दुनियाभर में फैल रहे कोरोनावायरस में धार्मिक स्थलों और कार्यक्रमों ने ही सबसे बड़ी भूमिका निभाई। एक तरफ जहां देश के ज्यादतर मंदिर बंद हैं वहीं दूसरी ओर मस्जिदों में नमाज अदा करने को लेकर लगातार वीडियो वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया पर लगातार मस्जिदों को बंद करने की अपील की जा रही है। दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्थित मरकज में न सिर्फ देश के विभिन्न राज्यों से बल्कि विदेशों से भी एक से 15 मार्च तक तब्लीग-ए-जमात में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे थे। देश-विदेश के लोगों को मिलाकर कुल 1830 लोग मरकज में पहुंचे थे।
इस अवधि के बाद भी 1,400 लोग यहां रुके हुए थे। कोरोनावायरस के चलते मरकज से अब तक कुल 860 लोगों को निकालकर अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचाया जा चुका है। वहीं अभी 300 और लोगों को निकाल कर अस्पताल ले जाया जा रहा है। इन्हीं में से मरकज में शामिल होने वाले छह लोगों की तेलंगाना में कोरोनावायरस से मौत हो गई। उधर, अंडमान में 10 लोगों की रिपोर्ट में कोरोनावायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है। इन 10 में 9 लोग वह हैं जो दिल्ली की मरकज में शामिल हुए थे। 10वीं संक्रमित महिला भी इन्हीं में से एक पत्नी है जो दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज में शामिल हुए थे। श्रीनगर में भी एक व्यक्ति की मौत हुई,वह मरकज में शामिल हुआ था।
देश में लॉकडाउन के ऐलान के बाद इस तरह लोगों का इक_ा होना अपराध है। लेकिन, मरकज आयोजित करने वाले मस्जिद प्रशासन का कहना है कि उन्होंने किसी तरह के नियमों का उल्लंघन नहीं किया है। इनका कहना है कि यह आयोजन हर साल एक बार होता है। प्रधानमंत्री मोदी ने जब जनता कफ्र्यू की घोषणा की थी, उसी दिन से मरकज को बंद कर दिया गया, लेकिन ट्रेनें न चलने के कारण मरकज में आए लोग यहीं फंसे रह गए। जनता कफ्र्यू के एक दिन पहले ही रेलवे ने देशभर की कई ट्रेनों को रद्द कर दिया था। 22 तारीख को रात 9 बजे तक कहीं नहीं निकला जा सका। इसी दिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 23 तारीख को सुबह 6 बजे से 31 मार्च राज्य में लॉकडाउन का ऐलान कर दिया और फिर 25 मार्च से पूरे देश को ही लॉकडाउन कर दिया गया। ऐसे में मरकज में आए लोगों कहीं नहीं जा पाए। हालांकि 1500 से ज्यादा लोगों को किसी तरह निजी वाहनों के जरिए घरों तक पहुंचाया गया। लेकिन करीब इतने ही लोग यहां फंसे रह गए।
यहां तमिलनाडु के 64 साल के बुजुर्ग को तबीयत बिगडऩे पर अस्पताल ले जाना पड़ा था, जहां रविवार को उनकी मौत हो गई। मौत की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन ने सक्रियता दिखाते हुए मरकज में जांच की। यहां एक-एक कमरे में 8-10 लोग ठहरे थे। इनमें से कई को हल्की खांसी और जुकाम की शिकायत भी थी। इतनी तादाद में संदिग्ध मिलने पर प्रशासन ने डीटीसी की बसें लगाकर लोगों को अस्पतालों में पहुंचाना शुरू किया।
इस खबर के बाद ट्वीटर से लेकर फेसबुक तक लोगों ने मस्जिदों और मुस्लिमों से संबंधित सभी धार्मिक आयोजनों पर रोक लगाने की बात उठने लगी है। लोग तरह-तरह के वीडियो को शेयर कर रहे हैं। इसमें कुछ आपत्तिजनक भी हैं। एक तरफ जब देश इस महामारी से जंग लड़ रहा है तो दूसरी तरफ इस प्रकार की खबरें हमें परेशान करती है। लोगों को मिलजुलकर इस कोरोना नामक वायरस को भगाने के लिए आगे आना चाहिए। मुस्लिम संगठनों को भी अपनी जिम्मेवारी निभानी चाहिए ताकि हमारा देश इस संकट से जल्दी निकल सके।
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