कुलवंत कौर के साथ बंसी लाल की रिपोर्ट। शनिवार को राष्ट्रीय संत सेवा एवं गौ रक्षा कल्याण परिषद की केंद्रीय कार्यकारणी की बैठक श्री सिद्ध शक्ति पीठ शनिधाम में सम्पन्न हुई। बैठक राष्ट्रीय अध्यक्ष परम पूज्य महामंडलेश्वर निजस्वरूपानंदपुरी जी महाराज के सान्निध्य में व अध्यक्षता श्रीमहंत ऋषि कुमार दास जी महाराज द्वारा संचालित हुई बैठक में सर्वप्रथम सनातन धर्म पर आपतिजनक टिप्पणी करने वालों के विरोध में रोष प्रगट कर निंदा प्रस्ताव पारित किया गयाद्। तत्पश्चात् सभी सदस्यों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष दाती जी महाराज का उनके मार्गदर्शन में सामाजिक समरसता पर 15 सम्मेलनों के सफल आयोजन पर सभी पदाधिकारियों ने आभार प्रगट किया।
सामाजिक समरसता के विषय पर बोलते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष दाती जी महाराज ने कहा कि समानता और एकता का सन्देश देने और भगवान श्रीराम के नाम की महिमा को जन जन पहुँचने वाले ब्रह्मऋषि आदि गुरु भगवान वाल्मीकि जी के विचार और संस्कार के प्रचार और प्रसार से समाज को जोड़ने और जात पात के बंधन को तोड़ने की परम आवश्यकता है। भगवान वाल्मीकि जी के अवतरण दिवस पर एक भव्य दिव्य कार्यकर्म के द्वारा सामाजिक समरसता का संदेश दिया जाये। वही इस बात का पुरजोर समर्थन करते हुए दिल्ली के उपाध्यक्ष महंत सतीशदास जी महाराज ने इस कार्यक्रम की रूपरेखा की तैयार करने की पूरी जिम्मेदारी ली।
महंतयोगी उमेशपूरी जी व फ़रीदाबाद अध्यक्ष श्री महंत मुनिराज जी ने पर्यावरण पर बोलते हुए कहा कि प्रदूषण वर्तमान में एक गंभीर समस्या है जी पर राष्ट्रीय अध्यक्ष जी ने निर्णय लिया की संस्था सनातन संस्कृति के प्रतीक पंचपल्व वृक्षों का रोपण करेगी। श्रीमहंत विजयगिरी जी ने शास्त्र के साथ शस्त्र की शिक्षा पर ज़ोर दिया तथा विजय दशमी के अवसर पर सामूहिक शस्त्र पूजन का आग्रह किया। इसी क्रम में महंत सूरजगिरी जी ने दिव्यँगों और वंचित लोगो की सहायता के लिए सहयोग बात कही दिल्ली के महामंत्री श्री महंत भोलागिरी जी ने सभी क्षेत्रीय अध्यक्षों से विनती की वह अपनी कार्यकरणी की सूची केंद्रीय कार्यालय में अति शीघ्र पहुँचा दें। अध्यक्षीय उद्बोधन में श्रीमहंत ऋषिकुमार दास जी महाराज ने कहा कि संस्था को धार्मिक कार्यों के साथ सामाजिक कार्य भी करने चाहिए।
बैठक में आये सभी सदस्यों ने एकमत से सभी विषयों का समर्थन किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी निजस्वरूपानंदपुरी जी महाराज, महामंडलेश्वर हरिओमगिरी जी महाराज, श्रीमहंत ऋषिकुमार दास जी महाराज, महंत श्यामनाथ जी महाराज, श्रीमहंत मुनिराज जी महाराज, श्रीमहंत कन्हैयागिरी जी महाराज, श्रीमहंत आदित्यकृष्णगिरी जी महाराज, महंत जयभारती जी महाराज, श्रीमहंत भोलागिरी जी महाराज, महंत सतीशदास जी महाराज, महंत सूरजगिरी जी महाराज, महंत विजयगिरी जी महाराज, महंत धनराजगिरी जी महाराज, महंत योगी उमेशपुरी जी महाराज, महंत कमलगिरी जी महाराज, स्वामी प्रज्ञानंदपुरी जी महाराज, श्रीमहंत दयालपुरी जी महाराज, स्वामी गिरिजानंद सरस्वती जी महाराज, ब्रह्चारी प्रेम प्रकाशानंद जी महाराज आदि संतो की उपस्थिति रही।
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