अधिवेशन के प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनी "रानी अब्बक्का प्रदर्शनी" का उद्घाटन भी आज मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पतंजलि योग ट्रस्ट के महासचिव आचार्य बालकृष्ण एवं उत्तराखण्ड के शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत द्वारा किया गया, जिसका थीम "देवभूमि से राष्ट्रभूमि तक - उत्तराखण्ड के 25 वर्षों की यात्रा एवं विजन 2047 के संदर्भ में राष्ट्रीय पुनर्जागरण" है।
रानी अब्बक्का की 500वीं जन्म शताब्दी के अवसर पर कर्नाटक स्थित उनकी जन्मस्थली से निकाली गई 3000 किलोमीटर लंबी "रानी अब्बक्का कलश यात्रा" एवं भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जन्म जयंती के अवसर उनकी जन्मस्थली उलिहातु, झारखंड से निकाली गई "भगवान बिरसा संदेश यात्रा" आज भगवान बिरसा मुंडा नगर पहुंची है, जहां इनके भव्य स्वागत के पश्चात यात्रा में लाए गए जल व मिट्टी के कलशों को प्रांगण में स्थापित किया गया।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो राजशरण शाही ने राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक के उद्घाटन सत्र में कहा कि,"अभाविप ने शैक्षिक, सामाजिक व अन्य क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया है। अभाविप की यह बैठक ज्ञान, साधना, संस्कार और गंगा-यमुना के उद्गम स्थल की भूमि पर आयोजित की जा रही है, जिससे हम सभी के भीतर भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा है। भारतीय संस्कृति के अनुरूप भारतीय युवाओं का मानस बने इसके लिए भारतीय मूल्यों के आधार पर नेतृत्व आवश्यक है और अभाविप इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है।"
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि, "अभाविप की इस राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक में देशभर से आए कार्यकर्ताओं ने संगठनात्मक और कार्यक्रयात्मक विषयों पर विचार-विमर्श किया। इस बैठक और अधिवेशन के माध्यम से विद्यार्थी परिषद के कार्य को तेज़ गति मिलने वाली है। बैठक में आए प्रतिनिधि कार्यकर्ता अपने केंद्रों पर सम्पूर्ण दृढ़ता और प्रतिबद्धता के साथ काम कर सभी शैक्षिक संस्थानों एवं समाज तक विद्यार्थी परिषद का संदेश पहुंचाएंगे। एक नई ऊर्जा और दृढ़ संकल्प के साथ विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता आगे बढ़ेंगे और निश्चित रूप में देशभर में छात्रशक्ति तीव्र गति से आगे बढ़ने वाली है।"
इस सेवा की मुख्य सुविधाएँ:
जरूरी मेडिकल सामान को समय पर और सुरक्षित तरीके से पहुँचाना
ऐसे उत्पादों के लिए खास पैकेजिंग का इस्तेमाल करना जिन्हें ठंडा या नियंत्रित तापमान में रखना जरूरी हो।
शुरुआत में यह सेवा 50 बड़े शहरों में शुरू की जाएगी, और बाद में इसे पूरे भारत में फैलाया जाएगा। इससे इस क्षेत्र में मूवीन की मजबूत मौजूदगी दिखती है।
मोविन का क्वालिटी एश्योरेंस सिस्टम सख्त सुरक्षा नियमों का पालन करता है। इसमें गलतियों को रोकने और सुधारने (कैपा) की प्रक्रिया और किसी भी घटना की पारदर्शी रिपोर्टिंग शामिल है। यह नई सुविधा हेल्थकेयर क्षेत्र में ज्यादा भरोसा और जिम्मेदारी लेकर आएगी। अपनी बेहतर लॉजिस्टिक्स क्षमता के साथ, मूवीन हेल्थकेयर ज़रूरी मेडिकल सामान को अस्पतालों और हेल्थकेयर सेवाओं तक तेज़ और सही तरीके से पहुँचाएगा। इससे मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा, यही इस नई विशेष सेवा का उद्देश्य है।
इस साल के अभियान का एक प्रमुख आकर्षण "मायोपिया प्रतिज्ञा– राष्ट्रीय मायोपिया सप्ताह 2025" था। यह आधिकारिक वेबसाइट www.nationalmyopiaweek.org पर आयोजित किया गया था। इस पहल के जरिए अभिभावकों को अपने बच्चों की साल में एक बार आंखों की जांच कराने और अपने समुदायों में मायोपिया की रोकथाम के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिबद्ध होने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इस राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान के तहत प्रतिभागियों को आधिकारिक मायोपिया प्रतिज्ञा प्रमाणपत्र भी डाउनलोड करने का मौका मिला।
एसएएम आई हॉस्पिटल लखनऊ की डॉ. आरती एलहांस ने बचाव के तौर पर आंखों की देखभाल की तुरंत ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा, “लखनऊ में हम 6 से 8 साल के बच्चों में भी मायोपिया के केस तेज़ी से देख रहे हैं, खासकर पिछले कुछ सालों में डिजिटल इस्तेमाल बढ़ने के बाद ऐसे केस ज्यादा आने लगे हैं। स्कूलों और माता-पिता को इस ट्रेंड को गंभीरता से लेना चाहिए। रेगुलर आंखों की जांच, स्क्रीन पर कम समय बिताना और बाहर ज्यादा है समय बिताना बहुत ज़रूरी है। हम लखनऊ में माता-पिता को सलाह देते हैं कि वे इस बीमारी को जल्दी पता लगाने को प्राथमिकता दें, क्योंकि समय पर इलाज से मायोपिया का बढ़ना काफी धीमा हो सकता है।”
पिछले तीन सालों में राष्ट्रीय मायोपिया सप्ताह अभियान सोशल मीडिया पहलों, प्रेस कवरेज और स्कूल जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से पूरे भारत में लाखों अभिभावकों, शिक्षकों और बच्चों तक पहुँच चुका है। इस साल एंटोड का लक्ष्य और भी ज़्यादा दर्शकों तक पहुँचना है। इसके अलावा एंटोड का उद्देश्य अपनी गतिविधियों का विस्तार 450 जिलों तक करके और स्कूलों तथा समुदायों को शामिल करके देश भर में 7 करोड़ से ज़्यादा लोगों तक पहुँचना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए संगठन ने देश भर में जागरूकता गतिविधियों में सहायता के लिए 2,500 से ज़्यादा डॉक्टरों और 5,000 वॉलंटियर्स को नियुक्त किया गया है। इनमें नेत्र विशेषज्ञ द्वारा संचालित, स्कूल-आधारित शैक्षिक सत्र, विजन स्क्रीनिंग कैंप और नेत्र स्वास्थ्य पर इंटरैक्टिव वर्कशॉप शामिल हैं। क्लीनिक और हॉस्पिटल स्तर पर मरीजों को प्रिवेंटिव आई हेल्थ (निवारक नेत्र देखभाल) पर मार्गदर्शन के साथ क्षेत्रीय भाषाओं में सूचनात्मक पत्रक प्राप्त होंगे।
एंटोंड फार्मास्यूटिकल्स के एक्जीक्यूटिव डॉयरेक्टर निखिल के. मसुरकर ने सक्रिय कार्रवाई के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “मायोपिया का ग्लोबल ट्रेंड बहुत चिंताजनक हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि 2050 तक दुनिया की लगभग आधी आबादी मायोपिया से प्रभावित हो सकती है। #OperationMyopia के साथ हमारा मिशन एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन बनाना है जो प्रारंभिक नेत्र जांच को बढ़ावा दे और परिवारों को बच्चों के आंखों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए सशक्त बनाए।”
इन प्रयासों के साथ ही दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, वाराणसी, अहमदाबाद, वडोदरा, कोयंबटूर, पुणे, पटना और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में रेडियो कार्यक्रमों और स्थानीय जागरूकता अभियानों का आयोजन किया जाएगा, ताकि आंखों की सेहत से जुड़ा संदेश देश के अलग-अलग समुदायों तक पहुंच सके। रेड एफएम के सहयोग से चलाए जा रहे ये शहर-स्तरीय अभियान लोगों की भागीदारी बढ़ाने और इस पहल को और मजबूत बनाने का लक्ष्य रखते हैं। मायोपिया एक बढ़ती हुई वैश्विक स्वास्थ्य समस्या बन गई है। एंटोड फ़ार्मास्युटिकल्स जागरूकता, इनोवेशन और रोकथाम के ज़रिए इससे निपटने के लिए लगातार काम कर रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों की आंखों की रोशनी सुरक्षित रखी जा सके।
क्यूरेटेड कॉर्पोरेट सैलरी प्रोग्राम, जिसे विशेष रूप से फंडेड स्टार्ट-अप और डिजिटल व्यवसायों के कर्मचारियों के लिए डिज़ाइन किया गया है, इसमें सुविधा, जीवनशैली और फाइनेंशियल वेलनेस को ध्यान में रखते हुए कई लाभ दिए गए हैं, जैसे: जीरो-बैलेंस सेविंग्स अकाउंट, व्यापक इंश्योरेंस कवरेज, एक्सक्लूसिव क्रेडिट कार्ड प्रिविलेज, और पर्सनलाइज़्ड लोन ऑप्शंस शामिल हैं। यह प्रोग्राम जेन जी और जेन अल्फा वर्कफोर्स की जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य जांच, फिटनेस, यात्रा, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़े कई लाभ प्रदान करता है।
