कुलवंत कौर के साथ बंसी लाल की रिपोर्ट। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) की अध्यक्ष प्रो. सरोज शर्मा ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा पेश की गई नई शिक्षा नीति मूल्य आधारित शिक्षा पर केंद्रित है ताकि आज के छात्र एक जिम्मेदार नागरिक बन सकें और देश के विकास में योगदान दे सकें। यहां जीवा पब्लिक स्कूल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के आलोक में राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (National Curriculum Framework - NCF) पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रो. शर्मा ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति सुगमता से पहुँच, समानता, गुणवत्ता और भारत-केंद्रित शिक्षा की वकालत करती है। उन्होंने कहा, "भारत का लक्ष्य 2030 तक 100 प्रतिशत साक्षरता दर हासिल करना है और इसे हासिल करने के लिए एनआईओएस उन छात्रों को शिक्षा प्रदान करने के लिए काम करेगा जो नियमित स्कूल नहीं जा रहे हैं। साथ ही समाज में हाशिए पर खड़े वर्गों को भी हमारी शिक्षा प्रणाली में शामिल करेगा जिसमें विशेष आवश्यकता वाले बच्चे और वंचित बच्चे शामिल हैं।"
प्रो. शर्मा ने आगे कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में नए भारत के निर्माण की परिकल्पना की गई है। उन्होंने कहा, "यह मूल्य आधारित शिक्षा पर भी ध्यान केंद्रित करता है। एनईपी हमारी प्राचीन संस्कृति और परंपराओं में निहित है, जिन्हें हमें संरक्षित करने की आवश्यकता है। साक्षरता और ज्ञान में अंतर होता है। हम कुछ वर्षों में पूरी तरह से साक्षर हो सकते हैं, लेकिन हकीकत में ज्ञान ही समाज में बदलाव लाने का कारक बन सकता है तथा हाल ही में पश्चिम बंगाल में हुई दर्दनाक घटना जैसी अप्रिय घटनाओं को रोक सकता है।" उन्होंने कहा कि हालांकि सभी साक्षर हैं और अच्छी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन हमारी शिक्षा समाज को स्वस्थ रखने में विफल रही है। प्रो. शर्मा ने कहा, "मैं समझता हूं कि शिक्षा प्रणाली में एक समस्या जरूर है और एनईपी में अधिकांश चीजों को एड्रेस किया गया है।"
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के सचिव डॉ अतुल कोठारी ने कहा, " नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति मानवीय मूल्यों के विकास पर केंद्रित है। दुनिया जानती है कि यह केवल भारत ही है जो मूल्य आधारित शिक्षा प्रणाली को समझता है और दुनिया को इसके बारे में सिखा सकता है। विभिन्न देशों और संस्थानों से इसकी मांग बढ़ रही है। हमारे शिक्षकों को इस चुनौती के लिए तैयार रहना चाहिए।" डॉ. कोठारी ने कहा कि एनईपी शिक्षा के लिए समग्र दृष्टिकोण पर केंद्रित है। हमें एनईपी के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक मॉडल बनाने की भी आवश्यकता है।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए एनसीईआरटी के शिक्षक शिक्षा विभाग के प्रमुख प्रोफेसर शरद सिन्हा ने कहा कि भारत जैसे विविधतापूर्ण और विशाल देश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लाना एक बहुत बड़ा काम था। उन्होंने कहा, "पुरानी शिक्षा नीति में बहुत ज़्यादा विविधता नहीं थी। सरकारी स्कूल, निजी संस्थान, ट्रस्ट आदि जैसे अलग-अलग स्कूली प्रारूप हैं। भारत जैसे विशाल देश में कई भाषाएँ हैं। इसलिए एक ने पाठ्यचर्चा फ्रेमवर्क की जरूरत थी। इसलिए शिक्षकों और शिक्षाविदों की स्पष्ट दृष्टि को ध्यान में रखते हुए स्कूली शिक्षा के लिए 600-पृष्ठों के राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे (एनसीएफ) को तैयार किया गया।"
