आपदा में अवसर इसे ही कहते हैं। ईरान इजरायल के युद्ध ने जो तेल संकट दिया उस आपदा से निपटने के लिए विश्व के कई देश विकल्प की तलाश शुरू कर दी। इसी क्रम में भारत ने अपने मौजूद विकल्प पर ध्यान दिया। इस क्रम में पाया गया की एथेनॉल का उपयोग श्रेयस्कर है। अब तक लगता था एथेनॉल का उपयोग सिर्फ गाड़ियों में ईंधन के रूप में किया जा सकता है। लेकिन ऐसा नहीं है गाड़ियों के अलावा अब इससे घरों के चूल्हे भी जलेंगे। अब सवाल है कि क्या एथेनॉल पेट्रोल - डीजल के अलावा घरेलू गैस का भी विकल्प हो सकता है?
गाड़ियों में एथेनॉल का ईंधन के रूप में उपयोग के अलावा घरेलू गैस के विकल्प के रूप में उपयोग की सारी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय इस संबंध में एक नई नीति का मसौदा भी तैयार कर चुका है। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक मसौदा सितंबर 2026 तक लागू किया जा सकता है। मानसून सत्र के पहले दिन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने सरकार का पक्ष रखते हुए राज्यसभा में कहा सरकार का उद्देश्य बेहतर ईंधन को बढ़ाने का है। पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण (ई 20) से संबंधित उपभोक्ताओं के संशय को स्पष्ट करते हुए कहा की पेट्रोल में 20% से ज्यादा एथेनॉल मिलने के बारे में सरकार ने अभी कोई निर्णय नहीं किया है। आने वाले समय में कोई भी फैसला वैज्ञानिक अध्ययन और पक्षकारों से चर्चा के बाद लिया जाएगा।
एथेनॉल ईंधन का विपक्ष विरोध कर रहा है। कांग्रेस केंद्र सरकार पर हमलावर है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को तेजी से लागू किया जा रहा है। एथेनॉल मिश्रित इंधनों की दिशा में भी नीति बनाई जाएगी। यह केवल एक तकनीकी परिवर्तन नहीं है, बल्कि ऐसा निर्णय है जिसका प्रभाव आने वाले वर्षों में करोड़ों भारतीय परिवारों, देश की अर्थव्यवस्था, जल संसाधनों, कृषि, परिवहन व्यवस्था तथा उपभोक्ताओं की जीवन भर की बचत पर पड़ने वाला है। हालांकि यूपीए एक में केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने 2005 में संसद में एक प्रश्न के जबाव में कहा कि हम सदन को आश्वस्त करना चाहते हैं कि एथेनॉल का पेट्रोल के साथ बॉन्डिंग होगी। इस पर हम आगे बढ़ेंगे।
वहीं आदित्य ठाकरे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण से गाड़ियों की माइलेज कम हो रही है। गाड़ियां खराब हो रही है। इसलिए इसे बंद किया जाए। वहीं आप नेता अरविंद केजरीवाल ने ई-20 ईंधन के उपयोग को जनता की जेब पर डाका माना है। कुछ लोगों ने तो माइलेज में 30% की कमी तक की बात कहने लगे हैं। लेकिन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट करते हुए कहां कि 30% का आंकड़ा केवल पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल के ऊष्मीयमान अर्थात कैलोरीफिक वैल्यू से संबंधित है। इससे इसके माइलेज पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
भारत में इथेनॉल की उपलब्धता
भारत में इथेनॉल की भरमार है देश की एथेनॉल उत्पादन क्षमता प्रतिवर्ष 20 अब लीटर से अधिक है 2026-27 वित्तीय वर्ष में इसे चार अरब लीटर और जुड़ने वाला है जिससे यह उत्पादन बढ़कर लगभग 24 अरब लीटर हो जाएगा। सरकार ई20 ईंधन में लगभग 11 अरब लीटर एथेनॉल का उपयोग करती है। साथ ही शराब, फार्मास्यूटिकल्स और रासायनिक कंपनियां को मिलाकर तीन से साढे तीन अरब लीटर का उपयोग होता है। इस प्रकार प्रतिवर्ष लगभग सात अरब लीटर इथेनॉल बच जाता है। भारत चाहे तो इस पड़ोसी देशों में खपा सकता है। भारत पड़ोसी देश नेपाल, बांग्लादेश, इंडोनेशिया को एथेनॉल निर्यात कर सकता है। क्योंकि इन देशों में ई10 ईंधन का लक्ष्य है जिसकी आपूर्ति भारत आराम से कर सकता है।
एथेनॉल प्रस्तावित नीति क्या है?