अपने 'स्विच टू सेव' फ़ीचर के माध्यम से, यह प्रोग्राम कर्मचारियों को बेहतरीन मूल्य भी देता है, जिससे खाते के प्रकार के आधार पर 46,000 रुपये से 2.4 लाख रुपये तक की वार्षिक बचत कर सकते हैं। ये विशेष लाभ इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक वेतन खाताधारक की वित्तीय भलाई को बेहतर बनाने के लिए तैयार किए गए हैं।लॉन्च पर टिप्पणी करते हुए, एक्सिस बैंक के ग्रुप एक्जीक्यूटिव – होलसेल बैंकिंग कवरेज, कॉर्पोरेट सैलरी, सस्टेनेबिलिटी और सीएसआर, विजय मुलबागल ने कहा: “भारत की स्टार्ट-अप कहानी महत्वाकांक्षा, मजबूत और वैश्विक स्तर की है।
एक्सिस बैंक में हमें इसका हिस्सा बनने का सम्मान मिला है—हम भारत के 65% से अधिक यूनिकॉर्न्स को बैंकिंग सेवाएँ प्रदान करते हैं और ग्रोथ स्तर से लेकर लिस्टिंग तक कंपनियों का समर्थन करते हैं। अपने न्यू इकोनॉमी ग्रुप के माध्यम से, हम इस जुड़ाव को और गहरा कर रहे हैं – न केवल एक बैंकर के रूप में, बल्कि एक विकास भागीदार के रूप में भी। यह क्यूरेटेड कॉर्पोरेट सैलरी प्रोग्राम डिजिटल इकोनॉमी को आगे बढ़ाने वाले लोगों को सशक्त बनाने की दिशा में एक और अहम कदम है। यह प्रोग्राम इंश्योरेंस, होम लोन, क्रेडिट कार्ड और लाइफस्टाइल प्रिविलेज सहित व्यापक लाभों की श्रृंखला प्रदान करता है, जिसमें नई पीढ़ी की वर्कफोर्स के लिए विशेष छूट भी शामिल हैं।”
एक्सिस बैंक के प्रेसिडेंट और हैड – न्यू इकोनॉमी एण्ड मल्टीनेशनल्स कवरेज, संजीव भाटिया ने कहा, “स्टार्ट-अप्स भारत में अत्यधिक कुशल तकनीकी प्रोफेशनल्स के साथ रोज़गार को नए रूप में परिभाषित कर रहे हैं। हमारा क्यूरेटेड कॉर्पोरेट सैलरी प्रोग्राम उनकी अनूठी ज़रूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जो रोज़मर्रा की बैंकिंग को अलग ही जीवनशैली लाभों के साथ जोड़ता है। यह पहल हमारी अन्य पेशकशों, जैसे स्टार्ट-अप कार्ड, वर्किंग कैपिटल समाधानों, पूंजी बाजार, कैपिटल मार्केट, बैंकिंग एपीआई के साथ जुड़ाव और संस्थापकों के लिए बरगंडी प्राइवेट समाधान का पूरक है जिससे हम कंपनियों की हर ग्रोथ स्टेज पर मौजूद रहते हैं।”
भारत की इनोवेशन इकोनॉमी को सशक्त बनाना एक्सिस बैंक का न्यू इकोनॉमिक एंड फाइनेंशियल स्पॉन्सर ग्रुप (एनईजीएफएस) स्टार्ट-अप्स, वेंचर-बैक्ड कंपनियों और निवेशकों की बैंकिंग आवश्यकताओं के लिए समर्पित है। सभी प्रमुख इनोवेशन हब्स में उपस्थिति के साथ, न्यू इकोनॉमी ग्रुप वर्तमान में 45% से अधिक फंडेड स्टार्ट-अप्स (सीरीज़ ए और उससे ऊपर) को बैंकिंग सेवाएँ प्रदान करता है, और उन्हें डिजिटल लेनदेन बैंकिंग और ट्रेजरी सेवाओं से लेकर कॉर्पोरेट क्रेडिट कार्ड और संस्थापकों के लिए धन समाधान तक, उत्पादों की एक पूरी श्रृंखला प्रदान करता है।
न्यू इकोनॉमी ग्रुप कई स्टार्ट-अप्स के साथ एपीआई इंटीग्रेशन के माध्यम से गहन समाधान प्रदान करके और रणनीतिक साझेदारियाँ बनाकर पारंपरिक बैंकिंग से आगे बढ़ता है, जो स्टार्ट-अप्स को एक्सिस ब्रांड की ताकत और विश्वास के साथ जोड़ती हैं। न्यू इकोनॉमी एंड फाइनेंशियल स्पॉन्सर्स ग्रुप द्वारा संचालित एक्सिस बैंक स्टार्ट-अप सोशल प्लेटफॉर्म, स्टार्ट-अप इकोसिस्टम के लिए एक प्रमुख नेटवर्किंग फोरम बन गया है, जो संस्थापकों, वीसी और इकोसिस्टम के खिलाड़ियों को एक-दूसरे से और सीधे बैंक की लीडरशिप टीम से जुड़ने का अवसर देता है।
अभाविप जेएनयू इन नारों को राष्ट्र-विरोधी करार देती है, दिल्ली की सड़कों पर माओवादी हिंसा का गुणगान करने वाले देश विरोधी तत्वों का कड़ा विरोध करती है। इन वामपंथी गुटों द्वारा इंडिया गेट पर लगाए गए देश विरोधी नारों में संलिप्त लोगों में कुछ उस संगठन के लोग भी थे जो कल जेएनयू में हिडमा के समर्थन में पर्चे बांट रहे थे। इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि वामपंथी संगठन पर्यावरण, छात्र समस्याओं, या सामाजिक मुद्दों का उपयोग केवल अपने नक्सल समर्थक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कर रहा है और यह सभी वामपंथी संगठन देश के लिए खतरा है।
अभाविप जेएनयू अध्यक्ष मयंक पंचाल ने कहा,“जिस प्रदर्शन का उद्देश्य प्रदूषण के खिलाफ आवाज़ उठाना था, उसे वामपंथी तत्वों ने माओवादी आतंकवाद के समर्थन का मंच बना दिया। यह दिल्ली की जनता और देश के सुरक्षा बलों का अपमान है। ऐसे कृत्यों पर कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए।” अभाविप जेएनयू मंत्री प्रवीण पीयूष ने कहा,”हिडमा जैसे खूनी आतंकवादी के लिए ‘अमर रहो’ के नारे लगाना किसी भी लोकतांत्रिक समाज में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। यह सीधे-सीधे आतंकवाद के पक्ष में खड़े होने का कृत्य है। अभाविप इसकी घोर निंदा करता है और देश की सुरक्षा एजेंसियों से मांग करता है कि इस मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।”
अभाविप नक्सलवाद के समर्थन और किसी भी प्रकार की आतंक-मित्र राजनीति का दृढ़ता से विरोध जारी रखेगी। देश के सैनिकों का सम्मान और निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है, और किसी भी मंच पर आतंकी तत्वों का महिमामंडन राष्ट्र के खिलाफ गंभीर अपराध है।
KHAANA aur GAANA emerged as an immersive experience—led, shaped, and enlivened by the unmatched talent and creative vision of Aviekal Kakkar.
निवेशकों के पास अब विभिन्न प्रकार के उपकरणों तक पहुँच है, यानि आज के समय में निवेशक इक्विटी, डेब्ट सिक्योरिटीज़, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ), रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (आरईआईटी), इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (इन्वाइट्स), सरकारी बॉन्ड और कॉर्पोरेट बॉन्ड जैसे कई विकल्पों में सरलता से निवेश कर सकते हैं। इन सभी प्रयासों का नतीजा है कि इस साल एनएसई ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है कि नवंबर में निवेशक अकाउंट्स की संख्या 24 करोड़ के आँकड़े को पार कर गई है।"
कार्यक्रम के पहले सत्र में कवि सम्मेलन किया गया, इस कवि सम्मेलन की अध्यक्षता डॉ प्रमोद कुमार के द्वारा किया गया जिसमें 8 कवि/कवियित्रियों ने अपने काव्य पाठ से उपस्थित दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया एवम गाउँ से शहर तक का सफर अपने काव्य पाठ से कराया। कवि/कवियित्रों में डॉ प्रमोद कुमार, ई बिजय कुमार लाल, सुजीत कुमार, रविरंजन वर्मा "चमन", आनंद दास "गौतम", तनुजा दत्त, शशि महेंद्र एवम प्रिया वरुण कुमार ने कविता पाठ किया एवम बतौर संचालक भूमिका में तनुजा एवम सुजीत उपस्थित रहे। अंत मे सभी कवि/कवियित्रों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में "गृहिणी महिलाओं के लिए स्वरोजगार के विभिन्न अवसर पर" परिचर्चा किया गया जिसमें वक्ता के रूप में, सीए आशीष नीरज (प्रख्यात चार्टर्ड अकाउंटेंट व राष्ट्रीय अध्यक्ष केकेएम) ने महिलाओं के रोजगार हेतु विभिन्न दिशाओं को सबके समक्ष रखा। सत्र के बाद वक्ता आशीष को समन्वय समिति के सदस्य के के करन जी के द्वारा स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया गया ! सत्र के संचालन में बतौर भूमिका श्री हिमांशु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंतिम सत्र में "सांस्कृतिक संध्या" का आयोजन हुआ, जिसमें 1 गायक एवम 7 गायिकाओं ने अपनी संगीतमयी प्रस्तुति से पूरे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया। गायिकाओं में पूनम कर्ण, रजनी दास, चन्दा चौधरी, आराधना मल्लिक, शांता कुमारी, स्वाति दास एवम दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष व प्रख्यात चिकित्सक डॉ संजय लाभ एवम उनके धर्मपत्नी डॉ अनुपमा लाभ ने सामूहिक गीत से उपस्थित श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस सत्र का संचालन दिल्ली प्रदेश महासचिव हिमांशु सौरभ ने किया और अंत में गायक एवम गायिकाओं को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित भी किया गया !
