बजट सत्र को लेकर शनिवार को हुई सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों को लेकर बड़ी बातें कहीं। पीएम मोदी ने कहा कि सरकार किसानों से बातचीत को हमेशा तैयार है। उन्होंने कहा कि किसानों से कृषि मंत्री की ओर से किया गया वादा आज भी कायम है। पीएम ने यहां तक कहा, ''किसानों से सरकार सिर्फ एक फोन कॉल दूर है।'' बजट सत्र (2021-22) को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज सर्वदलीय बैठक हुई। इस बैठक में कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद, तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंद्योपाध्याय, शिवसेना सांसद विनायक राउत और शिरोमणि अकाली दल के बलविंदर सिंह भुंडर ने किसान आंदोलन पर अपना पक्ष रखा। वहीं, जेडीयू का प्रतिनिधित्व कर रहे राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह ने कृषि कानूनों का समर्थन किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से कहा कि उनकी सरकार प्रदर्शनकारी किसानों की ओर से उठाए गए मुद्दों का बातचीत के जरिए समाधान निकालने का निरंतर प्रयास कर रही है। संसद में विभिन्न दलों के सदन के नेताओं की डिजिटल बैठक में मोदी ने यह भी कहा कि तीन कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार ने जो प्रस्ताव दिया था वो आज भी बरकरार है। सरकार ने यह सर्वदलीय बैठक बजट सत्र के दौरान संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने और विधायी कार्यों के संदर्भ में चर्चा के मकसद से बुलाई थी। विभिन्न दलों के नेताओं ने इस बैठक में अलग अलग मुद्दे उठाए। इस बैठक में प्रधानमंत्री के संबोधन का हवाला देते हुए बताया कि मोदी ने नेताओं से कहा कि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर प्रदर्शनकारी किसानों से सिर्फ एक फोन कॉल की दूरी पर हैं और तोमर ने इस महीने की शुरुआत में किसान नेताओं को इस बात से अवगत भी कराया था।
आपको बता दें कि आमतौर पर इस तरह की सभी बैठकें संसद के सत्र से पहले होती थीं, ताकि दोनों सदनों की कार्यवाही सुगमता से हो सके। इस वर्चुअल बैठक के दौरान, विपक्षी दलों द्वारा किसान आंदोलन पर चर्चा कराने की मांग की संभावना पहले से ही थी। दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर पिछले दो महीनों से प्रदर्शनकारी किसान केंद्र के तीन नये कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग करते हुए डटे हुए हैं। हालांकि, विपक्षी दलों ने शुक्रवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा बुलाई गई एक सर्वदलीय बैठक में इसी तरह की मांग की, लेकिन सरकार ने सुझाव दिया कि किसान आंदोलन का मुद्दा राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उठाया जा सकता है, जिसके लिए लोकसभा में दो, तीन और चार फरवरी को 10 घंटे का समय आवंटित किया गया है।
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