पाकिस्तान के सियालकोट में स्थित एक अतिप्राचीन हिंदू मंदिर को 72 साल बाद खोल दिया गया है। भारत-पाक बंटवारे के बाद यह मंदिर पाकिस्तान के हिस्से चला गया था। दिवंगत लेखक राशिद नियाज के द्वारा लिखी गई 'हिस्ट्री ऑफ सियालकोट' के मुताबिक यह मंदिर 1,000 साल पुराना है और लाहौर से 100 किलोमीटर की दूरी पर शहर के धारोवाल क्षेत्र में है।
एक हजार साल पुराना है यह मंदिर
यह मंदिर 1000 साल पुराना है। यह मंदिर भगवान शिव और भगवान जगन्नाथ का बताया जा रहा है। सरदार तेजा सिंह ने शवाला तेजा सिंह मंदिर का निर्माण करवाया था। जब देश का विभाजन हुआ उस दौरान इसे बंद कर दिया गया था। शिवाला का निर्माण 1000 साल पहले अर्थात 10वीं सदी में हुआ था। इसी सदी में खजुराहो समेत दक्षिण भारत के तमाम मंदिरों का निर्माण हुआ। शिवाला तेजा सिंह पर भी इन्हीं भारतीय मंदिरों के शिल्प की छाप है। इस शिवाला के पिलर, गुंबद से लेकर छतों की बनावट तथा भव्य नक्काशी और चित्रकारी दिल को छू लेने वाली है। संरक्षण के बाद यह धार्मिक ही नहीं पर्यटन के नजरिए से भी आकर्षण होगा।
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