धन्यवाद ज्ञापन पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सी एम एल दास ने किया। इस कार्यक्रम में केकेएम झारखंड प्रदेश सचिव अमरनाथ लास दास, केकेएम के पूर्व राष्ट्रीय सचिव विजय कुमार जी, संस्था के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष कुमार रंजीत एवम सैकड़ों दर्शक उपस्थित हुए।
ऐसे लेक्चर्स और अकादमिक संवादों के माध्यम से एनआईईपीए शिक्षा नीति और व्यवहार में इनोवेशन और विमर्श को बढ़ावा देता रहा है, जो राष्ट्र के व्यापक शैक्षिक लक्ष्यों के अनुरूप है।कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए संस्थान की कुलपति प्रो. शशिकला वंजारी ने कहा“मौलाना आज़ाद मेमोरियल लेक्चर भारत की समृद्ध शैक्षिक विरासत और उसके भविष्य के प्रति एहसास की याद दिलाता है। श्री अरविंद जैसे विचारकों के चिंतन को समकालीन दृष्टि से जोड़कर, हमने भारत में शिक्षा की नैतिक और बौद्धिक नींव को सुदृढ़ करने का प्रयास किया है।”
इस आयोजन ने शिक्षाविदों, नीतिनिर्माताओं, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को एक साथ लाकर ऐसे विचारों पर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान किया, जो एक प्रगतिशील और समावेशी समाज के लिए शिक्षा को दिशा देते हैं। एनआईईपीए शिक्षा के क्षेत्र में विचार नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान, प्रशिक्षण और संवाद के माध्यम से भारत के बदलते शैक्षिक परिदृश्य के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। कार्यक्रम के अंत में डॉ. सूर्य नारायण मिश्रा, कुलसचिव, एनआईईपीए ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया
स्वतंत्र तालीम फाउंडेशन के सह-संस्थापक राहुल ने कहा, “600 से अधिक बच्चों को खुले मन से खेलते देखना अद्भुत था। जब बच्चों से पूछा गया कि उन्हें उत्सव में सबसे अच्छा क्या लगा, तो उन्होंने कहा ‘मुक्त खेल’। सभी बच्चों को खेलने के लिए पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए।” उत्सव की प्रमुख झलकियों में से एक थी ‘आर्टिस्ट म्यूज़ियम’। एक अनुभवात्मक और इंटरएक्टिव स्थल, जहाँ बच्चों ने भारत और विश्वभर के कलाकारों की कहानियों और रचनाओं के साथ संवाद किया। इसने रचनात्मकता और प्रेरणा पर नई दृष्टि प्रस्तुत की। शाम के समय कठपुतली प्रस्तुतियाँ सैपलिंग्स, झिलमिल जंक्शन और फ्रेंड्स फॉरएवर तथा बहुप्रतीक्षित ‘पपेट परेड’ ने वातावरण को जीवंत कर दिया। प्रत्येक विद्यालय ने गर्व से अपने बाँस से बने विशाल पशु कठपुतलों को प्रदर्शित किया जो सच-मुच और रूपक दोनों अर्थों में बच्चों की सामूहिक सृजनशीलता की रोशनी से जगमगा रहे थे।
शिक्षकों के लिए विशेष कार्यशाला ‘कठपुतली के माध्यम से सीखना’ विषय पर पार्थ पॉल (बर्दवान द पपेटियर्स) द्वारा संचालित की गई, जिसमें शिक्षकों ने रचनात्मक शिक्षण और कहानी कहने की नई विधियों को समझा। कबीर थिएटर में लगी बच्चों की प्रदर्शनी ने उनकी बढ़ती जिज्ञासा और निर्माण की चाह को सुंदर रूप से अभिव्यक्त किया। साथ ही, यह दिखाया कि कैसे बच्चों की स्वतंत्र खोजों ने शिक्षकों को भी इस रचनात्मक यात्रा का सहभागी बना दिया। इस वर्ष के संस्करण के लिए स्वतंत्र तालीम फाउंडेशन ने बचपन मनाओ (बेंगलुरु स्थित एकस्टेप फाउंडेशन की पहल) के साथ साझेदारी की। बचपन मनाओ पहल का उद्देश्य 0-8 वर्ष के बच्चों के शुरुआती वर्षों में खेल और आनंद के माध्यम से सीखने और विकास का उत्सव मनाना है। यह पहल देशभर में 100 से अधिक “कोलैब-एक्टर्स” के साथ एक बढ़ता हुआ समुदाय है, जो बच्चों के आस-पास के वयस्कों को प्रेरित और सक्षम बनाकर हर बच्चे को समग्र बचपन का अनुभव दिलाने की दिशा में काम कर रहा है।
एकस्टेप फाउंडेशन की नीति एवं साझेदारी निदेशक हिता कुमार ने कहा, “बचपन के पहले आठ वर्ष अत्यंत समृद्ध होते हैं- सबसे तेज़ विकास, सबसे अधिक जिज्ञासा और दुनिया से सहज जुड़ाव का समय। ‘बचपन मनाओ’ इसी सहजता और समृद्धि को समझने और मनाने का एक प्रयास है।” स्वतंत्र तालीम फाउंडेशन की सह-संस्थापक रिद्धि ने कहा, “बुलबुले फेस्टिवल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे समुदाय मिलकर रचता है, जिसके तहत शिक्षक, अभिभावक, कलाकार, पड़ोसी सभी एक साझा भावना से जुड़ते हैं। यह उत्सव बच्चों द्वारा और बच्चों के लिए जीवंत हुआ है।”
बुलबुले फेस्टिवल 2025 ने यह दर्शाया कि बच्चे खेल के माध्यम से सबसे प्रभावी रूप से सीखते हैं। यह सिर्फ पढ़ाई का नहीं, बल्कि संपूर्ण विकास रचनात्मकता, सामाजिक जुड़ाव, भावनात्मक अभिव्यक्ति और कहानियों के माध्यम से जीवन को समझने का उत्सव बना। एक युवा स्वयंसेवक विजय ने कहा , “मैंने कुछ साल पहले स्वतंत्र तालीम के मेकर्स्पेस में पढ़ाई की थी। आज मैं उसी संस्था के बुलबुले फेस्टिवल में स्वयंसेवक हूँ। अब मैं डिज़ाइन की पढ़ाई कर रहा हूँ और बच्चों के साथ सीखने का यह अनुभव मेरे लिए बेहद प्रेरक रहा।”
संगीत कार्यशाला का संचालन करने वाले तबला गुरु तुषार ने कहा, “बच्चे किसी भी चीज़ से संगीत बना सकते हैं- हाथों, पैरों, यहाँ तक कि अपनी छाती से भी। उनका कल्पनालोक असीमित है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को स्वतंत्र रूप से सीखने और खोजने दें संगीत जैसे माध्यम बच्चे के समग्र विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।” बुलबुले फेस्टिवल 2025 के समापन के साथ ही पूरा परिसर हँसी, संगीत और रचनात्मक ऊर्जा से गूँज उठा। इस उत्सव ने एक बार फिर यह विश्वास जगाया कि जब बच्चों को सृजनकर्ता और विचारक के रूप में स्वीकार किया जाता है, तो वे न केवल कला बल्कि सीखने के मायनों को भी बदल सकते हैं।
आर्या.एजी के को-फाउंडर और सीईओ प्रसन्न राव ने कहा, "कृषि में तरक्की की बुनियाद 'सहयोग' है। स्मार्ट फार्म सेंटर्स यह दिखाते हैं कि जब तकनीकी विशेषज्ञ, डेटा वैज्ञानिक और स्थानीय समुदाय साथ आते हैं, तो कितना बड़ा बदलाव संभव होता है। ये सेंटर्स साबित करते हैं कि भारत के किसानों की ज़मीनी हकीकत को ध्यान में रखकर साझेदारी के जरिए व्यावहारिक और बड़े स्तर पर अपनाए जा सकने वाले समाधान तैयार किए जा सकते हैं।"
सुमन यादव (सीवीआरपी) ने कहा, "इस साल धान की कटाई दीपावली और छठ पर्व के समय पर आ रही थी, इसलिए कई किसानों ने कटाई टालने का मन बना लिया था। लेकिन, स्मार्ट फार्म सेंटर से मिले मौसम अलर्ट ने पहले से ही हमें आने वाले चक्रवात और बारिश की जानकारी दी। हमने तुरंत किसानों को बताया और उन्होंने समय पर कटाई कर ली, इस फैसले से उनकी पूरी फसल बच गई।"
स्वप्निल सतिंगे (किसान) ने कहा, "स्मार्ट फार्म सेंटर की सलाह से मैंने ज्यादा उपज देने वाली सोयाबीन किस्म अपनाई और बीबीएफ तकनीक से बुवाई की। तकनीक आधारित सुझावों से मुझे फसल प्रबंधन में काफी मदद मिली, जिससे मेरी पैदावार और दाने की गुणवत्ता दोनों बेहतर हुईं। फसल गुणवत्ता की जाँच की सुविधा से मुझे बाजार में प्रीमियम दाम भी मिला।"
स्मार्ट फार्म सेंटर्स सीधे तौर पर आर्या.एजी के व्यापक नेटवर्क- स्टोरेज, फाइनेंस और मार्केट से जुड़े हैं, जिससे खेत से लेकर बाजार तक एक पारदर्शी और जुड़ी हुई वैल्यू चेन बनती है। यह न सिर्फ किसानों की आमदनी को स्थिर बनाती है, बल्कि जोखिम प्रबंधन को बेहतर करती है और छोटे किसानों के लिए दीर्घकालिक विकास का मार्ग भी प्रशस्त करती है। आने वाले तीन सालों में, आर्या.एजी का लक्ष्य 100 स्मार्ट फार्म सेंटर्स का नेटवर्क स्थापित करने का है।
वर्तमान में आर्या.एजी देशभर में 1,600 से अधिक एफपीओ और 8 लाख से ज्यादा किसानों के साथ काम कर रहा है। यह अपने नेटवर्क में देश के 60% जिलों को कवर करता है, जिसमें 12,000 से अधिक वेयरहाउसेस शामिल हैं। यह हर साल लगभग 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य का अनाज एकत्रित करता है और किसानों व उनके संगठनों को करीब 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का क्रेडिट उपलब्ध कराता है।
स्मार्ट फार्म सेंटर्स के जरिए आर्या.एजी (Arya.ag) एक बार फिर यह साबित कर रहा है कि वह भारत का सबसे व्यापक कृषि तंत्र है, जहाँ तकनीक, डेटा और समुदाय की साझेदारी मिलकर छोटे किसानों और उनके संगठनों को एक मजबूत और टिकाऊ भविष्य की दिशा में आगे बढ़ा रही है।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ. निकिता सभरवाल, निदेशक, प्रांगण प्रशिक्षण और कौशल विकास केंद्र द्वारा कक्षा से कॉर्पोरेट यात्रा विषय पर एक आकर्षक सत्र की शुरुआत करते हुए विद्यार्थियों से करियर की तैयारी, कार्यस्थल की अपेक्षाओं और अकादमिक जीवन से पेशेवर दुनिया में संक्रमण में व्यावहारिक अंतर्दृष्टि साझा की। उन्होंने बताया कि हमें अपना करियर चयन से पूर्व आवश्यक है कि सरकारी संस्थानों व गैर- सरकारी संस्थानों में किस कोर्स की ज्यादा मांग है । लेकिन आपको सबसे पहले किसी भी कोर्स की शिक्षा बहुत जरूरी है , शिक्षा ही आपके जीवन में बदलाव लाएगी ।कार्यक्रम की समन्वयक सुश्री मिन्नी नारंग ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और छात्रों के लिए निरंतर परामर्श और परामर्श के अवसर प्रदान करने के लिए सेल की प्रतिबद्धता को दोहराया। इस पहल को छात्रों और संकाय सदस्यों से उत्साही प्रतिक्रिया मिली, समग्र शिक्षा, भावनात्मक कल्याण और करियर सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए अरबिंदो कॉलेज के समर्पण की पुष्टि की।
