आचार्य श्री शुभेश शर्मन का कॉलम : गंगे तव दर्शनात मुक्ति
By: Dilip Kumar
2/24/2025 1:50:13 PM
गंगे तव दर्शनात मुक्ति, यह संबोधन जब कानों में पड़ता है तो एक विश्वास के साथ निर्णय हो जाता है कि यह अर्थ धर्म काम में अंतिम मोक्ष के लिए है क्योंकि सभी संसार बंधन से मुक्ति चाहते हैं। ऐसी मान्यता भारतीय दर्शन शास्त्रों में अनेकों साधकों उपासकों तपस्वियों ऋषियों मुनियों गुरुओं अपितु अनेकों दृष्टांतो के अनुसार वेदों उपनिषदों पुराणों अनेकों ब्राह्मण ग्रंथों में गंगा जी के तटों पर सुक्ष्म लघु दीर्घ काल तक साधना कर उनका दर्शन आचमन स्नान कर उनसे से सब कुछ प्राप्त करते हुए अंत में मोक्ष पद को प्राप्त किया जाता रहा है। हमारे आदि वैदिक पूर्वज ब्रह्म जी के कमंडल में मां गंगा का वास है। यह ब्रह्म वाक्य अनेकों बार श्री मद भागवत कथा व्यास भगवान की कथा में बताते हैं। गंगा अनेकों ऋषियों की तपस्थली सैकड़ों तीर्थों का प्रत्यक्ष दर्शन है। गंगा जी किनारे बैठकर अनेकों तपस्वियों ने परम पद प्राप्त किया है। अगर विश्व से गंगा को अलग करके देखें तो अध्यात्म दर्शन की परिभाषा ही कुछ नहीं रहेगी।
संपूर्ण विश्व में गंगा ही एक मात्र ऐसी हैं जो आपको जप तप साधना का प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष दर्शन कराती और कोई नदी ऐसी नहीं जिसके किनारे ऋषि मुनि तपस्वी अपना सर्वस्व त्यागकर परम गति की उपासना के साथ विश्व के मंगल की कामना करते हो। संपूर्ण धरा पर सैकड़ों नदिया है परंतु गंगा जी ही ऐसे एक मात्र ऐसी धारा है जिसमें अलग बहने वाली नदियां का जल को भी अपने जैसा पवित्र बना देती है। अनेकों वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद भी कोई इस प्रमाण से अतिरिक्त नहीं कर सका जब मानव जल के पास जाता है तो जल में एक विशेष प्रकार की ऊर्जा का संचार होता है और आपकी ऊर्जा जल अपने अंदर समाहित कर लेता है। विशेषता यह है कि गंगा जी के स्पर्श से जल आपकी दूषित ऊर्जा को भी शुद्ध पवित्र ऊर्जा में परिवर्तित कर समाहित कर लेता, यह दिव्य शक्ति केवल गंगा जी में है।
धार्मिक महत्व के साथ सामाजिक महत्व पर विचार करें हमारे आपके सबके पूर्वजों की अस्थियों को आदि काल से गंगाजी में ही प्रवाहित किया जाता है। इसका लेखा-जोखा गंगा जी के पुजारियों पण्डो के पास प्रमाणिक रूप से आज भी सुरक्षित है। अब एक ओर विचार करे हमारे यहां भारतीय दर्शन वेदों में गंगा जी की पवित्रता का महत्व वर्णित है उसके जल अमृत की प्रामाणिकता को अनेकों वैज्ञानिकों ने शोध करने पर पाया कि इसमें जितने जीवाणु हैं। वह विषाणुओं को नष्ट करने की क्षमता वाले हैं। अभी तीर्थ राज प्रयाग में के जल की वैज्ञानिक शोध करने वाले वैज्ञानिक बंधु ने बताया कि उनकी संख्या 1100 सौ से अधिक है। पद्मश्री अजय सोनकर ने प्रयोगशाला में गंगा जल के अलग अलग पांच मानकों को जांच कर बताया कि यह तो लगभग50/55करोड़ लोगों के स्नान के पश्चात प्राप्त जल मानकों पर है।
संसार में बहुत से नदिया है परंतु गंगा जी के अतिरिक्त किसी भी नदी का जल ऐसा नहीं है जो मानव हड्डियों को गलाने की शक्ति रखता हो और चिंतन करें गंगा जी आदि काल से मानव अस्थियों को मुक्ति हेतु प्रवाहित किया जाता है। मानव देह भी प्रवाहित की जाती है और गंगा जी उसे पूरी तरह अस्थि त्वचा को पूर्ण रूप से पूरी तरह जल रूप में परिवर्तित कर देती हैं। यह वरदान भगवान श्री विष्णु हरि नारायण ने गंगा जी को दिया गंगा तव दर्शनात मुक्ति गंगा तुम्हारे दर्शन से मोक्ष पद प्राप्त हो, ऐसा हमारे वैदिक ग्रंथों में वर्णित है जो एक चेतावनी के साथ आग्रह जो गंगा जी की शुद्धि करण की बात करतें मां गंगा शुद्ध ही नहीं अपितु पवित्र है। वह जल वर्षों तक सर्वोपयोगी रहता है। स्नान आचमन पीने से भी आगे गंगाजल की एक बूंद मृत्यु के समय अथवा उसके पश्चात भी मुख में डालने से मुक्ति दायिनी है। उसकी बूंद-बूंद कल्याणकारी है। एक ओर चिंतन भारत भूमि में हिमालय से निकलकर बंगाल की खाड़ी तक भिन्न-भिन्न भागो के नागरिकों का पोषण करती हैं।
हमारे किसान बंधु गंगा जल से कृषि कर अन्न उपजाकर जीवन के लिए प्राण शक्ति प्रदान करते हैं। मां गंगा प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष सहज भाव से पूर्ण पोषक भी हैं जो शुद्धि की बात कर रहे हैं। प्रत्यक्ष रूप से सिर्फ सनातन का विरोध ही उनका उद्देश है। ऐसे लोगों को अपने पूर्वजों को गंगा जी जाकर खोजना चाहिए जिनको मां गंगा ने मुक्ति प्रदान कर दी है और हो सकता है उनकी भी हो जाए। जय मां गंगे
लेखक : आचार्य श्री शुभेश शर्मन,
श्री राम शक्ति पीठ दिल्ली राष्ट्रीय प्रमुख धर्म समाज अखिल भारतीय संत समिति