुरु तेग बहादुर जी के 350वें बलिदान दिवस, महारानी अब्बक्का के 500वें राज्यारोहण वर्ष, भगवान बिरसा मुंडा जी की 150वीं जन्म जयंती, वंदे मातरम् के 150 वर्ष तथा संघ शताब्दी वर्ष जैसे ऐतिहासिक अवसरों के माध्यम से छात्रसमाज में राष्ट्रबोध, सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक आत्मगौरव को और अधिक सशक्त किया जाएगा।"

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कुलवंत कौर के साथ बंसी लाल की रिपोर्ट। साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था विद्योतमा फाउंडेशन, नाशिक (पंजी.) द्वारा महेश्वरी भवन, आर्टीलरी सेंटर रोड पर अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मान समारोह एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में साहित्यकारों का सम्मान तथा द्वितीय सत्र में कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता दैनिक भास्कर के समूह संपादक प्रकाश दुबे ने की। मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नाशिक के निदेशक नीलाभ तिवारी रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में कर्मचारी राज्य बीमा निगम, नाशिक के संयुक्त निदेशक चंद्रशेखर आर. पाटिल और कर्नल राजेश सक्सेना उपस्थित रहे। संस्था के अध्यक्ष सुबोध कुमार मिश्रा ने विद्योतमा फाउंडेशन की स्थापना, उद्देश्यों और कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि संस्था की इकाइयाँ लखनऊ, कानपुर, इंदौर, नागपुर और दिल्ली में स्थापित हो चुकी हैं।

देशभर से चयनित विभिन्न विधाओं की 31 श्रेष्ठ कृतियों के रचनाकारों को अलग-अलग साहित्यिक सम्मानों से नवाजा गया। प्रमुख रूप से राजवीर सिंह सिकरवार, सरोजिनी तन्हा, ज्ञानचंद मर्मज्ञ, प्रमोद भार्गव, डॉ. जया आनंद, डॉ. जीनत अहसान कुरैशी, प्रो. मनोज कुमार कैन, विनोद नागर, डॉ. रुखसाना सिद्दीकी, मीना कौशल, संगीता, मंजू गुप्ता, पूर्णिमा ढिल्लन, सुनील दुबे, दीपमाला महेश्वरी, जितेंद्र कुमार तिवारी सहित अन्य साहित्यकार सम्मानित हुए।

इसके अलावा नेहा तुषार बोरसे को आईसीएसई बोर्ड की दसवीं परीक्षा में हिंदी में 98 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर विद्योतमा बालिका सम्मान, प्रसिद्ध धाविका संजीवनी जाधव को विद्योतमा खेल रत्न तथा कर्नल शिवनारायण मिश्र को विद्योतमा सेना रत्न सम्मान प्रदान किया गया। इस वर्ष कुल 78,600 रुपये की पुरस्कार राशि वितरित की गई।

कार्यक्रम का संचालन भरत सिंह, सी.पी. मिश्रा और अनीता दुबे ने किया। दूसरे सत्र में कवियों की रचनाओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। बड़ी संख्या में भारतीय सैनिकों की उपस्थिति ने समारोह की गरिमा बढ़ाई। अंत में बी.सी. मुनगली ने अतिथियों एवं सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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नासिक में अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मान समारोह, 31 साहित्यकार सम्मानित
कुलवंत कौर के साथ बंसी लाल की रिपोर्ट। साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था विद्योतमा फाउंडेशन, नाशिक (पंजी.) द्वारा महेश्वरी भवन, आर्टीलरी सेंटर रोड पर अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मान समारोह एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में साहित्यकारों का सम्मान तथा द्वितीय सत्र में कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता दैनिक भास्कर के समूह संपादक प्रकाश दुबे ने की। मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नाशिक के निदेशक नीलाभ तिवारी रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में कर्मचारी राज्य बीमा निगम, नाशिक के संयुक्त निदेशक चंद्रशेखर आर. पाटिल और कर्नल राजेश सक्सेना उपस्थित रहे। संस्था के अध्यक्ष सुबोध कुमार मिश्रा ने विद्योतमा फाउंडेशन की स्थापना, उद्देश्यों और कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि संस्था की इकाइयाँ लखनऊ, कानपुर, इंदौर, नागपुर और दिल्ली में स्थापित हो चुकी हैं।

देशभर से चयनित विभिन्न विधाओं की 31 श्रेष्ठ कृतियों के रचनाकारों को अलग-अलग साहित्यिक सम्मानों से नवाजा गया। प्रमुख रूप से राजवीर सिंह सिकरवार, सरोजिनी तन्हा, ज्ञानचंद मर्मज्ञ, प्रमोद भार्गव, डॉ. जया आनंद, डॉ. जीनत अहसान कुरैशी, प्रो. मनोज कुमार कैन, विनोद नागर, डॉ. रुखसाना सिद्दीकी, मीना कौशल, संगीता, मंजू गुप्ता, पूर्णिमा ढिल्लन, सुनील दुबे, दीपमाला महेश्वरी, जितेंद्र कुमार तिवारी सहित अन्य साहित्यकार सम्मानित हुए।

इसके अलावा नेहा तुषार बोरसे को आईसीएसई बोर्ड की दसवीं परीक्षा में हिंदी में 98 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर विद्योतमा बालिका सम्मान, प्रसिद्ध धाविका संजीवनी जाधव को विद्योतमा खेल रत्न तथा कर्नल शिवनारायण मिश्र को विद्योतमा सेना रत्न सम्मान प्रदान किया गया। इस वर्ष कुल 78,600 रुपये की पुरस्कार राशि वितरित की गई।

कार्यक्रम का संचालन भरत सिंह, सी.पी. मिश्रा और अनीता दुबे ने किया। दूसरे सत्र में कवियों की रचनाओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। बड़ी संख्या में भारतीय सैनिकों की उपस्थिति ने समारोह की गरिमा बढ़ाई। अंत में बी.सी. मुनगली ने अतिथियों एवं सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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कुलवंत कौर के साथ बंसी लाल की रिपोर्ट। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) ने अपनी इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईसीटी एकेडमी (E&ICT एकेडमी) के माध्यम से मसाई (Masai) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहयोग के तहत ऑनलाइन सर्टिफिकेशन प्रोग्राम शुरू किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कुशल और नौकरी के लिए तैयार प्रोफेशनल्स तैयार करना है। इस साझेदारी के अंतर्गत प्रोग्राम्स को E&ICT एकेडमी, आईआईटी रुड़की द्वारा डिज़ाइन और संचालित किया जाएगा। इनमें डेटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मशीन लर्निंग, एआई के साथ सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग जैसे विषय शामिल होंगे। इन कोर्सेज़ में थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल और इंडस्ट्री से जुड़े कौशल पर विशेष ज़ोर दिया जाएगा। 

जैसे-जैसे भारत की डिजिटल और एआई-आधारित अर्थव्यवस्था तेज़ी से आगे बढ़ रही है, कंपनियों को ऐसे प्रोफेशनल्स की ज़रूरत है जिन्हें प्रोग्रामिंग की अच्छी समझ हो, एआई और मशीन लर्निंग टूल्स का ज़िम्मेदारी से उपयोग करना आता हो और जो वास्तविक प्रोजेक्ट्स पर काम कर सकें। ये प्रोग्राम नए छात्रों, वर्किंग प्रोफेशनल्स और नॉन-टेक्निकल बैकग्राउंड से आने वाले लोगों के लिए भी उपयोगी होंगे। पढ़ाई लाइव क्लासेज़ और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग के ज़रिए कराई जाएगी। हर प्रोग्राम के अंत में एक कैपस्टोन प्रोजेक्ट होगा, जिससे प्रतिभागी अपनी स्किल्स का एक मजबूत पोर्टफोलियो तैयार कर सकेंगे और वास्तविक बिज़नेस समस्याओं के समाधान पर काम करने का अनुभव पाएंगे।

इस पहल पर बोलते हुए, प्रो. संजीव मनहास, चीफ इन्वेस्टिगेटर, E&ICT अकादमी, आईआईटी रुड़की ने कहा, “आज के डिजिटल दौर में ऐसे प्रोफेशनल्स की आवश्यकता है जो एआई, मशीन लर्निंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कौशल का उपयोग वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने में कर सकें। E&ICT अकादमी के माध्यम से आईआईटी रुड़की का उद्देश्य अकादमिक और उद्योग जगत के बीच सहयोग को मजबूत करना है, ताकि विद्यार्थी न केवल उभरती तकनीकों को समझें, बल्कि उनका जिम्मेदारीपूर्ण और व्यावहारिक उपयोग भी कर सकें। ये कार्यक्रम भारत की भविष्य की कार्यबल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्राथमिक तकनीकी क्षेत्रों में कौशल विकास को समर्थन देते हैं।”

प्रो. के. के. पंत, निदेशक, आईआईटी रुड़की ने कहा, “उच्च शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में अपनी राष्ट्रीय जिम्मेदारी के तहत आईआईटी रुड़की उभरती डिजिटल और एआई आधारित तकनीकों में क्षमता निर्माण पर विशेष ज़ोर देता है। E&ICT एकेडमी के माध्यम से संस्थान ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लगातार मजबूत कर रहा है, जो अकादमिक सख्‍ती को व्यावहारिक अनुभव के साथ जोड़ते हैं। इस प्रकार

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आईआईटी रुड़की और मसाई मिलकर तैयार करेंगे डिजिटल टैलेंट
कुलवंत कौर के साथ बंसी लाल की रिपोर्ट। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) ने अपनी इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईसीटी एकेडमी (E&ICT एकेडमी) के माध्यम से मसाई (Masai) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहयोग के तहत ऑनलाइन सर्टिफिकेशन प्रोग्राम शुरू किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कुशल और नौकरी के लिए तैयार प्रोफेशनल्स तैयार करना है। इस साझेदारी के अंतर्गत प्रोग्राम्स को E&ICT एकेडमी, आईआईटी रुड़की द्वारा डिज़ाइन और संचालित किया जाएगा। इनमें डेटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मशीन लर्निंग, एआई के साथ सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग जैसे विषय शामिल होंगे। इन कोर्सेज़ में थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल और इंडस्ट्री से जुड़े कौशल पर विशेष ज़ोर दिया जाएगा। 

जैसे-जैसे भारत की डिजिटल और एआई-आधारित अर्थव्यवस्था तेज़ी से आगे बढ़ रही है, कंपनियों को ऐसे प्रोफेशनल्स की ज़रूरत है जिन्हें प्रोग्रामिंग की अच्छी समझ हो, एआई और मशीन लर्निंग टूल्स का ज़िम्मेदारी से उपयोग करना आता हो और जो वास्तविक प्रोजेक्ट्स पर काम कर सकें। ये प्रोग्राम नए छात्रों, वर्किंग प्रोफेशनल्स और नॉन-टेक्निकल बैकग्राउंड से आने वाले लोगों के लिए भी उपयोगी होंगे। पढ़ाई लाइव क्लासेज़ और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग के ज़रिए कराई जाएगी। हर प्रोग्राम के अंत में एक कैपस्टोन प्रोजेक्ट होगा, जिससे प्रतिभागी अपनी स्किल्स का एक मजबूत पोर्टफोलियो तैयार कर सकेंगे और वास्तविक बिज़नेस समस्याओं के समाधान पर काम करने का अनुभव पाएंगे।

