धार्मिक परंपराओं को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की पहल के तहत ‘हरित बड़ा मंगल अभियान’ को लेकर लोक भारती द्वारा आयोजित कार्यक्रम में गोपाल आर्य, राष्ट्रीय संयोजक – पर्यावरण विभाग, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मीडिया के साथ विस्तृत संवाद किया। उन्होंने बड़े मंगल के आयोजन को स्वच्छता, हरित पहल और सामाजिक सहभागिता से जोड़ने पर विशेष बल दिया। गोपाल आर्य ने बताया कि इस वर्ष ज्येष्ठ मास के दोहराव के कारण कुल आठ बड़े मंगल पड़ रहे हैं, जिनके दौरान शहरभर में भंडारों का आयोजन होगा। ये आयोजन पंचांग के अनुसार अप्रैल-मई के बीच संपन्न होंगे।
पर्यावरण अनुकूल भंडारों पर जोर
अभियान के तहत भंडारों में सिंगल-यूज प्लास्टिक के पूर्ण त्याग का आह्वान किया गया है। इसके स्थान पर पत्तल, बांस और अन्य जैविक तथा कम्पोस्ट-योग्य सामग्री के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही आयोजकों को कचरा प्रबंधन, कूड़ा वर्गीकरण और पुनर्चक्रण के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता प्रदान करने की योजना है। अभियान के अंतर्गत स्वच्छता टीमों और ‘पर्यावरण मित्र’ समूहों का गठन किया जाएगा, वहीं स्थानीय प्रशासन, स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के साथ समन्वय स्थापित कर सहयोगी नेटवर्क भी तैयार किया जा रहा है।
जागरूकता और सहभागिता पर बल
गोपाल आर्य ने बताया कि लोक भारती की लखनऊ इकाई द्वारा इस अभियान के तहत कई बैठकें आयोजित की गई हैं, जिनमें आयोजकों, स्वयंसेवकों और नागरिकों को जोड़ा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल भंडारों का आयोजन ही इस पहल का मूल उद्देश्य है, जिससे धार्मिक आयोजनों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश व्यापक स्तर पर पहुंचे।
ऐसे मनाया जा सकता है ‘हरित बड़ा मंगल’
उन्होंने सुझाव दिए कि आयोजन स्थलों को स्वच्छ रखा जाए, भोजन परोसने में केवल जैविक सामग्री का उपयोग किया जाए, कचरे का उचित निपटान और पुनर्चक्रण सुनिश्चित किया जाए तथा स्थानीय युवाओं और स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से अभियान को व्यापक रूप से प्रचारित करने की भी अपील की गई।
मीडिया से सहयोग की अपील
गोपाल आर्य ने मीडिया से इस जनहितकारी पहल को व्यापक स्तर पर प्रचारित करने का आग्रह किया, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि आयोजकों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से यह अभियान सफल होगा और देशभर में एक प्रेरणास्पद मॉडल के रूप में स्थापित हो सकता है।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “जब तक हम अपने धार्मिक आयोजनों को स्वच्छ, हरित और पर्यावरण अनुकूल नहीं बनाएंगे, तब तक सच्ची सेवा और सामाजिक सम्मान की भावना पूर्ण नहीं होती। बड़े मंगल को एक आदर्श सामाजिक एवं पर्यावरणीय मॉडल के रूप में प्रस्तुत करना हम सभी का दायित्व है।”
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