उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संस्थानों, सड़कों और स्मारकों के नामकरण में स्वतंत्रता सेनानियों को समुचित स्थान दिया जाना चाहिए। उनके संघर्ष, त्याग और राष्ट्र निर्माण में योगदान को शिक्षा, संस्कृति और जनजीवन का स्थायी एवं सम्मानजनक हिस्सा बनाया जाना आवश्यक है। विश्व प्रसिद्ध शिक्षाविद डॉ. संदीप मारवाह ने स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों को युवाओं तक पहुँचाने में शिक्षा, मीडिया और सांस्कृतिक माध्यमों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक सामाजिक उत्तरदायित्व भी है। यदि देश को स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों के अनुरूप विकसित करना है, तो गरीबी, प्रदूषण, महिलाओं की सुरक्षा, किसानों की समस्याएँ, युवाओं का रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ, न्याय व्यवस्था, सड़क सुरक्षा, जल संकट, पर्यावरण संरक्षण और सुशासन जैसे विषयों पर गंभीर एवं सतत प्रयास आवश्यक हैं।
वरिष्ठ पत्रकार आलोक कुमार ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को स्मरण करना केवल इतिहास का सम्मान नहीं, बल्कि भविष्य के लिए मार्गदर्शन भी है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों से उनके संघर्ष, साहस, रणनीति और बलिदान की वास्तविक कहानियाँ अवश्य सुननी चाहिए, जिससे राष्ट्रभक्ति, धैर्य और नेतृत्व की प्रेरणा प्राप्त होती है।
कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान केवल औपचारिक श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनके आदर्श—राष्ट्रभक्ति, ईमानदारी, समानता, सामाजिक न्याय, राष्ट्रीय एकता और जनसेवा—देश के सामाजिक एवं सार्वजनिक जीवन का अभिन्न अंग बनने चाहिए। इस अवसर पर मेजर जनरल लखविंदर सिंह (सेवानिवृत्त), ब्रिगेडियर बी. के. खन्ना (सेवानिवृत्त), कर्नल दिवेंद्र सहरावत, वरिष्ठ अधिवक्ता एन. डी. पंचोली, प्रोफेसर राम सिंह, डॉ. बनिंदर राही, वरिष्ठ पत्रकार आलोक कुमार सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। सभी प्रतिभागियों ने स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को संरक्षित करने, उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों से स्वतंत्रता सेनानियों और उनके परिवारों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान, पहचान और संस्थागत संरक्षण प्रदान करने की मांग की। गोष्ठी में उपस्थित वक्ताओं का मत था कि 9 अगस्त 'भारत छोड़ो आंदोलन' की भावना और 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस का वास्तविक संदेश तभी सार्थक होगा, जब राष्ट्र अपने स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग को केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित न रखकर उसे वर्तमान नीतियों, शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक चेतना में भी समान सम्मान प्रदान करेगा।
लेकिन मेरी आध्यात्मिक यात्रा यहीं समाप्त नहीं हुई। अगले दिन मैंने पुरी से लगभग 25 किलोमीटर दूर ब्रह्मगिरि स्थित अलारनाथ मंदिर जाने का निर्णय लिया। स्थानीय लोगों का कहना था कि यदि पुरी आए हैं और अलारनाथ नहीं गए, तो यात्रा अभी अधूरी है। पुरी की चहल-पहल पीछे छूटती गई और सड़क के दोनों ओर फैली हरियाली के बीच हमारी गाड़ी ब्रह्मगिरि की ओर बढ़ने लगी। कुछ ही समय बाद प्राचीन अलारनाथ मंदिर के शिखर दिखाई देने लगे। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही एक अलग ही अनुभूति हुई। यहां न रथयात्रा जैसी भीड़ थी और न ही शोर-शराबा। वातावरण में केवल भक्ति, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव हो रहा था।
अलारनाथ मंदिर का महत्व केवल इसकी प्राचीनता में नहीं, बल्कि भगवान जगन्नाथ से इसके गहरे आध्यात्मिक संबंध में भी है। स्नान पूर्णिमा के बाद जब भगवान जगन्नाथ अनवसर काल में सार्वजनिक दर्शन नहीं देते, तब लाखों श्रद्धालु अलारनाथ मंदिर पहुंचते हैं। मान्यता है कि इसी अवधि में भगवान अपने भक्तों को अलारनाथ स्वरूप में दर्शन देते हैं। मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु के अलारनाथ स्वरूप के दर्शन करते समय मन में अनायास यही भाव आया कि रथयात्रा में जिस विराट स्वरूप के दर्शन हुए थे, यहां वही ईश्वर अत्यंत शांत और आत्मीय रूप में अपने भक्तों के बीच विराजमान हैं। यह अनुभव शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं है।
अलारनाथ मंदिर श्री चैतन्य महाप्रभु की स्मृतियों से भी जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि जगन्नाथ के विरह में व्याकुल महाप्रभु अनवसर काल में यहीं आए थे और भगवान के दर्शन कर भाव-विभोर हो गए थे। मंदिर परिसर में आज भी उस पवित्र शिला को श्रद्धा से देखा जाता है, जिस पर उनके दंडवत प्रणाम की छाप होने की मान्यता है। मंदिर में दर्शन के बाद प्रसिद्ध खीर महाप्रसाद का स्वाद लेने का अवसर मिला। मिट्टी के पात्र में परोसी गई यह खीर केवल एक प्रसाद नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा और श्रद्धा का प्रतीक है। इसकी सादगी और स्वाद दोनों मन में बस गए।
इस पूरी यात्रा ने मुझे एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। रथयात्रा भगवान की लोकमंगल यात्रा है, जहां वे स्वयं अपने भक्तों के बीच आते हैं। वहीं अलारनाथ की यात्रा उस अंतरंग भक्ति का अनुभव कराती है, जहां श्रद्धालु और भगवान के बीच केवल प्रेम, विश्वास और आत्मिक संवाद रह जाता है।
जब मैं ब्रह्मगिरि से वापस पुरी लौट रहा था, तब मन में यही विचार था कि जगन्नाथ धाम की यात्रा केवल मंदिर दर्शन या रथयात्रा तक सीमित नहीं है। अलारनाथ जैसे तीर्थ इस आध्यात्मिक यात्रा को पूर्णता प्रदान करते हैं। यदि आप भी कभी जगन्नाथ पुरी जाएं, तो रथयात्रा और सुना बेस के दर्शन के साथ अलारनाथ अवश्य जाएं। संभव है कि वहां आपको केवल भगवान के दर्शन ही नहीं, बल्कि स्वयं से मिलने का अवसर भी मिल जाए।
भारत टेक्स ट्रेड फेडरेशन के सह-अध्यक्ष श्री भद्रेश दोधिया ने कहा, "अगले चार दिनों में 4,000 से अधिक B2B व्यावसायिक बैठकों तथा 30 से अधिक समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। भारत टेक्स 2026 को इस प्रकार तैयार किया गया है कि यह केवल संवाद का मंच न होकर, वास्तविक व्यावसायिक निर्णयों, निवेश प्रतिबद्धताओं और दीर्घकालिक साझेदारियों का केंद्र बने।"
इंडिया एक्सपोज़िशन मार्ट लिमिटेड (IEML) के अध्यक्ष एवं भारत टेक्स 2026 की कोर कमेटी के सदस्य डॉ. राकेश कुमार ने कहा, "स्टेट इन्वेस्टर कनेक्ट सत्रों से लेकर व्यापार, प्रौद्योगिकी, स्थिरता और शिल्प पर आधारित 100 से अधिक ज्ञान सत्रों तक, इस संस्करण को भारत के संपूर्ण वस्त्र पारिस्थितिकी तंत्र—बड़े निर्यातकों से लेकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) तक—की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। मुझे विश्वास है कि भारत टेक्स 2026 वह संस्करण सिद्ध होगा जिसने इस आयोजन को वैश्विक पहचान के नए शिखर तक पहुंचाया।"
सरकार और राज्यों की मजबूत सहभागिता