इस पहल पर बोलते हुए, प्रो. संजीव मनहास, चीफ इन्वेस्टिगेटर, E&ICT अकादमी, आईआईटी रुड़की ने कहा, “आज के डिजिटल दौर में ऐसे प्रोफेशनल्स की आवश्यकता है जो एआई, मशीन लर्निंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कौशल का उपयोग वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने में कर सकें। E&ICT अकादमी के माध्यम से आईआईटी रुड़की का उद्देश्य अकादमिक और उद्योग जगत के बीच सहयोग को मजबूत करना है, ताकि विद्यार्थी न केवल उभरती तकनीकों को समझें, बल्कि उनका जिम्मेदारीपूर्ण और व्यावहारिक उपयोग भी कर सकें। ये कार्यक्रम भारत की भविष्य की कार्यबल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्राथमिक तकनीकी क्षेत्रों में कौशल विकास को समर्थन देते हैं।”

प्रो. के. के. पंत, निदेशक, आईआईटी रुड़की ने कहा, “उच्च शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में अपनी राष्ट्रीय जिम्मेदारी के तहत आईआईटी रुड़की उभरती डिजिटल और एआई आधारित तकनीकों में क्षमता निर्माण पर विशेष ज़ोर देता है। E&ICT एकेडमी के माध्यम से संस्थान ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लगातार मजबूत कर रहा है, जो अकादमिक सख्‍ती को व्यावहारिक अनुभव के साथ जोड़ते हैं। इस प्रकार

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कुलवंत कौर के साथ बंसी लाल की रिपोर्ट। भारतीय जैन संगठन (BJS) दिल्ली एनसीआर द्वारा आयोजित तीन दिवसीय निःशुल्क प्लास्टिक सर्जरी शिविर का भव्य शुभारंभ मंगलवार को मुनि माया राम जैन अस्पताल, पीतमपुरा में हुआ। शिविर के पहले ही दिन 350 से अधिक मरीजों ने ओपीडी में पंजीकरण कराया, जबकि 100 से अधिक जरूरतमंद मरीजों की सर्जरी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जो अगले तीन दिनों में पूर्ण की जाएगी। कार्यक्रम का शुभारंभ नवकार मंत्र के सामूहिक उच्चारण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर अमेरिका से आए सुप्रसिद्ध प्लास्टिक सर्जन डॉ. लेहरी एवं उनकी विशेषज्ञ टीम भी उपस्थित रही।

उद्घाटन समारोह में BJS के संस्थापक शांति लाल मुथा, राष्ट्रीय अध्यक्ष नंद किशोर, मैनेजिंग डायरेक्टर कोमल जैन, BJS दिल्ली एनसीआर के अध्यक्ष डॉ. कमल जैन सेठिया सहित संगठन के अनेक राष्ट्रीय एवं प्रांतीय पदाधिकारी मौजूद रहे। स्वागत भाषण में डॉ. कमल जैन सेठिया ने बताया कि BJS के माध्यम से अब तक देशभर में तीन लाख से अधिक निःशुल्क प्लास्टिक सर्जरी कराई जा चुकी हैं और यह शिविर उसी सेवा परंपरा की निरंतरता है।

संस्थापक शांति लाल मुथा ने कहा कि BJS के सभी कार्यक्रम राष्ट्र को समर्पित हैं और संगठन सेवा, करुणा एवं मानवता के मूल्यों के साथ समाज को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नंद किशोर ने BJS दिल्ली के सेवा कार्यों की सराहना की। मैनेजिंग डायरेक्टर कोमल जैन ने कहा कि संगठन भविष्य में स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में अपने प्रयासों को और विस्तार देगा।

इस अवसर पर BJS ईस्ट दिल्ली चैप्टर एवं BJS दिल्ली फेमिना विंग का शपथ ग्रहण समारोह भी आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 500 से अधिक BJS सदस्य, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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BJS : निःशुल्क प्लास्टिक सर्जरी शिविर का शुभारंभ, 350 से अधिक मरीजों की ओपीडी
कुलवंत कौर के साथ बंसी लाल की रिपोर्ट। भारतीय जैन संगठन (BJS) दिल्ली एनसीआर द्वारा आयोजित तीन दिवसीय निःशुल्क प्लास्टिक सर्जरी शिविर का भव्य शुभारंभ मंगलवार को मुनि माया राम जैन अस्पताल, पीतमपुरा में हुआ। शिविर के पहले ही दिन 350 से अधिक मरीजों ने ओपीडी में पंजीकरण कराया, जबकि 100 से अधिक जरूरतमंद मरीजों की सर्जरी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जो अगले तीन दिनों में पूर्ण की जाएगी। कार्यक्रम का शुभारंभ नवकार मंत्र के सामूहिक उच्चारण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर अमेरिका से आए सुप्रसिद्ध प्लास्टिक सर्जन डॉ. लेहरी एवं उनकी विशेषज्ञ टीम भी उपस्थित रही।

उद्घाटन समारोह में BJS के संस्थापक शांति लाल मुथा, राष्ट्रीय अध्यक्ष नंद किशोर, मैनेजिंग डायरेक्टर कोमल जैन, BJS दिल्ली एनसीआर के अध्यक्ष डॉ. कमल जैन सेठिया सहित संगठन के अनेक राष्ट्रीय एवं प्रांतीय पदाधिकारी मौजूद रहे। स्वागत भाषण में डॉ. कमल जैन सेठिया ने बताया कि BJS के माध्यम से अब तक देशभर में तीन लाख से अधिक निःशुल्क प्लास्टिक सर्जरी कराई जा चुकी हैं और यह शिविर उसी सेवा परंपरा की निरंतरता है।

संस्थापक शांति लाल मुथा ने कहा कि BJS के सभी कार्यक्रम राष्ट्र को समर्पित हैं और संगठन सेवा, करुणा एवं मानवता के मूल्यों के साथ समाज को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नंद किशोर ने BJS दिल्ली के सेवा कार्यों की सराहना की। मैनेजिंग डायरेक्टर कोमल जैन ने कहा कि संगठन भविष्य में स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में अपने प्रयासों को और विस्तार देगा।

इस अवसर पर BJS ईस्ट दिल्ली चैप्टर एवं BJS दिल्ली फेमिना विंग का शपथ ग्रहण समारोह भी आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 500 से अधिक BJS सदस्य, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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एशिया पेसिफिक प्रीडेटर लीग 2026 का नई दिल्‍ली में जोरदार फिनाले के साथ समापन
रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स का होगा शुभारंभ, 154 देशों का करेगा मूल्यांकन

उन्होंने आरोप लगाया कि यह भगवंत मान ही हैं जो बार-बार अनादर के काम कर रहे हैं। सरना ने मुख्यमंत्री द्वारा बेअदबी के एक पैटर्न का जिक्र किया, जिसमें शराब से संबंधित एक वीडियो प्रसारित होना,जो सिख प्रतीकों का मजाक उड़ाता है, संत जरनैल सिंह भिंडरांवाले और सिख गुरुओं के प्रति अनादर दिखाना, गुरु के गोलक के खातों पर सवाल उठाना, जबकि अपनी ही सरकार के तहत करोड़ों रुपये की लूट पर चुप रहना, श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता को चुनौती देना, और कार्यवाहक जत्थेदार, ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज्ज के खिलाफ अपमानजनक और नीच भाषा का इस्तेमाल करना शामिल है।

उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा बुलाए जाने के बाद लाइव टेलीकास्ट की मांगों सहित शर्तें रखने के लिए भी मान की आलोचना की, इसे अहंकार का खुला प्रदर्शन बताया। सरना ने कहा कि यह रवैया आमआदमी पार्टी की सिख धर्म के धर्म के प्रति व्यापक दुश्मनी को दिखाता है, उन्होंने दिल्ली विधानसभा के अंदर मान की पूर्व दिल्ली समकक्ष आतिशी द्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब के खिलाफ पहले की गई अपमानजनक टिप्पणियों का हवाला दिया। उन्होंने कहा, "यह वही शहरी नक्सली मानसिकता है जो धर्म का मज़ाक उड़ाती है और पवित्र संस्थानों पर हमला करती है।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पिछले चार सालों में बेअदबी की 100 से ज़्यादा घटनाएं हुई हैं, जिसमें सुल्तानपुर लोधी के एक गुरुद्वारे के अंदर पुलिस द्वारा फायरिंग, आपके विधायक पर बेअदबी के आरोप, पूर्व मुख्यमंत्री पर आरोप, और श्री अखंड पाठ साहिब में रुकावट शामिल है, लेकिन सरकार ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। सरना ने भाई ईश्वर सिंह रिपोर्ट की ओर भी इशारा किया जिसमें बाइंडर जसप्रीत सिंह को मुख्य आरोपी बताया गया था, और आरोप लगाया कि कार्रवाई करने के बजाय, आप सरकार ने उसे कई राजनीतिक पदों से नवाज़ा है।

आगे सवाल उठाते हुए, सरना ने पूछा कि प्रमुख धार्मिक नेता और संगठन सिख संस्थानों पर व्यवस्थित हमलों के सामने क्यों चुप हैं। उन्होंने कहा कि मान सरकार की कार्रवाई के पीछे असली मकसद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के कामकाज में दखल देना और सरदार सुखबीर सिंह बादल को झूठे मामलों में फंसाना है। सरना ने कहा, "मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी को समझना चाहिए कि सरदार बादल एक नाकाम सरकार की गीदड़ जैसी धमकियों से डरने वाले नहीं हैं," उन्होंने कहा कि ये कार्रवाई शिरोमणि अकाली दल के फिर से मज़बूत होने से घबराई हुई सरकार की घबराहट को दिखाती है। उन्होंने कहा, "पंजाब के लोगों के समर्थन और आशीर्वाद से, हम इस सरकार का सामना करेंगे और इसका असली चेहरा बेनकाब करेंगे।"

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सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ मान की साजिश के पीछे अर्बन नक्सल का हाथ: सरना

उन्होंने आरोप लगाया कि यह भगवंत मान ही हैं जो बार-बार अनादर के काम कर रहे हैं। सरना ने मुख्यमंत्री द्वारा बेअदबी के एक पैटर्न का जिक्र किया, जिसमें शराब से संबंधित एक वीडियो प्रसारित होना,जो सिख प्रतीकों का मजाक उड़ाता है, संत जरनैल सिंह भिंडरांवाले और सिख गुरुओं के प्रति अनादर दिखाना, गुरु के गोलक के खातों पर सवाल उठाना, जबकि अपनी ही सरकार के तहत करोड़ों रुपये की लूट पर चुप रहना, श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता को चुनौती देना, और कार्यवाहक जत्थेदार, ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज्ज के खिलाफ अपमानजनक और नीच भाषा का इस्तेमाल करना शामिल है।

उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा बुलाए जाने के बाद लाइव टेलीकास्ट की मांगों सहित शर्तें रखने के लिए भी मान की आलोचना की, इसे अहंकार का खुला प्रदर्शन बताया। सरना ने कहा कि यह रवैया आमआदमी पार्टी की सिख धर्म के धर्म के प्रति व्यापक दुश्मनी को दिखाता है, उन्होंने दिल्ली विधानसभा के अंदर मान की पूर्व दिल्ली समकक्ष आतिशी द्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब के खिलाफ पहले की गई अपमानजनक टिप्पणियों का हवाला दिया। उन्होंने कहा, "यह वही शहरी नक्सली मानसिकता है जो धर्म का मज़ाक उड़ाती है और पवित्र संस्थानों पर हमला करती है।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पिछले चार सालों में बेअदबी की 100 से ज़्यादा घटनाएं हुई हैं, जिसमें सुल्तानपुर लोधी के एक गुरुद्वारे के अंदर पुलिस द्वारा फायरिंग, आपके विधायक पर बेअदबी के आरोप, पूर्व मुख्यमंत्री पर आरोप, और श्री अखंड पाठ साहिब में रुकावट शामिल है, लेकिन सरकार ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। सरना ने भाई ईश्वर सिंह रिपोर्ट की ओर भी इशारा किया जिसमें बाइंडर जसप्रीत सिंह को मुख्य आरोपी बताया गया था, और आरोप लगाया कि कार्रवाई करने के बजाय, आप सरकार ने उसे कई राजनीतिक पदों से नवाज़ा है।

आगे सवाल उठाते हुए, सरना ने पूछा कि प्रमुख धार्मिक नेता और संगठन सिख संस्थानों पर व्यवस्थित हमलों के सामने क्यों चुप हैं। उन्होंने कहा कि मान सरकार की कार्रवाई के पीछे असली मकसद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के कामकाज में दखल देना और सरदार सुखबीर सिंह बादल को झूठे मामलों में फंसाना है। सरना ने कहा, "मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी को समझना चाहिए कि सरदार बादल एक नाकाम सरकार की गीदड़ जैसी धमकियों से डरने वाले नहीं हैं," उन्होंने कहा कि ये कार्रवाई शिरोमणि अकाली दल के फिर से मज़बूत होने से घबराई हुई सरकार की घबराहट को दिखाती है। उन्होंने कहा, "पंजाब के लोगों के समर्थन और आशीर्वाद से, हम इस सरकार का सामना करेंगे और इसका असली चेहरा बेनकाब करेंगे।"

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दिल्ली में भव्य सनातन समागम, 26 कन्याओं का होगा सामूहिक सनातनी विवाह
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सत्या साची में साची की भूमिका निभा रहीं भाग्यश्री मिश्रा ने कहा, "मकर संक्रांति मुझे इसलिए खास लगती है, क्योंकि यह नई शुरुआत और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। बचपन की वो यादें आज भी मन को खुश कर देती हैं, यानि रंगीन पतंगें उड़ाना और फिर कटी हुई पतंगों के पीछे पूरे जोश के साथ दौड़ना। वह मस्ती अब सोचने पर और भी खास लगती है। आज हम सब बड़े हो गए हैं और काम की वजह से समय कम मिल पाता है, लेकिन यदि इस साल मौका मिला तो हम 'सत्या साची' के सेट पर पतंग जरूर उड़ाएँगे और साथ में कुछ खुशनुमा पल बिताएँगे।"

प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी में घेवर का किरदार निभा रहीं गौरी शेलगांवकर ने अपने दिल की बात साझा करते हुए कहा, "मेरे लिए मकर संक्रांति हमेशा सादगी भरी खुशियों का त्यौहार रही है, जिसमें परिवार के साथ खाना, हँसी-मजाक करना और लोगों को बाँटकर खाने की कला को सीखना। मुझे याद है, बड़े हमें तिल-गुड़ देते हुए कहते थे कि हमेशा मीठा बोलो, सकारात्मक सोचो और खुश रहो। इस साल मैं सादगी से त्यौहार मनाऊँगी, अपने करीबियों को फोन करुँगी और उनके प्यार व सपोर्ट के लिए उन्हें धन्यवाद कहूँगी। साथ ही, मेरी माँ के हाथों से बने तिल के लड्डू 'प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी' के सेट पर ले जाकर सबके साथ बाटूँगी। बचपन में अपने पापा के साथ पतंग उड़ाने की यादें आज भी दिल को छू जाती हैं, वह पूरा दिन हमारे साथ पतंग उड़ाते थे।"

देखिए दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी शाम 7:30 बजे, सत्या साची शाम 8:00 बजे, प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी- रात 9:00 बजे, सिर्फ सन नियो पर।

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सन नियो कलाकारों ने साझा की मकर संक्रांति से जुड़ी खुशियाँ

सत्या साची में साची की भूमिका निभा रहीं भाग्यश्री मिश्रा ने कहा, "मकर संक्रांति मुझे इसलिए खास लगती है, क्योंकि यह नई शुरुआत और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। बचपन की वो यादें आज भी मन को खुश कर देती हैं, यानि रंगीन पतंगें उड़ाना और फिर कटी हुई पतंगों के पीछे पूरे जोश के साथ दौड़ना। वह मस्ती अब सोचने पर और भी खास लगती है। आज हम सब बड़े हो गए हैं और काम की वजह से समय कम मिल पाता है, लेकिन यदि इस साल मौका मिला तो हम 'सत्या साची' के सेट पर पतंग जरूर उड़ाएँगे और साथ में कुछ खुशनुमा पल बिताएँगे।"

प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी में घेवर का किरदार निभा रहीं गौरी शेलगांवकर ने अपने दिल की बात साझा करते हुए कहा, "मेरे लिए मकर संक्रांति हमेशा सादगी भरी खुशियों का त्यौहार रही है, जिसमें परिवार के साथ खाना, हँसी-मजाक करना और लोगों को बाँटकर खाने की कला को सीखना। मुझे याद है, बड़े हमें तिल-गुड़ देते हुए कहते थे कि हमेशा मीठा बोलो, सकारात्मक सोचो और खुश रहो। इस साल मैं सादगी से त्यौहार मनाऊँगी, अपने करीबियों को फोन करुँगी और उनके प्यार व सपोर्ट के लिए उन्हें धन्यवाद कहूँगी। साथ ही, मेरी माँ के हाथों से बने तिल के लड्डू 'प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी' के सेट पर ले जाकर सबके साथ बाटूँगी। बचपन में अपने पापा के साथ पतंग उड़ाने की यादें आज भी दिल को छू जाती हैं, वह पूरा दिन हमारे साथ पतंग उड़ाते थे।"

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श्रील प्रभुपाद पर केंदित प्रेरणादायी पुस्तक का उपराष्ट्रपति भवन में विमोचन

यह भव्य समर्पणोत्सव, पर्याय श्री पुत्तिगे श्रीकृष्ण मठ, उडुपी के पीठाधीश परम पूज्य श्री श्री सुगुणेन्द्र तीर्थ स्वामीजी एवं उनके शिष्य श्रीपद परम पूज्य श्री श्री सुष्रीन्द्र तीर्थ स्वामीजी की पावन उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। इस सुवसर पर हरिद्वार के निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर परम पूज्य कैलाशानंद गिरी महाराज विशेष रूप से इस अवसर पर उडुपी पधारे। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री मधु पंडित दास, चेयरमैन एवं मेंटर, ग्लोबल हरे कृष्ण मूवमेंट, चेयरमैन अक्षय पात्र फाउंडेशन तथा अध्यक्ष, इस्कॉन बेंगलुरु ने की। इस अवसर पर श्री चंचलापति दास, वाइस चेयरमैन एवं सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, इस्कॉन बेंगलुरु समूह के वरिष्ठ प्रचारक, तथा देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेला 2025 के दौरान इस्कॉन के संस्थापक-आचार्य परम पूज्य ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी श्रील प्रभुपाद को ‘विश्वगुरु’ की प्रतिष्ठित उपाधि से सम्मानित किया था। परम पूज्य कैलाशानंद गिरी महाराज एवं अन्य अखाड़ों के महामंडलेश्वरों ने सनातन धर्म और मानवता के लिए श्रील प्रभुपाद के अतुलनीय योगदान को सम्मानित किया।

श्रीकृष्ण समर्पणोत्सव का आयोजन परम पूज्य श्री श्री सुगुणेन्द्र तीर्थ स्वामीजी के मार्गदर्शन में हुआ, जिन्होंने पिछले वर्ष ऐतिहासिक रूप से चौथी बार पर्याय पीठ का आरोहण किया। उनके पर्याय काल में गीता उत्सव, सुवर्ण रथ (स्वर्ण रथ यात्रा) जैसी अनेक आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पहलों को प्रारंभ किया गया है, जो पंच प्रधान योजनाओं का हिस्सा हैं। वे इस्कॉन बेंगलुरु और अक्षय पात्र के दीर्घकालिक शुभचिंतक रहे हैं तथा समाज सेवा के उनके कार्यों का निरंतर समर्थन करते रहे हैं।
श्रील प्रभुपाद श्री ब्रह्मा-माध्व–गौड़ीय संप्रदाय के एक सशक्त वैष्णव आचार्य थे। उन्होंने भारत की शाश्वत आध्यात्मिक ज्ञान परंपरा, संस्कृति और जीवनशैली को विश्वभर में पहुँचाया। भगवान श्रीकृष्ण के संदेश के प्रचार में उनके अग्रणी प्रयासों ने विश्वभर में लाखों लोगों के जीवन को रूपांतरित किया। श्री माध्वाचार्य द्वारा प्रतिष्ठित एवं पूजित उडुपी श्रीकृष्ण को ‘विश्वगुरु’ उपाधि समर्पित करना, समस्त वैष्णवों एवं सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण रहा।

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समारोह का शुभारंभ गीता पारायण, हरिनाम संकीर्तन एवं दासरा पदगलु (कन्नड़ वैष्णव संत-कवियों द्वारा रचित भक्ति गीतों) से हुआ। श्रील प्रभुपाद द्वारा यह सम्मान उडुपी श्रीकृष्ण को अर्पित करते हुए दर्शाने वाली प्रतीकात्मक छवि से युक्त एक सुंदर पट्टिका का अनावरण किया गया। भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा श्रील प्रभुपाद के योगदान की सराहना करते हुए दिए गए संदेशों एवं महाकुंभ कार्यक्रम की झलकियों का वीडियो भी प्रदर्शित किया गया। श्रील प्रभुपाद को परंपरागत सम्मान स्वरूप देवता के पवित्र अलंकरण एवं भव्य रत्नजटित मुकुट से विभूषित किया गया। श्री माध्वाचार्य एवं श्रील प्रभुपाद पर पुष्पवृष्टि तथा गुरुवाष्टकम (गुरु की स्तुति में अष्ट श्लोकों का संस्कृत स्तोत्र) का सामूहिक पाठ इस अवसर का प्रमुख आकर्षण रहा।

इस अवसर पर डॉ. कब्बिनाले वसंत भारद्वाज, कर्नाटक तुलु साहित्य अकादमी पुरस्कार एवं कर्नाटक राज्योत्सव पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध विद्वान द्वारा रचित ‘श्रील प्रभुपाद चरितामृतम् : कन्नड़ महाकाव्य’ का विमोचन किया गया। यह अपने प्रकार का पहला कन्नड़ महाकाव्य है, जो अष्टादश पदी छंद में रचित है और प्राचीन व आधुनिक कन्नड़ का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। विद्वानों एवं बुद्धिजीवियों ने इस ग्रंथ की सराहना की है। उडुपी मठ की रंगीन एवं आध्यात्मिक पत्रिका ‘श्री तुलसी’ का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम का समापन गुरु पूजा, पुत्तिगे मठ के दीवानों के सम्मान तथा सभी भक्तों को श्रीकृष्ण प्रसाद वितरण के साथ हुआ।

