भारत में प० जवाहरलाल नेहरू को आधुनिक भारत के निर्माता के रूप में जाना जाता है। उन्होंने भारत को एक आधुनिक लोकतांत्रिक, धर्मनिर्पेक्ष, समाजवादी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण देते हुये सशक्त राष्ट्र बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महात्मा गाँधी के विचारों से ओत-प्रोत प० नेहरू ने भारतीय स्मृतन्त्रता आन्दोलन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे अनेकों बार जेल गये। 14 नवम्बर 1989 में उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में जन्में प० नेहरू 15 अगस्त 1947 को स्वतंन्त्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बने और 27 मई 1964 तक वे तीन बार प्रधानमंत्री रहे। प्रधानमंत्री रहते हुए 27 मई 1964 को उनकी मृत्यु हो गई और उसी के साथ देश ने एक महानायक खो दिया। वे 16 वर्ष 286 दिन तक देश के प्रधानमंत्री रहें। 15 अगस्त 1947 को गठित उनके प्रधानमन्त्रिव के अन्तर्गत उनके मंत्रीमण्डल में 14 जाने माने सदस् थे जो सभी वर्गों व समुदायों का प्रतिनिधित्व करते थे।
मन्त्रिमण्डल के इन सदस्यों में प्रमुख रूप से सरदार वल्लभ भाई पटेल, डा० राजेन्द्र प्रसाद, डॉ. बाबा साहेब बी० आर० अम्बेडकर, मौलाना अब्दुल कलाम आजाद, सरदार वलदेव सिंह, राजकुमारी अमृतकौर, डा० श्यामा प्रसाद मुखर्जी व अन्ध्र शामिल थे। प० जवाहर लाल नेहरू के कुशल नेतृत्व में सरदार पटेल की मदद से 500 से ज्यादा रियासतों को सरकार के अधीन लाया गया। देश में 1951-52 में पहला चुनाव हुआ, 1951 में प० नेहरू द्वारा पंचवर्षीय योजना को लागू किया गया। उन्होंने ही भारत के पहले योजना आयोग का श्रृजन किया, आर्थिक नियोजन 'इकोनोमिक प्लानिंग' के तहत नीति गत विकास को गति मिली।
लोकतन्त्र और समाजवाद के प्रबल समर्थक प. जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रथम प्रधानमंत्री का पदभार बखूबी संभाला और राष्ट्र की नीतियों को आकार देने और उसकी प्राथमिकताएँ निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपनी प्रगतिशील और वैज्ञानिक सोच से नये भारत की परिकल्पना को प्रगति के क्षितिज पर पहुँचाने के लिये पंख दिये। उनके नेतृत्व ने देश के गरीब, किसान खेतिहर मजदूर और सम्पूर्ण समाज के सामाजिक, आर्थिक एवं एकीकृत विकास के लिये 'कल्याणकारी राज्य वेल्फेयर स्ट्रेट के सिद्धान्त को लोकतन्त्र की स्थापना के लिये मूल, (कन्द्र) में रखा और ऐसी नीतियाँ और कार्यक्रम बनाये, जिससे समाज और राष्ट्र का चहुँमुखी विकास सुनिश्चित किया जा सके।
देश के समेकित विकास और योजनाओं के सुव्यवस्थित कार्यान्वयन के लिये उन्होंने योजना आयोग का गठन किया, जिसके अन्तगत 'आर्थिक नियोजन (इकॉनामिक प्लानिंग) को समाहित किया गया। आने वाले प्रत्येक 5 वर्षों के विकास के प्लान को सुनिश्चित करने के लिये "पंचवर्षीय योजना" Five Year Plan को देश के सम्मुख रखना अनिवार्य किया गया। पंच वर्षीय योजना के साथ सरकारों को कार्य करने के लिये पाँच वर्ष की समय सीमा सुनिश्चित की गई, यानी पंचवर्षीय योजना के तहत पाँच साल के प्लान के साथ हर पाँच साल आम चुनाव, लोगों की पसंद के आधार पर चुनी सरकारे लोगों से किये वायदे निभाने का फिर पाँच साल की समय सीमा का लक्ष्य। यही था प० नेहरू का भारत के सुनिश्चित विकास के दिशा निर्देशन का मूल मंन्त्र। प० नेहरू की आधुनिक और वैज्ञानिक सोच का ही परिणाम था देश के नवनिर्माण के लिये उन्होंने 5 प्रतिष्ठि 5 प्रतिष्ठित I.I. T (आई०आई०टी) आई० आई० एम० और A.I.I.M.S. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिये, वहीं बड़े और नामी स्टील/इस्पात प्लाण्ट्स, जिनमे भिलाई, बोकारो, रूरकेला और दुर्गापुर जैसे भारी संयत्र शामिल हैं, जिनसे देश का आर्थिक विकास सम्भव हुआ।
पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भारत को समृद्ध और विकसित राष्ट्र बनाने के लिये ओद्यौगिक विकास विज्ञान और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा दिया। उन्होंने अनेक सामाजिक सुधारों को गति दी। लोकतंत्र के प्रवल समर्थक रूप में उन्होंने भारत को धर्मनिर्पेक्ष और लोकतान्त्रिक राष्ट्र बनाने के लिये अथक प्रयास किये। उन्होंने गुटनिर्पेक्षता की नीति को अपनाया, शिक्षा और संस्कृति का विकास किया। प० नेहरू की भारत को विकसित और समृद्ध देश बनाने की डाली गयी नींव पर भारत हमेशा प्रगति की ऊचाईयों को प्राप्त करता रहेगा ऐसी आशा और विश्वास के साथ उस महानायक को शत शत नमन
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