एक महिला मरीन इंजिनियर की खूबसूरत कहानी हैं 'एंकर माई हर्ट'

By: Dilip Kumar
1/12/2019 6:01:06 PM
नई दिल्ली

अभी हाल ही में पुस्तक मेले में एक नई किताब हमारे हाथ में आई। इस किताब के कवर फोटो ने हमारा ध्यान उस ओर खींचा। किताब को हाथ में लिया तो आकर्षण बढ़ता ही गया। इस किताब की लेखिका ने बड़ी ही संजदगी से मरीन इंजीनियर की चुनौतियों के संग प्रेम को दर्शाया है। इस किताब की मुख्य पात्र के इर्दगिर्द कहानी घूमती दिखती है। किताब में एक महिला मरीन इंजीनियर के रुप में किन दिक्कतों को झेलती है और उससे सीखते हुए आगे बढऩे को बेताब दिखती है। इस किताब में दोहरे प्रेम को बड़ी ही संजीदगी से लेखिका ने कागज पर उतारा है। इसके अलावे इस किताब में कई देशों के यात्रा वृतान्त को शामिल किया गया है।

कोचिंग हब कोटा को स्थान मिला है। एमवी ऑर्किड में चौथे इंजीनियर के रूप में कार्यरत कहानी की मुख्य पात्र लहर सक्सेना मरीन इंजीनियर के रुप में ज्वाइन करती है। इस दौरान उनके सीनियर उनसे दोहरा व्यवहार करते हैं। जैसे हर फिल्ड में महिलाओं के लिए कार्य करना चुनौतीपूर्ण है उसी प्रकार लहर सक्सेना को भी ऐसे माहौल का सामना करना पड़ता है। उसका मुख्य अभियंता उसकी हिम्मत नफरत करता है। अपने आस-पास की मशीनों, पसीने और टेस्टोस्टेरोन के बीच, लहर सक्सेना समीर के साथ अपने संबंधों की गाड़ी आगे बढ़ाती है। वहीं दूसरी ओर वीर के रूप में एक दूसरा हैंडसम अधिकारी हाल ही में चालक दल में शामिल हुआ के साथ भी एक अलग प्रकार का संबंध सामने आता है। इस पूरी कहानी में लेखिका न्यारी नैन ने करियर, प्रेम और रोमांच को बड़े अच्छे ढ़ंग से परोसा है।

न्यारी नैन की यह पहली पुस्तक है जिसे उसने मात्र २२ दिनों में जहाज यात्रा के दौरान लिखा। इस किताब को हार्पर कोलिन्स इंडिया ने प्रकाशित किया है। यह किताब अमेजन और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है। युवाओं में न्यारी की किताब काफी लोकप्रिय होती जा रही है। न्यारी के लिंगडीन प्रोफाइल पर अपलोड वीडियो को ५० हजार से ज्यादा बार लोगों ने देखा है। हजारों लाइक्स के साथ सैकड़ों कमेंट इस किताब की लोकप्रियता को दर्शाती है। इस पुस्तक को लेकर कैप्टन स्वरुप कहते हैं कि बधाई न्यारी! मुझे यह देखकर खुशी हुई कि न केवल आप अपने समुद्री करियर का आनंद ले रही हैं, बल्कि अपने खाली समय का उपयोग पुस्तक लिखने में भी कर रही हैं। मैं वास्तव में आपसे काफी प्रभावित हूं।

लेखिका खुद भी मरीन इंजिनियर हैं। वेतनमान व सुविधा के लिहाज से मरीन इंजीनियरिंग की नौकरी काफी आकर्षक मानी जाती है। लेकिन इस नौकरी में चुनौतियां भी कम नहीं है। फिर इस नौकरी में अगर कोई महिला हो तो चुनौतियां और भी बढ़ जाती है। लेकिन इन चुनौतियों को स्वीकार किया है रामगढ़ गोला रोड निवासी न्यारी नैन ने। न्यारी नैन ने केंद्रीय विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त कर मरीन इंजीनियर बनी। रांची के गोला रोड निवासी विनोद कुमार सिन्हा की पुत्री न्यारी नैन रामगढ़ जिला की पहली मरीन इंजीनियर है। कोर्स समाप्ति के बाद न्यारी की विश्व प्रसिद्ध एंग्लो इस्टर्न अंतरराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी हुई है। अपने प्रशिक्षण के दौरान न्यारी नैन ने जापान, चीन, श्रीलंका, आस्ट्रेलिया व म्यांमार की यात्रा की है।

कॉलेज के दिनों में न्यारी ने मरीन इंजीनियर का कोर्स करते हुए अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। एनसीआर स्थित प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान आइएमआइ ने उसे अपना ब्रांड एंबेस्डर बनाया व बेस्ट ऑल रांउडर के खिताब से नवाजा था। खेलकूद से लेकर वाद-विवाद प्रतियोगिता में भी न्यारी हमेश अव्वल रही. वर्ष 2012 में दिल्ली में आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता में वह अव्वल रही. इस प्रतियोगिता में जेएनयू व दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिभागियों ने भाग लिया था. न्यारी की शिक्षा-दीक्षा रामगढ़ के आर्मी स्कूल में हुई है. आर्मी पब्लिक स्कूल में आज भी न्यारी नैन को शिक्षक-शिक्षिका याद करते हैं.


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