यह उल्लेखनीय है कि इस्कॉन बेंगलुरु द्वारा गीता जयंती माह में एक लाख भगवद्गीता वितरण (लक्ष गीता दान) किया जा रहा है, जो श्रील प्रभुपाद की भगवान कृष्ण के संदेश को सर्वत्र पहुँचाने की अभिलाषा के अनुरूप है। ये प्रयास परम पूज्य श्री सुगुणेन्द्र तीर्थ स्वामीजी की उस संकल्पना से भी मेल खाते हैं, जिसके अंतर्गत उनके ऐतिहासिक चौथे पर्याय को ‘विश्व गीता पर्याय’ घोषित किया गया है - उद्देश्य है हर घर में गीता और हर हृदय में गीता।

वक्तव्यों के अंश

परम पूज्य श्री श्री सुगुणेन्द्र तीर्थ स्वामीजी ने कहा, “जब भगवान के भक्तों की महिमा होती है, तब भगवान श्रीकृष्ण अत्यंत प्रसन्न होते हैं। मैं मानता हूँ कि स्वयं श्रीकृष्ण ने अपना ‘विश्वगुरु’ का शीर्षक अपने प्रिय भक्त श्रील प्रभुपाद को प्रदान किया। आज का दिन अत्यंत पावन है, जब श्रील प्रभुपाद इस सम्मान को उडुपी श्रीकृष्ण को समर्पित करने यहाँ आए हैं। कलियुग में भगवान ने अपने सशक्त प्रतिनिधि श्रील प्रभुपाद को संपूर्ण विश्व में अपना संदेश फैलाने के लिए भेजा। मुझे हर्ष है कि मेरे पर्याय काल में श्रील प्रभुपाद को यह सम्मान प्राप्त हुआ। परम पूज्य कैलाशानंद गिरी महाराज की उपस्थिति से उडुपी हरिद्वार के समान हरिहर क्षेत्र बन गया है। उत्तर भारत देवभूमि है और दक्षिण भारत आचार्य भूमि-भारतवर्ष में सदैव एकता और शांति बनी रहे।”

परम पूज्य कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा, “उडुपी, भगवान श्रीकृष्ण और श्री माध्वाचार्य की पवित्र भूमि है। मुझे भगवान ने यह सौभाग्य दिया कि मैं उनके प्रिय सेवक श्रील प्रभुपाद को ‘विश्वगुरु’ सम्मान प्रदान कर सका। यह सम्मान बहुत पहले मिलना चाहिए था। यह अवसर अत्यंत दुर्लभ है और समस्त विश्व के भक्त इससे हर्षित हैं।”

श्री मधु पंडित दास ने कहा, “मैं परम पूज्य श्री सुगुणेन्द्र तीर्थ स्वामीजी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ कि उन्होंने इस ऐतिहासिक स्थल पर श्रीकृष्ण समर्पणोत्सव का आयोजन किया। श्रील प्रभुपाद हमारे सभी सेवा कार्यों की प्रेरणा हैं। गीता जयंती के इस पावन माह में यह आयोजन अत्यंत शुभ है। मैं डॉ. कब्बिनाले वसंत भारद्वाज को उनके अद्वितीय साहित्यिक योगदान के लिए बधाई देता हूँ।”

विश्वगुरु श्रील प्रभुपाद के बारे में

श्रील प्रभुपाद का जन्म 1896 में कोलकाता में एक भक्त परिवार में हुआ। उन्होंने आदर्श गृहस्थ जीवन जिया और बाद में संन्यास आश्रम स्वीकार कर श्री ब्रह्मा–माध्व–गौड़ीय वैष्णव परंपरा के 32वें आचार्य बने। 69 वर्ष की आयु में उन्होंने पश्चिम की यात्रा कर भारत की आध्यात्मिक संस्कृति को विश्वभर में फैलाया। उन्होंने भगवद्गीता एवं श्रीमद्भागवत पर प्रामाणिक भाष्य लिखे, 100 से अधिक इस्कॉन मंदिर स्थापित किए, हरिनाम संकीर्तन एवं अन्नदान परंपरा को विश्वव्यापी बनाया और 1977 में अपने दिव्य प्रस्थान तक संपूर्ण मानवता पर भगवान कृष्ण की कृपा बरसाई।

आयोजन स्थल का महत्व

उडुपी कर्नाटक के तटीय क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन नगर है, जिसकी सांस्कृतिक विरासत हजारों वर्षों पुरानी है। इस पवित्र भूमि की महानता प्राचीन ग्रंथों जैसे पुराणों में भी देखने को मिलती है। उडुपी का “कृष्ण मठ” कृष्ण भक्ति का विश्व प्रसिद्ध केंद्र है, जो पूरी दुनिया से लाखों भक्तों को आकर्षित करता है। यह कृष्ण मठ लगभग 800 वर्ष पहले महान संत श्री माध्वाचार्य द्वारा स्थापित किया गया था। वे स्वयं श्री मुख्यप्राण के अवतार माने जाते हैं। श्री माध्वाचार्य ने “तत्त्ववाद” का दर्शन फैलाया, जो बाद में द्वैत दर्शन के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

कृष्ण मठ में, उन्होंने भगवान कृष्ण की 5000 वर्ष पुरानी मूर्ति की स्थापना की, जो द्वारका, गुजरात के तट से नाव द्वारा उडुपी के मलपे तक लाई गई थी। यह संभवतः इस बात का प्रमाण है कि भगवान कृष्ण ने अपने परम भक्त श्री माध्वाचार्य को अत्यधिक अनुग्रह प्रदान किया। श्री माध्वाचार्य ने कृष्ण मठ में धार्मिक कर्मकांडों का संचालन और समर्थन करने के लिए आठ मठों की स्थापना की। श्री पुथिगे मठ उन्हीं में से एक है।

श्री माध्वाचार्य के सबसे प्रमुख शिष्य श्री उपेन्द्र तीर्थ थे, जिनका नाम “श्री समुद्र्ध्व विजय” (श्री माध्वाचार्य का जीवनी ग्रंथ) में उल्लेखित है। उनके माध्यम से जो मठ हमारे समय तक आया है, उसे श्री पुथिगे मठ कहा जाता है। वर्तमान में मठ के प्रमुख श्री सुगुणेंद्र तीर्थ स्वामीजी हैं, जिन्हें केवल बारह वर्ष की आयु में श्री मठ का 30वाँ पीठाधीश्वर नियुक्त किया गया। स्वामीजी ने श्री विद्यामण्य तीर्थ स्वामीजी के अधीन अध्ययन किया, जो आधुनिक समय के महान वेदान्त विद्वानों में से एक माने जाते हैं।

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‘विश्वगुरु’ सम्मान का श्रीकृष्ण को समर्पण: विनम्रता की पराकाष्ठा

यह भव्य समर्पणोत्सव, पर्याय श्री पुत्तिगे श्रीकृष्ण मठ, उडुपी के पीठाधीश परम पूज्य श्री श्री सुगुणेन्द्र तीर्थ स्वामीजी एवं उनके शिष्य श्रीपद परम पूज्य श्री श्री सुष्रीन्द्र तीर्थ स्वामीजी की पावन उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। इस सुवसर पर हरिद्वार के निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर परम पूज्य कैलाशानंद गिरी महाराज विशेष रूप से इस अवसर पर उडुपी पधारे। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री मधु पंडित दास, चेयरमैन एवं मेंटर, ग्लोबल हरे कृष्ण मूवमेंट, चेयरमैन अक्षय पात्र फाउंडेशन तथा अध्यक्ष, इस्कॉन बेंगलुरु ने की। इस अवसर पर श्री चंचलापति दास, वाइस चेयरमैन एवं सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, इस्कॉन बेंगलुरु समूह के वरिष्ठ प्रचारक, तथा देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेला 2025 के दौरान इस्कॉन के संस्थापक-आचार्य परम पूज्य ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी श्रील प्रभुपाद को ‘विश्वगुरु’ की प्रतिष्ठित उपाधि से सम्मानित किया था। परम पूज्य कैलाशानंद गिरी महाराज एवं अन्य अखाड़ों के महामंडलेश्वरों ने सनातन धर्म और मानवता के लिए श्रील प्रभुपाद के अतुलनीय योगदान को सम्मानित किया।

श्रीकृष्ण समर्पणोत्सव का आयोजन परम पूज्य श्री श्री सुगुणेन्द्र तीर्थ स्वामीजी के मार्गदर्शन में हुआ, जिन्होंने पिछले वर्ष ऐतिहासिक रूप से चौथी बार पर्याय पीठ का आरोहण किया। उनके पर्याय काल में गीता उत्सव, सुवर्ण रथ (स्वर्ण रथ यात्रा) जैसी अनेक आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पहलों को प्रारंभ किया गया है, जो पंच प्रधान योजनाओं का हिस्सा हैं। वे इस्कॉन बेंगलुरु और अक्षय पात्र के दीर्घकालिक शुभचिंतक रहे हैं तथा समाज सेवा के उनके कार्यों का निरंतर समर्थन करते रहे हैं।
श्रील प्रभुपाद श्री ब्रह्मा-माध्व–गौड़ीय संप्रदाय के एक सशक्त वैष्णव आचार्य थे। उन्होंने भारत की शाश्वत आध्यात्मिक ज्ञान परंपरा, संस्कृति और जीवनशैली को विश्वभर में पहुँचाया। भगवान श्रीकृष्ण के संदेश के प्रचार में उनके अग्रणी प्रयासों ने विश्वभर में लाखों लोगों के जीवन को रूपांतरित किया। श्री माध्वाचार्य द्वारा प्रतिष्ठित एवं पूजित उडुपी श्रीकृष्ण को ‘विश्वगुरु’ उपाधि समर्पित करना, समस्त वैष्णवों एवं सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण रहा।

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समारोह का शुभारंभ गीता पारायण, हरिनाम संकीर्तन एवं दासरा पदगलु (कन्नड़ वैष्णव संत-कवियों द्वारा रचित भक्ति गीतों) से हुआ। श्रील प्रभुपाद द्वारा यह सम्मान उडुपी श्रीकृष्ण को अर्पित करते हुए दर्शाने वाली प्रतीकात्मक छवि से युक्त एक सुंदर पट्टिका का अनावरण किया गया। भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा श्रील प्रभुपाद के योगदान की सराहना करते हुए दिए गए संदेशों एवं महाकुंभ कार्यक्रम की झलकियों का वीडियो भी प्रदर्शित किया गया। श्रील प्रभुपाद को परंपरागत सम्मान स्वरूप देवता के पवित्र अलंकरण एवं भव्य रत्नजटित मुकुट से विभूषित किया गया। श्री माध्वाचार्य एवं श्रील प्रभुपाद पर पुष्पवृष्टि तथा गुरुवाष्टकम (गुरु की स्तुति में अष्ट श्लोकों का संस्कृत स्तोत्र) का सामूहिक पाठ इस अवसर का प्रमुख आकर्षण रहा।