मुख्य अतिथि और प्रसिद्ध उद्योगपति, एस. के. पोद्दार ने कहा: "डॉ. अग्रवाल ने स्वास्थ्य शिक्षा को एक ऐसे आंदोलन में बदल दिया जिसने हर घर को छुआ। परफेक्ट हेल्थ मेला एक आयोजन से कहीं बढ़कर है, यह उनकी जीवंत विरासत है। आज छात्रों को इतनी रचनात्मकता और दृढ़ विश्वास के साथ उनके आदर्शों को आगे बढ़ाते देखना एक सशक्त अनुस्मारक है कि उनकी आत्मा आज भी हमारा मार्गदर्शन करती है।"
हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया की ट्रस्टी, डॉ. वीना अग्रवाल ने कहा: "डॉ. के. के. अग्रवाल के लिए, स्वास्थ्य केवल बीमारी का अभाव नहीं था; यह शरीर, मन और आत्मा का सामंजस्य था। युवा छात्रों को कला और जागरूकता के माध्यम से उस संतुलन को साकार करते देखना, निवारक और करुणामयी स्वास्थ्य सेवा के उनके मिशन के प्रति सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है।"
होली फैमिली कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्रिंसिपल डॉ. (सीनियर) रमिंदर कालरा ने कहा, "इस आयोजन की सह-मेजबानी ने हमारे छात्रों को स्वास्थ्य सेवा के पीछे के उद्देश्य सेवा, सहानुभूति और सहयोग का अनुभव करने का अवसर दिया है। यह मेला उन्हें उस उद्देश्य को उन तरीकों से व्यक्त करने का मंच प्रदान करता है जो उनकी पीढ़ी को सूचित और प्रेरित करते हैं।"
पहले दिन दिल्ली-एनसीआर के 20 से अधिक कॉलेजों के 800 से अधिक छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और 1500 से अधिक दर्शकों को आकर्षित किया। संगीत, नृत्य, रंगमंच और नवाचार के माध्यम से, प्रतिभागियों ने जटिल स्वास्थ्य समस्याओं को रचनात्मक अभिव्यक्तियों में ढाला, जिसने जानकारी और मनोरंजन दोनों को समान रूप से प्रभावित किया।
कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएँ:
लोक नृत्य (समूह): भारत की सांस्कृतिक विविधता और जीवंतता का एक रंगारंग प्रदर्शन।
बॉलीवुड गायन (समूह): आशा और उपचार के गीतों पर प्रस्तुतियाँ, निर्णायक मंडल में वंदना वशिष्ठ और सुजीत गुप्ता शामिल थे।
मोनो एक्टः साइबरबुलिंग और सोशल मीडिया के दबाव पर सम्मोहक चित्रण, शिव कुमार कोहली और इंदु आहूजा द्वारा मूल्यांकन।
स्टैंड-अप कॉमेडी फॉर अ कॉज़ः डॉक्टर गूगल एमबीबीएस इन कन्फ्यूजन पर हास्यपूर्ण प्रस्तुति, निर्णायकः दिव्या और मीना रावत।
नुक्कड़ नाटक / नुक्कड़ नाटकः डिजिटल दुनिया के आभासी जालः लाइक्स बनाम लाइफ पर प्रभावशाली प्रदर्शन, निर्णायकः डॉ. सैयद नज़म इकबाल और निर्मल वैद।
नवाचार मॉडल निर्माणः स्वास्थ्य निगरानी और पहनने योग्य तकनीक पर छात्र प्रोटोटाइप, मूल्यांकनः डॉ. अनिल कुमार और नीरज त्यागी।
प्रत्येक कार्यक्रम ने सभी के लिए संपूर्ण स्वास्थ्य शरीर, मन और आत्मा का पोषण, रचनात्मकता को सार्थक सामाजिक संदेश के साथ सम्मिश्रित करते हुए, के सार को दर्शाया।
दूसरे दिन शास्त्रीय और पश्चिमी नृत्य प्रस्तुतियाँ, पहनने योग्य स्वास्थ्य उपकरणों और गोपनीयता।
ओडिशा सरकार की आरई नोडल एजेंसी के प्रमुख, देबाशीष दास, ने राज्य के स्वच्छ ऊर्जा बदलाव की अनिवार्यता को रेखांकित किया। श्री दास ने कहा: "ओडिशा विकसित ओडिशा 2026 और विकसित भारत 2047 के साथ संरेखित ओडिशा अक्षय ऊर्जा नीति के तहत परिवर्तन के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। हम अपने 2.25 लाख वर्ग किलोमीटर के जल जलाशयों में फ्लोटिंग सौर परियोजनाओं और पंप स्टोरेज अवसरों के माध्यम से अक्षय ऊर्जा को प्राथमिकता दे रहे हैं। हमारा विज़न ओडिशा में ऊर्जा को किफायती, सुलभ और टिकाऊ बनाना है, जिससे राज्य भारत के अक्षय ऊर्जा परिदृश्य में पसंदीदा निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित हो सके।"
द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट की महानिदेशक, डॉ. विभा धवन, ने भारत की प्रगति पर प्रकाश डाला। डॉ. धवन ने कहा: "भारत पहले ही 127 गीगावाट की स्थापित सौर क्षमता हासिल कर चुका है और 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ रहा है। यह उपलब्धि स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में भारत के नेतृत्व को उजागर करती है।राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, सौर और बैटरी निर्माण के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना, और राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन जैसी पहलों के साथ, सरकार एक मजबूत घरेलू मूल्य शृंखला को बढ़ावा दे रही है। टेरी में, दशकों से किए गए अनुसंधान, क्षमता निर्माण और साझेदारियों का उद्देश्य भारत की अनुमानित 10,800 GW सौर क्षमता को साकार करना और ग्रामीण विकास को गति देने वाले एग्री-फोटोवोल्टिक मॉडल को आगे बढ़ाना रहा है। अब ध्यान स्थिरता को औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता और समावेशी विकास के एक रणनीतिक प्रवर्तक के रूप में देखने की ओर केंद्रित होना चाहिए।"
इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया के प्रबंध निदेशक, योगेश मुद्रास, ने सह-स्थित एक्सपो पर अपने विचार साझा किए और महत्वपूर्ण निवेशों पर जोर दिया। श्री मुद्रस ने कहा: "भारत की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता 2025 में 250 गीगावाट को पार कर गई है, और 2030 तक 500 गीगावाट का लक्ष्य है। विद्युत मंत्रालय ने 30 GWh बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS) के लिए ₹5,400 करोड़ की व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) योजना को मंजूरी दी है, जिससे 2028 तक ₹33,000 करोड़ का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है। रिन्यूएबल एनर्जी इंडिया एक्सपो और बैटरी शो इंडिया जो अपना अब तक का सबसे बड़ा संस्करण मना रहे हैं, नवाचार, नीति अंतर्दृष्टि और क्रॉस-सेक्टरल सहयोग के एक संगम के रूप में इस विकास को आगे बढ़ाने की कुंजी हैं।"
आरईआई 2025 एक्सपो में 700 से अधिक प्रदर्शकों, 1,000 ब्रांडों और 250 वैश्विक विचारकों ने भाग लिया, जिसने तीन दिनों में 35,000 से अधिक आगंतुकों को आकर्षित किया। एक्सपो में सौर विनिर्माण, बैटरी स्टोरेज, EV चार्जिंग और पवन ऊर्जा सहित अक्षय प्रौद्योगिकियों की पूरी श्रृंखला प्रदर्शित हुई। द बैटरी शो इंडिया जिसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और भारी उद्योग मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है, में 350 से अधिक प्रदर्शक और 20,000 पेशेवर शामिल हुए, जिसने भारत को स्वच्छ ऊर्जा के पावरहाउस के रूप में मजबूत किया। इस आयोजन में जर्मनी, चीन, जापान जैसे देशों के पवेलियनों के साथ-साथ रिलायंस, अडाणी सोलर, गोल्डि सोलर, हैवल्स, वारी सोलर और विक्रम सोलर जैसी प्रमुख कंपनियों ने अपने अत्याधुनिक नवाचारों का प्रदर्शन किया।
Adding a competitive edge to Branch Banking services, Express Banking will offer a bundled, customizable solution in a compact digital lobby format, enabling rapid deployment that can be operated in both self-service and assisted modes. The customers can now walk-in to Express Banking, 24x7, to open new bank accounts, avail instant cards, book fixed deposits, apply for loans and pay utility bills, among others. This all-in-one solution includes features such as a card printer, cheque depositor, passbook printer, and NFC capabilities. By digitizing key services, it enables faster processing and offers advanced, modular, scalable, and future-ready capabilities.
Blending the trust and safety of traditional banking with the speed and efficiency of digital innovation, Digital Banking Point is equipped with the latest security features and a contemporary, intuitive user interface that elevates customer experience. With a compact and flexible set-up, it occupies minimal space and can be rapidly deployed across diverse places including city centres, rural areas, or captive locations such as community hubs, corporate parks, hospitals and universities. This next-generation solution brings a full spectrum of banking services with accessible digital-first touchpoints, ensuring inclusivity for everyone from digitally savvy users to first-time banking customers.
Commenting on the launch, Reynold D’Souza, President & Head - Branch Banking, North & East & TASC Business, Axis Bank, said, “The Digital Banking Point is not just a technological innovation — it represents a new philosophy in express banking. By seamlessly integrating secure digital services, this kiosk ensures that customers across India — whether in metropolitan hubs or rural communities — enjoy a smart, consistent, and reliable banking experience. This initiative reflects our continued commitment to redefining banking, elevating customer experience, and serving the evolving needs of diverse segments through future-ready solutions.”