भारत सरकार द्वारा एथेनॉल चूल्हों पर सब्सिडी प्रस्तावित नीति में उपभोक्ताओं को सब्सिडी या प्रोत्साहन देने पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य शुरुआती लागत कम करना और लोगों को एथेनॉल ईंधन के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना के तहत कंपनियां पेट्रोल पंप और खुदरा केंद्रों पर एथेनॉल एटीएम स्थापित कर सकती है। यहां से उपभोक्ता कंटेनर में एथेनॉल भरवा कर घर ले जा सकेंगे और इसे विशेष एथेनॉल चूल्हे में इस्तेमाल कर सकेंगे। इथेनॉल चूल्हे पर सब्सिडी की भी चर्चा है।
एथेनॉल कैसे बनता है?
एथेनॉल प्राकृतिक रूप से खमीर द्वारा शर्करा के किण्वन प्रक्रिया अथवा एथिलीन जलयोजन जैसी पेट्रोकेमिकल प्रक्रियाओं के माध्यम से तैयार किया जाता है। भारत में उत्पादित गन्ना, मक्का अथवा चावल से निर्मित एथेनॉल, देश में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए मौजूदा ईंधन निर्भरता को कम करने का एक प्रभावी माध्यम प्रदान करता है।
ईंधन के अलावा एथेनॉल का उपयोग
एथेनॉल का उपयोग ईंधन के अलावा और भी कई चीजों में किया जाता है। ईंधन के अलावा एथेनॉल का उपयोग फार्मास्यूटिकल्स अर्थात दवाइयां, वैक्सीन, एंटीबायोटिक दवाईयां आदि बनाने में किया जाता है। सौंदर्य प्रसाधन जैसे परफ्यूम, कॉस्मेटिक क्रीम, लोशन इत्यादि के उत्पादन में इसका उपयोग किया जाता है। स्वच्छता उत्पाद जैसे हैंड सेनीटाइजर, एंटीसेप्टिक इत्यादि में भी एथेनॉल का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा खाद्य एवं पेय पदार्थ में भी एक सॉल्वेंट के रूप में एथेनॉल का उपयोग किया जाता है। केमिकल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में भी इसका खूब उपयोग किया जाता है।
एथेनॉल उपयोग का प्रभाव
भारत अपनी आवश्यकता के लगभग 88% कच्चे तेल का आयात करता है। इससे भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करना पड़ता है। फरवरी माह में जारी इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक ‘इंडियाज क्लीन कुकिंग शिफ्ट’ के अनुसार, ई- कुकिंग और बायोगैस के उपयोग करने से भारत को 2050 तक एलपीजी सब्सिडी में 2 लाख करोड़ रूपया अर्थात 24 अरब डॉलर से अधिक की बचत हो सकती है।
विश्व के अन्य देशों में एथेनॉल का उपयोग
भारत के अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका और कई यूरोपियन देश एथेनॉल का वैकल्पिक ईंधन के रूप में उपयोग शुरू किया है। अमेरिका में ई10 मानक एथेनॉल मिश्रित ईंधन के रूप में उपयोग प्रचलित है। हाल ही में अमेरिकी सरकार ने ई15 के उपयोग को तेजी से बढ़ाया है। और इस मिश्रण को ई85 तक के एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन कार्यक्रम पर अग्रसर है। इथेनॉल के उपयोग में ब्राजील विश्व में अग्रणी देशों में गिना जाता है। वर्तमान में यहां ई27 मिश्रित ईंधन का उपयोग जोर-शोर से चल रहा है। और इसे बढ़ाकर ई35 की प्रक्रिया पर काम चल रहा है। यहां बिकने वाले 80% से अधिक वाहन ई27, ई30 अथवा शुद्ध जलयुक्त एथेनॉल अर्थात् हाइड्रस एथेनॉल पर संचालित होता है। जापान भी अपने ईंधन मिश्रण में एथेनॉल को शामिल किया है इसके लिए उसने चरणबद्ध योजना बनाई है। फिलहाल जापान ई10 एथेनॉल पर कार्य कर रहा है।
बहरहाल ईंधन संकट को देखते हुए कहा जा सकता है कि आने वाले वर्षों में एथेनॉल एक प्रमुख ईंधन का स्रोत बनकर उभर सकता है। भारत में इसके उत्पादन क्षमता को देखते हुए कहा जा सकता है कि यह न सिर्फ अपने देश में बल्कि पड़ोस के कई एशियाई देशों में वैकल्पिक ईंधन का साधन बन सकता है।
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