चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने पटना में बुधवार को एक कार्यक्रम को आयोजित कर अपनी पार्टी लॉन्च कर दी है. उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी का नाम जन सुराज ही होगा. अपनी पार्टी के द्वारा उन्हें बिहार में राजनीतिक परिदृश्य में तूफान आने की उम्मीद है. उन्होंने मनोज भारती को कार्यकारी का अध्यक्ष बनाया है. पार्टी के लॉन्च के दौरान उन्होंने पटना के वेटनरी कॉलेज ग्राउंड में बुधवार को भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि बहुत दिन से जन सुराज अभियान चल रहा है, पिछले दो ढाई सालों से चल रहा है. अब लोग पूछ रहे हैं कि हम पार्टी कब बनाएंगे. आप यहां पार्टी बनाने के लिए जुटे हैं. भगवान का शुक्रिया अदा करना चाहिए, आज चुनाव आयोग ने आधिकारिक तौर पर जन सुराज को जन सुराज पार्टी के तौर में स्वीकार कर लिया गया है.
शांत किशोर की जन सुराज पार्टी के संविधान में क्या-क्या?
चुनाव रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने बुधवार को अपनी नई पार्टी ‘जन सुराज’ का आधिकारिक ऐलान कर दिया. इसके साथ ही उन्होंने पार्टी के संविधान और संगठन की रूपरेखा जनता के सामने रखी. प्रशांत किशोर ने यह स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी पारंपरिक राजनीति से हटकर एक नया राजनीतिक मॉडल अपनाएगी, जिसमें जनता की भागीदारी सबसे पहले होगी. जन सुराज पार्टी में अध्यक्ष का कार्यकाल सिर्फ एक साल का होगा, जबकि पार्टी की कमिटी का कार्यकाल दो साल का होगा. इससे पार्टी में नेतृत्व का लगातार बदलाव और नए सोच-विचारों को शामिल किया जाएगा.
प्रशांत किशोर ने पार्टी के उम्मीदवारों को चुनने की प्रक्रिया में जनता की भूमिका को सबसे अहम बताया. उनके अनुसार, उम्मीदवारों का चयन पार्टी नहीं करेगी, बल्कि जनता खुद उम्मीदवार चुनेगी. मार्च से पहले उम्मीदवारों की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, और मार्च से नवंबर तक पार्टी के संस्थापक जनता की पसंद के आधार पर टिकट फाइनल करेंगे. प्रशांत किशोर ने साफ कहा कि “मेरी गणेश परिक्रमा करने की कोई ज़रूरत नहीं है.” टिकट जनता तय करेगी और वह खुद टिकट बांटने में किसी भी तरह की भूमिका नहीं निभाएंगे. उनका कहना है कि इस फैसले से पार्टी में पारदर्शिता और जनता की सच्ची भागीदारी तय होगी.
राइट टू रिकॉल का प्रावधान
जन सुराज पार्टी ने ‘राइट टू रिकॉल’ को अपने संविधान में शामिल किया है. इसका मतलब है कि अगर कोई उम्मीदवार चुनाव जीतने के बाद दो साल तक अपने क्षेत्र में ठीक से काम नहीं करता है, तो उसे वापस बुला लिया जाएगा. यह प्रावधान पार्टी के संविधान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा, जिससे जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय की जा सकेगी. प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्हें पार्टी चलाने की कोई ज़िम्मेदारी नहीं मिलेगी. पार्टी की जिम्मेदारी उन्हीं को सौंपी जाएगी, जो संगठन चलाएंगे. प्रशांत किशोर खुद बिहार की यात्रा पर रहेंगे और जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को जानेंगे.
उपचुनाव में जन सुराज की एंट्री
प्रशांत किशोर ने यह भी ऐलान किया कि नवंबर में बिहार में होने वाले चार उपचुनावों में जन सुराज अपने उम्मीदवार उतारेगी. उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा कि अगर उनकी पार्टी इन चुनावों में जीत हासिल करती है, तो बिहार की राजनीति में कई दलों का बोरिया बिस्तर बंध जाएगा. प्रशांत किशोर का यह कदम बिहार की राजनीति में एक नई लहर ला सकता है. उन्होंने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया में जनता की सक्रिय भागीदारी का वादा किया है, जो पारंपरिक राजनीति से बिल्कुल अलग है.
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