Sumil Vikamsey, Managing Director & Chief Executive Officer - Cash Business, Hitachi Payment Services, further added , “We are thrilled to introduce India’s first Digital Banking Point, a landmark in how banking services will be delivered. Ushering in a new era of technology-driven banking, it will play a pivotal role in expanding access and digitizing services across India. As we continue to bridge the gap between traditional and digital banking, we believe that the Digital Banking Point will set the stage for a broader transition to accessible and convenient banking experiences in India.”
मुख्य अतिथि मीरा और मुज़फ़्फ़र अली ने इस कार्यक्रम का स्मरण किया और गुरु दत्त की काव्यात्मक और सिनेमाई प्रतिभा की सराहना की, साथ ही इस श्रद्धांजलि के पीछे के विचारशील प्रयास को भी याद किया, जिसने कहानी, संगीत और स्मृति के माध्यम से उनकी आत्मा को पुनर्जीवित किया। इस शाम में रोमी देव, रसील और नवीन अंसल, अर्चना डालमिया, आभा डालमिया, कथक नृत्यांगना शिवानी वर्मा, रेनी जॉय और कई अन्य प्रतिष्ठित अतिथि भी मौजूद थे, जो इस कलात्मक श्रद्धांजलि का जश्न मनाने के लिए एक साथ आए थे।
मिशन फॉर विज़न, इंडिया की चीफ फंक्शनरी और ट्रस्टी, एलिज़ाबेथ कुरियन कहती हैं, "लगभग 1 अरब लोग रोज़ाना बचाई जा सकने वाली दृष्टि हानि के साथ जी रहे हैं, खासकर निम्न और मध्यम आय वाले देशों में, जिससे उनकी उत्पादकता और क्षमता सीमित होती है। दृष्टि में निवेश सिर्फ चैरिटी नहीं है; यह स्मार्ट इकोनॉमिक्स है। एमिशन फॉर विज़न में हम हर दिन देखते हैं कि कैसे एक जोड़ी चश्मा या मोतियाबिंद सर्जरी आजीविका को बहाल कर सकती है और परिवारों को गरीबी से बाहर निकाल सकती है। यदि हम सतत विकास और समानता के लिए गंभीर हैं, तो आँखों का स्वास्थ्य राष्ट्रीय नीति के मुख्यधारा में आना चाहिए। राष्ट्रीय अंधत्व एवं दृश्य क्षीणता नियंत्रण कार्यक्रम इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।"
आईएपीबी के सीईओ पीटर हॉलैंड कहते हैं, "दृष्टि हानि एक सार्वभौमिक समस्या है, जो हमारे जीवन के हर पहलू को प्रभावित करती है। लेकिन हमारे पास स्पष्ट समाधान हैं। अधिकांश दृष्टि हानि सरल और किफायती उपायों से रोकी जा सकती है, जैसे दृष्टि परीक्षण का विस्तार, चश्मे प्रदान करना और मोतियाबिंद सर्जरी में सुधार। इस विश्व दृष्टि दिवस पर, हम सरकारों और व्यवसायों से लेकर स्कूलों और परिवारों तक सभी से अपील करते हैं कि आँखों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। सबूत स्पष्ट हैं: दृष्टि में निवेश करके हम अपने भविष्य में निवेश कर रहे हैं।"
जब दुनिया में लगभग 1 अरब लोग बचाई जा सकने वाली दृष्टि हानि के साथ जी रहे हैं, तब आँखों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और प्राथमिकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। नियमित आँखों की जाँच दृष्टि को सुरक्षित रखने का सबसे आसान तरीका है, जबकि व्यापक प्रणालीगत समाधान यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं कि हर किसी को, हर जगह, आवश्यक देखभाल मिले। अपनी दृष्टि का महत्व समझकर और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करके, हम बदलाव ला सकते हैं, मानव क्षमता को उजागर कर सकते हैं और एक स्वस्थ, अधिक उत्पादक भविष्य का सृजन कर सकते हैं।
सम्मेलन आयोजन सचिव और फोर्टिस अस्पताल में रूमेटोलॉजी के निदेशक डॉ. बिमलेश धर पांडेय ने कहा: "प्रदूषण गठिया, विशेष रूप से रूमेटाइड गठिया से जुड़ा हुआ है, क्योंकि वायु प्रदूषक सूजन, ऑक्सीडेटिव तनाव और ऑटोएंटीबॉडी उत्पादन का कारण बन सकते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि पीएम 2.5 का, नाइट्रोजन ऑक्साइड और ओज़ोन के संपर्क में आने से गठिया का खतरा बढ़ जाता है और लक्षण बिगड़ जाते हैं, खासकर अतिसंवेदनशील व्यक्तियों में। व्यस्त सड़कों के पास रहने ,लगातार यातायात से जुड़ा प्रदूषण गठिया के बढ़ते जोखिम से भी जुड़ा है।"
यूरोपियन मेडिकल जर्नल (2025) में प्रकाशित एक ऐतिहासिक अध्ययन ने वायु प्रदूषण को आरए सहित ऑटोइम्यून रोगों से जोड़ने वाले मजबूत प्रमाण प्रदान किए हैं। अध्ययन ने सामान्य प्रदूषकों और प्रतिरक्षा प्रणाली की शिथिलता के बीच महत्वपूर्ण कारणात्मक संबंधों की पहचान की, और पर्यावरणीय क्षति को इन रोगों के बढ़ने के एक महत्वपूर्ण कारण के रूप में उजागर किया। सर गंगा राम अस्पताल में रुमेटोलॉजी विभाग के उपाध्यक्ष डॉ. नीरज जैन ने चेतावनी दी: "हम आरए को मुख्यतः आनुवंशिक मानते थे, लेकिन प्रदूषण इस कहानी को बदल रहा है। पर्यावरणीय बोझ तराजू को झुका रहा है, स्वस्थ व्यक्तियों को रोगियों में बदल रहा है। यह तथ्य है की बिना किसी पारिवारिक इतिहास वाले युवा लोग आरए विकसित कर रहे हैं, यह एक खतरे की घंटी है ।"
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में प्रोफेसर और रुमेटोलॉजिस्ट डॉ. पुलिन गुप्ता ने एक और चिंताजनक पहलू पर प्रकाश डाला: "हम न केवल रूमेटॉइड आर्थराइटिस के बढ़ते मामले देख रहे हैं, बल्कि गंभीर मामले भी देख रहे हैं। पीएम 2.5 की संपर्क में आने वाले मरीज़ों में आक्रामक बीमारी तेज़ी से फैल रही है। शहरी क्षेत्रों में हरियाली कम होने से समस्या और बिगड़ रही है, जिससे निवासियों को सुरक्षात्मक पर्यावरणीय सुरक्षा कवच से वंचित होना पड़ रहा है।" नई दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में रुमेटोलॉजी विभाग के सीनियर कंसलटेंट और सम्मेलन अध्यक्ष डॉ. रोहिणी हांडा ने कहा: "यह केवल एक चिकित्सा समस्या नहीं है; यह एक सामाजिक संकट है। जब तक प्रदूषण के स्तर पर अंकुश नहीं लगाया जाता, हम एक ऐसी पीढ़ी को देख रहे हैं जो रोके जा सकने वाले ऑटो इम्यून रोगों से अपंग हो जाएगी। इसकी कीमत—पीड़ा, उत्पादकता में कमी और स्वास्थ्य सेवा के बोझ के रूप में—बहुत ज़्यादा होगी।"
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि रूमेटॉइड आर्थराइटिस जैसी ऑटो इम्यून रोग आजीवन रहने वाली बीमारियाँ हैं जिनका कोई स्थायी इलाज नहीं है, केवल प्रबंधन ही काफी है। प्रदूषण के आग में घी डालने के साथ, दिल्ली एनसीआर और इसी तरह के प्रदूषित क्षेत्रों में आरए का प्रचलन बढ़ने की उम्मीद है। वर्तमान अनुमान बताते हैं कि रूमेटॉइड आर्थराइटिस पहले से ही भारत की लगभग 1% वयस्क आबादी को प्रभावित करता है, लेकिन प्रदूषण के कारण, ये संख्या तेजी से से बढ़ सकती है। चीन में किए गए शोध से पता चला है कि लंबे समय तक पीएम 2.5 के संपर्क में रहने से आरए विकसित होने का जोखिम 12-18% बढ़ जाता है। इसी तरह यूरोपीय समूहों ने बताया कि अत्यधिक प्रदूषित शहरों में रहने वाले लोगों में स्वप्रतिरक्षी विकारों से संबंधित रुग्णता काफी अधिक थी। ये निष्कर्ष वही दर्शाते हैं जो डॉक्टर अब भारत में देख रहे हैं—जहाँ दिल्ली के निवासी श्वसन संकट और ऑटोइम्यून रोगों की दोहरी मार झेल रहे हैं।
IRACON 2025 के विशेषज्ञों ने बहु-विषयक कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया: सख्त प्रदूषण नियंत्रण, जन जागरूकता में वृद्धि, जोखिम वाली आबादी की शीघ्र जाँच, और जोखिम को कम करने के लिए जीवनशैली में बदलाव। उन्होंने शहरी हरित क्षेत्र के विस्तार, स्वच्छ परिवहन समाधानों तथा वायु गुणवत्ता को स्वास्थ्य से जोड़ने वाली मजबूत राष्ट्रीय नीतियों का भी आह्वान किया। दिल्ली ज़हरीले स्मॉग सीज़न से हर साल जूझती है, ऐसे में IRACON 2025 के खुलासे इस बात की कड़ी चेतावनी देते हैं कि गंदी हवा न सिर्फ़ हमारे फेफड़ों का दम घोंट रही है, बल्कि हमारे जोड़ों पर भी असर डाल रही है। प्रदूषण और रूमेटाइड आर्थराइटिस के बीच का संबंध इस बात पर ज़ोर देता है कि पर्यावरण मानव स्वास्थ्य से कितनी गहराई से जुड़ा हुआ है।