प्रोफेसर सिन्हा ने आगे कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति एक परिवर्तनकारी पहल है, फिर भी इसका उद्देश्य मूल संस्कृति तथा देश की सांस्कृतिक विरासत को एक समान शिक्षा प्रणाली के साथ सतत रूप से संबोधित करना है। हालाँकि, उन्होंने प्रौद्योगिकी के आगमन और लोगों के सोशल मीडिया से जुड़ाव की खतरनाक प्रवृत्ति के बारे में भी आगाह किया। उन्होंने शिक्षक समुदाय को सोशल मीडिया एजुकेटर्स की बढ़ती संख्या से सावधान किया, जो शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए उपकरण विकसित करने का दावा करते हैं। उन्होंने कहा, "ऐसा संभव नहीं है जब हम सोशल मीडिया पर युवाओं को दो-दो दशकों का अनुभव रखने वाले शिक्षकों को सलाह देते हुए देखते हैं। हमें शिक्षा को सुसंस्कृत बनाने के लिए एक स्थिर और व्यवस्थित मूल्य आधारित शिक्षा प्रणाली भी विकसित करनी होगी।"
इस अवसर पर बोलते हुए जीवा पब्लिक स्कूल के संस्थापक और अध्यक्ष ऋषि पाल चौहान ने कहा कि संगोष्ठी का मुख्य विषय भारत की स्कूली शिक्षा प्रणाली में व्यापक परिवर्तन और गुणात्मक सुधार की परिकल्पना को साकार कैसे करें, इस विषय पर था, जैसा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में उल्लिखित है। संगोष्ठी में देश भर के प्रतिष्ठित स्कूलों और संस्थानों का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 400 शिक्षकों ने भाग लिया। यह संगोष्ठी भारत में शिक्षा के भविष्य पर चर्चा करने के लिए देश भर के प्रतिष्ठित शिक्षकों, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों को एक साथ लेकर आई। उन्होंने कहा, “इस संगोष्ठी से पहले, एनआईओएस और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्त तत्वावधान में 15-दिवसीय वेबिनार श्रृंखला आयोजित की गई थी। इस श्रृंखला में 26 सत्र शामिल थे, जहाँ एनसीईआरटी, सीबीएसई, एआईसीटीई, विभिन्न केंद्रीय विश्वविद्यालयों और देश भर के स्कूल प्रिंसिपलों के विशेषज्ञों ने एनसीएफ के अध्यायों पर सार्थक चर्चा की।”
जीवा लर्निंग सिस्टम के बारे में बात करते हुए श्री चौहान ने कहा कि हमारा लर्निंग सिस्टम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है और विभिन्न स्कूल बोर्डों के स्कूलों को समर्थन देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह प्रत्येक छात्र की आवश्यकता के अनुरूप लर्निंग सिस्टम को प्राथमिकता देता है और कौशल एवं मूल्य आधारित शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करता है।
जीवा लर्निंग सिस्टम के बारे में
30 वर्षों के अनुसंधान एवं विकास के आधार पर जीवा लर्निंग सिस्टम (जेएलएस) एक व्यापक शैक्षिक ढाँचे के रूप में प्रतिष्ठित हुआ है जो कौशल एवं मूल्य आधारित शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए प्रत्येक छात्र की आवश्यकता के अनुरूप शिक्षा को प्राथमिकता देता है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है, और विभिन्न स्कूल बोर्डों के स्कूलों को सहायता प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। जीवा लर्निंग सिस्टम सभी के लिए एक ही दृष्टिकोण के बजाय प्रत्येक बच्चे की विशिष्टता को पोषित करने के इर्द-गिर्द बना है। यह बच्चों में शिक्षा, कौशल और मूल्यों को एकीकृत करता है तथा उन्हें जीवन में सफल होने और दृढ़ विश्वास के साथ नई चुनौतियों का सामना करने के लिए जीवन कौशल और प्रतिस्पर्धी क्षमताओं से सशक्त बनाता है।
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