सऊदी अरब ने कच्चे तेल की कीमतों में भारी कटौती की घोषणा कर दी है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 30 फीसदी तक गिर गई हैं। सऊदी अरब की ओर से प्राइस में कटौती के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 1991 के बाद इतनी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर 14.25 डॉलर या 31.5 फीसदी गिरकर 31.02 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है।
17 जून 1991 को पहला खाड़ी युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में यह सबसे बड़ी गिरावट है। इस गिरावट के साथ ब्रेंट क्रूड फ्यूचर 12 फरवरी 2016 के निचले स्तर पर पहुंच गया है। यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड 11.28 डॉलर या 27.4 फीसदी गिरकर 30 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतों में भी पहले खाड़ी युद्ध के बाद सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है और यह 22 फरवरी 2016 के निचले स्तर पर पहुंच गया है। इस समय ब्रेंट क्रूड फ्यूचर 35.75 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 32.61 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।
एंजेल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसीडेंट अनुज गुप्ता का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में हो रही गिरावट का असर घरेलू बाजार पर पड़ना तय है। गुप्ता का मानना है कि जिस गति से कच्चे तेल की कीमतें गिर रही हैं, उससे घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में एक सप्ताह में 2 से 3 रुपए तक की कटौती हो सकती है। उनके मुताबिक, ओपेक देशों और रूस के बीच उत्पादन में कटौती पर असहमति होने का असर कच्चे तेल की कीमतों पर करीब दो सप्ताह तक बना रहेगा। उन्होंने आशंका जताई कि कोरोना वायरस और अन्य कारणों से मांग में कमी के कारण कच्चे तेल की कीमतें 28 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकती हैं।
भारत पूरी दुनिया में कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक है। इसका असर भारत के करंट अकाउंट व्यापार घाटे पर पड़ता है। अनुज गुप्ता का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में कटौती का भारत के व्यापार घाटे को ज्यादा फायदा नहीं होगा। इसका कारण यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के अधिकांश सौदे भविष्य के आधार पर किए जाते हैं, जिनका भुगतान सौदे में तय कीमत के आधार पर किया जाता है। ऐसे में मार्च के बाद खरीदे जाने वाले कच्चे तेल से भारत के व्यापार घाटे में कमी आ सकती है।
कोरोनावायरस के कारण कच्चे तेल की कीमतों में हो रही लगातार गिरावट को थामने के लिए ओपेक और सहयोगी देश तेल उत्पादन में रोजाना 1.5 मिलियन बैरल कटौती की योजना बना रहे थे, लेकिन रूस ने इस पर अपनी सहमति नहीं दी। इसके बाद विश्व के सबसे बड़े तेल उत्पादक देश सऊदी अरब ने रविवार को कच्चे तेल की कीमतों में कटौती की घोषणा कर दी। जानकारों का कहना है कि कीमतों में कमी करके सऊदी अरब रूस को तेल उत्पादन कटौती पर सहमत नहीं होने की सजा देना चाहता है। सूत्रों के हवाले से रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि ओपेक और रूस के बीच तेल सप्लाई को लेकर समझौता अप्रैल में खत्म हो रहा है। इस समझौते को खत्म होने के बाद सऊदी अरब अपने क्रूड उत्पादन में 10 मिलियन बैरल रोजाना की बढ़ोतरी करने की योजना बना रहा है।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब ने कच्चे तेल की कीमतों में 20 साल की सबसे बड़ी कटौती की है। सऊदी ने अप्रैल डिलीवरी में सभी देशों के लिए कच्चे तेल की कीमतों में 6 से 8 डॉलर प्रति बैरल की कटौती की है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सऊदी की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको यूरोपीय देश के लिए अरबियन लाइट क्रूड की बिक्री ब्रेंट के मुकाबले 10.25 डॉलर प्रति बैरल सस्ती दर पर बेच रही है।
लेखक नितेश मांगलिक द्वारा लिखित और ड्रीम पब्लिशर्स एवं गाइडिंग सन प्रेस द्वारा प्रकाशि ..Read More
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) दिल्ली प्रांत के दो दिवसीय 61वें प्रांत अधिवेशन ..Read More
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक 'वेदांत स्थल' पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ..Read More
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) दिल्ली प्रदेश इकाई के अध्यक्ष और मंत्री दायित्व ..Read More
कुलवंत कौर के साथ बंसी लाल की रिपोर्ट। दिल्ली लिटरेचर फेस्टिवल (DLF) का 14वां संस्करण ..Read More
कुलवंत कौर के साथ बंसी लाल की रिपोर्ट। उत्तर भारत के सबसे भव्य और महाशिवरात्रि आयोजनों ..Read More
कर्णगोष्ठी कल्याण समिति, नोएडा के तत्वावधान में हिमालय अपार्टमेंट, वसुंधरा, ग़ाज़ियाबाद ..Read More
कुलवंत कौर के साथ बंसी लाल की रिपोर्ट। 2024 में अपने पहले संस्करण की ज़बरदस्त सफलता के ..Read More
कुलवंत कौर के साथ बंसी लाल की रिपोर्ट। भारत में एडवांस्ड डायग्नोस्टिक सेंटर्स की एक जा ..Read More