दिल्ली विश्वविद्यालय के श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र एवं अन्य प्रमुख संस्थानों (एन.सी.वेब, जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय, हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय एवं हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय) के सहयोग से राष्ट्रीय संगोष्ठी “भारत मंथन पर्व, युगाब्द 5128” का सफल आयोजन किया गया। संगोष्ठी का मुख्य विषय “नागरिक कर्तव्य” एवं “स्वदेशी आत्मनिर्भरता” रहा। यह आयोजन एक सशक्त बौद्धिक मंच के रूप में उभरा, जिसमें विद्वानों, शिक्षाविदों एवं विद्यार्थियों ने भारत के समग्र राष्ट्रीय विकास की दिशा पर सार्थक चिंतन किया। कार्यक्रम का प्रारंभ विभिन्न कक्षों में आयोजित तकनीकी सत्रों से हुआ, जिनमें 42 प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
तकनीकी सत्रों के उपरांत आयोजित सामान्य सत्र का शुभारंभ परंपरागत दीप प्रज्वलन, भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि एवं वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ हुआ, जिससे वातावरण में देशभक्ति एवं चिंतनशीलता का भाव जागृत हुआ। इस अवसर पर डॉ. मनीष कुमार सिंह ने इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र की कार्यदिशा एवं गतिविधियों का परिचय दिया, वहीं विनोद शर्मा “विवेक” ने भारत मंथन पर्व की संकल्पना को विस्तार से प्रस्तुत किया। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. नीलम गोयल के अध्यक्षीय उद्बोधन ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। साथ ही, आकांक्षा थैपियाल द्वारा नागरिक कर्तव्य एवं स्वदेशी आत्मनिर्भरता विषय पर प्रस्तुत एकल गीत ने सभी उपस्थित जनों को भावविभोर कर दिया।
संगोष्ठी का मुख्य आकर्षण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह-प्रचार प्रमुख श्री नरेंद्र ठाकुर जी का मुख्य भाषण रहा। उन्होंने अपने उद्बोधन में स्पष्ट किया कि स्वदेशी केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता तक सीमित नहीं, बल्कि यह एक गहन सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। आत्मनिर्भरता को नागरिक कर्तव्य से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि जब नागरिक अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करते हैं, तभी राष्ट्र सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनता है। उनका संबोधन युवाओं के लिए प्रेरणादायी रहा, जिसमें उन्होंने परंपरागत मूल्यों एवं आधुनिक नवाचार के समन्वय पर बल दिया।
कार्यक्रम का समापन सह-संयोजक डॉ. उर्मिल वत्स द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने सहयोगी संस्थानों एवं प्रायोजकों, विशेषतः केनरा बैंक, के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राजकुमार फलवारिया रहे एवं इसका कुशल संचालन डॉ. आमना मिर्ज़ा द्वारा किया गया। अंत में कल्याण मंत्र के उच्चारण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, जिससे सभी प्रतिभागी सेवा, कर्तव्य एवं राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता के प्रति नवसंकल्प के साथ प्रेरित हुए।
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