भारत टेक्स 2026 में सरकार की सक्रिय भागीदारी इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है। मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु प्रायोजक राज्यों (Sponsor States) के रूप में भाग ले रहे हैं। वहीं आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, मणिपुर, राजस्थान और पश्चिम बंगाल प्रदर्शक राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।
स्टेट इन्वेस्टर कनेक्ट से मिलेगा निवेश को नया प्रोत्साहन
केंद्र, राज्य सरकारों और उद्योग के बीच सहयोग को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से गुजरात, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पंजाब, बिहार, महाराष्ट्र, तेलंगाना और तमिलनाडु के लिए विशेष स्टेट इन्वेस्टर कनेक्ट सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें निवेश के अवसरों, औद्योगिक अवसंरचना, PM MITRA परियोजनाओं तथा नीतिगत सहयोग पर विशेष चर्चा होगी। गुजरात एवं उत्तर प्रदेश के लिए विशेष PM MITRA Master Developer Session भी आयोजित किया जाएगा।
व्यापार और निवेश रहेगा आयोजन का प्रमुख केंद्र
भारत टेक्स 2026 में 7,000 से अधिक वैश्विक खरीदार, 1.30 लाख से अधिक व्यापारिक आगंतुक, 1,600 से अधिक प्रदर्शक, 20,000 से अधिक वस्त्र उत्पाद तथा 16 लाख वर्गफुट से अधिक प्रदर्शनी क्षेत्र शामिल होगा।
भारत की संपूर्ण वस्त्र मूल्य श्रृंखला—फाइबर, यार्न, फैब्रिक, परिधान एवं फैशन, होम टेक्सटाइल्स, टेक्निकल टेक्सटाइल्स तथा सहायक उद्योगों—का व्यापक प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही तिरुपुर, इचलकरंजी और अहमदाबाद जैसे प्रतिष्ठित वस्त्र क्लस्टर्स भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, पुर्तगाल, स्पेन, न्यूज़ीलैंड, दक्षिण कोरिया, दक्षिण अफ्रीका और नेपाल सहित 14 देशों के अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शक भाग लेंगे। इसके अतिरिक्त संयुक्त राष्ट्र (UN) एवं यूरोपीय संघ (EU) का संस्थागत प्रतिनिधित्व भी रहेगा। आयोजन के प्रमुख उद्योग प्रायोजकों में Trident, Vardhman Textiles, RSWM, Shahi Exports, Colorjet, Arvind, PDS Limited और Sattva शामिल हैं।
4,000 से अधिक B2B बैठकें और 30 से अधिक समझौते
आयोजन के दौरान 4,000 से अधिक B2B बैठकें, 100 से अधिक B2G बैठकें तथा 30 से अधिक समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। ये समझौते व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, सतत विकास तथा वैश्विक बाजार तक पहुंच जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देंगे।
वैश्विक प्रतिनिधिमंडलों की प्रभावशाली भागीदारी
भारत टेक्स 2026 में 20 से अधिक देशों के 350 से अधिक अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ, उद्योग जगत के अग्रणी प्रतिनिधि, CXOs, नीति-निर्माता एवं विचारक भाग लेंगे। अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए विशेष इंटरनेशनल पवेलियन भी स्थापित किया गया है। न्यूज़ीलैंड, श्रीलंका, जॉर्डन, कंबोडिया और ब्रुनेई के मंत्रीस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों ने आयोजन में भागीदारी में रुचि दिखाई है। वहीं अमेरिका, जापान, स्पेन, ब्रिटेन, पुर्तगाल, रूस, दक्षिण अफ्रीका, न्यूज़ीलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, थाईलैंड, बांग्लादेश, श्रीलंका और म्यांमार सहित अनेक देशों के उद्योग एवं व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी आयोजन में शामिल होंगे। भारत-अमेरिका कपास साझेदारी, भारत-न्यूज़ीलैंड ऊन सहयोग, भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता (FTA), जापान उद्योग प्रतिनिधिमंडल तथा रूस-केंद्रित वस्त्र चर्चाएं इस संस्करण के प्रमुख द्विपक्षीय सत्र होंगे।
100 से अधिक ज्ञान सत्र
आयोजन के दौरान 100 से अधिक ज्ञान सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें 39 पैनल चर्चाएं, 16 राउंडटेबल, 37 मास्टरक्लास तथा 8 राज्य सत्र शामिल होंगे। 50 से अधिक ज्ञान सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से आयोजित इन सत्रों में व्यापार एवं निवेश, स्थिरता, इंडस्ट्री 5.0, नवाचार, टेक्निकल टेक्सटाइल्स, फैशन, नीति, वैश्विक सोर्सिंग तथा MSMEs की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श होगा।
CITI Textile Sustainability Awards 2026
भारत टेक्स 2026 के दौरान CITI Textile Sustainability Awards 2026 का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें संसाधन दक्षता, ऊर्जा एवं उत्सर्जन, परिपत्र अर्थव्यवस्था, सतत सामग्री, सामाजिक उत्तरदायित्व, उत्तरदायी व्यवसाय और उद्योग सहयोग जैसे सात प्रमुख क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले संगठनों को सम्मानित किया जाएगा।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से मिलेगा स्मार्ट बिजनेस अनुभव
प्रतिभागियों की सुविधा के लिए भारत टेक्स 2026 मोबाइल ऐप एवं Pre-Fair Directory को एकीकृत डिजिटल बिजनेस प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है। इनके माध्यम से प्रदर्शकों की जानकारी, बैठक निर्धारण, कार्यक्रम नेविगेशन, QR आधारित लीड कैप्चर, डिजिटल बैज, AI आधारित सहायता तथा खरीदार-विक्रेता के बीच पूर्व-निर्धारित बिजनेस मैचमेकिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
भारत के वस्त्र भविष्य का वैश्विक मंच
कल जब भारत टेक्स 2026 वैश्विक वस्त्र समुदाय के लिए अपने द्वार खोलेगा, तब यह केवल भारत की वस्त्र क्षमता का प्रदर्शन नहीं करेगा, बल्कि विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी, सुदृढ़ और सतत वस्त्र मूल्य श्रृंखलाओं के निर्माण के भारत के संकल्प को भी साकार करेगा। सरकार, उद्योग, निर्यातकों, निवेशकों, नीति-निर्माताओं और निर्माताओं को एक मंच पर लाकर यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को मजबूत करने, व्यापार एवं निवेश के नए अवसर सृजित करने तथा वैश्विक वस्त्र मूल्य श्रृंखला में भारत की विश्वसनीय भागीदार के रूप में स्थिति को और सुदृढ़ करेगा।
कबीर साहेब अंधविश्वास, पाखण्ड और आडम्बर का खुलकर विरोध करते थे। कबीर साहेब मूर्तिपूजा और नमाज को ढोंग मानते थे। मनुष्य को जीविकोपार्जन के लिए क्रियाशील रहने को उपासना और भक्ति कहते थे। उनके पद - झीनी झीनी बीनी चदरिया में भक्ति का कर्म रूप ही दिखाई देता है। स्वयं कबीर साहेब जुलाहा ( बुनकर ) जाति से थे, बुनाई से अर्थोपार्जन करते थे। कबीर साहेब मनुष्य के आचरण की शुद्धता और सादगी पर बल देते थे।
संगोष्ठी में आए अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए । अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि - कबीर साहेब का मानना था कि सदाचार और सद्गुणों से ही स्वच्छ समाज का निर्माण हो सकता है। कबीर साहेब ने अपने विचार आम बोलचाल की भाषा में व्यस्त किए। उनका मानना है कि आम आवाम तक अपने विचार पहुचाने के लिए उन्हीं की भाषा में बातचीत करने को प्रमुखता देते थे। साहित्य और दार्शनिक भाषा लोगों से दूरी बनाती है। वे विचारों के आदान प्रदान के लिए सरल प्रवाहमय भाषा को उचित मानते थे। इसीलिए वे संस्कृत भाषा की आलोचना करते हैं - संस्कृत है कूप जल भासा बहता नीर ।