इस अवसर पर डॉ. कब्बिनाले वसंत भारद्वाज, कर्नाटक तुलु साहित्य अकादमी पुरस्कार एवं कर्नाटक राज्योत्सव पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध विद्वान द्वारा रचित ‘श्रील प्रभुपाद चरितामृतम् : कन्नड़ महाकाव्य’ का विमोचन किया गया। यह अपने प्रकार का पहला कन्नड़ महाकाव्य है, जो अष्टादश पदी छंद में रचित है और प्राचीन व आधुनिक कन्नड़ का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। विद्वानों एवं बुद्धिजीवियों ने इस ग्रंथ की सराहना की है। उडुपी मठ की रंगीन एवं आध्यात्मिक पत्रिका ‘श्री तुलसी’ का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम का समापन गुरु पूजा, पुत्तिगे मठ के दीवानों के सम्मान तथा सभी भक्तों को श्रीकृष्ण प्रसाद वितरण के साथ हुआ।

यह उल्लेखनीय है कि इस्कॉन बेंगलुरु द्वारा गीता जयंती माह में एक लाख भगवद्गीता वितरण (लक्ष गीता दान) किया जा रहा है, जो श्रील प्रभुपाद की भगवान कृष्ण के संदेश को सर्वत्र पहुँचाने की अभिलाषा के अनुरूप है। ये प्रयास परम पूज्य श्री सुगुणेन्द्र तीर्थ स्वामीजी की उस संकल्पना से भी मेल खाते हैं, जिसके अंतर्गत उनके ऐतिहासिक चौथे पर्याय को ‘विश्व गीता पर्याय’ घोषित किया गया है - उद्देश्य है हर घर में गीता और हर हृदय में गीता।

वक्तव्यों के अंश

परम पूज्य श्री श्री सुगुणेन्द्र तीर्थ स्वामीजी ने कहा, “जब भगवान के भक्तों की महिमा होती है, तब भगवान श्रीकृष्ण अत्यंत प्रसन्न होते हैं। मैं मानता हूँ कि स्वयं श्रीकृष्ण ने अपना ‘विश्वगुरु’ का शीर्षक अपने प्रिय भक्त श्रील प्रभुपाद को प्रदान किया। आज का दिन अत्यंत पावन है, जब श्रील प्रभुपाद इस सम्मान को उडुपी श्रीकृष्ण को समर्पित करने यहाँ आए हैं। कलियुग में भगवान ने अपने सशक्त प्रतिनिधि श्रील प्रभुपाद को संपूर्ण विश्व में अपना संदेश फैलाने के लिए भेजा। मुझे हर्ष है कि मेरे पर्याय काल में श्रील प्रभुपाद को यह सम्मान प्राप्त हुआ। परम पूज्य कैलाशानंद गिरी महाराज की उपस्थिति से उडुपी हरिद्वार के समान हरिहर क्षेत्र बन गया है। उत्तर भारत देवभूमि है और दक्षिण भारत आचार्य भूमि-भारतवर्ष में सदैव एकता और शांति बनी रहे।”

परम पूज्य कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा, “उडुपी, भगवान श्रीकृष्ण और श्री माध्वाचार्य की पवित्र भूमि है। मुझे भगवान ने यह सौभाग्य दिया कि मैं उनके प्रिय सेवक श्रील प्रभुपाद को ‘विश्वगुरु’ सम्मान प्रदान कर सका। यह सम्मान बहुत पहले मिलना चाहिए था। यह अवसर अत्यंत दुर्लभ है और समस्त विश्व के भक्त इससे हर्षित हैं।”

श्री मधु पंडित दास ने कहा, “मैं परम पूज्य श्री सुगुणेन्द्र तीर्थ स्वामीजी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ कि उन्होंने इस ऐतिहासिक स्थल पर श्रीकृष्ण समर्पणोत्सव का आयोजन किया। श्रील प्रभुपाद हमारे सभी सेवा कार्यों की प्रेरणा हैं। गीता जयंती के इस पावन माह में यह आयोजन अत्यंत शुभ है। मैं डॉ. कब्बिनाले वसंत भारद्वाज को उनके अद्वितीय साहित्यिक योगदान के लिए बधाई देता हूँ।”

विश्वगुरु श्रील प्रभुपाद के बारे में

श्रील प्रभुपाद का जन्म 1896 में कोलकाता में एक भक्त परिवार में हुआ। उन्होंने आदर्श गृहस्थ जीवन जिया और बाद में संन्यास आश्रम स्वीकार कर श्री ब्रह्मा–माध्व–गौड़ीय वैष्णव परंपरा के 32वें आचार्य बने। 69 वर्ष की आयु में उन्होंने पश्चिम की यात्रा कर भारत की आध्यात्मिक संस्कृति को विश्वभर में फैलाया। उन्होंने भगवद्गीता एवं श्रीमद्भागवत पर प्रामाणिक भाष्य लिखे, 100 से अधिक इस्कॉन मंदिर स्थापित किए, हरिनाम संकीर्तन एवं अन्नदान परंपरा को विश्वव्यापी बनाया और 1977 में अपने दिव्य प्रस्थान तक संपूर्ण मानवता पर भगवान कृष्ण की कृपा बरसाई।

आयोजन स्थल का महत्व

उडुपी कर्नाटक के तटीय क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन नगर है, जिसकी सांस्कृतिक विरासत हजारों वर्षों पुरानी है। इस पवित्र भूमि की महानता प्राचीन ग्रंथों जैसे पुराणों में भी देखने को मिलती है। उडुपी का “कृष्ण मठ” कृष्ण भक्ति का विश्व प्रसिद्ध केंद्र है, जो पूरी दुनिया से लाखों भक्तों को आकर्षित करता है। यह कृष्ण मठ लगभग 800 वर्ष पहले महान संत श्री माध्वाचार्य द्वारा स्थापित किया गया था। वे स्वयं श्री मुख्यप्राण के अवतार माने जाते हैं। श्री माध्वाचार्य ने “तत्त्ववाद” का दर्शन फैलाया, जो बाद में द्वैत दर्शन के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

कृष्ण मठ में, उन्होंने भगवान कृष्ण की 5000 वर्ष पुरानी मूर्ति की स्थापना की, जो द्वारका, गुजरात के तट से नाव द्वारा उडुपी के मलपे तक लाई गई थी। यह संभवतः इस बात का प्रमाण है कि भगवान कृष्ण ने अपने परम भक्त श्री माध्वाचार्य को अत्यधिक अनुग्रह प्रदान किया। श्री माध्वाचार्य ने कृष्ण मठ में धार्मिक कर्मकांडों का संचालन और समर्थन करने के लिए आठ मठों की स्थापना की। श्री पुथिगे मठ उन्हीं में से एक है।

श्री माध्वाचार्य के सबसे प्रमुख शिष्य श्री उपेन्द्र तीर्थ थे, जिनका नाम “श्री समुद्र्ध्व विजय” (श्री माध्वाचार्य का जीवनी ग्रंथ) में उल्लेखित है। उनके माध्यम से जो मठ हमारे समय तक आया है, उसे श्री पुथिगे मठ कहा जाता है। वर्तमान में मठ के प्रमुख श्री सुगुणेंद्र तीर्थ स्वामीजी हैं, जिन्हें केवल बारह वर्ष की आयु में श्री मठ का 30वाँ पीठाधीश्वर नियुक्त किया गया। स्वामीजी ने श्री विद्यामण्य तीर्थ स्वामीजी के अधीन अध्ययन किया, जो आधुनिक समय के महान वेदान्त विद्वानों में से एक माने जाते हैं।

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इस अवसर पर गौरव भाटिया, डीलर प्रिंसिपल, Bird Automotive ने कहा, 'नए Retail. NEXT शोरूम की ओपनिंग के साथ हमने अपने उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा एवं रीटेल का उत्कृष्ट अनुभव प्रदान करने के लिए अपने फुटप्रिन्ट का विस्तार किया है। यह नई युनिट हमारे मौजूदा शोरूम एवं फुल-सर्विस संचालन को बेहतर बनाएगी, और हमें कस्टमर एंगेजमेन्ट के सर्वोच्च मानकों को बनाए रखने के लिए सशक्त बनाएगी, जिसके लिए BMW को दुनिया भर में जाना जाता है।"

4,768 वर्गफीट में फैले हमारे Retail. NEXT शोरूम में पांच तक BMW वाहनों को दर्शाया जाएगा, यहां निर्धारित कस्टमर कन्सलटेशन जोन, एक्सक्लुज़िव सेल्स लाउंज और क्यूरेटेड BMW लाईफस्टाइल एरिया होंगे। शोरूम का सोच समझ कर डिजाइन किया गया लेआउट एक भव्य एवं बेहतरीन सैटिंग में प्रोडक्ट की सर्च से लेकर व्यक्तिगत कन्सलटेशन और वाहन सौंपने तक पूरी प्रक्रिया को सहज बना देगा। Retail. NEXT उपभोक्ताओं एवं वाहनों को प्राथमिकता देते हुए डीलरशिप के अनुभव को नया आयाम देगा। एकमात्र एवं स्पष्ट रूप से परिभाषित एंट्री आगंतुकों का गर्मजोशी के साथ स्वागत करेगी, जहां पारम्परिक रिसेप्शन काउंटर के बजाए

उपभोक्ताओं को ओपन इंटरैक्शन का मौका मिलेगा। सेंट्रल कस्टमर वॉकवे मेहमानों को प्रीमियम वाहनों के बीच से ले जाता है, यहां उन्हें मल्टीफंक्शन काउंटर्स, इंटीग्रेटेड पार्टस एवं एक्सेसरीज़ तथा एक विशेष कार देखने को मिलती है, जिसका मजबूत विजुअल प्रभाव पड़ता है। सेंट्रल BMW बार एवं लाउंज आतिथ्य को और भी बेहतर बना देते हैं, वहीं कन्सलटेशन स्टेज एवं लाउंज उन्हें बातचीत का निजी, प्रत्यास्थ एवं सहज अनुभव प्रदान करते हैं। डिजिटल टूल्स, पर्सनलाइज्ड सर्विस एवं सोच समझ कर डिजाइन किया गया माहौल आरामदायक, प्रीमियम एवं यादगार अनुभव प्रदान करते हैं।

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BMW Group India का विस्तार, गुरुग्राम में Bird Automotive का नया शोरूम

इस अवसर पर गौरव भाटिया, डीलर प्रिंसिपल, Bird Automotive ने कहा, 'नए Retail. NEXT शोरूम की ओपनिंग के साथ हमने अपने उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा एवं रीटेल का उत्कृष्ट अनुभव प्रदान करने के लिए अपने फुटप्रिन्ट का विस्तार किया है। यह नई युनिट हमारे मौजूदा शोरूम एवं फुल-सर्विस संचालन को बेहतर बनाएगी, और हमें कस्टमर एंगेजमेन्ट के सर्वोच्च मानकों को बनाए रखने के लिए सशक्त बनाएगी, जिसके लिए BMW को दुनिया भर में जाना जाता है।"

4,768 वर्गफीट में फैले हमारे Retail. NEXT शोरूम में पांच तक BMW वाहनों को दर्शाया जाएगा, यहां निर्धारित कस्टमर कन्सलटेशन जोन, एक्सक्लुज़िव सेल्स लाउंज और क्यूरेटेड BMW लाईफस्टाइल एरिया होंगे। शोरूम का सोच समझ कर डिजाइन किया गया लेआउट एक भव्य एवं बेहतरीन सैटिंग में प्रोडक्ट की सर्च से लेकर व्यक्तिगत कन्सलटेशन और वाहन सौंपने तक पूरी प्रक्रिया को सहज बना देगा। Retail. NEXT उपभोक्ताओं एवं वाहनों को प्राथमिकता देते हुए डीलरशिप के अनुभव को नया आयाम देगा। एकमात्र एवं स्पष्ट रूप से परिभाषित एंट्री आगंतुकों का गर्मजोशी के साथ स्वागत करेगी, जहां पारम्परिक रिसेप्शन काउंटर के बजाए