विशेषज्ञों ने एक ज़बरदस्त संदेश दिया: रुमेटोलॉजी अब सिर्फ़ दर्द का प्रबंधन नहीं करती—यह उस दुश्मन का सामना करने के बारे में है जो हम साँस लेते समय हवा में रहते हैं। अगर भारत को आने वाली पीढ़ियों को रूमेटाइड आर्थराइटिस की गंभीर पकड़ से बचाना है, तो हवा को साफ़ करना राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकता बन
स्वतंत्रता के पश्चात देश में अनेक संतों और महा पुरुषों ने अवैध धर्मांतरण को रोकने हेतु केंद्रीय कानून की मांग की। संविधान सभा में भी इस विषय पर चर्चा हुई किंतु, तत्कालीन सत्ताधारी दल का यह मानना था कि इस कानून को बनाने का अधिकार सिर्फ राज्य सरकारों को है। इसीलिए, भारत के कई राज्यों - मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, ओडिशा, छत्तीसगढ़, राजस्थान आदि ने धर्म स्वतंत्रता अधिनियम बनाए। इन कानूनों का उद्देश्य आस्था का दमन करना नहीं, बल्कि छल-कपट, बल प्रयोग और प्रलोभन के माध्यम से धर्म परिवर्तन को रोकना है। अब अवैध धर्मांतरण करने वाली शक्तियों व उनके समर्थकों ने इन संविधान सम्मत कानूनों को संबंधित उच्च न्यायालयों में चुनौती दी है किन्तु दुर्भाग्य से माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने इन सबको इकट्ठा कर एक साथ सुनवाई का आदेश दिया है।
पूज्य संतों का मानना है कि राज्य सरकारों का विषय होने के कारण, उच्च न्यायालयों द्वारा निर्णय के पश्चात ही, इन मामलों में सर्वोच्च न्यायालय को विचार करना चाहिए। वैसे भी हर राज्य की परिस्थितियां अलग अलग हैं, वहाँ के कानूनों का स्वरूप और उनका विरोध करने के आधार भी अलग अलग हैं। इन सब को भला एक साथ कैसे सुना जा सकता है, ये बात किसी की भी समझ से परे है। वैसे भी मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्ति के संदर्भ में पूज्य स्वामी दयानंद सरस्वती जी की एक याचिका में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि ये राज्य सरकारों का विषय है इसलिए इन सब मामलों को सर्वोच्च न्यायालय मे एक साथ नहीं सुना जा सकता। धर्म स्वतंत्रता अधिनियम भी विविध राज्य सरकारों के ही विषय हैं तो इन सबको एक साथ कैसे सुना जा सकता है, यह समाज के मन में संदेह निर्माण करता है।
उन्होंने कहा कि राज्यों द्वारा पारित धर्म स्वतंत्रता अधिनियमों के संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय ने उन राज्यों से भी राय मांगी है जहां ऐसा कोई कानून बना ही नहीं है और वहाँ के सत्ताधारी दल स्वयं धर्मांतरण के कुचक्र रचने वाली शक्तियों के साथ खड़े हैं। उन सब को भी एक साथ सुनना देश के चिंतकों के मन में शंका निर्माण करता है। इसी समय इन शक्तियों के साथ जुड़े कुछ कथित संविधानवेत्ता धर्मांतरण के संबंध में संविधान पीठ द्वारा स्थापित निर्णयों पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए दिखे। धर्मांतरण के पक्ष में अंतर्राष्ट्रीय षडयन्त्र पहले से ही सक्रिय हैं, जो अनेक बार उजागर हो चुके हैं। यह आशंका निर्मूल नहीं है कि हमारी न्यायपालिका भी कहीं इन षड्यंत्रों से प्रभावित तो नहीं हो रही! हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हमारी न्यायपालिका की प्रतिष्ठा सुरक्षित रहे।
संतों ने यह भी कहा कि आज की परिस्थियों की भीषणता को देखते हुए आवश्यक है कि अवैध धर्मांतरण को रोकने वाले कानूनों को और अधिक मजबूत किया जाए ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक सद्भाव व स्वधर्म पालन की स्वतंत्रता के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके। हमारा न्यायपालिका से यह आग्रह है कि वह जिन राज्यों में ये कानून नहीं हैं वहाँ बनाने के लिए राज्य सरकारों को आदेश दे और जहां बने हुए हैं वहाँ उनको कठोरता से लागू करने में सहयोग दे। प्रेस वार्ता में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेंद्र जैन व अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता पूज्य श्रीमहंत गौरी शंकर दास जी महाराज भी उपस्थित थे।
पिछली वर्ल्ड चैम्पियनशिप्स में भारत ने दुबई 2019 में 9 पदक, पेरिस 2023 में 10 पदक और कोबे 2024 में 17 पदक जीते थे। पैरालंपिक खेलों में भी भारत के पदकों की संख्या लगातार बढ़ी है। 2004 के एथेंस पैरालंपिक में 2 पदक से शुरू होकर, 2016 के रियो डी जेनेरियो में 4 पदक, 2020 के टोक्यो में 19 पदक और 2024 के पेरिस पैरालंपिक में 29 पदक जीते, जो अब तक का भारत का सबसे अच्छा प्रदर्शन है। भारतीय पैरा एथलीट्स के प्रदर्शन में यह उल्लेखनीय बढ़ोतरी साफ दिखाती है कि सरकार उन्हें पूरा समर्थन दे रही है। डब्ल्यूपीएसी 2025 में सरकार की टारगेट ओलिंपिक पोडियम स्कीम (टीओपीएस) के तहत 15 खिलाड़ियों और खेलो इंडिया कार्यक्रम के एक खिलाड़ी ने पदक जीते। कुल 23 टीओपीएस समूह के खिलाड़ी और 22 खेलो इंडिया के खिलाड़ी इस चैम्पियनशिप में शामिल हुए।
मशहूर जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स का गवाह रहा है, जिसमें पैरा एथलेटिक्स को भी मेडल इवेंट के रूप में शामिल किया गया था। लेकिन नई दिल्ली में हुई इस डब्ल्यूपीएसी ने भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े आयोजन को सफलतापूर्वक करने की क्षमता को एक "नई ऊँचाई" पर पहुँचा दिया है। ऐसा कहना है कई अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट्स का जिन्होंने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। भारत, कतर, यूएई और जापान के बाद चौथा एशियाई देश बन गया है जिसने वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैम्पियनशिप की मेज़बानी की है। नीदरलैंड्स की फ्ल्योर जोंग, जो वर्ल्ड चैम्पियनशिप में छह बार की गोल्ड मेडलिस्ट और तीन बार की पैरालंपिक पदक विजेता हैं, ने भारत की मेहमाननवाज़ी और मेज़बानों के स्वागतभाव की खूब प्रशंसा की। डबल एम्प्यूटी फ्ल्योर ने यहां लंबी कूद और 100 मीटर टी64 श्रेणी में दो स्वर्ण पदक जीते। फ्ल्योर जोंग ने कहा, "भारत में मेरा अनुभव बेहद शानदार रहा। यहाँ के लोग, अधिकारी, वॉलंटियर्स, मेडिकल स्टाफ और होटल स्टाफ, सभी बहुत स्वागतपूर्ण रहे और हर समय मदद के लिए तैयार थे। यह आयोजन बहुत अच्छे तरीके से किया गया है। मुझे खुशी होगी अगर भविष्य में फिर कभी भारत आने का मौका मिले।" पैरालंपिक गेम्स, एशियन पैरा गेम्स और वर्ल्ड चैम्पियनशिप में कई अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुकीं और अनुभवी प्रशासक दीपा मलिक ने कहा कि अब देश के नागरिकों और सरकार, दोनों को पैरा एथलीट्स की उपलब्धियों को सही मायने में पहचानना और सम्मान देना चाहिए। दीपा मलिक ने आगे कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि भारत वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैम्पियनशिप का इतना शानदार आयोजन करेगा। उन्होंने कहा, "एक खिलाड़ी और एक प्रशासक दोनों रूपों में मैं बेहद खुश हूँ कि भारत ने 100 से अधिक देशों की सफलतापूर्वक मेज़बानी की है। यह भारत में पैरा स्पोर्ट्स का अब तक का सबसे बड़ा उत्सव रहा है।
यह आयोजन लोगों के दिलों में जागरूकता और प्यार दोनों बढ़ाएगा, न सिर्फ भारत में, बल्कि पूरे विश्व में भारत की पहचान को मजबूत करेगा। पिछली बार जब इतने बड़े स्तर पर पैरा स्पोर्ट्स का बहुराष्ट्रीय आयोजन हुआ था, वह 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स थे। लेकिन आज का दृश्य बिल्कुल अलग है, चाहे बात खेलों के आयोजन की हो, इन्फ्रास्ट्रक्चर की, रहन-सहन, यात्रा या वॉलंटियर्स की, हर स्तर पर सब कुछ बहुत बेहतर हुआ है।" दीपा ने कहा, "हाँ, भारत 2036 के लिए पूरी तरह तैयार है और आज का भारत एक समावेशी विकसित भारत है, जहाँ पैरा एथलीट्स के लिए अपने सपनों को पूरा करने, आगे बढ़ने और देश का नाम रोशन करने के अपार अवसर हैं।" पैरालंपिक पदक विजेता और कोच अमित सरोहा, जो वर्ल्ड चैम्पियनशिप पदक विजेता एकता भ्याण और धरमबीर को प्रशिक्षित करते हैं, ने कहा कि डब्ल्यूपीएसी अब तक भारत में आयोजित सबसे बेहतर अंतरराष्ट्रीय आयोजन रहा है और अब भारत पैरालंपिक गेम्स की मेज़बानी करने में भी पूरी तरह सक्षम है।