कबीर साहेब कर्मकर भारतीय समाज और संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनमें बुद्ध का मानवतावादी दर्शन और नाथपंथ की सामाजिक एकता का प्रयास दोनों दिखाई देता है। कबीर साहेब इसीलिए प्रासंगिक हो रहे हैं क्योंकि उनके विचार आज के समाजिक वातावरण को मानवीय और सामाजिक एकता में बाँधे रहने के अनुकूल हैं।
वक्ता के रूप में पल्लवी प्रियदर्शनी ने कबीर साहेब को याद करते हुए कहा कि कबीर साहेब अहंकार विरोधी थे। उनका समाज दर्शन सर्व- समभाव का था। उनके विचारों में स्पष्टता है। उनके अनुसार सुखमय जीवन के लिए मनुष्य को अहंकार और उच्चता के मनोविकार का त्याग कर देना चाहिए। कबीर साहेब अपने समय में जितने लोकप्रिय थे आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। बाबा साहेब अंबेडकर ने कबीर साहेब को अपना आदर्श इसीलिए माना था कि कबीर साहेब सामाजिक भेदभाव और अलगाववाद के विरोधी थे। उन्होंने आगे कहा कि कबीर साहेब मानवीय प्रेम को श्रेष्ठ गुण मानते थे, वे कहते थे कि एक-दूसरे के प्रति मानवीय भावना ही मनुष्यता है।
कार्यक्रम के अंत में प्रोफेसर हंसराज सुमन ने कबीर साहेब के चिंतन और दर्शन से संबंधित उनके दोहों, साखियों और पदों का गायन किया। इस कार्यक्रम में राज पाल सिंह, अविनाश, घनश्याम भारती, श्री प्रसून पाटिल तथा मनीष ने भी अपने महत्वपूर्ण विचार रखे। अंत में धन्यवाद ज्ञापन पल्लवी प्रियदर्शनी ने किया।
भौतिकवादी विकास: हम सभी के लिए यह गौरव का विषय है कि विगत कुछ सदियों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मानव ने अभूतपूर्व प्रगति करते हुए विकास के अनेक नए आयाम स्थापित किए हैं और उद्देश्य मात्र यह रहा कि कैसे मानव जीवन को सुविधाजनक एवं विलासिता पूर्ण बनाया जावे। किंतु विडम्बना यह रही कि इस लक्ष्य को अर्जित करने की चाह में हम आँखे मूँदे, विकास की इस अंधी दौड़ में शामिल हो बैठे। हमने दिन प्रतिदिन शोधित, नवीनतम तकनीक को तथाकथित विकास का एक सरल माध्यम बना डाला। लेकिन यह सब करते समय, उससे होने वाले प्रदूषण, ग्लोबल वॉर्मिंग, पारिस्थितिक असंतुलन जैसे सम्भावित गम्भीर दुष्परिणामों को नज़रंदाज़ किया। हमने प्रकृति द्वारा प्रदत्त बहुमूल्य संसाधनों का बेतहाशा दोहन किया किंतु इस प्रक्रिया में अपनी जीवनदायिनी धरती माँ की पीड़ा को अनुभव करने का प्रयास नहीं किया। परिणामस्वरूप आज सम्पूर्ण विश्व प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं की गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है, और मानव सभ्यता स्वयं को इनके समक्ष असहाय अनुभव कर रही है। संभवतः यही कारण है कि ‘भौतिकवादी त्वरित विकास’ की इस निरंतर दौड़ में “विकास” शब्द के साथ अनजाने में "विनाश" शब्द भी जुड़ता चला गया
परिवर्तन की इस प्रक्रिया में यदि कोई कमी रही तो वह यह है कि हम सनातनवादी से भौतिकवादी होते चले गए। हमने भौतिकवादी होने की चाह में अपनी पुरातन सांस्कृतिक एवं वैदिक विरासत, उत्तम जीवन शैली, परिवार एवं संस्कारों, मूल्यों आदि को कहीं दरकिनार कर दिया। परिणाम स्वरुप समाज के हर वर्ग ने, उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों में मानवता, ईमानदारी, गुणवत्ता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं से समझौता करना आरम्भ कर दिया। जिसकी परिणिति के, आज आप और हम सभी साक्षी हैं।
सारांशतः इसी पीड़ा को व्यक्त करती निम्न पंक्तियाँ हैं :
विकास की अंधी दौड़ों में, हम संस्कारों को छोड़ रहे।उड़ने की इक चाहत में, रिश्ते-नाते सब तोड़ रहे।यों रोक नदी धारा को और काट धरा के वृक्षों को, कुल कायनात को नाप रहे, मंगल पर जीवन खोज रहे।पर जीवनदाई माँ वसुधा का, दामन ही हम निचोड़ रहे।है वक़्त अभी भी लौट चलो, लौटा दो सब इस धरती को,जिसे छीन, सभी हम दौड़ रहे।।
सुबह का भूला यदि शाम को घर लौट आए तो उसे भूला नहीं कहते। अतः अभी भी वक्त है कि हम समय रहते अपनी त्रुटियों को पहचानें और समाज के प्रत्येक क्षेत्र में उनका समुचित समाधान खोजने का सम्मिलित प्रयास करें यथा, शिक्षा, कार्य-क्षेत्र, घर, परिवार, समाज आदि, तो निस्संदेह हम समग्र और चिरस्थायी विकास की ओर बढ़ पाएँगे एवं इस धरती और इसके पर्यावरण को विनाश से बचा पाएंगे।
लेखक : डॉ. भारत प्रकाश सुनेजा सेवानिवृत्त प्रोफेसर एवं डीनराजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय, कोटा
● वर्षभर चलेंगे राष्ट्रीय अभियान
डॉ. सोलंकी ने बताया कि आगामी वर्ष में अभाविप निम्नलिखित विषयों पर देशव्यापी अभियान चलाएगी—
SEIL@60 (अन्तर्राज्यीय छात्र जीवन दर्शन कार्यक्रम के 60 वर्ष)
स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम अभियान
वंदे मातरम् के 150 वर्ष
आपातकाल निषेध के 50 वर्ष
श्री गुरु तेगबहादुर बलिदान दिवस के 350 वर्ष
संत रविदास जी के 650वें प्राकट्योत्सव
इन अभियानों के माध्यम से युवाओं में राष्ट्रीय एकात्मता, सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक समरसता एवं सकारात्मक जीवनशैली को प्रोत्साहित किया जाएगा।
● नीट-यूजी, सीयूईटी एवं राष्ट्रीय परीक्षाओं पर चिंता
प्रेस वार्ता में अभाविप ने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
मुख्य मांगें—
पेपर लीक और परीक्षा विसंगतियों के दोषियों पर कठोर कार्रवाई।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की भूमिका की निष्पक्ष जांच।
पूर्णतः पारदर्शी एवं तकनीकी रूप से सुरक्षित परीक्षा तंत्र का निर्माण।
विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के बीच उत्पन्न अविश्वास को दूर करने के लिए ठोस कदम।
डॉ. सोलंकी ने कहा कि लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
● त्रि-भाषा नीति के पूर्ण क्रियान्वयन की मांग
अभाविप ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप त्रि-भाषा नीति का स्वागत करते हुए कहा—
भारतीय भाषाओं में शिक्षा और परीक्षाओं को बढ़ावा दिया जाए।
राष्ट्रीय स्तर की अधिकाधिक परीक्षाएं भारतीय भाषाओं में आयोजित हों।
भाषाई विविधता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए बहुभाषी शिक्षा आवश्यक है।
विद्यार्थियों को मातृभाषा एवं भारतीय भाषाओं में समान अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
● अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने का आह्वान
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अभाविप उद्योग जगत से संवाद कर विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों में निवेश बढ़ाने का आग्रह करेगी।
प्रमुख सुझाव—
विश्वविद्यालयों में अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना।
उद्योग-प्रायोजित पीएचडी कार्यक्रमों को बढ़ावा।
स्टार्टअप एवं पेटेंट आधारित अनुसंधान को प्रोत्साहन।
भारतीय भाषाओं में अकादमिक लेखन एवं शोध कार्य के लिए विशेष अनुदान।
उद्योग, विश्वविद्यालय और शोध संस्थानों के बीच समन्वय बढ़ाना।
इसके लिए अभाविप का प्रतिनिधिमंडल उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों से भेंट करेगा।
● केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति की मांग
अभाविप ने देश के अनेक केंद्रीय विश्वविद्यालयों में रिक्त कुलपति पदों पर चिंता व्यक्त की।
मुख्य बिंदु—
13 से अधिक केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कुलपति पद रिक्त हैं।
प्रशासनिक एवं शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
अभाविप महामहिम राष्ट्रपति को पत्र लिखकर शीघ्र नियुक्ति की मांग करेगी।
डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद में पारित प्रस्ताव विकसित, सुरक्षित, आत्मनिर्भर एवं समृद्ध भारत के निर्माण के प्रति अभाविप की व्यापक दृष्टि को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा सुधारों को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करना समय की आवश्यकता है। महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान राष्ट्रीय प्राथमिकता होनी चाहिए। शहरी माओवाद जैसी चुनौतियों के प्रति समाज को सजग रहना होगा। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच राष्ट्रीय हित सर्वोपरि रहना चाहिए।
आज ट्रेलर रिलीज़ करना और ग्लोबल प्रीमियर का ऐलान करना पूरी टीम के लिए बहुत खुशी की बात है, क्योंकि दर्शकों को पहली बार उस दुनिया की झलक मिलेगी जिसे हम सालों से बड़ी मेहनत से तैयार कर रहे हैं। विजनरी फिल्म मेकर नागराज पोपटराव मंजुले के निर्देशन, बेहद टैलेंटेड अभय कोरान्ने की मेहनत और बेहतरीन कलाकारों के साथ बनी 'मटका किंग' उस तरह के क्रिएटिव रिस्क को दिखाती है जो हमें लगता है कि लेने चाहिए। हमें गर्व है कि हम प्राइम वीडियो के साथ मिलकर इस कहानी को पूरी दुनिया तक पहुँचा रहे हैं और हम 17 अप्रैल का इंतज़ार नहीं कर पा रहे हैं।"
राइटर, क्रिएटर और डायरेक्टर नागराज पोपटराव मंजुले ने कहा, " 'मटका किंग' सिर्फ एक पीरियड ड्रामा नहीं है। यह एक ऐसे आदमी की कहानी है जो सम्मान के लिए लड़ने और अपने सपनों को पूरा करने की हिम्मत करता है, और ऐसा करते हुए वह अपने आस-पास के पूरे सिस्टम को बदल देता है।
हर फ्रेम में तनाव, बड़े सपने और ऊंचे दांव नज़र आएंगे, जिसमें उस दौर के हिसाब से सटीक इंटीरियर, सामान, कपड़े और लाइटिंग का इस्तेमाल किया गया है ताकि किरदारों के इमोशनल सफर को और बेहतर दिखाया जा सके। रॉय कपूर फिल्म्स, आटपाट, एसएमआर एंटरटेनमेंट और प्राइम वीडियो के साथ जुड़कर इस विज़न को हकीकत में बदलने में मदद मिली। मैं चाहता हूँ कि 17 अप्रैल को दर्शक इस सीरीज की गहराई और रोमांच को खुद महसूस करें।"
इससे स्पष्ट है कि इस क्षेत्र में विस्तार की काफी संभावनाएँ मौजूद हैं यूनिटरी कूलिंग उत्पादों की हमारी नई रेंज, जिसमें कमर्शियल रेफ्रिजरेशन समाधान का व्यापक पोर्टफोलियो भी शामिल है हमें बढ़ते अवसरों का लाभ उठाने और आवासीय तथा व्यावसायिक दोनों ही क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करने में मदद करेगी प्रहली बार एसी अपनाने वाले ग्राहकों की बढ़ती संख्या और रेफ्रिजरेशन जरूरतों में हो रहे बदलाव जैसे बड़े रुझानों को ध्यान में रखकर हमने अपनी उत्पाद रणनीति तैयार की है। इससे ब्लू स्टार कूलिंग की बढ़ती मांग के अगले चरण में नेतृत्व करने के लिए अच्छी स्थिति में है।'
इची, जो एक थिएटर अभिनेत्री है, जब एक नए फ्लैट में रहने आती है, तो उसका सामना उस मक्खी से होता है। इची के पास प्लास्टिक के गुलाबों और सूरजमुखी के फूलों का एक गुलदस्ता है। किसी अजीब वजह से, उस मक्खी को प्लास्टिक के गुलाब पसंद आ जाते हैं और वह फ्लैट छोड़कर जाने से मना कर देती है।
मक्खी मारने वाले रैकेट लेकर, इची, उसके नाटक का निर्देशक और उसकी सह-अभिनेत्री मिलकर उस मक्खी को मारने की कोशिश करते हैं। वे मक्खी को मारने में कामयाब तो होते हैं, लेकिन उसे पूरी तरह खत्म नहीं कर पाते। फिर इची की एक अवास्तविक (surreal) पर्यावरणीय यात्रा शुरू होती है, जिसका अंत एक हत्या के साथ होता है। इची की प्रेम कहानी भी इस अवास्तविक यात्रा का ही एक हिस्सा बन जाती है।
अभिनेत्री दीपाली जैन ने बताया, डायरेक्टर जी किसी भी कहानी का खुलासा पहले नहीं करतें, वहीं उनकी भावनाये, कहानियो के साथ बढ़ती हैं, सवेदनशील मुद्दों और आत्मीयता को नजदीक से दिखाने में माहिर हैं, फ़िल्म 'प्लास्टिक रोज'ऐसी ही उनकी सोच को समर्पित हैं और में इस फ़िल्म का हिस्सा हूँ.
बबिता अशिवाल द्वारा यूनोइया फिल्म्स (Eunoia Films) के बैनर तले प्रोड्यूस की गई 'माँ का सम' एक दिल को छू लेने वाली प्राइम ओरिजिनल सीरीज है, जिसे निकोलस खारकोंगोर ने डायरेक्ट किया है और रविंदर रंधावा और सुमृत शाही ने लिखा है। अंगिरा के अलावा, इस सीरीज में मोना सिंह, मिहिर आहूजा और रणवीर बरार लीड रोल में हैं। 'माँ का सम' अब विशेष रूप से प्राइम वीडियो पर हिंदी में स्ट्रीम हो रही है, साथ ही तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम में सबटाइटल्स भी उपलब्ध हैं।
सोशल मीडिया के माध्यम से दिए गए जवाब में केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि एनईपी 2020 हिंदी थोपने के बारे में नहीं, बल्कि 'भाषाई मुक्ति' का एक विजन है। यह मातृभाषा को प्राथमिकता देती है ताकि तमिल भाषी बच्चे अपनी समृद्ध और गौरवशाली भाषा में शिक्षा प्राप्त कर वैश्विक स्तर पर उत्कृष्टता प्राप्त कर सकें।
प्रधान ने कहा कि बहुभाषावाद को खतरे के रूप में देखना गलत है। तमिल भाषा अतिरिक्त भाषाओं को सीखने से कमजोर नहीं, बल्कि समृद्ध होती है। मुख्यमंत्री का लचीली नीति को "अनिवार्य हिंदी" के रूप में पेश करना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।एनईपी न केवल सभी भारतीय भाषाओं को समान बढ़ावा देती है, बल्कि मौजूदा दो भाषा प्रणाली की सीमाओं को भी दूर करती है। सरकार 'समग्र शिक्षा' और शिक्षक प्रशिक्षण (NPST, NMM) के माध्यम से इसे जमीन पर उतार रही है।
श्री प्रधान ने लिखा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तमिल को 'राष्ट्रीय धरोहर' माना गया है। काशी तमिल संगमम जैसे आयोजनों ने तमिल संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई है। श्री प्रधान ने आरोप लगाया कि डीएमके सरकार वोट बैंक की राजनीति के लिए तमिल छात्रों को विविध अवसरों से वंचित कर रही है।
मंत्री ने डेटा का हवाला देते हुए कहा कि डीएमके सरकार ने ही एमओयू पर हस्ताक्षर न करके पीएम श्री स्कूलों का रास्ता रोका है। साथ ही, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद तमिलनाडु में नवोदय विद्यालयों के कार्यान्वयन में बाधा डालना गरीब और मेधावी छात्रों के साथ सीधा अन्याय है।
आशीष जैन, संस्थापक एवं निदेशक ने कहा कि उद्देश्य एक ऐसा मंच तैयार करना है जो स्थापित और उभरते दोनों क्षेत्रों के बीच सहयोग को बढ़ावा दे। उन्होंने कहा,"ऑटो टेक एशिया पूरे ऑटोमोबाइल इकोसिस्टम को एक साथ लाता है, जिसमें वाहन निर्माता, सप्लायर्स, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े सभी प्रमुख भागीदार शामिल हैं। हमारा फोकस ऐसे सार्थक इंडस्ट्री संवाद को सक्षम बनाना है जहां नवाचार से सहयोग को बढ़ावा मिले और सहयोग से दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित हो।"
