नई दिल्ली से कुलवंत कौर। चंदौली जिले के एकौनी गांव में 5,000 कि.ग्रा. प्रतिदिन गोबर प्राप्ति क्षमता एवं 200 घन मीटर प्रतिदिन बायोगैस उत्पादन क्षमता का एक बायोगैस संयंत्र स्थापित किया गया है| इस परियोजना का उद्देश्य एकौनी गांव के 120 घरों में पाइपलाइन के माध्यम से चौबीस घंटे रसोई ईंधन के रूप में बायोगैस की आपूर्ति करना है| इस परियोजना का शुभारंभ माननीय श्री अतुल चतुर्वेदी, सचिव, पशुपालन और डेयरी विभाग, भारत सरकार के करकमलों द्वारा, NDDB के अध्यक्ष श्री मीनेश शाह की गरिमामयी उपस्थिति में बुधवार 27 जुलाई 2022 को किया गया| साथ ही साथ क्षेत्र के किसानों में बायोगैस स्लर्री से बने जैविक खाद के उपयोग के प्रसार हेतु, NDDB के ट्रेडमार्क “सुधन” जैविक खाद का वितरण भी किसानों को किया गया |
यह बायोगैस संयंत्र NDDB के मार्गदर्शन से एक प्रगतिशील डेयरी किसान श्री नागेंद्र सिंह की “नन्द सदन गौशाला”, ग्राम एकौनी में “साफ बायोगैस प्राइवेट लिमिटेड” द्वारा स्थापित किया गया है| इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिये NDDB ने SAAF एनर्जी को परियोजना का प्रारूप बनाने, गौशाला का चयन करने तथा गोबर एकत्रीकरण के लिए एक प्रणाली स्थापित करने में मदद की है| यह बायोगैस संयंत्र, वाराणसी डेयरी प्लांट से लगभग 5 कि.मी. की दूरी पर है| इस परियोजना को सस्टेन प्लस एनर्जी फाउंडेशन (टाटा ट्रस्ट द्वारा समर्थित) से वित्तपोषण सहायता प्राप्त हुई है| उद्यमी द्वारा प्रायोजित पाइप्ड बायोगैस ग्रिड नेटवर्क बनाने एवं बायोगैस स्लर्री आधारित खाद संवर्धन करने वाली यह प्रदेश की पहली ऐसी परियोजना है|
आगामी दिनों में NDDB किसानों तथा बायोगैस के ग्राहकों से वित्तीय लेनदेन के प्रबंधन के लिए भी एक व्यवस्था विकसित करने तथा बायोगैस संयंत्र से निकलने वाली स्लर्री (घोल) के प्रबंधन और खाद प्रसंस्करण पहलुओं में भी SAAF एनर्जी को समुचित सहायता प्रदान करेगी| बायोगैस संयंत्र की लगभग 5 मीट्रिक टन प्रतिदिन गोबर की आवश्यकता गौशाला में उपलब्ध डेयरी पशुओं और गांव के भीतर या गांव के आसपास के किसानों से पूरी होने की उम्मीद है| SAAF एनर्जी इस संयंत्र का परिचालन करेगी जिसके लिए उन्होंने कुशल एवं प्रशिक्षित लोगों की एक टीम बनाई है| यह संयंत्र प्रतिदिन लगभग 200 घन मीटर बायोगैस उत्पादन करने में सक्षम होगा| सभी 120 परिवारों को उनकी आवश्यकता के अनुसार प्रतिदिन लगभग 1.2 से 2 घन मीटर बायोगैस पाइपलाइन से प्राप्त होगी और उनके उपभोग के अनुसार प्रति माह बिल जारी होगा| अंततः परियोजना को 150 घरों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा|
लगभग 4 KM लंबे इस बायोगैस नेटवर्क में प्रत्येक उपभोक्ता के घर में एक बायोगैस फ्लो-मीटर लगाया गया है, जिसमें प्रति माह रीडिंग ली जाएगी और उपभोक्ता द्वारा एक तय शुल्क के अनुसार भुगतान किया जाएगा| उपभोक्ता केवल उस बायोगैस की मात्रा का भुगतान करेंगे जो उन्होनें फ्लो-मीटर रीडिंग के अनुसार उपभोग किया हैं| इस परियोजना में एक ऐप भी विकसित किया जा रहा है जिससे डिजिटल भुगतान संभव होगा| एलपीजी की तुलना में रियायती दर पर बायोगैस की आपूर्ति SAAF एनर्जी द्वारा की जाएगी| SAAF एनर्जी ने गाँव के 120 घरों के लिए शुरुआती स्थापना लागत (फ्लो-मीटर, वाल्व, चूल्हा इत्यादि) का पूरा खर्च वहन किया है| इस परियोजना में किसानों से कोई निवेश अथवा पंजीकरण शुल्क नहीं लिया गया है|
इस अभिनव परियोजना से ग्रामीणों को ना केवल बायोगैस के माध्यम से धुआँ मुक्त रसोई मिलेगी बल्कि खाना पकाने के लिये एलपीजी की तुलना में सस्ता और सुरक्षित ईंधन भी मिलेगा| उन्हें अतिरिक्त गोबर के कुशल निष्पादन में मदद तो मिलेगी ही, साथ ही साथ बायोगैस स्लर्री एवं बायोगैस स्लर्री से बने जैविक खाद के उपयोग से कृषि में भी लाभ लेना संभव होगा| वर्तमान में जो परिवार खाना पकाने के लिये लकड़ियों अथवा गोबर के उपलों पर निर्भर है, उन्हे सरल, स्वच्छ और सस्ता रसोई ईंधन का विकल्प मिलेगा जिससे ग्रामीणों का और खास कर महिलाओं का जीवन सरल होगा और उनके लिये लकड़ियाँ जमा करने इत्यादि का समय भी बचेगा|
गोबर से संचालित होने वाले स्वच्छ कुकिंग पाइप्ड बायोगैस ग्रिड नेटवर्क का यह अनूठा प्रयास एक गोबर आधारित waste recycling इकोनॉमी मॉडल विकसित करने में सहायक होगा| एक बार सफलता पूर्वक स्थापित हो जाने पर यह राज्य सरकार या केंद्र सरकार की विकास योजनाओं, सी.एस.आर. अथवा अन्य विकास परियोजनाओं के तहत देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसे मॉडल की प्रतिकृति और विस्तार के लिए एक मजबूत प्रेरणास्रोत बनेगा|
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