अमित ने सीडब्ल्यूजी 2010 की तुलना भी की, जब पैरा एथलीट विभिन्न देशों से आए थे और भारतीय खिलाड़ियों के साथ खेला था। उन्होंने कहा, "यह भारत में अब तक का सबसे बड़ा पैरा स्पोर्ट्स इवेंट है। 4 वर्ल्ड चैम्पियनशिप और कई पैरालंपिक में हिस्सा लेने के बाद, मैं पूरे आत्मविश्वास के साथ कह सकता हूँ कि खिलाड़ियों को दी गई इन्फ्रास्ट्रक्चर, रहने की सुविधा, भोजन और सुलभ परिवहन जैसी सुविधाएँ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ में शामिल हैं। इन खेलों के सफल आयोजन के साथ मुझे लगता है कि हम वास्तव में पैरालंपिक की मेज़बानी के लिए तैयार हैं, और अब दुनिया ने इसे देख भी लिया है।"
सुमित अंतिल, जो तीन बार वर्ल्ड चैम्पियन रह चुके हैं और डब्ल्यूपीएसी 2025 में पुरुषों के जैवलिन थ्रो एफ64 इवेंट में गोल्ड जीतते हुए चैम्पियनशिप रिकॉर्ड बनाया, ने कहा कि टारगेट ओलिंपिक पोडियम स्कीम (टीओपीएस) के माध्यम से मिलने वाले समर्थन ने भारतीय पैरा एथलीट्स के लिए सब कुछ बदल दिया। "टीओपीएस की शुरुआत 2014 में हुई, और तभी से भारतीय खिलाड़ियों के लिए सही दिशा में बदलाव शुरू हुआ। अंतरराष्ट्रीय अनुभव मिलने से लेकर सोनीपत और गांधीनगर के स्पोर्ट्स ऑथॉरिटी ऑफ इंडिया (एसएआई) सेंटरों में बेहतरीन प्रशिक्षण सुविधाएँ मिलने तक, पैरा एथलीट्स को अब शीर्ष स्तर के कोच, न्यूट्रिशनिस्ट, संतुलित आहार और रिकवरी सिस्टम मिलते हैं, जो कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले असंभव था। इसी वजह से हमारे प्रदर्शन में कई गुना सुधार हुआ है।"
भारत की और भी प्रशंसा हुई। जर्मनी के लॉन्ग जम्प टी64 वर्ग के वर्ल्ड चैंपियन मार्कस रेम ने कहा , "यह मेरा यहाँ दूसरा अनुभव है, लेकिन भारत में हर पल मैंने बहुत एंजॉय किया। मेहमाननवाज़ी शानदार थी और लोग बहुत दोस्ताना हैं।" कनाडा के ग्रेग स्टीवर्ट, जो नई दिल्ली में शॉट पुट में वर्ल्ड चैंपियन बने, ने कहा, "भारतीय संस्कृति कनाडा से बहुत अलग है, लेकिन यहाँ की मेहमाननवाज़ी अद्भुत रही। स्टेडियम या शहर में जहाँ भी गया, हर जगह मैंने गर्मजोशी महसूस की।" अमेरिका के पैरा लॉन्ग जम्पर डेरेक लोसीडेंट, जिन्होंने यहाँ टी64 इवेंट में सिल्वर जीता, ने कहा "नई दिल्ली, भारत में मेरा अनुभव शानदार रहा। मैं यहाँ एक हफ्ते से अधिक समय से हूँ। भोजन से लेकर पूरे आयोजन तक सब कुछ बस अद्भुत था।"
भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र की उल्लेखनीय परिवर्तन यात्रा को रेखांकित करते हुए श्री नायडू ने कहा, "यह पुस्तक बेहद दुर्लभ और सराहनीय प्रयास है और भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र का एक तरह का विश्वकोश है। मेरे लिए यह विशेष क्षण है, क्योंकि ऐसी पुस्तक कम ही मिलती है जो एयरसाइड से लेकर टर्मिनल और लैंडसाइड तक विमानन जगत के हर पहलू को समेटे। इस पुस्तक में डीआईजी मोहंका ने विमानन क्षेत्र से जुड़ी हर एजेंसी और व्यक्ति को सम्मानपूर्वक स्थान दिया है, जो इस क्षेत्र को जीवंत बनाते हैं। पुस्तक का शीर्षक 'अबव एंड बियॉन्ड' वास्तव में भारत की उड़ान यात्रा की भावना को खूबसूरती से अभिव्यक्त करता है।"
तीन दशकों से अधिक अनुभव रखने वाले विमानन विशेषज्ञ शिव कुमार मोहंका ने इस 445 पृष्ठों की पुस्तक में अपने अनुभवों और जानकारियों को समाहित किया है। उनके शब्दों में "यह पुस्तक हर यात्री के लिए साथ रखने योग्स गाइडबुक है। यह तथ्यों, विचारों और अनुभवों का ऐसा रोचक संकलन है, जो पाठकों को न केवल आकर्षित करेगा, बल्कि यह एहसास भी कराएगा कि उड़ान से जुड़ी कितनी बातें अब तक अनजानी थीं।" पूर्व केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री सैयद शहनवाज़ हुसैन ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा, "मेरा मानना है कि यह पुस्तक भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के विमानन क्षेत्र के लिए 'बाइबिल' सिद्ध होगी।"
पुस्तक में अनेक रोचक तथ्य दिए गए हैं जैसे कि 35,000 फीट की ऊँचाई पर हमारे स्वादग्राही (टेस्ट् बड्स) अलग तरह से काम करते हैं, इसलिए यात्रियों के भोजन में विशेष जड़ी-बूटियाँ और मसाले मिलाए जाते हैं। आने वाले समय में वर्टिकल टेकऑफ और लैंडिंग का अनुभव आम हो जाएगा। क्या आप जानते हैं कि दिल्ली एयरपोर्ट का कोड DEL क्यों है, चेन्नई का CHE नहीं, बल्कि MAA क्यों, और ईटानगर का ITA नहीं बल्कि HGI क्यों रखा गया है? या फिर यह कि गर्भावस्था या स्वास्थ्य स्थितियाँ उड़ान अनुभव को कैसे प्रभावित करती हैं, और कौन-से छोटे उपाय यात्रा को सहज बना सकते हैं?
'अबव एंड बियॉन्ड' इन सभी सवालों का उत्तर सहज शैली में देता है - तथ्यों, निजी अनुभवों और विशेषज्ञ दृष्टिकोण के संयोजन के साथ। यह पुस्तक केवल हवाई यात्रा की चमक-दमक तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यात्रियों के वास्स्विक अनुभवों और क्षेत्र की चुनौतियों पर भी प्रकाश डालती है। 1,500 यात्रियों पर आधारित सर्वेक्षण में लेखक ने 262 ऐसे मुद्दों की पहचान की है, जो बार-बार सामने आते हैं। साथ में सेवा की कमियों से लेकर ढाँचागत सुधारों की आवश्यकता तक, इनके समाधान की दिशा में उपयोगी सुझाव भी दिए हैं।
पटना, बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद हवाई अड्डों पर तथा संयुक्त राष्ट्र मिशन (कोसोवो) में सेवा दे चुके मोहंका ने इस पुस्तक में अपने अनुभवों के आधार पर विमानन जगत का ऐसा दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है. जो रनवे से आगे बढ़कर मानव अनुभव की गहराइयों तक जाता है। उनके शब्दों में - "विमानन सिर्फ विमान और यात्रियों की कहानी नहीं, बल्कि यह लोगों, अनुशासन, और प्रगति की यात्रा है। इस पुस्तक के माध्यम से मैंने यह दिखाने का प्रयास किया है कि हर उड़ान के पीछे कितनी सटीक समन्घ्य, अनुशासन और सपनों का संगम होता है।"
राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित मोहंका की यह कृति भारत में हवाई यात्रा के विकास की कहानी को बेहतरीन ढंग से सामने लाती है सीमित पहुँच वाले शुरुआती दौर से लेकर आज के सर्वसुलभ एवं सर्वसंपर्क युग तक। इसमें सुरक्षा, स्थायित्व और सेवा के क्षेत्र में हुए अद्भुत सुधारों का भी उल्लेख है, जिन्होंने उड़ान को विलासिता से आगे बढ़ाकर करोड़ों भारतीयों के लिए एक सुलभ जीवनरेखा बना दिया है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विज़न "उड़े देश का आम नागरिक" के अनुरूप 'हवाई चप्पल से हवाई यात्रा' का सपना आज नए भारत की आकांक्षाओं का प्रतीक बन चुका है। वर्ष 2014 में जहाँ देश में केवल 74 एयरपोर्ट संचालित थे, वहीं आज यह संख्या बढ़कर 162 हो गई है। भारत अब अमेरिका और चीन के बाद विश्व कातीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार बन चुका है।
आज भारत का विमानन क्षेत्र न केवल व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय संपर्क को सशक्त कर रहा है, बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक विकास के प्रमुख इंजन के रूप में भी कार्य कर रहा है। लॉजिस्टिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों पर इस सेक्टर का गुणक प्रभाव (multiplier effect) स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
कांतारा चैप्टर 1 के मुख्य बिंदु:
- रिलीज डेट: 2 अक्टूबर 2025- भाषाएं: हिंदी, कन्नड़, तमिल, तेलुगु, मलयालम, बंगाली और इंग्लिश- निर्देशक और लेखक: ऋषभ शेट्टी- मुख्य अभिनेता: ऋषभ शेट्टी- कहानी: "कांतारा" की घटनाओं से सैकड़ों साल पहले की
फिल्म के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की भविष्यवाणी से पता चलता है कि यह फिल्म पहले दिन ही 236 करोड़ रुपये की कमाई कर चुकी है। इसके अलावा, फिल्म की एडवांस बुकिंग ने रिकॉर्ड बनाना शुरू कर दिया है ¹।