यह प्रदर्शनी ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और विनिर्माण क्षेत्रों की अग्रणी कंपनियों को एक साथ लाएगी, जो पूरे उद्योग के व्यापक प्रतिनिधित्व को दर्शाएंगी, जिनमें शामिल हैं: ऑटोमोबाइल ओईएम और टियर-1 आपूर्तिकर्ता इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता और नवउद्यम बैटरी निर्माता और ऊर्जा भंडारण समाधान प्रदाता ऑटोमोबाइल कलपुर्जा और प्रणाली आपूर्तिकर्ता मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी, ऑटोमेशन और इंडस्ट्रियल सॉल्यूशन प्रोवाइडर सॉफ्टवेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स और कनेक्टेड मोबिलिटी से जुड़ी कंपनियां इस आयोजन में खरीद, उत्पादन, अनुसंधान एवं विकास और व्यवसायिक नेतृत्व से जुड़े प्रमुख निर्णयकर्ताओं के एक साथ आने की उम्मीद है जिससे एक केंद्रित व्यापार-से-व्यापार माहौल तैयार होगा।
ईवी टेक और बैटरी टेक से उद्योग को मिलेगी दिशा इन दोनों खंडों के एकीकरण के माध्यम से, यह प्रदर्शनी ऑटोमोबाइल निर्माण, विद्युतिकरण और ऊर्जा भंडारण को एक ही मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास करेगी, जो उद्योग के तेजी से एकीकृत होते स्वरूप को दर्शाता हैं।
ध्यातव्य हो कि "मदारी" 2017 से दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों को अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने हेतु एक मंच प्रदान कर रहा है । इस कला महोत्सव को मुख्य रूप से खिचड़ी(नुक्कड़-नाटक), धरोहर(ओपेन माईक) और ग्राम्या(प्रदर्शनी) तीन भागों में बाँटा गया है । कार्यक्रम के पिछले तीन दिनों में खिचड़ी में गार्गी महाविद्यालय, लेडी हार्डिंग, देशबंधु महाविद्यालय, केशव महाविद्यालय सहित कुल 38 टीमों ने नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति की, धरोहर के अंतर्गत दिल्ली विश्वविद्यालय के 100 से अधिक प्रतिभावान कवियों और गायकों ने अपनी प्रस्तुति की तथा ग्राम्या के अंतर्गत मिरांडा हाऊस, हिन्दू महाविद्यालय, दौलतराम महाविद्यालय सहित कुल 30 महाविद्यालयों के छात्रों ने अपनी प्रदर्शनी लगाई ।
अभाविप के राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने अपने वक्तव्य में कहा' मदारी वह मंच है जहाँ पर नाटक समस्या के साथ समाधान की दिशा भी दिखाता है । मदारी का यह कार्यक्रम कला, संगीत, नाटक, संस्कृति को बढ़ावा देने का कार्य करने का प्रतिबिंब के रूप में होता है। राष्ट्रीय कला मंच युवाओं को स्क्रीन टाइम से प्ले टाइम की दिशा में कार्य कर रहा है। जिससे युवा भारतीय कला, संस्कृति, संगीत की परंपरा के साथ देशहित में कार्य करने के लिए प्रेरित भी करता है। राष्ट्रीय कला मंच के राष्ट्रीय संयोजक अभिनव सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि मदारी केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि समाज की गहरी सच्चाईयों को उजागर करने वाला एक मंच है। यह संवेदनशील अभिव्यक्ति का सशक्त मंच है जिसका उद्देश्य केवल अभिनय करना नहीं बल्कि समाज को जागरूक करना है ।
शराब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है
साथी ही अभाविप दिल्ली प्रदेश के पुनर्निवाचित प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा,"आज जहां अन्य देशों में युवाओं को विखंडनकारी एवं नकारात्मक दृष्टिकोण के साथ देख रहा है वहीं भारत का युवा अभाविप जैसे राष्ट्र प्रथम का विचार रखने वाले संगठन के साथ खड़ा है और विकसित भारत की ओर अग्रसर है।अभाविप का यह प्रांत अधिवेशन विभिन्न वैचारिक, शैक्षणिक एवं संगठनात्मक सत्रों के माध्यम से छात्रशक्ति को राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रेरित करने तथा संगठन के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण हेतु महत्वपूर्ण दिशा प्रदान करेगा।”
इस वर्ष जेएनयू ओलंपिक 2.O की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जेएनयू ओलंपिक में इस वर्ष 2500 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 1600 के करीब थी। इसके अतिरिक्त वॉलीबॉल, बैडमिंटन, फुटबॉल, एथलेटिक्स (100 मीटर, 400 मीटर दौड़), गोला फेंक और लंबी कूद जैसी स्पर्धाओं में 500 से अधिक पदक (स्वर्ण, रजत और कांस्य) विजेताओं को आज सम्मानित किया गया। विशेष रूप से 'पैरा-गेम्स' के सफल आयोजन ने इस पूरे महोत्सव को समावेशी बनाया, जिसके लिए प्रतिभागियों को विशेष प्रशस्ति पत्र और पदक प्रदान किए गए।
समारोह के मुख्य अतिथि, अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि, "जेएनयू ओलंपिक केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा में युवाओं को अनुशासित करने का एक महा-अभियान है। खेल हमें हार को स्वीकार करना और जीत के लिए निरंतर परिश्रम करना सिखाते हैं। आज जेएनयू का छात्र जिस उत्साह के साथ मैदान पर उतरा है, वह इस बात का प्रमाण है कि राष्ट्रवादी विचारधारा युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह समर्पित है। अभाविप का ध्येय परिसरों में नकारात्मकता को समाप्त कर सकारात्मक और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का वातावरण बनाना है।" उन्होंने जोर देते हुए कहा कि 'स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम' जैसे प्रयास न केवल छात्रों के स्वास्थ्य में सुधार करेंगे, बल्कि उनमें टीम वर्क और 'राष्ट्र प्रथम' की भावना को भी पुख्ता करेंगे, जो एक विकसित भारत के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है।
भारतीय कबड्डी टीम के पूर्व कप्तान और अर्जुन अवॉर्डी दीपक निवास हुड्डा ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि, "जेएनयू जैसे संस्थान में खेलों के प्रति ऐसा जुनून देखना सुखद अनुभव है। एक खिलाड़ी के रूप में मैं कह सकता हूँ कि खेल से बड़ा कोई शिक्षक नहीं होता। यहाँ के खिलाड़ियों की ऊर्जा देखकर विश्वास होता है कि आने वाले समय में जेएनयू से भी राष्ट्रीय स्तर के एथलीट निकलेंगे।"
अभाविप जेएनयू इकाई के अध्यक्ष मयंक पंचाल ने कहा कि शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ खेलों में भी अपना परचम लहराना चाहते हैं और अभाविप जेएनयू उन विद्यार्थियों के लिए हमेशा से प्रयासरत है। मंत्री प्रवीण के. पीयूष ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि 21 से 24 जनवरी तक चला ओलंपिक जेएनयू के इतिहास में यह एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ा है। अभाविप लगातार खेलों के प्रति पूरी तरह से समर्पित है, चाहे वो जेएनयू ओलंपिक का आयोजन हो चाहे परिषद प्रीमियर लीग का आयोजन हो।
पीस प्रोग्राम की प्रिंसिपल कोऑर्डिनेटर साध्वी तपेश्वरी भारती जी ने कहा, “महाशिवरात्रि केवल एक अनुष्ठानिक रात्रि नहीं है, बल्कि यह आत्म जागरण, संतुलन और सचेत जीवन की प्रेरणा है। शिव आनंदम 3.0 के माध्यम से हमारा प्रयास है कि महादेव के शाश्वत ज्ञान को आज की पीढ़ी की भाषा-तकनीक, सहभागिता और अनुभव- के माध्यम से प्रस्तुत किया जाए, ताकि शिव केवल पूजित ही नहीं, बल्कि अनुभूत भी हों।"
