सभी के लिए उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, शारदा हॉस्पिटल ने ग्रेटर नोएडा में आयुष्मान भारत योजना के तहत पहली किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी सफलतापूर्वक की है। यह उपलब्धि उन मरीजों के लिए नई उम्मीदें लेकर आई है, जो महंगे और जटिल इलाज का खर्च नहीं उठा पाते। यह सर्जरी एक 32 वर्षीय युवक पर की गई, जो क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) से पीड़ित था। उसकी बीमारी हाई ब्लड प्रेशर के इलाज के दौरान शुरू हुई और नियमित डायलिसिस के बावजूद धीरे-धीरे बढ़ती गई। डायलिसिस वह प्रक्रिया है, जिसमें किडनी ठीक से काम न करने पर शरीर से गंदगी और अतिरिक्त पानी निकाला जाता है।
फिस्टुला के जरिए डायलिसिस कराने के बावजूद मरीज को लगातार सिरदर्द और अन्य समस्याएं बनी रहीं। जांच में उसका ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा और किडनी से जुड़े पैरामीटर असामान्य पाए गए, जिससे एडवांस स्टेज की बीमारी की पुष्टि हुई। आर्थिक तंगी के कारण उसने आयुष्मान भारत योजना के तहत मदद मांगी। शारदा हॉस्पिटल ने आगे बढ़कर इस चुनौती को स्वीकार किया और इस योजना के तहत किडनी ट्रांसप्लांट करने वाला इस क्षेत्र का पहला अस्पताल बना।
ट्रांसप्लांट से पहले की जांच में (HLA टेस्ट सहित) मरीज के पिता को उपयुक्त डोनर पाया गया। अस्पताल की विशेषज्ञ टीम ने सफलतापूर्वक सर्जरी की। खास बात यह रही कि सर्जरी, अस्पताल में भर्ती और बाद की देखभाल का पूरा खर्च आयुष्मान भारत योजना के तहत कवर हुआ, जिससे मरीज और उसके परिवार पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ा। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। उसकी किडनी सामान्य रूप से काम कर रही है और उसकी शारीरिक व मानसिक सेहत भी बेहतर हो गई है। अब वह सामाजिक और आर्थिक रूप से भी स्थिर है, नौकरी पा चुका है और एक बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहा है।
यह मामला दिखाता है कि समय पर किडनी ट्रांसप्लांट और सही इलाज से गंभीर बीमारी को भी नियंत्रित किया जा सकता है, और सरकारी योजनाओं की मदद से मरीजों की जिंदगी बदली जा सकती है। डॉ. भीम राज गुप्ता, डायरेक्टर और यूनिट हेड (नेफ्रोलॉजी), शारदा हॉस्पिटल ने कहा: “डायलिसिस जीवन बचाने का एक जरूरी तरीका है, लेकिन किडनी ट्रांसप्लांट को एंड-स्टेज किडनी बीमारी के इलाज का सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है।
इससे मरीज को बेहतर जीवन गुणवत्ता और लंबी उम्र मिलती है। डायलिसिस के कारण मरीज की रोजमर्रा की जिंदगी काफी प्रभावित होती है। इस सर्जरी के जरिए हमने न सिर्फ एक किडनी ट्रांसप्लांट की, बल्कि एक युवा को सामान्य और स्वतंत्र जीवन जीने का मौका दिया है। हमारा लक्ष्य है कि ऐसे उन्नत इलाज हर जरूरतमंद मरीज तक पहुंचें।”
डॉ. शिल्पी तिवारी, सीनियर कंसल्टेंट (यूरोलॉजी), शारदा हॉस्पिटल ने कहा: “यह सिर्फ एक मेडिकल उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि सही समय पर सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं क्या बदलाव ला सकती हैं। आजकल युवाओं में किडनी की बीमारी तेजी से बढ़ रही है। लगभग 17% लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं, और 40 साल से कम उम्र में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं।
इसका मुख्य कारण हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, खराब लाइफस्टाइल और गलत खानपान है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बीमारी का पता देर से चलता है, जब मरीज को डायलिसिस या ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। आयुष्मान भारत के तहत हमने इस मरीज को समय पर इलाज दिया, बिना किसी आर्थिक दबाव के।”
डॉ. कौसर शाह, ग्रुप CEO, शारदा हॉस्पिटल और शारदा केयर-हेल्थसिटी ने कहा: “हमारा मानना है कि अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं हर व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए, चाहे उसकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो। आयुष्मान भारत के तहत यह ट्रांसप्लांट यह दिखाता है कि सरकारी योजनाएं सही तरीके से लागू हों तो वे बड़ी से बड़ी स्वास्थ्य जरूरत को पूरा कर सकती हैं। हम भारत सरकार के ‘सभी के लिए स्वास्थ्य’ के लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
शारदा हॉस्पिटल के बारे में
2006 में स्थापित, शारदा हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा (NCR) में स्थित एक आधुनिक मल्टी-सुपर स्पेशलिटी अस्पताल है। 9 एकड़ में फैले इस अस्पताल में 1200 से अधिक बेड हैं और यहां आधुनिक तकनीक व सुविधाएं उपलब्ध हैं। NABH और NABL से मान्यता प्राप्त यह अस्पताल सुपर-स्पेशलिटी, जनरल चिकित्सा, एडवांस डायग्नोस्टिक्स और रेडियोलॉजी सेवाएं प्रदान करता है।
यह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च से भी जुड़ा हुआ है और आयुष्मान भारत (PMJAY) योजना के तहत मरीजों का इलाज करता है। यहां अनुभवी डॉक्टरों और विशेषज्ञों की टीम मरीजों को बेहतर और संवेदनशील इलाज देने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही मेडिकल शिक्षा और रिसर्च में भी योगदान दे रही है।
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