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एनसीआर क्षेत्र में मैनेज्ड वर्कस्पेस की बढ़ती मांग के कारण स्प्रिंग हाउस लगातार अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। कंपनी अब ₹100 करोड़ के एआरआर (ARR) लक्ष्य को हासिल कर चुकी है, जो ऑफिस स्पेस मार्केट में इसकी मजबूत पकड़ और ब्रांड वैल्यू को साबित करता है।

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स्प्रिंग हाउस वर्कस्पेस का एनसीआर में विस्तार, गुरुग्राम में नया मुख्यालय

एनसीआर क्षेत्र में मैनेज्ड वर्कस्पेस की बढ़ती मांग के कारण स्प्रिंग हाउस लगातार अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। कंपनी अब ₹100 करोड़ के एआरआर (ARR) लक्ष्य को हासिल कर चुकी है, जो ऑफिस स्पेस मार्केट में इसकी मजबूत पकड़ और ब्रांड वैल्यू को साबित करता है।

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कोच्चि में ‘वृषभा’ का भव्य ट्रेलर लॉन्च: इस क्रिसमस मोहनलाल लौटे दमदार पिता–पुत्र गाथा के साथ

Apurv Agrawal, Co-Founder & CEO, SquadStack.ai

Consider a digital car-buying journey, where users often struggle to compare variants, understand pricing differences, or evaluate which model best fits their needs. These moments of uncertainty create hesitation. and drop-offs. The In-App Voice Al Assistant resolves this by allowing users to simply ask questions inside the journey and receive instant, expert-level guidance. This builds confidence, reduces decision friction, and moves more users toward the right choice without leaving the flow.

The assistant is powered by SquadStack.ai's Humanoid Al Agent Stack, trained on billions of structured conversations across India. Built to handle diverse accents, languages, and real-world user behavior, it delivers the most natural and human-sounding voice experience in India. The underlying voice engine recently passed the Turing Test milestone for naturalness, reinforcing its ability to create lifelike, high-trust interactions, which is a critical requirement for Bharat-scale adoption.

The In-App Voice Al Assistant strengthens workflows across assisted sales, product comparison, qualification flows, onboarding support, account opening, and ecommerce navigation. Early pilots have demonstrated meaningful reductions in early-stage drop-offs and faster conversion velocity across BFSI, automotive, ecommerce, education, and travel.

Designed for enterprise-grade deployment, the solution includes advanced security controls and Indian data residency to meet regulatory and industry standards. Delivered as an embeddable SDK, it integrates. seamlessly into existing web and app journeys without disruption. It is now available across Web, Android, and IOS

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SquadStack.ai Launches In-App Voice Al Assistant to Reimagine Digital Customer Journeys

Apurv Agrawal, Co-Founder & CEO, SquadStack.ai

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ASSOCHAM Seeks Growth-Oriented Reforms in Budget 2026–27
'पूर्वोत्तर प्रांतों का एक साझा मंच बने जो पर्यावरण के मुद्दे पर विमर्श कर सकें'

· क्‍यूआर कोड कैशबैक ऑफ़र: “पैसे पाने के लिए क्‍यूआर कोड स्कैन करें” जैसे मैसेज। क्‍यूआर स्कैन करते ही आपके खाते से पैसा कट सकता है या आपको किसी फर्जी पेज पर रिडायरेक्‍ट किया जा सकता है।

· अविश्वसनीय छूट: मोबाइल फोन, गैजेट या ट्रैवल पैकेज पर आमतौर पर बहुत ज़्यादा छूट वाले फर्जी वेबसाइट। भुगतान के बाद न सामान मिलता है, न कोई जवाब।

· अकाउंट वॉर्निंग ईमेल्‍स: बैंकों अथवा ‘सेवा प्रदाताओं’ से अलर्ट मिलता है जिसमें फौरन वेरिफाई ना करने पर अकाउंट ब्लॉक होने की धमकी दी जाती है और फिर इनमें ओटीपी पूछा जाता है।

· फ्री गिफ्ट मैसेज: मुफ्त मोबाइल या फेस्टिव हैम्पर को क्‍लेम करने के नाम पर छोटी फीस या निजी जानकारी मांगी जाती है, जिससे किसी भी रिवार्ड के बजाय वित्‍तीय नुकसान होता है या फिर डेटा चोरी होती है। 

साइबर स्‍मार्ट रहने के आसान तरीके – “रुको, सोचो, फिर एक्शन लो”

अनजान या फॉरवर्ड किए गए लिंक पर क्लिक न करें। हमेशा आधिकारिक ऐप या वेबसाइट पर ही जाएं।
अजनबियों द्वारा भेजे गए क्‍यूआर कोड कभी स्कैन न करें। पैसा पाने के लिए किसी भी चीज को स्‍कैन करने की जरूरत नहीं पड़ती है।
ओटीपी, बैंक डिटेल, कार्ड नंबर या पर्सनल जानकारी किसी से साझा न करें। बैंक या कुरियर कंपनियां इस तरह की जानकारी नहीं मांगती हैं।
अतिरिक्‍त सुरक्षा के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन ज़रूर चालू रखें

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हॉलिडे रश, साइबर हश: साल के अंत में होने वाली धोखाधड़ी से रहें सुरक्षित 

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सनम बैंड के यारी जैम ने जयपुर में रच दी संगीत और दोस्ती की यादगार शाम

महिलाओं के लिए सुरक्षित डिजिटल परिवेश, कृषि शिक्षा में एकरूपता के लिए राष्ट्रीय परिषद का गठन और खेल को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाना विकसित भारत की संकल्पना के लिए आवश्यक है। माननीय मंत्रियों ने इन विषयों पर सकारात्मक रुख दिखाया है और हमें विश्वास है कि इन सुझावों पर शीघ्र ही प्रभावी नीतिगत निर्णय लिए जाएंगे।"

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तीन मंत्रालय, तीन मुद्दे: अभाविप ने महिला, कृषि और खेल नीतियों पर रखा पक्ष

महिलाओं के लिए सुरक्षित डिजिटल परिवेश, कृषि शिक्षा में एकरूपता के लिए राष्ट्रीय परिषद का गठन और खेल को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाना विकसित भारत की संकल्पना के लिए आवश्यक है। माननीय मंत्रियों ने इन विषयों पर सकारात्मक रुख दिखाया है और हमें विश्वास है कि इन सुझावों पर शीघ्र ही प्रभावी नीतिगत निर्णय लिए जाएंगे।"

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शैक्षणिक स्वतंत्रता, संवेदनशीलता और आस्था का सम्मान
स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा आत्मनिर्भरता भारत की प्राथमिकता: डॉ. बिनय कुमार
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तीसरे वार्षिक कथा गोष्ठी का मैसाम ने किया उत्कृष्ट आयोजन
आरएमजी फ्यूचर की 10वीं वर्षगांठ, उड़ान के लिए सफल लीडरों में उत्साह
अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकी कैलिफोर्निया की तृषा वर्धन
आया नगर को मिली नई सड़कों की सौगात, बिधूड़ी–तंवर ने किया सड़कों का लोकार्पण
मैरिको ने लॉन्च किया निहार नेचुरल्स शांति एलोवेरा आँवला हेयर ऑयल
जहाँगीरपुरी स्थित मुस्कान स्किल सेंटर में प्रमाण पत्र वितरण समारोह एवं नए कोर्स का शुभारंभ

उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य सरल थेरेपी प्रदान करना है—बेहतर ग्लाइसेमिक कंट्रोल, वजन प्रबंधन और हृदय-किडनी सुरक्षा के लिए—उपयोगकर्ता-अनुकूल पेन से साप्ताहिक एक बार डोजिंग के माध्यम से। ये परिणाम नोवो नॉर्डिस्क की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि मूल जीएलपी-1 आरए के रूप में, 20 वर्षों के अनुसंधान और 38 मिलियन से अधिक मरीज-वर्षों के डेटा के साथ विकसित ओजेम्पिक® ग्लाइसेमिक कंट्रोल सुधारता है, मस्तिष्क मार्गों के माध्यम से भूख को नियंत्रित करता है, टी2डीएम में वजन प्रबंधन में सहायता करता है और डायबिटीज-संबंधी हृदय-किडनी जोखिमों को कम करता है। हाल ही में डब्ल्यूएचओ की एसेंशियल मेडिसिन्स मॉडल लिस्ट में शामिल, यह 0.25 एमजी, 0.5 एमजी और 1 एमजी डोज में चिकित्सक-निर्देशित टाइट्रेशन के लिए उपलब्ध है।

1923 में स्थापित और डेनमार्क में मुख्यालय वाली नोवो नॉर्डिस्क एक सदी से अधिक समय से डायबिटीज देखभाल का नेतृत्व कर रही है। 78,500 कर्मचारियों के साथ 80 देशों में और 170 बाजारों में उत्पादों के साथ, इसके 'बी' शेयर नास्डैक कोपेनहेगन (NOVO-B) पर लिस्टेड हैं और एडीआर न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (NVO) पर।

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डायबिटीज उपचार में नया विकल्प: ओजेम्पिक® भारत में लॉन्च

उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य सरल थेरेपी प्रदान करना है—बेहतर ग्लाइसेमिक कंट्रोल, वजन प्रबंधन और हृदय-किडनी सुरक्षा के लिए—उपयोगकर्ता-अनुकूल पेन से साप्ताहिक एक बार डोजिंग के माध्यम से। ये परिणाम नोवो नॉर्डिस्क की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि मूल जीएलपी-1 आरए के रूप में, 20 वर्षों के अनुसंधान और 38 मिलियन से अधिक मरीज-वर्षों के डेटा के साथ विकसित ओजेम्पिक® ग्लाइसेमिक कंट्रोल सुधारता है, मस्तिष्क मार्गों के माध्यम से भूख को नियंत्रित करता है, टी2डीएम में वजन प्रबंधन में सहायता करता है और डायबिटीज-संबंधी हृदय-किडनी जोखिमों को कम करता है। हाल ही में डब्ल्यूएचओ की एसेंशियल मेडिसिन्स मॉडल लिस्ट में शामिल, यह 0.25 एमजी, 0.5 एमजी और 1 एमजी डोज में चिकित्सक-निर्देशित टाइट्रेशन के लिए उपलब्ध है।

1923 में स्थापित और डेनमार्क में मुख्यालय वाली नोवो नॉर्डिस्क एक सदी से अधिक समय से डायबिटीज देखभाल का नेतृत्व कर रही है। 78,500 कर्मचारियों के साथ 80 देशों में और 170 बाजारों में उत्पादों के साथ, इसके 'बी' शेयर नास्डैक कोपेनहेगन (NOVO-B) पर लिस्टेड हैं और एडीआर न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (NVO) पर।

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भारत में ओजेम्पिक® लॉन्च: टाइप 2 डायबिटीज उपचार में गेम-चेंजर थेरेपी

उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य सरल थेरेपी प्रदान करना है—बेहतर ग्लाइसेमिक कंट्रोल, वजन प्रबंधन और हृदय-किडनी सुरक्षा के लिए—उपयोगकर्ता-अनुकूल पेन से साप्ताहिक एक बार डोजिंग के माध्यम से। ये परिणाम नोवो नॉर्डिस्क की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि मूल जीएलपी-1 आरए के रूप में, 20 वर्षों के अनुसंधान और 38 मिलियन से अधिक मरीज-वर्षों के डेटा के साथ विकसित ओजेम्पिक® ग्लाइसेमिक कंट्रोल सुधारता है, मस्तिष्क मार्गों के माध्यम से भूख को नियंत्रित करता है, टी2डीएम में वजन प्रबंधन में सहायता करता है और डायबिटीज-संबंधी हृदय-किडनी जोखिमों को कम करता है। हाल ही में डब्ल्यूएचओ की एसेंशियल मेडिसिन्स मॉडल लिस्ट में शामिल, यह 0.25 एमजी, 0.5 एमजी और 1 एमजी डोज में चिकित्सक-निर्देशित टाइट्रेशन के लिए उपलब्ध है।

1923 में स्थापित और डेनमार्क में मुख्यालय वाली नोवो नॉर्डिस्क एक सदी से अधिक समय से डायबिटीज देखभाल का नेतृत्व कर रही है। 78,500 कर्मचारियों के साथ 80 देशों में और 170 बाजारों में उत्पादों के साथ, इसके 'बी' शेयर नास्डैक कोपेनहेगन (NOVO-B) पर लिस्टेड हैं और एडीआर न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (NVO) पर।

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कार्यक्रम में ओम शांति रिट्रीट सेंटर की निदेशका बीके आशा, अफ्रीका के देशों की क्षेत्रीय समन्वयक राजयोगिनी बीके वेदांती, माउंट आबू से महासचिव राजयोगी बीके करुणा, ओआरसी निदेशिका राजयोगिनी बीके शुक्ला, संस्थान के महिला विंग की अध्यक्षा राजयोगिनी बी के चक्रधारी, ज्यूरिस्ट विंग की अध्यक्षा राजयोगिनी बीके पुष्पा ने उप राष्ट्रपति का अभिनन्दन किया। उप राष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ करने के उपरांत अपने संबोधन में कहा कि ध्यान आत्मा, मन और शरीर को गहन शांति प्रदान करता है। ध्यान की अवस्था में सकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं और आंतरिक ऊर्जा का संचार होता है। इसी ध्यान की अनुभूति के बीच, समाज के विभिन्न क्षेत्रों—एविएशन, चिकित्सा, विज्ञान, प्रशासन, सामाजिक सेवा और राजनीति से आए हुए व्यक्तित्वों से परिचय हुआ, जो इस बात का प्रमाण है कि ध्यान और आध्यात्मिक शांति हर मनुष्य की आवश्यकता है।

उप राष्ट्रपति ने कहा कि धर्म का पालन शांति और विजय दोनों देता है। मन को जीतना ही सफलता का प्रथम सूत्र है—यही गीता का संदेश है। जब तक हम भीतर सकारात्मकता, विनम्रता और सेवा-भाव नहीं अपनाते, तब तक मन की शांति संभव नहीं। तमिल परंपरा के महान कवि तिरुवल्लुवर ने कहा है—मन में लाखों विचार आते हैं, पर जीवन का अगला क्षण भी निश्चित नहीं। अतः चिंता नहीं, बल्कि सद्कर्म, सद्भाव और समाज-सेवा ही मनुष्य को सच्ची शांति प्रदान करते हैं। उन्होंने मानव हित में संस्थान द्वारा किये जा रहे कार्यों की सराहना भी की।

उप राष्ट्रपति ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विश्व के अनेक देशों को निःशुल्क वैक्सीन उपलब्ध कराना भारत की “वसुधैव कुटुम्बकम” की सनातन भावना का श्रेष्ठ उदाहरण है। खुद के लिए जीते हुए भी सबके लिए जीने की यही मानवीय सोच भारत को वैश्विक शांति, करुणा और मानवता का मार्गदर्शक बनाती है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में सदैव केवल अपने ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व के कल्याण का संदेश निहित है। उप राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि आध्यात्मिकता हमारी सबसे बड़ी शक्ति है—यह प्रत्येक मनुष्य के भीतर विद्यमान होती है, बस आवश्यकता है उसे पहचानकर जीवन में उतारने की।

जीवन का सार समझने की शक्ति है आध्यात्मिकता : राव नरबीर सिंह

हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि मनुष्य के जीवन में पारस्परिक द्वेष का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। यदि हम एक-दूसरे के प्रति सद्भाव बनाए रखें, तो जीवन स्वाभाविक रूप से सहज, सुंदर और संतुलित बन जाता है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता का अर्थ किसी धर्म विशेष से जुड़ना नहीं, बल्कि जीवन के सार को समझना है। जब व्यक्ति आध्यात्मिक दृष्टि विकसित करता है, तो उसके विचार, व्यवहार और दुनिया को देखने का नजरिया बदल जाता है। मन में सकारात्मकता बढ़ती है और हर परिस्थिति तथा हर व्यक्ति में अच्छाई दिखाई देने लगती है, जिससे भीतर नई ऊर्जा का संचार होता है। राव ने कहा कि जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने, सही निर्णय लेने और सच्चे अर्थों में विजय प्राप्त करने के लिए आध्यात्मिक शिक्षाएं मार्गदर्शन और गहरी समझ प्रदान करती हैं। संस्थान के महासचिव राजयोगी बीके करुणा ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान विश्व में महिलाओं द्वारा संचालित एकमात्र आध्यात्मिक संगठन है। जिसने बहुत कम समय में विश्व के 110 से भी अधिक देशों में हजारों सेवाकेंद्र खोले हैं। संस्थान राजयोग के माध्यम से विश्व परिवर्तन का कार्य कर रहा है।

ओआरसी की निदेशिका राजयोगिनी आशा दीदी ने कहा कि युग परिवर्तक केवल एक परमात्मा ही है। परमात्मा हमें ज्ञान का तीसरा नेत्र देते हैं। उन्होंने कहा कि देह का अभिमान ही बुराइयों की मूल वजह है। इसलिए परमात्मा हमें आत्मा का ज्ञान देते हैं। व्यावहारिक शुद्धि ही परिवर्तन का आधार है। उन्होंने रजत रश्मियां थीम के अंतर्गत वर्षभर होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी दी। उनमें से मेरा घर स्वर्ग अभियान प्रमुख है। संस्थान के अफ्रीका महाद्वीप की क्षेत्रीय संयोजिका राजयोगिनी वेदांती दीदी ने सबको राजयोग के अभ्यास से गहन शांति की अनुभूति कराई। अहमदाबाद से राजयोग शिक्षिका डॉ. दामिनी ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में विशेष रूप ओआरसी के सदस्यों द्वारा बहुत सामूहिक नृत्य प्रस्तुत हुआ। केंद्र की राजयोग शिक्षिका बीके हुसैन ने मंच संचालन किया। कार्यक्रम में संस्थान के अनेक सदस्यों सहित 4000 से भी अधिक लोगों ने शिरकत की।

यह रहे मौजूद

इस अवसर पर उप राष्ट्रपति के सेक्रेटरी अमित खरे, डीसी अजय कुमार, जॉइंट सीपी संगीता कालिया , डीसीपी ट्रैफिक राजेश मोहन, एसडीएम दिनेश लुहाच सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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समृद्ध आध्यात्मिक परंपराएं भारत को बना रही है विश्व गुरु : उपराष्ट्रपति 

कार्यक्रम में ओम शांति रिट्रीट सेंटर की निदेशका बीके आशा, अफ्रीका के देशों की क्षेत्रीय समन्वयक राजयोगिनी बीके वेदांती, माउंट आबू से महासचिव राजयोगी बीके करुणा, ओआरसी निदेशिका राजयोगिनी बीके शुक्ला, संस्थान के महिला विंग की अध्यक्षा राजयोगिनी बी के चक्रधारी, ज्यूरिस्ट विंग की अध्यक्षा राजयोगिनी बीके पुष्पा ने उप राष्ट्रपति का अभिनन्दन किया। उप राष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ करने के उपरांत अपने संबोधन में कहा कि ध्यान आत्मा, मन और शरीर को गहन शांति प्रदान करता है। ध्यान की अवस्था में सकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं और आंतरिक ऊर्जा का संचार होता है। इसी ध्यान की अनुभूति के बीच, समाज के विभिन्न क्षेत्रों—एविएशन, चिकित्सा, विज्ञान, प्रशासन, सामाजिक सेवा और राजनीति से आए हुए व्यक्तित्वों से परिचय हुआ, जो इस बात का प्रमाण है कि ध्यान और आध्यात्मिक शांति हर मनुष्य की आवश्यकता है।

उप राष्ट्रपति ने कहा कि धर्म का पालन शांति और विजय दोनों देता है। मन को जीतना ही सफलता का प्रथम सूत्र है—यही गीता का संदेश है। जब तक हम भीतर सकारात्मकता, विनम्रता और सेवा-भाव नहीं अपनाते, तब तक मन की शांति संभव नहीं। तमिल परंपरा के महान कवि तिरुवल्लुवर ने कहा है—मन में लाखों विचार आते हैं, पर जीवन का अगला क्षण भी निश्चित नहीं। अतः चिंता नहीं, बल्कि सद्कर्म, सद्भाव और समाज-सेवा ही मनुष्य को सच्ची शांति प्रदान करते हैं। उन्होंने मानव हित में संस्थान द्वारा किये जा रहे कार्यों की सराहना भी की।

उप राष्ट्रपति ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विश्व के अनेक देशों को निःशुल्क वैक्सीन उपलब्ध कराना भारत की “वसुधैव कुटुम्बकम” की सनातन भावना का श्रेष्ठ उदाहरण है। खुद के लिए जीते हुए भी सबके लिए जीने की यही मानवीय सोच भारत को वैश्विक शांति, करुणा और मानवता का मार्गदर्शक बनाती है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में सदैव केवल अपने ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व के कल्याण का संदेश निहित है। उप राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि आध्यात्मिकता हमारी सबसे बड़ी शक्ति है—यह प्रत्येक मनुष्य के भीतर विद्यमान होती है, बस आवश्यकता है उसे पहचानकर जीवन में उतारने की।

जीवन का सार समझने की शक्ति है आध्यात्मिकता : राव नरबीर सिंह

हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि मनुष्य के जीवन में पारस्परिक द्वेष का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। यदि हम एक-दूसरे के प्रति सद्भाव बनाए रखें, तो जीवन स्वाभाविक रूप से सहज, सुंदर और संतुलित बन जाता है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता का अर्थ किसी धर्म विशेष से जुड़ना नहीं, बल्कि जीवन के सार को समझना है। जब व्यक्ति आध्यात्मिक दृष्टि विकसित करता है, तो उसके विचार, व्यवहार और दुनिया को देखने का नजरिया बदल जाता है। मन में सकारात्मकता बढ़ती है और हर परिस्थिति तथा हर व्यक्ति में अच्छाई दिखाई देने लगती है, जिससे भीतर नई ऊर्जा का संचार होता है। राव ने कहा कि जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने, सही निर्णय लेने और सच्चे अर्थों में विजय प्राप्त करने के लिए आध्यात्मिक शिक्षाएं मार्गदर्शन और गहरी समझ प्रदान करती हैं। संस्थान के महासचिव राजयोगी बीके करुणा ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान विश्व में महिलाओं द्वारा संचालित एकमात्र आध्यात्मिक संगठन है। जिसने बहुत कम समय में विश्व के 110 से भी अधिक देशों में हजारों सेवाकेंद्र खोले हैं। संस्थान राजयोग के माध्यम से विश्व परिवर्तन का कार्य कर रहा है।