इस सोच को आगे बढ़ाते हुए, सह-संयोजिका साध्वी निधि भारती जी ने कहा: "यह मंच अध्यात्म को ऐसा बनाना चाहता है जिसे लोग महसूस कर सकें, उसमें भाग ले सकें और जो आज के समय से जुड़ा हो। शिव आनंदम 3.0 दिखाता है कि हमारे प्राचीन सनातन मूल्य आज के जीवन में भी कैसे रास्ता दिखा सकते हैं- चाहे वह सेहत हो, रिश्ते हों, विज्ञान हो या पूरी दुनिया में आपसी सद्भाव-और वह भी अपनी पवित्रता बनाए रखते हुए।"
अपने नवाचार, अवधारणा और प्रस्तुति के साथ, शिव आनंदम 3.0 आधुनिक भारत में महाशिवरात्रि उत्सव की एक नई परिभाषा स्थापित करने जा रहा है।
डॉ. सुमित सिंह ने कहा, “अल्ज़ाइमर बीमारी भारत में एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है क्योंकि हमारी युवा आबादी अब वृद्धावस्था के चरण में जा रही है इसलिए इस बीमारी के ज्यादा होने की संभावना बढ़ रही है। अगर हम चाहते हैं कि इस बीमारी का इलाज और देखभाल प्रभावी ढंग से हो तो इसके लिए जरूरी है कि इस बीमारी का पता जल्दी चले और इसका निदान बहुत सटीक हो।” डॉ. एम.वी. पद्मा ने कहा, “ब्लड-बेस्ड बायोमार्कर को MRI और PET-CT इमेजिंग के साथ मिलाकर यह पैकेज समय पर बीमारी का पता लगाने, सही रेफरल और देखभाल की बेहतर योजना बनाने में मदद करता है। यह हमारे हेल्थकेयर सिस्टम की सक्रिय रूप से प्रतिक्रिया करने की क्षमता को मज़बूत करता है और परिवारों और समाज पर लंबे समय का बोझ कम करता है।”
अभी तक अल्ज़ाइमर के बायोमार्कर टेस्ट सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड सैंपल पर निर्भर थे। यह मरीजों के लिए ज्यादा मुश्किल प्रक्रिया थी। आज प्लाज़्मा-बेस्ड टेस्टिंग से हम एक सिंपल ब्लड टेस्ट के ज़रिए वही ज़रूरी जानकारी हासिल कर सकते हैं। इससे डायग्नोसिस आसान, सुरक्षित और मरीज़ों के लिए ज्यादा स्वीकार्य हो जाता है। महाजन इमेजिंग एंड लैब्स अब अपनी रेफरेंस लेबोरेटरी में pTAU/Aβ1-42 ब्लड बायोमार्कर टेस्ट करती है, जिससे तेज़ रिपोर्टिंग, इमेजिंग नतीजों के साथ बेहतर क्लीनिकल इंटीग्रेशन और मरीज़ों और डॉक्टरों दोनों के लिए बेहतर किफायती सुविधा मिलती है। महाजन इमेजिंग एंड लैब्स की लैब डायरेक्टर डॉ. शैली महाजन ने कहा, “ अभी तक अल्ज़ाइमर का पता क्लीनिकल लक्षणों के दिखने पर होता था। इससे अक्सर सही इलाज में देरी होती है। वहीं ब्लड-बेस्ड बायोमार्कर डॉक्टरों को अल्ज़ाइमर पैथोलॉजी की पहचान बहुत शुरुआती स्टेज में करने में मदद करते हैं। शुरुआती स्टेज में बीमारी का पता चलने से मरीज़ों और परिवारों के पास योजना बनाने, इलाज कराने और सोच-समझकर देखभाल के फैसले लेने का मौका होता है। इस टेस्टिंग और एनालिसिस को भारत में लाने से एक बड़ी रुकावट दूर होगी और भारतीय डायग्नोस्टिक्स को ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के अनुरूप बनाया जा सकेगा।”
विश्व स्तर पर अल्ज़ाइमर का डायग्नोसिस ज़्यादातर एमाइलॉयड PET इमेजिंग और सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (CSF) टेस्टिंग पर निर्भर करता है। भारत में अल्ज़ाइमर डायग्नोस्टिक्स के बारे में बात करते हुए महाजन इमेजिंग एंड लैब्स के फाउंडर और चेयरमैन ,पद्म श्री अवॉर्डी, डॉ. हर्ष महाजन ने कहा, "भारत में सीमित उपलब्धता और ज़्यादा खर्च, जोकि प्रति स्कैन दो लाख रुपये तक है, ने एमाइलॉयड PET टेस्ट आम लोगों की पहुँच से दूर कर दियाहै। इस कमी की वजह से कई डॉक्टर लक्षणों के नजर आने पर बीमारी पहचानते हैं। महाजन इमेजिंग एंड लैब्स के दृष्टिकोण की एक मुख्य खासियत लैब डायग्नोस्टिक्स को इमेजिंग के साथ जोड़ना है। ब्लड बायोमार्कर का 18F FDG के साथ कॉम्बिनेशन न केवल अल्ज़ाइमर के शुरुआती डायग्नोसिस में, बल्कि नए इलाज करा रहे मरीज़ों के फॉलो-अप में भी ट्रीटमेंट रिस्पॉन्स का आकलन करने में गेम-चेंजर साबित हो सकता है। इस सिम्पोज़ियम के निष्कर्ष न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ़ इंडिया को भेजे जाएंगे ताकि भारत में अल्ज़ाइमर के डायग्नोसिस और इलाज के लिए गाइडलाइंस बनाने में मदद मिल सके। इसका असर दुनिया के दूसरे हिस्सों में अल्ज़ाइमर की जल्दी पहचान करने के तरीकों पर भी पड़ सकता है।”
इस डेवलपमेंट पर टिप्पणी करते हुए महाजन इमेजिंग एंड लैब्स की न्यूक्लियर मेडिसिन और PET CT की डायरेक्टर डॉ. रितु वर्मा ने बताया, "ब्लड बायोमार्कर एक मज़बूत प्राइमरी डायग्नोस्टिक इंडिकेटर के तौर पर काम करता है, MRI ब्रेन इमेजिंग मेमोरी से जुड़े हिस्सों में स्ट्रक्चरल बदलावों का पता लगाने और कॉग्निटिव लक्षणों के दूसरे कारणों, जैसे स्ट्रोक, ट्यूमर या प्रेशर से जुड़ी गड़बड़ियों को दूर करने में अहम भूमिका निभाती है। PET इमेजिंग का उपयोग तब किया जाता है जब इससे मरीज के इलाज में स्पष्ट लाभ हो और बीमारी की सही पहचान करने में मदद मिले।”
इस डायग्नोस्टिक दृष्टिकोण के बारे में बताते हुए डॉ. वर्मा ने कहा, “इस इंटीग्रेटेड डायग्नोस्टिक विधि से मरीज़ में pTAU/Aβ1-42 ब्लड बायोमार्कर टेस्ट से शुरूआत होती हैं। टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आने या रिजल्ट संदिग्ध आने के बाद ज़रूरत पड़ने पर MRI ब्रेन और FDG PET CT किया जाता है। इसके बाद आगे के इलाज़ के लिए सभी टेस्ट रिपोर्ट को मिलाकर सही इलाज़ सुझाया जाता है। इलाज़ का यह फ्रेमवर्क खास तौर पर 50 साल से ज़्यादा उम्र के उन लोगों के लिए ज़रूरी होता है जिन्हें याददाश्त की समस्या हैं, हल्के कॉग्निटिव इंपेयरमेंट (MCI) के लक्षण हैं, या जिनके परिवार में अल्ज़ाइमर बीमारी किसी को रह चुकी हो, और ऐसे केसों में जहां एडवांस्ड इमेजिंग की सुविधा नहीं होती है वहां यह दृष्टिकोण फायदेमंद होता है।”
डायग्नोसिस में इस नई सुविधा के आने से महाजन इमेजिंग एंड लैब्स सटीक डायग्नोस्टिक्स में अपनी भूमिका को और ज्यादा मज़बूत किया है। इस नए डायग्नोस्टिक दृष्टिकोण से डॉक्टरों को इंटीग्रेटेड, साइंस-आधारित टूल मिलते हैं जो अल्ज़ाइमर का जल्दी, ज़्यादा स्पष्ट और ज़्यादा भरोसेमंद डायग्नोसिस करते हैं। डायग्नोसिस की यह सुविधा अल्जाइमर मरीजों के परिवारों के लिए बहुत राहत भरी ख़बर है।
स्कॉलर प्राची मिश्रा, इकोनॉमिक्स की प्रोफेसर और डायरेक्टर, आइज़ैक सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी, अशोका यूनिवर्सिटी,डॉ. लवीश भंडारी, प्रेसिडेंट और सीनियर फेलो, सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक, प्रोग्रेस नीलकंठ मिश्रा, चीफ इकोनॉमिस्ट, एक्सिस बैंक और हेड ऑफ ग्लोबल रिसर्च, एक्सिस कैपिटल पैनल में जाने-माने इकोनॉमिस्ट भी उपस्थित रहें, सुधांशु त्रिवेदी सांसद भाजपा ने कहा रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स एक बुनियादी सवाल पूछता है- कोई देश अपनी पावर का इस्तेमाल कितनी ज़िम्मेदारी से करता है? बिना ज़िम्मेदारी के खुशहाली टिकाऊ नहीं है।आरएनआई नैतिक शासन, मानवीय विकास और ग्लोबल मैनेजमेंट को बढ़ावा देना चाहता है।"
