चालबाजी से बाज नहीं आ रहा चीन, पत्थर फेंका अब रच रहा शांति का ढोंग

By: Dilip Kumar
8/17/2017 1:38:38 AM
नई दिल्ली

लद्दाख के सीमावर्ती क्षेत्र में चीनी सैनिकों की ओर से की गई पत्थरबाजी पर चीन का ताजा बयान उसके दोहरे चरित्र की पोल खोल रहा है। चीन ने इस पूरे घटनाक्रम से अनभिज्ञता जताई है। इतना ही नहीं चीन का कहना है कि चीनी बॉर्डर सेना हमेशा शांति के लिए प्रतिबद्ध है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उसे लद्दाख में पैंगॉन्ग झील के किनारे भारतीय क्षेत्र में पीएलए के जवानों के घुसने संबंधित रिपोर्ट्स की कोई जानकारी नहीं है। इस घटना के बाद चुसुल में भारत-चीन के अधिकारियों की बैठक जारी है। बैठक में चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि बातचीत शुरू करने से पहले भारतीय सेना बिना किसी शर्त के विवादित जगह से हट जाए। 

बताते चलें कि डोकलाम को लेकर दोनों देश पिछले दो महीने से अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं। वहीं यह तनातनी मंगलवार को उस वक्‍त और बढ़ गई जब चीनी सैनिकों ने लद्दाख में पैंगॉन्ग झील के किनारे भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ करने की कोशिश की। मगर पहले से सर्तक भारतीय जवानों ने चीनी सैनिकों को इस कोशिश को नाकाम करते हुए उन्‍हें खदेड़ दिया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच झड़पें भी हुईं। एक दूसरे पर पत्‍थरें फेंकी और कुछ सैनिकों को मामूली चोटें भी आईं। 

गौरतलब है कि सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, चीनी सैनिक मंगलवार की सुबह दो तरफ से भारतीय सीमा में घुस आए। लद्दाख के सामरिक महत्व के क्षेत्र फिंगर-4 और फिंगर-5 इलाकों में चीनी घुसपैठ तड़के सुबह छह बजे और फिर नौ बजे हुई, मगर दोनों ही मौकों पर पहले से सतर्क भारतीय सुरक्षा बलों ने उन्हें पीछे खदेड़ दिया। जब चीनी सेना ने देखा कि भारतीय सैनिकों ने मानव श्रृंखला बनाकर उनका आगे बढ़ने का रास्ता रोक दिया है। उन्होंने भारतीय सैनिकों पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। इसके बाद भारतीय जवानों ने भी पत्थरबाजी करके मुंहतोड़ जवाब दिया।

डोकलाम विवाद के 2 महीने,जानें कब क्या हुआ

भारत-चीन के बीच सिक्किम सेक्टर के डोकलाम में शुरू हुए विवाद के 2 महीने पूरे हो चुके हैं. ये विवाद 16 जून को उस वक्त शुरू हुआ था, जब भारतीय सेना ने चीनी जवानों को भूटान के डोकलाम में सड़क बनाने से रोक दिया था. ऐसे में 2 महीने पूरे होने पर बुधवार को एक बार फिर चीन ने भारत से डोकलाम क्षेत्र से अपने सैनिकों को वापस बुलाने को कहा है. बता दें कि भारत का कहना है कि ये क्षेत्र भूटान का है, जबकि चीन मानता है कि ये उसका क्षेत्र है और भारत को भूटान के साथ सीमा विवाद के उसके मामले से दूर रहना चाहिए.

16 जून: भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों को डोकलाम में सड़क निर्माण करने से रोक दिया.

20 जून: दबाव बढ़ाने के लिए चीन ने 20 जून को नाथू ला इमिग्रेशन प्वाइंट पर तिब्बत में कैलाश मानसरोवर जा रहे 50 तीर्थ यात्रियों को वापस भेज दिया. सिक्किम से यह नया रास्ता छोटा, सुरक्षित और ज्यादा आरामदायक है. बाद में चीन ने ये रोक हटा ली.

29 जून: सेना प्रमुख बिपिन रावत ने सिक्किम का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने गंगटोक स्थित 17 माउंटेन डिविजन और कलिमपोंग स्थित 27 माउंटेन डिविजन का दौरा किया.

