अजीत दूबे की रिपोर्ट। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस दो फाड़ होती नजर आ रही है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और बंगाल कांग्रेस प्रमुख अधीर रंजन चौधरी के बीच विवाद बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। कोलकाता में प्रदेश कांग्रेस भवन में मल्लिकार्जुन खड़गे की फोटो पर काली स्याही पोत दी गई। फिर बाद में पोस्टर को दूध से धोया गया। हालांकि, जैसे ही कांग्रेस नेताओं को इस घटना की जानकारी मिली उन्होंने खड़गे की तस्वीर पर स्याही से पोते गए बैनर हटा लिए। दिलचस्प बात ये है कि उस तस्वीर पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी की तस्वीर भी थी, लेकिन उसे छुआ तक भी नहीं गया था। मामला संज्ञान में आते ही तुरंत स्याही लगे होर्डिंग्स और बैनर को हटा दिया गया। हालांकि, प्रदेश कांग्रेस इसके लिए टीएमसी को जिम्मेवार बता रही है।
दरअसल, बंगाल में इंडिया ब्लॉक की सहयोगी टीएमसी और उसकी नेता ममता बनर्जी को लेकर कांग्रेस हाई कमान और बंगाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी की सोच अलग-अलग नजर आ रही है। लेकिन, खड़गे की तस्वीर पर कालिख पोते जाने से लग रहा है कि पार्टी के अंदर का विवाद काफी ज्यादा गहरा गया है। सूत्रों की मानें तो, ममता बनर्जी और इंडिया अलायंस पर हमलों को लेकर खड़गे की ओर से बंगाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी को फटकार लगाए जाने के एक दिन बाद कोलकाता में पार्टी के बंगाल हेडक्वार्टर बिधान भवन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की तस्वीर पर काली स्याही लगा दी गई और बैनर पर 'टीएमसी दलाल' लिखा गया। दिलचस्प है कि इस बार चौधरी के लिए प्रचार करने कांग्रेस का कोई दिग्गज नहीं आया।
जानें क्या है पूरा मामला
ममता बनर्जी ने एक रैली के दौरान कहा था कि वो केंद्र में इंडिया गठबंधन की सरकार बनाने के लिए उन्हें बाहर से समर्थन देंगी। उनके इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अधीर रंजन चौधरी ने कहा था कि उन्हें ममता बनर्जी पर भरोसा नहीं है और वो बीजेपी के साथ जा सकती है। इस बारे में जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं। वो सरकार का हिस्सा बनेंगी। इसको लेकर फैसला अधीर रंजन चौधरी नहीं करेंगे। ये निर्णय मैं और आलाकमान करेंगे, जो लोग सहमत नहीं हैं, वो बाहर जाएंगे।
अधीर रंजन ने किया था पलटवार
खरगे के बयान पर अधीर रंजन चौधरी ने कहा था, 'मैं किसी भी ऐसे व्यक्ति का समर्थन नहीं करना चाहता हूं, जो मुझे और कांग्रेस पार्टी को राजनीतिक रूप से खत्म करने की इच्छा रखता हो। ये लड़ाई कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की है। मैं उनसे भी बात कर चुका हूं। उन्होंने आगे कहा था, ' ममता बनर्जी के प्रति उनका विरोध सैद्धांतिक रूप से है। इसमें उनका कोई व्यक्तिगत हित या अहित नहीं है। उनका ये द्वेष व्यक्तिगत नहीं है। मैं बस उनकी राजनीतिक नैतिकता पर सवाल उठा रहा हूं।'
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