देवलापार ग्रामीण अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय मेश्राम ने प्रकाश डालते हुए कहा,“यह सहयोग हमारे अस्पताल की आपातकालीन तैयारियों को मजबूत करता है और एनएच-44 पर सड़क दुर्घटनाओं में घायल हुए मरीजों को सीधे तौर पर लाभ पहुँचाएगा। ग्रामीण स्तर पर आघात देखभाल सेवाओं को सुदृढ़ करने में सेवलाइफ फाउंडेशन और पार्ले बिस्कुट प्राइवेट लिमिटेड के प्रयासों की हम सराहना करते हैं।” एनएच-353डी और एनएच-44 पर यातायात बहुत अधिक रहता है और यहाँ गंभीर सड़क दुर्घटनाओं का खतरा अधिक रहता है। जनवरी-नवंबर 2025 के बीच, एनएच-44 पर सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में पिछले वर्ष की तुलना में 104% की वृद्धि दर्ज की गई, जो 2024 में 24 से बढ़कर 2025 में 49 हो गईं। वहीं, एनएच-353डी पर मौतों में पिछले वर्ष की तुलना में 10% की कमी दर्ज की गई, जो 2024 में 30 से घटकर 2025 में 27 रह गईं। कुल मिलाकर, नागपुर ग्रामीण क्षेत्र के उच्च मृत्यु दर वाले गलियारों में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में पिछले वर्ष की तुलना में 7.3% की वृद्धि दर्ज की गई, जो जनवरी-नवंबर 2024 के बीच 233 से बढ़कर इस वर्ष इसी अवधि में 250 हो गईं। ग्रामीण अस्पतालों को आवश्यक शल्य चिकित्सा और आपातकालीन देखभाल उपकरणों से लैस करके, इस पहल का उद्देश्य आघात देखभाल की तैयारियों में सुधार करना और सड़क दुर्घटनाओं के कारण होने वाली रोकी जा सकने वाली मौतों और गंभीर चोटों को कम करना है।
पारले बिस्कुट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) प्रयासों के तहत समर्थित, जीरो फैटैलिटी कॉरिडोर कार्यक्रम उन्नत दुर्घटना डेटा विश्लेषण, सामुदायिक सहभागिता, बेहतर आघात देखभाल और क्षमता निर्माण के माध्यम से उच्च जोखिम वाले राजमार्गों को सुरक्षित गलियारों में बदलने पर केंद्रित है।उमरेड ग्रामीण अस्पताल और देओलापार ग्रामीण अस्पताल को महत्वपूर्ण शल्य चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने की पहल से सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए आपातकालीन देखभाल की तैयारी और समय पर उपचार सुनिश्चित होगा। जीरो फैटैलिटी कॉरिडोर कार्यक्रम के तहत यह पहल रोकी जा सकने वाली मौतों को कम करने और अधिक प्रभावी आपातकालीन देखभाल प्रणाली के निर्माण की दिशा में एक कदम है।
इस पहल के बारे में बात करते हुए, सेवलाइफ फाउंडेशन की कार्यक्रम प्रमुख डॉ. इलिया जाफर ने कहा, ”विशेषीकृत आघात देखभाल सुविधाओं की अनुपलब्धतादुर्घटनास्थलों के निकट स्थित अस्पताल सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों का एक प्रमुख कारण है। उमरेड ग्रामीण अस्पताल और देओलापार ग्रामीण अस्पताल की आपातकालीन चिकित्सा और आघात संबंधी देखभाल प्रदान करने की क्षमता को मजबूत करके, हम बेहतर उत्तरजीविता परिणामों को प्राप्त करने के प्रति आश्वस्त हैं।” सेवलाइफ फाउंडेशन भारत के राजमार्गों पर शून्य मौतों के लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से डेटा-आधारित साक्ष्यों का लाभ उठाते हुए सड़क सुरक्षा और आघात देखभाल के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि,"अभाविप अपनी विशिष्ट कार्यपद्धति के कारण आज विश्व का सबसे बड़ा विद्यार्थी संगठन बनकर उभरी है। इस बैठक में देशभर से आए विद्यार्थी परिषद के प्रमुख कार्यकर्ता गत तीन से चार माह में किए गए अभियानों एवं कार्यक्रमों की समीक्षा करेंगे तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा करेंगे। गोवा की यह भूमि केवल भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। बैठक में शिक्षा से जुड़े गंभीर विषयों पर भी गहन विमर्श हुआ। देशभर के शैक्षिक परिसरों में व्याप्त अनियमितताएँ, अनैतिक शुल्क वृद्धि, तथा छात्रावासों की स्थिति जैसे मुद्दों पर अभाविप ने अपनी स्पष्ट चिंता व्यक्त की है। इन्हीं विषयों के समाधान हेतु आगामी फरवरी माह से देशभर में ‘छात्रावास सर्वेक्षण अभियान’ चलाया जाएगा, जिसके माध्यम से जमीनी वास्तविकताओं को सामने लाकर ठोस हस्तक्षेप किया जाएगा।
राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर प्रारंभ किए गए ‘स्क्रीन टाइम से एक्टिविटी टाइम’ अभियान के माध्यम से युवाओं को डिजिटल लत से बाहर निकालकर खेल, समाजसेवा, रचनात्मक एवं शारीरिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यह अभियान युवाओं के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके अतिरिक्त, गुरु तेग बहादुर जी के 350वें बलिदान दिवस, महारानी अब्बक्का के 500वें राज्यारोहण वर्ष, भगवान बिरसा मुंडा जी की 150वीं जन्म जयंती, वंदे मातरम् के 150 वर्ष तथा संघ शताब्दी वर्ष जैसे ऐतिहासिक अवसरों के माध्यम से छात्रसमाज में राष्ट्रबोध, सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक आत्मगौरव को और अधिक सशक्त किया जाएगा।"
कार्यक्रम की अध्यक्षता दैनिक भास्कर के समूह संपादक प्रकाश दुबे ने की। मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नाशिक के निदेशक नीलाभ तिवारी रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में कर्मचारी राज्य बीमा निगम, नाशिक के संयुक्त निदेशक चंद्रशेखर आर. पाटिल और कर्नल राजेश सक्सेना उपस्थित रहे। संस्था के अध्यक्ष सुबोध कुमार मिश्रा ने विद्योतमा फाउंडेशन की स्थापना, उद्देश्यों और कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि संस्था की इकाइयाँ लखनऊ, कानपुर, इंदौर, नागपुर और दिल्ली में स्थापित हो चुकी हैं।
देशभर से चयनित विभिन्न विधाओं की 31 श्रेष्ठ कृतियों के रचनाकारों को अलग-अलग साहित्यिक सम्मानों से नवाजा गया। प्रमुख रूप से राजवीर सिंह सिकरवार, सरोजिनी तन्हा, ज्ञानचंद मर्मज्ञ, प्रमोद भार्गव, डॉ. जया आनंद, डॉ. जीनत अहसान कुरैशी, प्रो. मनोज कुमार कैन, विनोद नागर, डॉ. रुखसाना सिद्दीकी, मीना कौशल, संगीता, मंजू गुप्ता, पूर्णिमा ढिल्लन, सुनील दुबे, दीपमाला महेश्वरी, जितेंद्र कुमार तिवारी सहित अन्य साहित्यकार सम्मानित हुए।
इसके अलावा नेहा तुषार बोरसे को आईसीएसई बोर्ड की दसवीं परीक्षा में हिंदी में 98 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर विद्योतमा बालिका सम्मान, प्रसिद्ध धाविका संजीवनी जाधव को विद्योतमा खेल रत्न तथा कर्नल शिवनारायण मिश्र को विद्योतमा सेना रत्न सम्मान प्रदान किया गया। इस वर्ष कुल 78,600 रुपये की पुरस्कार राशि वितरित की गई।
कार्यक्रम का संचालन भरत सिंह, सी.पी. मिश्रा और अनीता दुबे ने किया। दूसरे सत्र में कवियों की रचनाओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। बड़ी संख्या में भारतीय सैनिकों की उपस्थिति ने समारोह की गरिमा बढ़ाई। अंत में बी.सी. मुनगली ने अतिथियों एवं सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
जैसे-जैसे भारत की डिजिटल और एआई-आधारित अर्थव्यवस्था तेज़ी से आगे बढ़ रही है, कंपनियों को ऐसे प्रोफेशनल्स की ज़रूरत है जिन्हें प्रोग्रामिंग की अच्छी समझ हो, एआई और मशीन लर्निंग टूल्स का ज़िम्मेदारी से उपयोग करना आता हो और जो वास्तविक प्रोजेक्ट्स पर काम कर सकें। ये प्रोग्राम नए छात्रों, वर्किंग प्रोफेशनल्स और नॉन-टेक्निकल बैकग्राउंड से आने वाले लोगों के लिए भी उपयोगी होंगे। पढ़ाई लाइव क्लासेज़ और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग के ज़रिए कराई जाएगी। हर प्रोग्राम के अंत में एक कैपस्टोन प्रोजेक्ट होगा, जिससे प्रतिभागी अपनी स्किल्स का एक मजबूत पोर्टफोलियो तैयार कर सकेंगे और वास्तविक बिज़नेस समस्याओं के समाधान पर काम करने का अनुभव पाएंगे।