ओआरसी की निदेशिका राजयोगिनी आशा दीदी ने कहा कि युग परिवर्तक केवल एक परमात्मा ही है। परमात्मा हमें ज्ञान का तीसरा नेत्र देते हैं। उन्होंने कहा कि देह का अभिमान ही बुराइयों की मूल वजह है। इसलिए परमात्मा हमें आत्मा का ज्ञान देते हैं। व्यावहारिक शुद्धि ही परिवर्तन का आधार है। उन्होंने रजत रश्मियां थीम के अंतर्गत वर्षभर होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी दी। उनमें से मेरा घर स्वर्ग अभियान प्रमुख है। संस्थान के अफ्रीका महाद्वीप की क्षेत्रीय संयोजिका राजयोगिनी वेदांती दीदी ने सबको राजयोग के अभ्यास से गहन शांति की अनुभूति कराई। अहमदाबाद से राजयोग शिक्षिका डॉ. दामिनी ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में विशेष रूप ओआरसी के सदस्यों द्वारा बहुत सामूहिक नृत्य प्रस्तुत हुआ। केंद्र की राजयोग शिक्षिका बीके हुसैन ने मंच संचालन किया। कार्यक्रम में संस्थान के अनेक सदस्यों सहित 4000 से भी अधिक लोगों ने शिरकत की।

यह रहे मौजूद

इस अवसर पर उप राष्ट्रपति के सेक्रेटरी अमित खरे, डीसी अजय कुमार, जॉइंट सीपी संगीता कालिया , डीसीपी ट्रैफिक राजेश मोहन, एसडीएम दिनेश लुहाच सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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मंदिरों के सरकारी अधिग्रहण, धर्मांतरण और बढ़ती मजहबी कट्टरता पर चिंतन, 300 संत जुटे
कवियों ने बिखेरे भारत के बहुरंग, बहुभाषी कविता के संग

उक्त प्रदर्शन में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष आर्यन मान एवं सचिव कुणाल चौधरी सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल रहे।

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दिल्ली विश्वविद्यालय परीक्षा अव्यवस्था के खिलाफ अभाविप का प्रदर्शन

उक्त प्रदर्शन में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष आर्यन मान एवं सचिव कुणाल चौधरी सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल रहे।

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मोहन यादव महत्वपूर्ण मामलों में किसी नतीजे पर पहुंचने के लिए ज्यादा सोच विचार नहीं करते। वे जनहित से जुड़े हर मामले में त्वरित निर्णय करते हैं और उनके निर्णय हमेशा सही साबित होते हैं। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व भी उनकी इस कार्यशैली का कायल हो चुका है। अपनी इस विशिष्ट कार्य शैली के संकेत मोहन यादव ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के चंद दिनों के अंदर दे ही दिए थे और पिछले दो वर्षों के दौरान उनकी सरकार द्वारा लिए गए अनेक फैसलों से उनकी इस विशिष्ट कार्यशैली के प्रमाण भी मिल चुके हैं। यूं तो मात्र दो वर्षों में ही मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपनी झोली में जो शानदार उपलब्धियां संग्रहीत कर ली हैं उन पर गर्व करने का उन्हें पूरा हक है परन्तु उन्होंने तो मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही अपने लिए मध्यप्रदेश को देश के विकास राज्यों की कतार में अग्रणी स्थान का हकदार बनाने का दृढ़ संकल्प ले लिया था जिसकी पूर्ति के लिए वे इतने प्राणपण से जुटे हुए हैं कि उन्हें मील के पत्थर गिनने की फुर्सत नहीं है। मुख्यमंत्री के रूप में मोहन यादव के दो वर्षों के शानदार सफर पर मशहूर शायर बशीर बद्र का यह शेर पूरी तरह चरितार्थ होता है -

जिस दिन से चला हूं , मेरी मंजिल पे नज़र है।
इन आंखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा।

मुख्यमंत्री मोहन यादव की सहृदयता, संवेदनशीलता और सादगी ने प्रदेश की जनता का दिल जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आम आदमी को उनमें अपनी छवि दिखाई देती है।हरदिल अज़ीज़ मुख्यमंत्री ने अपने चारों ओर कभी ऐसा घेरा निर्मित नहीं होने दिया जिसमें आम आदमी का प्रवेश संभव न हो सके। पिछले दो वर्षों में ऐसे अनेक अवसर आए हैं जब मुख्यमंत्री मोहन यादव की अतिशय सादगी और सहज- सरल व्यवहार से आम जन को अभिभूत किया है। अपने प्रवास के दौरान कभी उन्होंने चाय की दुकान पर रुक कर चाय बना दी और कभी साधारण सी होटल में समोसे बना कर उपस्थित ग्राहकों को चकित कर दिया। पार्टी के छोटे से छोटे कार्यकर्ता के साथ भी वे जब आत्मीयता से मिलते हैं तो वह अभिभूत हुए बिना नहीं रहता। उनकी सादगी की ताज़ा मिसाल हाल में महाकाल की नगरी उज्जैन में पुण्य सलिला क्षिप्रा के तट पर आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में देखने को मिली थी जब उन्होंने अत्यंत सादगी से अपने चिकित्सक बेटे का विवाह संस्कार संपन्न करा कर समाज के सामने आदर्श प्रस्तुत किया।

मुख्यमंत्री प्रदेश में जब किसी भी क्षेत्र के दौरे पर जाते हैं तो साधारण से साधारण व्यक्ति भी उनके नजदीक पहुंच कर अपने मन की बात कह सकता है। वे मुस्कुरा कर हर व्यक्ति का अभिवादन स्वीकार करते हैं और लोगों की तकलीफों को दूर करने के लिए मौके पर ही अधिकारियों को निर्देशित भी करते हैं। वे इस बात का विशेष ध्यान रखते हैं कि निश्चित समय सीमा के अंदर उनके निर्देशों के अनुपालन में कहीं कोई कोताही न हो। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पिछले दो वर्षों में कर्तव्य पालन में लापरवाही बरतने वाले बड़े से बड़े अधिकारियों के विरुद्ध भी सख्त कार्रवाई करने में कोई संकोच नहीं किया है। उनके लिए जनता जनार्दन सर्वोपरि है।आम आदमी की तकलीफें उन्हें द्रवित कर देती हैं इसीलिए पिछले दो वर्षों से वे मध्यप्रदेश के नक्शे को खुशी के रंगों से सजाने में तन्मयतापूर्वक जुटे हुए हैं।

(लेखक राजनैतिक विश्लेषक है और ये उनके निजी विचार है)

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कृष्णमोहन झा का कॉलम : मोहन यादव ने मिटा दी है आमजन से सत्ता की दूरी

मोहन यादव महत्वपूर्ण मामलों में किसी नतीजे पर पहुंचने के लिए ज्यादा सोच विचार नहीं करते। वे जनहित से जुड़े हर मामले में त्वरित निर्णय करते हैं और उनके निर्णय हमेशा सही साबित होते हैं। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व भी उनकी इस कार्यशैली का कायल हो चुका है। अपनी इस विशिष्ट कार्य शैली के संकेत मोहन यादव ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के चंद दिनों के अंदर दे ही दिए थे और पिछले दो वर्षों के दौरान उनकी सरकार द्वारा लिए गए अनेक फैसलों से उनकी इस विशिष्ट कार्यशैली के प्रमाण भी मिल चुके हैं। यूं तो मात्र दो वर्षों में ही मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपनी झोली में जो शानदार उपलब्धियां संग्रहीत कर ली हैं उन पर गर्व करने का उन्हें पूरा हक है परन्तु उन्होंने तो मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही अपने लिए मध्यप्रदेश को देश के विकास राज्यों की कतार में अग्रणी स्थान का हकदार बनाने का दृढ़ संकल्प ले लिया था जिसकी पूर्ति के लिए वे इतने प्राणपण से जुटे हुए हैं कि उन्हें मील के पत्थर गिनने की फुर्सत नहीं है। मुख्यमंत्री के रूप में मोहन यादव के दो वर्षों के शानदार सफर पर मशहूर शायर बशीर बद्र का यह शेर पूरी तरह चरितार्थ होता है -

जिस दिन से चला हूं , मेरी मंजिल पे नज़र है।
इन आंखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा।

मुख्यमंत्री मोहन यादव की सहृदयता, संवेदनशीलता और सादगी ने प्रदेश की जनता का दिल जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आम आदमी को उनमें अपनी छवि दिखाई देती है।हरदिल अज़ीज़ मुख्यमंत्री ने अपने चारों ओर कभी ऐसा घेरा निर्मित नहीं होने दिया जिसमें आम आदमी का प्रवेश संभव न हो सके। पिछले दो वर्षों में ऐसे अनेक अवसर आए हैं जब मुख्यमंत्री मोहन यादव की अतिशय सादगी और सहज- सरल व्यवहार से आम जन को अभिभूत किया है। अपने प्रवास के दौरान कभी उन्होंने चाय की दुकान पर रुक कर चाय बना दी और कभी साधारण सी होटल में समोसे बना कर उपस्थित ग्राहकों को चकित कर दिया। पार्टी के छोटे से छोटे कार्यकर्ता के साथ भी वे जब आत्मीयता से मिलते हैं तो वह अभिभूत हुए बिना नहीं रहता। उनकी सादगी की ताज़ा मिसाल हाल में महाकाल की नगरी उज्जैन में पुण्य सलिला क्षिप्रा के तट पर आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में देखने को मिली थी जब उन्होंने अत्यंत सादगी से अपने चिकित्सक बेटे का विवाह संस्कार संपन्न करा कर समाज के सामने आदर्श प्रस्तुत किया।

मुख्यमंत्री प्रदेश में जब किसी भी क्षेत्र के दौरे पर जाते हैं तो साधारण से साधारण व्यक्ति भी उनके नजदीक पहुंच कर अपने मन की बात कह सकता है। वे मुस्कुरा कर हर व्यक्ति का अभिवादन स्वीकार करते हैं और लोगों की तकलीफों को दूर करने के लिए मौके पर ही अधिकारियों को निर्देशित भी करते हैं। वे इस बात का विशेष ध्यान रखते हैं कि निश्चित समय सीमा के अंदर उनके निर्देशों के अनुपालन में कहीं कोई कोताही न हो। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पिछले दो वर्षों में कर्तव्य पालन में लापरवाही बरतने वाले बड़े से बड़े अधिकारियों के विरुद्ध भी सख्त कार्रवाई करने में कोई संकोच नहीं किया है। उनके लिए जनता जनार्दन सर्वोपरि है।आम आदमी की तकलीफें उन्हें द्रवित कर देती हैं इसीलिए पिछले दो वर्षों से वे मध्यप्रदेश के नक्शे को खुशी के रंगों से सजाने में तन्मयतापूर्वक जुटे हुए हैं।

(लेखक राजनैतिक विश्लेषक है और ये उनके निजी विचार है)

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आप के वरिष्ठ नेता रमेश अम्बावता ने दी रक्षाबंधन की शुभकामनाएं
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