नई दिल्ली से बंसी लाल की रिपोर्ट। आज जब हम #75वें स्वतंत्रता दिवस और आज़ादी का अमृत महोत्सव को मना रहे हैं, उसी समय झुग्गियों, बस्ती कॉलोनियों में रहने वाले और असंगठित क्षेत्र के हजारों श्रमिकों को उनके घरों से बेदखल कर दिया गया है, जिन्हें बिना किसी पुनर्वास के अपनी आजीविका से वंचित भी कर दिया गया है, वे "बुलडोजर राज" के खिलाफ़ जंतर-मंतर पर अपनी आवाज उठाने के लिए एकत्र हुए हैं। सरकार देश भर से गरीब दलितों और आदिवासियों की जमीन जबरन छीन कर मुट्ठी भर पूंजीपतियों को बेच रही है और तूफान की तरह बुलडोजर से बस्तियों में तोड़फोड़ कर रही है। एक तरफ सरकार गरीबों और मजदूरों की हितैषी होने का दिखावा कर रही है तो दूसरी तरफ रोज़ी-रोटी और मकान की तबाही का जश्न मना रही है। दिल्ली में नफरत का माहौल बनाकर सरकार सांप्रदायिक एजेंडे को हवा देते हुए तोड़फोड़/बेदखली के इन अभियानों को आगे बड़ा रही है और इस तरह मजदूर वर्ग की एकता को भी तोड़ने का प्रयास कर रही है।
जबरन विस्थापन (बेदखली) पर तत्काल रोक लगाए।
पूर्ण पुनर्वास से पहले विस्थापन नहीं।
वंचित बस्तियों का सर्वेक्षण कर पुनर्वास के लिए सुनिश्चित करें।
जबरन बेदखली करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
हर राज्य की एक पुनर्वास नीति होनी चाहिए जिसकी कट ऑफ डेट 2021 की जाए।
स्ट्रीट वेंडर हॉकर्स आदि का सर्वे तत्काल कर सीओवी दें और सीओवी का सम्मान करें।
असंगठित श्रमिकों को नियमित करें और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना।
20-30% शहरी क्षेत्र श्रमिकों के लिए आरक्षित होना चाहिए।
COVID-19 महामारी की शुरुआत से लेकर अब तक, 6 लाख से अधिक लोगों को उनके घरों से बेदखल किया जा चुका है और लगभग 1.6 करोड़ लोग अब विस्थापित होने के खतरे और अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के बजाय बुलडोजर का उपयोग करके "न्याय" देने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। दिल्ली विकास प्राधिकरण ने दिल्ली-एनसीआर में 63 लाख घरों को बेदखल करने की घोषणा की, लेकिन पुनर्वास के बारे में एक भी शब्द नहीं कहा गया। इसके अतिरिक्त, असंगठित क्षेत्र के 50,000 मजदूरों के लिए कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है, न ही सरकार द्वारा उनके आवास की योजना है, जबकि दिल्ली में 28,000 घर खाली पड़े हैं। जमीनी हकीकत इस दावे का भी खंडन करती है कि प्रधानमंत्री आवाज योजना के तहत मार्च, 2022 तक लगभग 123 लाख घरों को मंजूरी दी गई है। DUSIB नीति 2015, 676 मान्यता प्राप्त मलिन बस्तियों के निवासियों के पुनर्वास की गारंटी देती है, हालांकि यह उन सैकड़ों मलिन बस्तियों/बस्तियों पर चुप है जिनका सर्वेक्षण भी नहीं किया गया है। हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और तमिलनाडु जैसे कई अन्य राज्यों में भी ऐसी ही स्थिति है।
ग्यासपुर बस्ती, खोरी गांव फरीदाबाद, हरियाणा, गाजियाबाद, आगरा, धोबी घाट कैंप, कस्तूरबा नगर, बेला घाट आदि के लोग धरने में इकट्ठा हुए हैं, जिन्होंने कुछ मामलों में दिल्ली उच्च न्यायालय के स्टे ऑर्डर के बावजूद जबरन बेदखली और विध्वंस का सामना किया है। इन विध्वंसों/बेदखलों ने कई "वैकल्पिक आश्रय" प्रावधानों का उल्लंघन किया है, जो कार्यपालिका और न्यायपालिका द्वारा शहरी गरीबों को गारंटी दी है और प्रभावित लोगों के जीवन, आजीविका और सम्मान के अधिकारों के साथ असंगत है।
देश में जहां बेरोजगारी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, वहीं फेरीवालों, रेहड़ी-पटरी वालों, कचरा कामगार और सफाई कर्मचारियों को उनके कार्यस्थल से बेदखल किया जा रहा है। मजदूरों के काम की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून को सरकार खुद नहीं बनने दे रही है। एनसीआरबी की रिपोर्ट "भारत में दुर्घटना से होने वाली मौतें और आत्महत्याएं" - से पता चलता है कि 2021 में आत्महत्या पीड़ितों के बीच दैनिक वेतन भोगी सबसे बड़ा व्यवसाय-वार समूह बना रहा, जो दर्ज किए गए 1,64,033 आत्महत्या पीड़ितों में हर चार में से एक है। जो संगठन या कार्यकर्ता आवाज उठाते हैं, उन पर झूठे मुकदमे लगाकर उन्हें जेल में डाला जा रहा है। न सर्वेक्षण, न स्थान परिवर्तन, न प्रमाणपत्र आवंटन, केवल आजीविका से वंचित और फलस्वरूप जीवन से वंचित किया जा रहा है।
विरोध में विभिन्न उत्साही नारे और गवाहियों को उठाया गया: "बुलडोजर राज बंद करो", "शहरी गरीबो को अधिकार देना होगा", "बिना पुनर्वास विस्थापन बंद करो", "जिस जमीन पर बसें हैं, जो जमीन सरकारी है, वो जमीन हमारी है!” इन जबरन विस्थापनों के रूप में इस आधुनिक गुलामी को रोकने के लिए, विस्थापन से पहले पूर्ण पुनर्वास प्रदान करने और जिन्हें बेदखल किया जाना है, उन्हें पर्याप्त नोटिस प्रदान करने के लिए प्रधान मंत्री और शहरी गरीब मंत्री को निम्नलिखित मांगों के साथ ज्ञापन दिया गया।
दिल्ली विश्वविद्यालय में नए शैक्षणिक सत्र के प्रथम दिन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अ ..Read More
कर्ण गोष्ठी कल्याण समिति नोएडा के तत्वावधान में चिकित्सा सेवा के अंतर्गत हृदय स्वास्थ् ..Read More
प्रभात झा के विचारों ने पीढ़ियों का पथ आलोकित किया। उन्होंने अपने विचार, लेखनी, संगठन ..Read More
अपने पूजनीय दादा राजेंद्र प्रशाद मिश्रा पूर्व (रिट) (आईपीएस)बिहार पुलिस केडर,मशहूर फुट ..Read More
ऑल कायस्थ नामक राष्ट्रीय संस्था की आम बैठक रविवार को रांची के बरियातू स्थित बारात घर म ..Read More
भारत के सबसे बड़े वैश्विक वस्त्र आयोजन भारत टेक्स 2026 की पूर्व संध्या पर देश का संपूर ..Read More
कारगिल युद्ध में शहीद हुए वीर सैनिकों की स्मृति को नमन करते हुए श्री राम सेवा संस्थान ..Read More
डॉ. एससी.देब होमियो रिसर्च लेबोरेटरी प्राइवेट लिमिटेड ने नई दिल्ली स्थित द ललित होटल म ..Read More
India's logistics cost for the mining and metals sector may be far closer to 8 per cen ..Read More