कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में अग्रिम पंक्ति में खड़े होने वाले स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला केरल का है। जहां कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के बाद अपनी जान गंवाने वाले न्यूरोसर्जन को जब कुछ लोग दफना रहे थे, जिसमें डॉक्टर भी शामिल थे। तभी भीड़ ने उनपर हमला कर दिया। संक्रमित डॉक्टर की निजी अस्पताल में रविवार को मौत हो गई थी। पूनमल्ली हाई रोड पर स्थित निजी अस्पताल के प्रमुख 55 वर्षीय डॉक्टर के शव को रविवार रात को किलपौक के पास चेन्नई कॉरपोरेशन के कब्रिस्तान में स्थानांतरित कर दिया गया था। हालांकि सड़क पर 200 लोग इकट्ठा हो गए और उन्होंने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
एक डॉक्टर प्रदीप कुमार ने कहा, 'चेन्नई नगर निगम के कर्मचारियों ने सभी व्यवस्थाएं की थीं और हमारे साथ निजी अस्पताल से कब्रिस्तान तक आए थे। हालांकि वहां पहुंचने पर हमने पाया कि लगभग 200 लोग वहां इकट्ठा हो चुके थे और उन्होंने विरोध करना शुरू कर दिया। पुलिस मौके पर मौजूद थी। निगम अधिकारियों ने कहा कि हमें अन्ना नगर (वेलांगु) में स्थित कब्रिस्तान जाना चाहिए। हम अन्य कब्रिस्तान पर पहुंचे। नियमों के अनुसार कब्रिस्तान में हम बहुत कम लोग मौजूद थे जिसमें डॉक्टर और परिवार के सदस्य शामिल थे।'
उन्होंने घटना को याद करते हुए कहा, 'अचानक वहां भी 50-60 लोग आ गए और उन्होंने हमपर हमला करना शुरू कर दिया। उन्होंने हमपर पत्थर फेंके और लाठी से मारना शुरू कर दिया। मौके पर करीब सात से आठ निगम कर्मचारी मौजूद थे। हमें हमले से बचने के लिए घटनास्थल से भागना पड़ा। हम में से बहुत से लोगों के शरीर से खून निकल रहा था। हमलावरों ने अस्पताल की एंबुलेंस के विंडशील्ड को क्षतिग्रस्त कर दिया। हम उसी वाहन से वापस गए।'
घटना में घायल हुए एंबुलेंस ड्राइवर ने कहा कि गवर्नमेंट किलपौक मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उनके सिर में चार टांके लगाए गए हैं। वहीं अन्य साथी के सिर में भी चोट लगी है और छह टांके लगाए गए। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पुलिस सुरक्षा में शव को दफनाया गया।
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