डीपीएस नासिक की प्रिंसिपल शिल्पा अहिराय ने कहा , ;"एआई को सबसे पहले लीडर्स द्वारा स्वीकार किए जाने की जरूरत है, क्योंकि इसे माता-पिता, छात्र और शिक्षक पहले ही स्वीकार कर चुके हैं। लीडर्स के मन में अभी थोड़ी झिझक है, इसलिए वे चाहें तो शुरुआत छोटे-छोटे कदमों या बुनियादी स्किल्स से कर सकते हैं।" पिछले 17 वर्षों से एक्स्ट्रामार्क्स 21,000 से अधिक स्कूलों का विश्वसनीय साझेदार रहा है और इसने दुनिया भर में 1 करोड़ से अधिक छात्रों की शैक्षणिक यात्रा पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। एक्स्ट्रा इंटेलिजेंस इसी विश्वास और अनुभव पर आधारित है, जो वैज्ञानिक रूप से तैयार की गई पढ़ाई की पद्धति, अवार्ड-विनिंग कंटेंट और आधुनिक एआई तकनीक को एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर सहज रूप से जोड़ता है।
एक्स्ट्रा इंटेलिजेंस की मुख्य विशेषताएँ
एक्स्ट्रा इंटेलिजेंस एआई आधारित एक क्रांतिकारी सुविधा है, जो शिक्षकों को पढ़ाई की योजना बनाने, असेसमेंट करने और पर्सनलाइज्ड लर्निंग में मदद करती है, साथ ही हर कक्षा से जुड़े फैसले के केंद्र में शिक्षकों को बनाए रखती है। यह नेशनल एजुकेशन पॉलिसी से जुड़ी समृद्ध कंटेंट लाइब्रेरी पर आधारित है, जिसे लगातार अपडेट किया जाता है ताकि यह नए पाठ्यक्रम और टीचिंग ट्रेंड्स से मेल खाए। साथ ही, इसमें शिक्षकों और छात्रों से मिले लगातार फीडबैक को शामिल किया जाता है, जिससे यह न केवल भरोसेमंद बनता है बल्कि कक्षा की वास्तविक ज़रूरतों से गहराई से जुड़ा रहता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
1. टीचर असिस्टेंट जो हर शिक्षक की अपनी शैली से मेल खाता है
a. टीचिंग डेक जेनरेटर: किसी भी विषय पर पूरा टीचिंग डेक कुछ ही सेकंड में तैयार कर सकता है। इससे समय औरमेहनत बचती है, और शिक्षक अपनी शैली के अनुसार उदाहरण जोड़कर क्लास को और असरदार बना सकते हैं।b. क्लासरूम एक्टिविटी जेनरेटर: विषय और छात्रों के स्तर के अनुसार तुरंत ही क्लासरूम गतिविधियाँ तैयार करताहै। बस एक छोटा-सा निर्देश टाइप करें और टीचर असिस्टेंट, प्रैक्टिकल एक्सरसाइज़ सुझा देगा। इससे तैयारी कासमय घटेगा और पढ़ाई ज्यादा रोचक बनेगी।c. टुगेदर मोड: हर लेसन को एक साझा अनुभव में बदल देता है। इसमें इंटरएक्टिव गेम्स के ज़रिए छात्रों को बारी-बारी से शामिल किया जाता है। एक्स्ट्रा इंटेलिजेंस क्लास को हमेशा जीवंत, सहयोगी और पूरी तरह से जुड़ा हुआबनाए रखता है।
2. असेसमेंट्स जो स्मार्ट, तेज़ और चीट-प्रूफ हैं
a. पावर क्वेश्चन्स: हर छात्र के लिए एक ही कॉन्सेप्ट पर अलग और यूनिक प्रश्न तैयार करता है। एक्स्ट्रा इंटेलिजेंस सेचीटिंग की संभावना कम होती है और मूल्यांकन ज्यादा निष्पक्ष और सुरक्षित बनता है।b. ऑब्जेक्टिव से सब्जेक्टिव कन्वर्ज़न: एमसीक्यू को एक क्लिक में ओपन-एंडेड सवालों में बदल देता है। यह फीचरशिक्षकों को छात्रों की कॉन्सेप्चुअल समझ जानने में मदद करता है और उन्हें बोर्ड स्तर की तैयारी के लिए तैयारकरता है।c. सब्जेक्टिव आंसर इवैल्यूएशन: हाथ से लिखे गए आंसर को स्कैन करें और एक्स्ट्रा इंटेलिजेंस की मदद से तुरंतमूल्यांकन प्राप्त करें। इससे सही स्कोर, स्ट्रक्चर्ड फीडबैक और अकादमिक मानकों के अनुसार सख्ती को एडजस्ट करनेकी सुविधा मिलती है।
3. पढ़ाई जो सभी बोर्ड और भाषाओं के अनुसार अनुकूल होती है
a. लेसन प्लानर: अपने पूरे लेसन या पाठ्यक्रम को मिनटों में प्लान करें। बस किसी भी किताब का इंडेक्स स्कैन करेंऔर एक्स्ट्रा इंटेलिजेंस उसे एक्स्ट्रामार्क्स कंटेंट लाइब्रेरी से ऑटो-मैप कर देगी, जिससे बोर्ड-विशेष और व्यवस्थितलेसन प्लान आसानी से तैयार हो जाएगा।b. ट्रांसलेट: किसी भी लेसन, प्रश्न या वीडियो को मराठी, तमिल, तेलुगु जैसी क्षेत्रीय भाषाओं में बदलकर भाषा कीबाधाओं को दूर करें। एक्स्ट्रा इंटेलिजेंस मल्टीलिंगुअल लर्निंग का समर्थन करता है और ब्रिटिश या अमेरिकन इंग्लिशजैसे ग्लोबल उच्चारण में भी मदद करता है, ताकि हर छात्र अपनी सबसे पसंदीदा भाषा में आसानी से सीख सके।
4. घर पर सीखने के लिए छात्र का को-पायलट
a. इंस्टेंट डाउट सॉल्वर: फोटो अपलोड करें, अपना सवाल बोलें या टाइप करें और तुरंत मदद पाएं। एक्स्ट्रा इंटेलिजेंससवाल को समझकर साफ और सही उत्तर देता है।b. हेल्प मी सॉल्व इट: वर्कशीट या प्रॉब्लम सॉल्व करते समय स्टेप-बाय-स्टेप मदद पाएं। एक्स्ट्रा इंटेलिजेंस जटिलसवालों को छोटे और आसान कदमों में तोड़ती है, जिससे छात्र खुद सोच सकें बिना अंतिम उत्तर बताए।c. आस्क इट: कोई भी वीडियो देखते समय सवाल पूछें। एक्स्ट्रा इंटेलिजेंस सीधे उत्तर के साथ एक एक्सप्लेनरवीडियो भी सुझाती है, ताकि सीखना कभी न रुके।
5. लाइव क्लास को अधिक अटेंटिव, प्रभावी और जिम्मेदार बनाना
a. एंगेजमीटर: छात्रों की भागीदारी को रीयल-टाइम में ट्रैक करें। एक्स्ट्रा इंटेलिजेंस स्कूल इंटीग्रेटेड प्रोग्राम(एसआईपी) की लाइव क्लास के दौरान हाथ उठाने, चेहरे के इशारों और एंगेजमेंट लेवल को मॉनिटर करता है,जिससे शिक्षक आसानी से डिसइंगेजमेंट पहचान सकें और समय पर मदद दे सकें।b. अटेंडेंस ट्रैकर: ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों क्लास की उपस्थिति को ऑटोमेट करें। एक्स्ट्रा इंटेलिजेंस फेसियलरिकॉग्निशन का उपयोग करके सटीक और कॉन्टैक्टलेस अटेंडेंस ट्रैकिंग करता है, जिससे पढ़ाई का समय बचता है औरजिम्मेदारी सुनिश्चित होती है।
टाटा मेमोरियल सेंटर के डायरेक्टर डॉ. सुदीप गुप्ता ने कहा , "यह नया हॉस्पिटल ब्लॉक कैंसर मरीजों के लिए उन विशेष उपचार सेवाओं की कमी को पूरा करेगा, जो अन्य बीमारियों (जैसे हृदय, फेफड़ों, तंत्रिका तंत्र, गुर्दे और पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियाँ) के इलाज के लिए आवश्यक होती हैं। अब तक एसीटीआरईसी एक स्वतंत्र कैंसर सेंटर था, इसलिए मरीजों को इन सेवाओं के लिए अन्य अस्पतालों में जाना पड़ता था। इस प्रोजेक्ट की एक बड़ी खासियत 60 बिस्तरों वाले बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) यूनिट का निर्माण है, जिससे एसीटीआरईसी दक्षिण एशिया के सबसे बड़े बीएमटी सेंटर्स में से एक बन जाएगा। बढ़ते कैंसर मामलों और हजारों मरीजों के बीएमटी उपचार की प्रतीक्षा को देखते हुए, इस अस्पताल का निर्माण बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह प्रक्रिया बहुत जटिल और महंगी होती है। नई सुविधा में यह जीवनरक्षक उपचार बहुत कम या रियायती दरों पर उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि एडवांस केयर सभी जरूरतमंद मरीजों तक पहुंच सके।"
एसीटीआरईसी के डायरेक्टर डॉ. पंकज चतुर्वेदी ने कहा , "टाटा मेमोरियल सेंटर (टीएमसी) देशभर से आने वाले अनगिनत कैंसर मरीजों को एडवांस, सस्ते और कई बार जीवनरक्षक उपचार प्रदान करता है। इस प्रोजेक्ट में हमारी भूमिका खास तौर पर उन मरीजों के लिए विशेष चिकित्सा सेवाओं की कमी को पूरा करना है, जिन्हें कैंसर के साथ अन्य बीमारियाँ भी होती हैं, और सबसे महत्वपूर्ण जरूरतमंदों के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) जैसी सुविधाएँ सुलभ कराना है।"
एसीटीआरईसी के उपनिदेशक और बोन मैरो ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ, डॉ. नवीन खत्री ने कहा, "बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) एक बहुत ही महत्वपूर्ण और जटिल चिकित्सीय प्रक्रिया है, जिसके लिए हज़ारों मरीज, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, इलाज की उम्मीद में इंतजार कर रहे हैं। यह नई सुविधा, जिसमें 60 बिस्तरों वाला बीएमटी यूनिट होगा, न केवल एसीटीआरईसी को दक्षिण एशिया के सबसे बड़े सेंटर्स में शामिल करेगी, बल्कि यह जीवनरक्षक उपचार बहुत ही रियायती दरों पर मरीजों को उपलब्ध कराएगी।" यह साझेदारी भारत में कैंसर मरीजों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं और उपचार को बेहतर बनाने के लिए टीएमसी के निरंतर प्रयासों में एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन साबित होगी। नवी मुंबई स्थित एसीटीआरईसी, टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल में नया मल्टीस्पेशियलिटी ओपीडी हॉस्पिटल ब्लॉक सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली कैंसर देखभाल के नए मानक स्थापित करने के लिए तैयार है।