इस पहल पर बोलते हुए, प्रो. संजीव मनहास, चीफ इन्वेस्टिगेटर, E&ICT अकादमी, आईआईटी रुड़की ने कहा, “आज के डिजिटल दौर में ऐसे प्रोफेशनल्स की आवश्यकता है जो एआई, मशीन लर्निंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कौशल का उपयोग वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने में कर सकें। E&ICT अकादमी के माध्यम से आईआईटी रुड़की का उद्देश्य अकादमिक और उद्योग जगत के बीच सहयोग को मजबूत करना है, ताकि विद्यार्थी न केवल उभरती तकनीकों को समझें, बल्कि उनका जिम्मेदारीपूर्ण और व्यावहारिक उपयोग भी कर सकें। ये कार्यक्रम भारत की भविष्य की कार्यबल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्राथमिक तकनीकी क्षेत्रों में कौशल विकास को समर्थन देते हैं।”
प्रो. के. के. पंत, निदेशक, आईआईटी रुड़की ने कहा, “उच्च शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में अपनी राष्ट्रीय जिम्मेदारी के तहत आईआईटी रुड़की उभरती डिजिटल और एआई आधारित तकनीकों में क्षमता निर्माण पर विशेष ज़ोर देता है। E&ICT एकेडमी के माध्यम से संस्थान ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लगातार मजबूत कर रहा है, जो अकादमिक सख्ती को व्यावहारिक अनुभव के साथ जोड़ते हैं। इस प्रकार
उद्घाटन समारोह में BJS के संस्थापक शांति लाल मुथा, राष्ट्रीय अध्यक्ष नंद किशोर, मैनेजिंग डायरेक्टर कोमल जैन, BJS दिल्ली एनसीआर के अध्यक्ष डॉ. कमल जैन सेठिया सहित संगठन के अनेक राष्ट्रीय एवं प्रांतीय पदाधिकारी मौजूद रहे। स्वागत भाषण में डॉ. कमल जैन सेठिया ने बताया कि BJS के माध्यम से अब तक देशभर में तीन लाख से अधिक निःशुल्क प्लास्टिक सर्जरी कराई जा चुकी हैं और यह शिविर उसी सेवा परंपरा की निरंतरता है।
संस्थापक शांति लाल मुथा ने कहा कि BJS के सभी कार्यक्रम राष्ट्र को समर्पित हैं और संगठन सेवा, करुणा एवं मानवता के मूल्यों के साथ समाज को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नंद किशोर ने BJS दिल्ली के सेवा कार्यों की सराहना की। मैनेजिंग डायरेक्टर कोमल जैन ने कहा कि संगठन भविष्य में स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में अपने प्रयासों को और विस्तार देगा।
इस अवसर पर BJS ईस्ट दिल्ली चैप्टर एवं BJS दिल्ली फेमिना विंग का शपथ ग्रहण समारोह भी आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 500 से अधिक BJS सदस्य, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह भगवंत मान ही हैं जो बार-बार अनादर के काम कर रहे हैं। सरना ने मुख्यमंत्री द्वारा बेअदबी के एक पैटर्न का जिक्र किया, जिसमें शराब से संबंधित एक वीडियो प्रसारित होना,जो सिख प्रतीकों का मजाक उड़ाता है, संत जरनैल सिंह भिंडरांवाले और सिख गुरुओं के प्रति अनादर दिखाना, गुरु के गोलक के खातों पर सवाल उठाना, जबकि अपनी ही सरकार के तहत करोड़ों रुपये की लूट पर चुप रहना, श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता को चुनौती देना, और कार्यवाहक जत्थेदार, ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज्ज के खिलाफ अपमानजनक और नीच भाषा का इस्तेमाल करना शामिल है।
उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा बुलाए जाने के बाद लाइव टेलीकास्ट की मांगों सहित शर्तें रखने के लिए भी मान की आलोचना की, इसे अहंकार का खुला प्रदर्शन बताया। सरना ने कहा कि यह रवैया आमआदमी पार्टी की सिख धर्म के धर्म के प्रति व्यापक दुश्मनी को दिखाता है, उन्होंने दिल्ली विधानसभा के अंदर मान की पूर्व दिल्ली समकक्ष आतिशी द्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब के खिलाफ पहले की गई अपमानजनक टिप्पणियों का हवाला दिया। उन्होंने कहा, "यह वही शहरी नक्सली मानसिकता है जो धर्म का मज़ाक उड़ाती है और पवित्र संस्थानों पर हमला करती है।
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पिछले चार सालों में बेअदबी की 100 से ज़्यादा घटनाएं हुई हैं, जिसमें सुल्तानपुर लोधी के एक गुरुद्वारे के अंदर पुलिस द्वारा फायरिंग, आपके विधायक पर बेअदबी के आरोप, पूर्व मुख्यमंत्री पर आरोप, और श्री अखंड पाठ साहिब में रुकावट शामिल है, लेकिन सरकार ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। सरना ने भाई ईश्वर सिंह रिपोर्ट की ओर भी इशारा किया जिसमें बाइंडर जसप्रीत सिंह को मुख्य आरोपी बताया गया था, और आरोप लगाया कि कार्रवाई करने के बजाय, आप सरकार ने उसे कई राजनीतिक पदों से नवाज़ा है।
आगे सवाल उठाते हुए, सरना ने पूछा कि प्रमुख धार्मिक नेता और संगठन सिख संस्थानों पर व्यवस्थित हमलों के सामने क्यों चुप हैं। उन्होंने कहा कि मान सरकार की कार्रवाई के पीछे असली मकसद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के कामकाज में दखल देना और सरदार सुखबीर सिंह बादल को झूठे मामलों में फंसाना है। सरना ने कहा, "मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी को समझना चाहिए कि सरदार बादल एक नाकाम सरकार की गीदड़ जैसी धमकियों से डरने वाले नहीं हैं," उन्होंने कहा कि ये कार्रवाई शिरोमणि अकाली दल के फिर से मज़बूत होने से घबराई हुई सरकार की घबराहट को दिखाती है। उन्होंने कहा, "पंजाब के लोगों के समर्थन और आशीर्वाद से, हम इस सरकार का सामना करेंगे और इसका असली चेहरा बेनकाब करेंगे।"
सत्या साची में साची की भूमिका निभा रहीं भाग्यश्री मिश्रा ने कहा, "मकर संक्रांति मुझे इसलिए खास लगती है, क्योंकि यह नई शुरुआत और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। बचपन की वो यादें आज भी मन को खुश कर देती हैं, यानि रंगीन पतंगें उड़ाना और फिर कटी हुई पतंगों के पीछे पूरे जोश के साथ दौड़ना। वह मस्ती अब सोचने पर और भी खास लगती है। आज हम सब बड़े हो गए हैं और काम की वजह से समय कम मिल पाता है, लेकिन यदि इस साल मौका मिला तो हम 'सत्या साची' के सेट पर पतंग जरूर उड़ाएँगे और साथ में कुछ खुशनुमा पल बिताएँगे।"
प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी में घेवर का किरदार निभा रहीं गौरी शेलगांवकर ने अपने दिल की बात साझा करते हुए कहा, "मेरे लिए मकर संक्रांति हमेशा सादगी भरी खुशियों का त्यौहार रही है, जिसमें परिवार के साथ खाना, हँसी-मजाक करना और लोगों को बाँटकर खाने की कला को सीखना। मुझे याद है, बड़े हमें तिल-गुड़ देते हुए कहते थे कि हमेशा मीठा बोलो, सकारात्मक सोचो और खुश रहो। इस साल मैं सादगी से त्यौहार मनाऊँगी, अपने करीबियों को फोन करुँगी और उनके प्यार व सपोर्ट के लिए उन्हें धन्यवाद कहूँगी। साथ ही, मेरी माँ के हाथों से बने तिल के लड्डू 'प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी' के सेट पर ले जाकर सबके साथ बाटूँगी। बचपन में अपने पापा के साथ पतंग उड़ाने की यादें आज भी दिल को छू जाती हैं, वह पूरा दिन हमारे साथ पतंग उड़ाते थे।"
देखिए दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी शाम 7:30 बजे, सत्या साची शाम 8:00 बजे, प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी- रात 9:00 बजे, सिर्फ सन नियो पर।