7 जुलाई: जी-20 सम्मेलन में पीएम मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकात हुई. जिनपिंग ने इस दौरान भारत की तारीफ की. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत बेहतरीन काम कर रहा है, साथ ही BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) में भारत के नेतृत्व की भी जिनपिंग ने तारीफ की.

17 जुलाई: चीन ने तिब्बत में 11 घंटे तक युद्ध अभ्यास किया. डिफेंस एक्सपर्ट्स ने इसे भारत के लिए चेतावनी करार दिया.

20 जुलाई: सुषमा स्वराज ने सीमा पर विवाद के शांतिपूर्ण समाधान की हिमायत करते हुए कहा कि इसपर कोई बातचीत शुरू करने के लिए पहले दोनों पक्षों को अपनी-अपनी सेना हटानी चाहिए.

24 जुलाई: चीनी सेना के प्रवक्ता ने भारत को धमकी के लिहाज में कहा कि पहाड़ को हिलाना मुमकिन है, चीन की सेना को नहीं. उन्होंने कहा- चीनी सेना का 90 साल का इतिहास हमारी क्षमता को साबित करता है. पहाड़ को हिलाना तो मुमकिन है, पर चीन की सेना को नहीं. भारत किसी भ्रम में न रहे. हम हर कीमत पर अपनी संप्रभुता की रक्षा करेंगे.

28 जुलाई: अजीत डोभाल ब्रिक्स देशों के सुरक्षा सलाहकारों की मीटिंग में हिस्सा लेने चीन पहुंचे. उन्होंने अपने चीनी समकक्ष यांग जिची से भी मुलाकात की. ऐसे अनुमान लगाए गए कि डोभाल के इस दौरे के बाद डोकलाम पर विवाद शांत हो जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

2 अगस्त: भारत-चीन के बीच सिक्किम सेक्टर में चल रहा सीमा विवाद 2 अगस्त को और बढ़ गया. चीन ने पहली बार 15 पेजों का अधिकृत बयान जारी कर भारत को चेतावनी दी. बयान में कहा गया कि मौजूदा गतिरोध खत्म करने के लिए भारत को 'बिना किसी शर्त के' डोकलाम से अपनी सेना फौरन हटाकर 'ठोस कार्रवाई' करनी चाहिए.

3 अगस्त: चीन के साथ सीमा विवाद पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने गुरुवार को भारत का पक्ष रखा. राज्यसभा में सुषमा ने कहा कि चीन को 2012 में हुए भारत-चीन-भूटान समझौते को मानना चाहिए. साथ ही सुषमा ने ये भी कहा कि किसी भी विवाद का हल युद्ध से नहीं बल्कि द्विपक्षीय बातचीत से ही हो सकता है.

क्यों अहम है डोकलाम?

ये पूरा इलाका सामरिक रूप से भारत के लिए बेहद अहम है. अगर चीन यहां सड़क बनाने में कामयाब होता है तो उसके लिए भारत के चिकन नेक कहे जाने वाले सिलीगुड़ी तक पहुंच काफी आसान हो जाएगी. भूटान के भारत के साथ खास रिश्ते हैं और 1949 की संधि के मुताबिक, ये विदेशी मामलों में भारत सरकार की ‘सलाह से निर्देशित’ होगा. 1949 में साइन की गई और फिर 2007 में दोहराई गई संधि के मुताबिक, भूटान के भू-भाग के मामलों को देखना भी भारत की जिम्मेदारी है.

चीन का डोकलाम पठार पर सड़क बना देना उसके सैनिकों को सिलीगुड़ी कॉरिडोर के और करीब पहुंचा देगा. चीन ये नहीं मानता है कि डोकलाम पठार का 'डोका ला' इलाका 'ट्राइजंक्शन' है. चीन 'डोका ला' इलाके को अपना हिस्सा मानता है और भूटान अपना. इस सड़क का मकसद है 'ट्राइजंक्शन' को हमेशा के लिए शिफ्ट कर देना. सड़क बनने के साथ ही चीन का ‘डोका ला’ पर दावा और मजबूत हो जाएगा.

 


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