शिक्षा जगत, थिंक टैंक, उद्योग और सरकार के बीच सशक्त साझेदारी की आवश्यकता पर बल देते हुए नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार लाहिड़ी ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण अनुसंधान-आधारित नवाचार तथा संस्थागत सहयोग पर निर्भर करेगी। उन्होंने विश्वविद्यालयों, थिंक टैंकों और शोध संस्थानों से आह्वान किया कि वे समकालीन नीतिगत चुनौतियों के समाधान के लिए व्यावहारिक एवं शोध-आधारित सुझाव विकसित करें तथा सरकारों के साथ सक्रिय सहभागिता स्थापित करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा जगत, उद्योग, थिंक टैंक और नीति-निर्माताओं के बीच मजबूत समन्वय ही भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा को नई दिशा देगा।
डॉ. लाहिड़ी ने ये विचार रिसर्च एंड इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज़ (RIS) द्वारा दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (DSE), दिल्ली विश्वविद्यालय तथा एमएसएमई फॉर 2047 के सहयोग से उनके नीति आयोग के उपाध्यक्ष नियुक्त होने के उपलक्ष्य में आयोजित सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। इस कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित नीति-निर्माता, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि तथा विभिन्न क्षेत्रों के प्रख्यात बुद्धिजीवी शामिल हुए।
समारोह में नीति आयोग के सदस्य एवं पूर्व कैबिनेट सचिव राजीव गौबा, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सदस्य संजीव सान्याल, RIS के महानिदेशक प्रो. सचिन कुमार शर्मा, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के निदेशक प्रो. राम सिंह, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के पूर्व निदेशक प्रो. पुलिन बी. नायक एवं प्रो. पामी दुआ, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य डॉ. शामिका रवि, सहित अनेक वरिष्ठ नीति-निर्माता, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और थिंक टैंकों के विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
अपने स्वागत संबोधन में प्रो. सचिन कुमार शर्मा, महानिदेशक, RIS ने डॉ. लाहिड़ी को नीति आयोग के उपाध्यक्ष का दायित्व संभालने पर हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि डॉ. लाहिड़ी का RIS के साथ दो दशकों से अधिक का आत्मीय संबंध रहा है तथा संस्था को समय-समय पर उनके मार्गदर्शन का लाभ मिला है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि RIS ने नीति आयोग के साथ सतत विकास लक्ष्यों (SDGs), भारत की स्वैच्छिक राष्ट्रीय समीक्षा (Voluntary National Reviews), दीर्घकालिक विकास रणनीति, समुद्री अर्थव्यवस्था और ब्लू इकोनॉमी जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर निरंतर सहयोग किया है। उन्होंने कहा कि RIS भविष्य में भी साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण को सुदृढ़ करने और भारत के विकास एजेंडा में अपनी सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा।
राजीव गौबा, सदस्य, नीति आयोग ने डॉ. लाहिड़ी को बधाई देते हुए उन्हें भारत के सबसे प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री-प्रशासकों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि सरकार, बहुपक्षीय संस्थाओं, सार्वजनिक वित्त और विधायी दायित्वों में डॉ. लाहिड़ी का व्यापक अनुभव नीति आयोग के माध्यम से भारत की दीर्घकालिक विकास रणनीति को नई दिशा प्रदान करेगा। संजीव सान्याल, सदस्य, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने डॉ. लाहिड़ी के साथ अपने लंबे पेशेवर संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका नेतृत्व भारत के आर्थिक सुधारों और नीतिगत निर्णयों को नई गति देगा। उन्होंने युवा अर्थशास्त्रियों के मार्गदर्शन तथा अकादमिक उत्कृष्टता और व्यावहारिक नीति-निर्माण के बीच सेतु स्थापित करने में डॉ. लाहिड़ी की महत्वपूर्ण भूमिका की भी सराहना की।
दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स की ओर से प्रो. राम सिंह ने डॉ. लाहिड़ी के आर्थिक चिंतन, संस्थान निर्माण और सार्वजनिक नीति में योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शिक्षा जगत और नीति-निर्माताओं के बीच और अधिक निकट सहयोग आवश्यक है। उन्होंने नीति-उन्मुख शोध को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
प्रो. पुलिन बी. नायक तथा प्रो. पामी दुआ ने डॉ. लाहिड़ी की उल्लेखनीय शैक्षणिक यात्रा, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उनके गहरे जुड़ाव तथा विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं की अनेक पीढ़ियों पर उनके स्थायी प्रभाव को याद किया। वहीं डॉ. शामिका रवि ने डॉ. लाहिड़ी को ऐसे विरले अर्थशास्त्री के रूप में वर्णित किया जिन्होंने कठोर अकादमिक शोध और व्यावहारिक नीति-निर्माण के बीच प्रभावी सेतु का निर्माण किया।
एमएसएमई फॉर 2047 की ओर से श्री आदित्य पिट्टी ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना होगा। उन्होंने नीति की स्पष्टता, संस्थागत क्षमता और नवाचार को इस दिशा में प्रमुख आधार बताया। शांतनु श्रीवास्तव ने एमएसएमई क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए प्रौद्योगिकी, वित्त तक बेहतर पहुंच, नीतिगत सुधारों तथा सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा को गति देने के लिए नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों, शोध संस्थानों, उद्योग जगत और थिंक टैंकों के बीच निरंतर संवाद, सहयोग और साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा।
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