करण ललित बुटानी ने डायरेक्टर के तौर पर अपना डेब्यू किया है फिल्म 'फेमस' से। फिल्म की भारीभरकम स्टार कास्ट होने के बावजूद फिल्म आपको बांध नहीं पाएगी। फिल्म की स्क्रिप्ट से लेकर स्क्रीनप्ले हर जगह कमियां नजर आएंगी। फिल्म देखते हुए कई बार आपको ऐसा लगेगा कि भाई बहुत हो गया अब घर वापस चलते हैं। करण ललित बुटानी के डायरेक्शन से काफी उम्मीदें थीं क्योंकि उन्होंने तिग्मांशू धूलिया जैसे डायरेक्टर को असिस्ट किया है। चलिए अब आपको बताते हैं कि फिल्म का प्लॉट कैसा है।
फिल्म चंबल के एक गांव से शुरू होती है, जहां के धाकड़ शंभू सिंह (जैकी श्रॉफ) की बेटी की शादी की तैयारियां चल रही होती हैं और तभी कड़क सिंह (केके मेनन) आता है और दुल्हन को उठा कर ले जाने लगता है। शंभू सिंह गोली चलाते हैं और गोली कड़क सिंह की जगह लग जाती है शंभू की खुद की बेटी को। इसके बाद शंभू को जेल हो जाती है। गांव का एक धाकड़ जेल जाता है और कड़क सिंह दूसरा धाकड़ बन जाता है। कड़क और त्रिपाठी (पंकज त्रिपाठी) मिलकर पूरे गांव में हाहाकार मचा देते हैं।
त्रिपाठी चुनाव जीत जाता है और कड़क सिंह अपनी बंदूक की नोक पर मनमानी करता है। इन सबके बीच के बीच राधे (जिमी शेरगिल) की कहानी भी है। राधे जब स्कूल में होता है तो रोजी टीचर (माही गिल) उसकी फेवरेट होती हैं। रोजी टीचर पर त्रिपाठी की नजर पड़ती है और वो उसे अपनी हवस का शिकार बनाकर गोली मार देता है। ये सब राधे देखता है, लेकिन उस समय वो बच्चा होता है। राधे ने कड़क सिंह को भी एक खून करते देखा होता है, लेकिन पुलिस के सामने मुकर जाता है और कड़क सिंह को जीवनदान मिल जाता है।
इसके बाद राधे की शादी होती है लल्ली (श्रिया सरन) से, जिसकी अपनी अलग कहानी है। फिर त्रिपाठी की नजर लल्ली पर भी पड़ती है और वो कड़क सिंह के साथ मिलकर राधे को फांसकर लल्ली को हथियाना चाहता है। कड़क सिंह वैसे तो राधे का एहसान मंद होता है, लेकिन जब बात सत्ता और वफादारी की आती है तो वो सत्ता चुनता है।फिल्म में इसके बात लल्ली को किडनैप किया जाता है, शंभू सिंह की फिर से वापसी होती है, और उसके बाद क्या कुछ होता है उसके लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।बस इतना समझिए कि फिल्म में इतनी कहानियां हो गई हैं कि आपका सिर चक्कर खाने लगेगा। जिमी शेरगिल, माही गिल, केके मेनन, पंकज त्रिपाठी जैसी स्टार कास्ट के साथ अगर आप इतनी कमजोर स्क्रिप्ट रखेंगे तो फिर भगवान ही मालिक है।
चंबल को लेकर बॉलीवुड की ये तीसरी और अब तक की सबसे कमजोर फिल्म भी है। इससे पहले 'बैंडिट क्वीन' और 'पान सिंह तोमर' भी चंबल पर बन चुकी फिल्में है। फिल्म में कई ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब आपको मिलेंगे ही नहीं। रिव्यू पढ़कर आपको समझ आ गया होगा कि इस फिल्म को नहीं देखने के लिए आपके पास बहुत कारण हैं। फिल्म के डायलॉग जो अच्छे हैं वो ट्रेलर में ही हैं, तो अगर वो ही सुनने हैं तो ऑनलाइन ट्रेलर देख लीजिए, फिल्म देखने जाने की जरूरत नहीं लगेगी।
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